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ये गुट अमेरिका में सिविल वॉर कराएगा?

ये संगठन डोनाल्ड ट्रम्प के कैपिटल हिल दंगों में भी शामिल था

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ये संगठन डोनाल्ड ट्रम्प के कैपिटल हिल दंगों में भी शामिल था
ये संगठन डोनाल्ड ट्रम्प के कैपिटल हिल दंगों में भी शामिल था
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साजिद खान
4 नवंबर 2022 (अपडेटेड: 4 नवंबर 2022, 01:10 PM IST)
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साल 2020. जून का महीना अमेरिका में ब्लैक लाइव्ज मैटर्स आंदोलन चल रहा था. इसी दौरान 2 अफसरों की हत्या कर दी गई. हत्या के आरोपियों को जब पुलिस गिरफ्तार करने पहुंची तो वहां एक चौंकाने वाला नजारा देखने को मिला. आरोपियों ने कार पर अपने खून से लिखा था,

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ये शब्दावली, अमेरिका में एक खास संगठन के लोग इस्तेमाल करते हैं. ये लोग हवाई शर्ट पहनते हैं. हाथ में बंदूक और झंडा रखते हैं. कहते हैं, देश में गृह युद्ध होने वाला है. हमें इसकी तैयारी कर लेनी चाहिए. ये लोग अपने आप को बुगालू बॉयज़ बुलाते हैं.

कौन है ये लोग? क्या चाहते हैं? क्या है इनका इतिहास? क्या ये ऐसा करने वाले एकमात्र संगठन हैं और आज हम इनकी चर्चा क्यों कर रहे हैं?

शुरू से शुरू करते हैं. सबसे पहले समझिए कि आज हम इनकी बात क्यों कर रहे हैं. दरअसल इस संगठन से जुड़े 2 लोग अमेरिका में गिरफ़्तार हुए हैं. अधिकारियों ने अंदेशा जताया है कि आने वाले मिड टर्म इलेक्शन में इस संगठन के लोग हिंसा फैला सकते हैं.

अब हम आपको बताते हैं कि बुगालू आंदोलन की कहानी क्या है?

साल था 1984. अमेरिका में एक फिल्म रिलीज़ हुई. फिल्म का नाम ब्रेकिंग 2 इलेक्ट्रिक बूगालू. ये फिल्म ब्रेकिंग इलेक्ट्रिक का सीक्वल थी. फिल्म उतनी चली नहीं, साथ में क्रिटिक्स ने भी इसे आड़े हाथों लिया.  कह सकते हैं फिल्म फ्लॉप रही. लेकिन लोगों ने इस फिल्म के टाइटल से दो शब्द लिए. कौन से दो शब्द ? 
इलेक्ट्रिक और बुगाल. और बना दिया इसका मीम. कॉन्टेक्स्ट समझ नहीं आया न? हमें भी नहीं आया. मीम का कहां हमेशा कॉन्टेक्स्ट होता है. खैर, मीम चल पड़ा.

कई सालों बाद कुछ दक्षिणपंथी, वाइट सुप्रिमिस्ट लोगों ने इस टर्म का इस्तेमाल कर एक कथित आंदोलन बना दिया. ज़्यादा कंफ्यूज़ मत होइए बात इतनी समझिए कि एक फ्लॉप फिल्म के टाइटल से मीम बना. मेमे नहीं मीम, और मीम से बना एक कथित आन्दोलन का नाम.

शुरू में ‘बुगालू’ टर्म 4 चैन नाम की वेबसाइट में प्रचलित हुआ. 2010 के दशक में. उस वक्त देश में बराक ओबामा की सरकार थी. ऐसे दक्षिण पंथी जो सरकार से नफ़रत करते थे. उनके बीच बुगालू फेमस होता गया. ये लोग बुगालू से अपने आपको ऐसोसिएट करके गर्व महसूस करने लगे. बाद के सालों में फेसबुक का चलन बढ़ा. फेसबुक में इस नाम से कई-कई ग्रुप्स और पेज बने. लेकिन जब बुगालू से जुड़े लोगों को हिंसा से जोड़ा जाने लगा तो फेसबुक ने इस कीवर्ड को बैन करना शुरू कर दिया. कई पेज पर्मानेंट डिलीट कर दिया गए. इस आंदोलन से जुड़े कुछ संगठन ने तो फेसबुक के हेडक्वार्टर को उड़ाने की धमकी तक दी है.

कट टू कट साल 2020 में आते हैं. इस बीच ये कथित आंदोलन इंटरनेट पर फलता-फूलता रहा.

मार्च 2020 में डंकन लेम्प नाम के शख्स को पुलिस ने गोली मार दी. उसके घर में घुसकर. लेम्प बुगालू नाम के फेसबुक ग्रुप को लीड करता था. पुलिस ने आरोप लगाया कि लैंप ने गैर कानूनी ढंग से फायर आर्म्स माने बंदूक रखी हुई है. हालांकि उसकी मौत के बाद परिवार वालों ने इससे इंकार किया. घोर दक्षिण पंथियों ने लेम्प को शहीद बताया. लोगों ने कहा कि कथित बुगालू आंदोलन में लेम्प की शहादत याद रखी जायेगी. कथित बुगालू आंदोलन से जुड़े  कई संगठन ने धमकी भी दी कि लेम्प की मौत से निकट भविष्य में पुलिस के ख़िलाफ़ हिंसा बढ़ेगी. लैंप की मौत ने आन्दोलन में एक नई जान सी फूंक दी. संगठन में लंबे समय के बाद नए नारे आए. ये नारे थे,

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अमेरिकी अखबार न्यू यॉर्क टाइम्स ने एक दफा लिखा था कि ये नारे बुगालू से जुड़े लोग मंत्र की तरह पढ़ा करते थे.
साल 2020, अमेरिका में लॉबी डे मनाया गया. रैली निकली. उद्देश्य था, बंदूक रखने के अधिकार की रक्षा करना. इस रैली में बुगालू से जुड़े संगठन के लोगों ने बड़ी तादात में हिस्सा लिया.  

25 मार्च 2020 को जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद अमेरिका में बड़े पैमाने में ब्लैक लाइव मैटर्स नाम से आन्दोलन शुरू हुआ. इस आन्दोलन से बुगालू दो फाड़ हो जाता है. कथित बुगालू आंदोलन से जुड़े कुछ लोग ब्लैक लाइव मैटर्स का समर्थन करते तो कुछ इसके ख़िलाफ़ हो जाते हैं.

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जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद ब्लैक लाइवज़ मैटर आंदोलन 

ब्लैक लाइव मैटर्स आन्दोलन के दौरान हुई हिंसक झड़प में बुगालू से जुड़े लोगों का नाम भी आया था. जब कोरोना के कहर से अमेरिका के कई राज्यों में लॉक डाउन लगा था तब बुगालू से जुड़े संगठनों ने इसका विरोध किया, लॉक डाउन के ख़िलाफ़ कई रैलियां आयोजित की. इसके अलावा पुलिस अधिकारीयों की हत्या, गवर्नर की किडनैपिंग, अवैध रूप से बंदूक रखने, ड्रग्स की तश्करी जैसे मामलों में बुगालू से जुड़े लोगों का नाम आता रहा है. इतना ही नहीं कैपिटल हिल दंगों को भड़काने में भी बुगालू के लोगों पर आरोप लगे हैं.

ये थी कहानी कथित बुगालू आन्दोलन की. लेकिन इस कहानी के कई जानकार हैं जो बुगालू को कोई आन्दोलन नहीं मानते. उनका कहना है कि ये बस कुछ लोग हैं जो हवाई शर्ट पहनकर हुडदंग करते हैं. ये केवल फेसबुक तक सीमित हैं. ज़मीन पर इनका कोई अस्तित्व नहीं है.

अब बात बुगालू बॉयज की. कथित बुगालू आंदोलन से जुड़े कई संगठनों में से एक संगठन है बुगालू बॉयज. इसी संगठन से जुड़े दो लोगों की गिरफ्तारी हुई है, इसी वजह से हमने आपको आज ये पूरी कहानी सुनाई.

गिरफ्तार हुए लोग कौन हैं?

टिमोथी टीगन और एरोन मैकिलिप्स नाम के दो लोगों की गिरफ्तारी हुई है, दोनों को कथित तौर पर बुगालू बॉयज़ का सदस्य बताया गया है. इनपर अवैध रूप से बंदूक रखने, मशीन गन बनाने और नशीली दवाओं की ख़रीद फ़रोख के आरोप लगे हैं. पुलिस ने इनके घरों से बुगालू आंदोलन के झंड़े और गैस मास्क बरामद किए हैं. अधिकारीयों ने भी अंदेशा जताया है कि आने वाले मिड टर्म इलेक्शन में संगठन के लोग हिंसा फैला सकते हैं.

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