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बैजल साहब के सोफे पर बैठने-लेटने से केजरीवाल को ये बीमारियां हो सकती हैं

लोकतंत्र खतरे में हो न हो, स्वास्थ्य ज़रूर है. आप सोफे पर लेटते हैं, तो आप भी सीख लें.

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13 जून 2018 (अपडेटेड: 13 जून 2018, 07:32 AM IST)
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केजरीवाल का धरना एक गंभीर बात को लेकर है. लेकिन क्या फर्क पड़ता है. आप अपने काम की चीज़ पढ़ लीजिए.
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अरविंद केजरीवाल. उस राज्य के मुख्यमंत्री जो कागज़ पर पूरा राज्य ही नहीं है. और इसीलिए मुख्यमंत्री वाली कई शक्तियां उपराज्यपाल अनिल बैजल के पास हैं. इसीलिए केजरीवाल की आगे बढ़ाई हर फाइल एलजी के यहां अटक जाती है. उनकी शिकायत है कि बैजल बात सुनते नहीं हैं. तो 11 जून (माने सोमवार को) की शाम साढ़े पांच बजे केजरीवाल बैजल जी से मिलने पहुंच गए. साथ में आए मनीष सिसोदिया, गोपाल राय और सत्येंद्र जैन. एलजी साहब दफ्तर में थे नहीं, तो सीएम साहब वेटिंग रूम में बैठ गए. और तब से बैठे ही हैं. बीच में लेट भी गए थे थोड़ी देर के लिए. फिर दोबारा बैठ गए. खबर लिखे जाने तक ताज़ा जानकारी यह थी कि अब धरने के साथ-साथ उपवास भी शुरू हो गया है. एलजी साहब का अता-पता नहीं है.
केजरीवाल एलजी से तीन मांगें मनवाना चाहते हैं:
- एलजी खुद IAS अधिकारियों की 'गैरकानूनी' हड़ताल तुरंत खत्म कराएं, क्योंकि वो सर्विस विभाग के मुखिया हैं - राशन की डोर-स्टेप-डिलीवरी की योजना को मंजूर किया जाए - मोहल्ला क्लीनिक, सरकारी स्कूलों में पुताई व अन्य रुके हुए काम जल्दी शुरू करवाए जाएं
बैजल के यहां चल रहा धरना अपने तीसरे दिन में है. लेकिन बैजल को समय नहीं मिल रहा.
बैजल के यहां चल रहा धरना अपने तीसरे दिन में है. लेकिन बैजल को समय नहीं मिल रहा.

एक राज्य का सीएम वहां के राज्यपाल के वेटिंग रूम में 22 घंटे से इंतज़ार कर रहा है लेकिन वो नहीं मिलते. शहर में दौरे करते रहते हैं. देश के किसी दूसरे राज्य में ये होता तो 'लोकतंत्र की हत्या' और 'संवैधानिक संकट' जैसे शब्द तुरंत कीवर्ड बन जाते. लेकिन अरविंद केजरीवाल किसी कारणवश मीम बनाने के ही ज़्यादा काबिल माने जाते हैं. तब भी, जब उनकी पार्टी के जाने-माने लोग एलजी हाउस के बाहर सड़क पर अखबार बिछाकर खाना खाते हैं. अगर इस खबर को पढ़ते हुए आप यहां तक आ गए हैं तो आपको इस बारे में सोचना चाहिए.
अगर इस घटना पर आपकी प्रतिक्रिया 'क्या फर्क पड़ता है' टाइप है तब भी हम आपको खाली हाथ नहीं जाने देंगे. हम आपको बताएंगे कि आपका हाल अरविंद जैसा हुआ तो आपको क्या करना चाहिए. माने अगर आपको सोफे पर सोना पड़ जाए तो आपके शरीर को क्या नुकसान हो सकता है और इससे कैसे बचा जाए. हमने बात की मैक्स हॉस्पिटल, साकेत (दिल्ली वाला साकेत) में ऑर्थोपेडिक विभाग के डायरेक्टर और हेड ऑफ जॉइंट्स रिप्लेसमेंट डॉक्टर रमणीक महाजन से. पढ़िए.
स्वाति मरलेना ने सड़क पर खाना खाया. ताकि बैजल जान सकें कि कोई उनसे मिलने की प्रतीक्षा में है.
स्वाति मरलेना ने सड़क पर खाना खाया. ताकि बैजल जान सकें कि कोई उनसे मिलने की प्रतीक्षा में है.

#. जितनी देर से केजरीवाल सोफे पर लेटे हुए हैं, उससे उन्हें क्या परेशानी हो सकती है?
केजरीवाल का सिर सोफे पर लेटते समय (चाहे वो थोड़ी ही देर के लिए हो) सोफे के ऊंचे हत्थे पर था. ज़्यादा देर इस तरह लेटे रहने से गर्दन में कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं. ये गर्दन में दर्द और ऐंठन से लेकर सरवाईकल स्पॉन्डलाइटिस शामिल है. अगर गर्दन की नसें दब जाएं तो वर्टिगो हो सकता है (इसमें शरीर का बैलेंस बिगड़ जाता है). और ये बात केजरीवाल, उनके कैबिनेट, अनिल बैजल और मोदी जी के सवा सौ करोड़ मानवी - सब पर लागू होती है.
#. अगर आप सोफे पर सीधे लेटें या बैठे रहें, तब भी नुकसान हो सकता है?
बिलकुल. सोफा बहुत नर्म मटेरियल का बना होता है. इसीलिए इसपर कुछ देर से ज़्यादा नहीं बैठना चाहिए. और तब भी पीठ एकदम सीधी होनी चाहिए. जैसे ही आप सोफे पर बैठे-बैठे झुकते हैं, रीढ़ पर उसकी कुदरती बनावट के विपरीत ज़ोर पड़ने लगता है. ये वैसा ही है जैसे किसी धनुष को उलटी तरफ से झुकाना. धनुष टूट जाता है, रीढ़ की बनावट बिगड़ने लगती है. इससे पीठ में दर्द उठेगा. दबाव रीढ़ के नीचे वाली डिस्क (वही जो स्लिप हो जाती है) पर भी पड़ता है. अब जितनी देर से केजरीवाल और उनके साथी बैजल साहब के यहां बैठे हुए हैं, उससे डिस्क डीहाइड्रेट हो जाती है. माने उसमें पानी की कमी हो जाती है. ऐसी स्थिति में डिस्क को ज़्यादा नुकसान पहुंचता है. दावा करना मुश्किल है, लेकिन एक्स्ट्रीम केस में डिस्क टूट ही जाती है. सोफे पर लेटना भी हानिकारक होता है. क्योंकि वो आपके शरीर की कुदरती बनावट को सपोर्ट नहीं कर सकता है.
मोटा मसनद लेकर लेटना भी हानिकारक होता है.
मोटा मसनद लेकर लेटना भी हानिकारक होता है.

#. अगर आप लेटे सख्त सतह पर हों और गर्दन के नीचे मोटा तकिया (मसनद) हो, तब भी नुकसान है?
आप शायद केजरीवाल की ही एक दूसरी तस्वीर की बात कर रहे हैं, उनकी भूख हड़ताल के समय की. वो तरीका भी गलत ही है. अगर आपकी गर्दन के नीचे काफी मोटा तकिया हो तो रीढ़ पर बगल से दबाव पड़ने लगता है. इससे जिस करवट आप लेटे होते हैं, उस करवट की नसों पर दबाव पड़ता है. लंबे समय तक लेटे रहने से नस टूट भी सकती है. इससे शरीर सुन्न पड़ सकता है. बाकी तकलीफें भी होंगी, जिनके बारे में हमने बात की.
जब नींद आए लेकिन सोना दूभर हो.
जब नींद आए लेकिन सोना दूभर हो.

#. तो सोने का सही तरीका क्या है?
पीठ के बल या किसी एक करवट पर. लेकिन पेट के बल नहीं. लेटते हुए सीधे लेटें. तकिया लेना चाहें तो पतला हो. ध्यान बस एक बात का रखना है. रीढ़ की कुदरती बनावट पर दबाव न पड़े. चाहें तो हल्के गद्दे पर लेट सकते हैं. सिर और शरीर एक सीध में होने चाहिए. पेट के बल लेटने से पीठ की मांसपेशियों पर ज़ोर पड़ता है. क्योंकि गुरुत्वाकर्षण शरीर के भार को रीढ़ पर डालने लगता है.
सोने का सही तरीका केजरीवाल से सीखें.
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