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'सब अगर अपने पापा जैसे बनने लगे तो दुनिया का कबाड़ा हुआ समझो'

पढ़िए नन्हें बच्चों के नाम संडे वाली चिट्ठी.

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10 जुलाई 2016 (अपडेटेड: 9 जुलाई 2016, 03:47 AM IST)
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symbolic image: फोटो क्रेडिट- Reuters
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दिव्य प्रकाश दुबे
दिव्य प्रकाश दुबे

Hi संडे! एक बच्चे ने शिकायत भेजी है कि संडे वाली चिट्ठी बच्चों के लिए कोई क्यूं नहीं लिखी जाती. अब जग में महबूब और बच्चे रूठ जाएं तो कुछ बचेगा नहीं. इसलिए इस रूठे हुए बच्चे को मनाने के लिए दिव्य प्रकाश दुबे ने इस बार की संडे वाली चिट्ठी नन्हें बच्चे के नाम लिखी है.


 

डियर नन्हें बच्चे,

क्या हाल हैं तुम्हारे! पढ़ाई का तो क्या हाल चाल पूछूं तुमसे. स्कूल के टीचर, घर पर पेरेंट्स, कोचिंग वाले टीचर, पड़ोस वाले अंकल आंटी और थोड़े बहुत रिश्तेदार इसका हाल तुमसे इतनी बार लेते होंगे कि तुम अभी तक इस सवाल से बोर हो चुके होगे.
तुम तो ये बताओ कि स्कूल की किताबों के अलावा क्या अच्छा लगता है तुमको? तुमको मज़ा क्या करने में आता है. बाहर खेलने वेलने जाते हो कि नहीं या वीडियो गेम को ही खेल मान चुके हो. ये बताओ क्लास की कोई लड़की तुम्हें अपनी लाइफ़ की हीरोइन लगना शुरू हुई कि नहीं?
अच्छा चलो ये बताओ तुम भी तो कहीं बड़े होकर अपने पापा जैसा तो नहीं बनना चाहते. यार एक बात कहनी थी हो सकता है तुम्हें बुरा लगे. अच्छी तो ख़ैर इस उम्र में अपने पेरेंट्स की बात भी नहीं लगती. इस दुनिया की हालत इतनी बुरी इसलिए भी है क्यूंकि हम में से कई लोग अपने पापा जैसा बनना चाहते हैं. हमारे इकलौते हीरो वही होते हैं, क्यूंकि हम उनकी नज़रों से दुनिया देखना शुरू करते हैं और पता नहीं कब पेरेंट्स लोग अपना नज़रिया थोपना शुरू कर देते हैं. वो हमें ये तो बताते हैं कि सपने देखो लेकिन वो हमारे सपने अपने हिसाब से देखने को बताने लगते हैं.
तुम्हारे साथ भी ऐसा होगा. इस बात से घबराना मत और इस बात से अपने पेरेंट्स की इज़्ज़त करना बंद मत कर देना. तुम एक बार अपने दोस्तों के पापा लोगों को देखना शुरू करो. तुम और तुम्हारे दोस्त भी अगर वैसे ही बनने की कोशिश करने लगे तो दुनिया का कबाड़ा हुआ समझो. तुम बाद में इसलिए भेजे गए हो ताकि तुम पिछली जेनरेशन से बेहतर कर पाओ.
मन लगाकर पढ़ने से ज़्यादा ज़रूरी है मन लगाकर सवाल करना. इसीलिए इस चिट्ठी की बात को भी सच मत मान लेना, अपना सच ढूंढना.
आज ये चिट्ठी पढ़ने के बाद अपने मम्मी पापा से ये सवाल पूछना कि आख़िर ये सच होता क्या है?
जिस दिन तुम्हारे पेरेंट्स तुम्हारे सवालों से परेशान होने लगें, उस दिन समझ लेना कि तुम सही दिशा में हो. फिर जल्द ही मुलाक़ात होगी.
दिव्य प्रकाश


 
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