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'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

अली का रोल करने वाले इंडियन एक्टर अनुपम त्रिपाठी का सलमान-शाहरुख़ कनेक्शन क्या है?

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अनुपम त्रिपाठी एज़ अली इन 'स्क्विड गेम'.
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शुभम्
12 अक्तूबर 2021 (Updated: 12 अक्तूबर 2021, 04:10 PM IST)
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'स्क्विड गेम'. आजकल ईरान से लेकर तूरान तक, ज़मीन से लेकर आसमान तक नेटफ्लिक्स के इस सर्वाइवल ड्रामा शो के ही चर्चे हैं. दुनिया भर में ये ड्रामा शो अलग स्तर की वाहवाही लूट रहा है. भारत समेत 65 से ऊपर देशों में 'स्क्विड गेम' इस वक़्त टॉप शो बना हुआ है. बाकी देश तो चलो शो के कंटेंट को लेकर उत्साहित हैं लेकिन इंडियंस के पास तो शो को पसंद करने की एक एक्स्ट्रा वजह भी है. वजह है प्लेयर नंबर 199. अब्दुल अली. सीधा-सच्चा इंसान. शो में तो अब्दुल अली एक पकिस्तानी माइग्रेंट है लेकिन असल ज़िंदगी में अली हिंदुस्तानी है. बस यही वो एक्स्ट्रा वजह है जिससे भारतीय 'स्क्विड गेम' को लेकर थोड़े ज़्यादा उत्साहित हैं.
रेगिस्तान में किसी प्यासे को अचानक से मीठा पानी मिल जाने पर जैसी खुशी महसूस होगी, वैसी ही खुशी किसी भी इंटरनेशनल शो में इंडियन एक्टर नज़र आने पर होती है. लगता है, अरे ये तो अपना ही बंदा है! बस इसीलिए जब साउथ कोरियाई शो 'स्क्विड गेम' में अली सामने आया, तो बाछें खिल गईं. पूरे शो में अली के किरदार ने अपना अलग इम्पैक्ट छोड़ा. एक सिंपल व्यक्ति जिसे बार-बार कुछ लोग अहसास दिलाते रहते हैं कि वो इस देश का नहीं है. उसे 'एलियन' बुलाते हैं. मज़ाक उड़ाते हैं. अली का किरदार कन्विंसिंग ढंग से निभाने वाले एक्टर हैं अनुपम त्रिपाठी. साड्डी दिल्ली दा लौंडा. अली की कहानी तो आपने शो में जानी, हम आपको अली का किरदार निभाने वाले एक्टर अनुपम त्रिपाठी की कहानी सुनाएंगे. बताएंगे कि कैसे दिल्ली का लड़का साउथ कोरिया में जाकर स्टार बन गया. वो कौन है, जो दिल्ली में 2 नवंबर को जन्मा और एक्टर बना? कहानी शुरू करने से पहले एक सवाल.
वो कौन शख्स है, जिसका जन्म दिल्ली में 2 नवंबर को हुआ और जो आगे चलकर एक्टर बना?
जवाब सबको मालूम है. अपने किंग खान यानी शाहरुख खान. लेकिन इसी सवाल का एक दूसरा जवाब भी है. अनुपम त्रिपाठी. अनुपम अपना जन्मदिन शाहरुख खान के साथ शेयर करते हैं. अनुपम का जन्म 2 नवंबर 1988 को दिल्ली में हुआ. एक टिपिकल मिडल क्लास फैमिली में. लिहाज़ा हर सिंपल मिडल क्लास फैमिली की तरह अनुपम के घरवाले भी चाहते थे कि वो पढ़ाई कर के डॉक्टर-इंजीनियर वगैरह-वगैरह बन जाए. लेकिन अनुपम का रुझान किताबों से ज़्यादा गानों के सुर और अभिनय के गुर सीखने में रहता था.
2005 में अनुपम ने 'स्पार्टाकस' नाम के प्ले में स्टेज प्रोडक्शन का काम किया. काम करते-करते अनुपम को इतना मज़ा आने लगा कि वो प्ले में एक्ट भी करने लगे. कई बार उन्होंने नाटक में स्लेव का रोल किया. 2006 में अनुपम ने शाहिद अनवर का बहरूप थिएटर ग्रुप जॉइन कर लिया. अनुपम बताते हैं उन्हें थिएटर करते हुए बहुत मज़ा आता था. उन्हें अच्छा लगता था कि वो कुछ वक़्त के लिए कोई और इंसान बन जाते हैं और कुछ वक़्त बाद वापिस खुद की पर्सनालिटी में आ जाते हैं.
18 वर्ष के होने तक अनुपम सिंगिंग और एक्टिंग की बाकायदा ट्रेनिंग भी लेने लगे. कुछ साल ट्रेनिंग लेने के बाद अनुपम ने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा यानी NSD में अप्लाई करने का सोचा. अपनी इच्छा उन्होंने अपने दोस्तों को बताई तो उनमें से एक ने त्रिपाठी को कहा कि वो कोरियाई नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ आर्ट्स के एक्टिंग स्कॉलरशिप प्रोग्राम में क्यों नहीं दाखिला ले लेते! उन्हें बस एक एग्जाम पास करना होगा और अगर वो सेलेक्ट हुए तो वो वो काम कर पाएंगे, जो उन्हें बहुत पसंद है. अनुपम को सलाह में दम लगा. लेकिन ये बात वो अपने घर पर मम्मी-पापा को बताते तो उन्हें इजाज़त नहीं मिलती. इसलिए बिना बताए कोरियाई नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ आर्ट्स में अप्लाई कर दिया. करीब एक महीने बाद रिजल्ट भी आ गया. अनुपम ने एग्जाम पास कर लिया था. तब जाकर अनुपम ने ये बात अपने घर में बताई. सभी बहुत नाराज़ हुए लेकिन फ़िर जाने की इजाज़त भी दे दी. # सिर्फ दो साल में सीख डाली कोरियन भाषा घरवालों को मना कर 2010 में अनुपम साउथ कोरिया मूव कर गए और अपनी पढ़ाई शुरू कर दी. मूव तो कर गए लेकिन साउथ कोरिया एक ऐसा देश था, जो हिंदुस्तान से बिल्कुल अलग था. भाषा से लेकर खाने तक और खाने से लेकर कल्चर तक, सबकुछ एकदम हिंदुस्तान से विपरीत. शुरुआत में तो अनुपम को कोरियाई रंग-ढंग में ढलने में बड़ी मुश्किलें आईं. ना खाना स्वाद लगे, ना किसी का कहा कुछ समझ आए. खैर अनुपम कोरियाई तौर-तरीके सीखने लगे. धीरे-धीरे उन्होंने साउथ कोरियाई रहन-सहन अपना लिया. और सिर्फ 2 साल में ही अनुपम एकदम फ्लुएंटली कोरियन लैंग्वेज बोलने लगे. आज की तारीख में अनुपम हिंदी, इंग्लिश और कोरियाई भाषा में एकदम निपुण हैं. # सलमान खान से क्या है कनेक्शन? अनुपम पढ़ाई के दौरान ही काम भी करने लगे थे. उन्होंने अपने कॉलेज के तीसरे साल तक कई सारे विज्ञापन कर डाले थे. और हां अनुपम का सिर्फ़ शाहरुख कनेक्शन ही नहीं है, बल्कि सलमान कनेक्शन भी है. कैसे? वो ऐसे...  2014 में अनुपम ने अपनी पहली फ़िल्म साइन की. फ़िल्म का नाम था 'ओड टू माय फादर'. इस फ़िल्म में अनुपम ने एक बम एक्सपर्ट की भूमिका निभाई थी. साउथ कोरिया में ये फ़िल्म उस साल बहुत बड़ी हिट साबित हुई. अब इसका सलमान कनेक्शन ये है कि इसी फिल्म का 2019 में अली अब्बास ज़फ़र ने हिंदी में रीमेक बनाया था. 'भारत' नाम से, जिसमें सलमान मेन लीड थे. # स्टीरियोटाइप वाले गेम में उलझे जैसे हिंदी फिल्मों में हम सालों तक वाइट एक्टर्स को सिर्फ़ क्रूर फिरंगी बनाते रहे, कुछ वैसी ही स्टीरियोटाइपिंग साउथ कोरिया में अनुपम को भी झेलनी पड़ी. उन्हें ज़्यादातर रोल्स सिर्फ माइग्रेंट के मिलते थे. किसी फ़िल्म में उन्हें श्रीलंकन माइग्रेंट का रोल मिलता तो किसी में नेपाली या इंडियन का. हालांकि इस बात से अनुपम उतने खफ़ा नहीं हैं. अनुपम कहते हैं,
"मैं माइग्रेंटस का बहुत शुक्रगुज़ार हूं. क्योंकि उनकी वजह से ही मैं स्टेज पर खड़ा हो पाता हूं. मुझे लगता है यही मौके होते हैं, जब आप कोरियाई सोसाइटी की डार्क एन्ड सैड साइड को बहुत से लोगों को दिखा सकते हैं."
# 'स्क्विड गेम' के लिए उर्दू भी सीख डाली 'स्क्विड गेम' में अली ने एक पाकिस्तानी माइग्रेंट की भूमिका निभाई है. इससे पहले तक उन्होंने इंडियन, श्रीलंकन माइग्रेंट के रोल्स ही किए थे. लिहाज़ा इस किरदार की तैयारी के लिए अली ने साउथ कोरिया में रह रहे पाकिस्तानी लोगों से मुलाकात की. उर्दू ज़ुबान सीखी. इसी के साथ उन्होंने पाकिस्तानी माइग्रेंटस के ऊपर बनी बीबीसी की कई डॉक्युमेंट्रीज़ भी देखीं. अपनी इस तैयारी के बारे में बात करते हुए अनुपम ने बताया,
"अली एक ऐसा इंसान था, जो पूरी मेहनत से काम करता है. ताकि अपने परिवार को एक अच्छी ज़िंदगी दे सके. मैंने खुद को किरदार से जोड़ने की कोशिश की. मैंने सोचा मैं कैसे कोरिया में सर्वाइव करता, अगर मेरे पास जॉब नहीं होती. मैने भी अली की तरह संघर्ष किया है. हां मैंने अली की तरह कभी अपने चेहरे से स्माइल नहीं जाने दी".
अलग-अलग किरदारों में अनुपम त्रिपाठी.
अलग-अलग किरदारों में अनुपम त्रिपाठी.

# पिता नहीं देख सके तरक्की अनुपम के माता-पिता उनकी करियर चॉइस से खुश नहीं थे. उन्हें नहीं लगता था कि अनुपम एक्टिंग के ज़रिए एक अच्छा जीवन जी पाएंगे. इधर अनुपम भी इतने साल कोरियाई फ़िल्म इंडस्ट्री में काम तो खूब कर रहे थे लेकिन उन्हें उनके हिस्से की सफ़लता हाथ नहीं लग रही थी. जो थोड़ा बहुत उनका नाम बना भी था, वो भी कोरिया तक ही सीमित था. खैर 2021 में 'स्क्विड गेम' से ना सिर्फ़ इंडिया बल्कि ऑल ओवर द वर्ल्ड अनुपम फ़ेमस हो गए. लेकिन दुखद बात ये कि 2017 में अनुपम के पिता जी का निधन हो गया था. वो अनुपम की इस सफलता को देख ना सके. लेकिन इंडिया में 'स्क्विड गेम' की सफ़लता के बाद उनकी मां और भाई का सिर गर्व से ऊंचा उठ गया. अपने परिवार का पोस्ट 'स्क्विड गेम' रिएक्शन बताते हुए अनुपम कहते हैं,
"मेरी मां और मेरा भाई, दोनों मुझ पर बहुत गर्व महसूस कर रहे हैं. मुझे यकीन था जो मैं कर रहा हूं, वो सही कर रहा हूं. अगर आज मेरे पिता होते, तो मुझे इस मुकाम पर देख कर बहुत खुश होते".
# ये रोल नहीं आसान अली का किरदार अनुपम को इतनी आसानी से भी नहीं मिला. अनुपम ने एक नहीं, दो नहीं पूरे तीन बार ऑडिशन राउंड क्लियर किए तब कहीं जाकर उन्हें ये रोल मिल पाया था. ये राउंड्स क्लियर करने के बाद जब अनुपम 'स्क्विड गेम के राइटर-क्रिएटर-डायरेक्टर ह्वांग डवोंग ह्युक के सामने पहुंचे, तो उन्हें अनुपम अली के किरदार के लिए परफेक्ट लगे. ह्वांग ने एक इंटरव्यू में अली की तारीफ़ करते हुए कहा,
"कोरिया में एक अच्छा फॉरेन एक्टर ढूंढना बहुत मुश्किल काम था. ऐसे में त्रिपाठी अवतार की तरह मेरे सामने आ गया. वो कोरियन में फ्लुएंट था और एक्टिंग भी कर सकता था. उसकी इमोशनल एक्टिंग भी बेहतरीन थी."
# 17 सितंबर 2021 के बाद बदल गई ज़िंदगी 'स्क्विड गेम' की इस ग्लोबल सफ़लता के बाद अनुपम के ढेर सारे इंटरव्यू हुए. ऐसे ही एक इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि शूटिंग के दौरान क्या उन्हें अहसास था कि वो एक बहुत ही कमाल के शो में काम करने जा रहे हैं! इसका जवाब देते हुए अनुपम ने कहा,
"हमें लगा तो था शो बहुत अच्छे से लिया जाएगा. लेकिन ये शो इतना बड़ा सेंसेशन बन जाएगा, ये तो हमने भी नहीं सोचा था. मैं तो इसके लिए तैयार भी नहीं था. मुझे अच्छे से याद है 17 सिंतबर 2021 तक मेरी लाइफ ओके थी. एकदम नॉर्मल. लेकिन 5 बजे के बाद मेरी लाइफ एकदम बदल गई. हर कोई अचानक से मुझे मैसेज करने लगा. हर मैसेज में सिर्फ एक नाम था अली अली."
अनुपम कहते हैं वो लुक्स बदलने में माहिर हैं.
अनुपम कहते हैं वो लुक्स बदलने में माहिर हैं.

# जब घर से आकर तुरंत बनानी पड़ी मसल्स जब अनुपम को अली के किरदार का ब्रीफ़ मिला उससे कुछ दिन पहले ही वो दिल्ली अपने घर होकर आए थे. लिहाज़ा घर पर मम्मी के हाथों  का बढ़िया खाना दबा के खाया था. इसलिए जब बढ़िया पेट-पूजा करने के बाद वापस को कोरिया पहुंचे, तो आउट ऑफ शेप थे. इधर अली का किरदार एक मैकेनिक का था. जिसके लिए अली को मसल्स बनाने के लिए ब्रीफ़ किया गया. अली भी मेहनत में जुट गए तकरीबन 7 से 8 किलो मसल वेट बढ़ा लिया. अली कहते हैं वो एकदम मस्क्युलर तो नहीं लग रहे थे लेकिन एक ताकतवर इंसान ज़रूर दिख रहे थे. # आजकल क्या कर रहे हैं? अनुपम ने इंडिया में सिर्फ थिएटर किया है लेकिन उनकी ख्वाहिश है कि वो इंडिया में बड़े लेवल पर परफॉर्म करें. अली कहते हैं वो अपने देश में अपने लोगों के सामने अपनी भाषा में परफॉर्म करने को लेकर बेहद उत्साहित हैं. हालांकि इस वक़्त उनके खाते में कोई इंट्रेस्टिंग इंडियन प्रोजेक्ट तो नहीं है लेकिन उन्हें यकीन है आने वाले वक़्त में उन्हें इंडिया से भी ऑफर आएंगे.
बैचलर डिग्री खत्म होने के बाद आजकल अनुपम एक्टिंग में ही मास्टर्स डिग्री की भी तैयारी कर रहे हैं. एक्टिंग के साथ सिंगिंग में भी वो पूरे तरीके से सक्रिय हैं. अक्सर अपने इन्स्टा अकाउंट से लेकर अन्य जगहों पर वो अपने गाने के वीडियो भी अपलोड करते रहते हैं. अनुपम कहते हैं वो एक पॉजिटिव आदमी हैं और ज़िंदगी को बड़ी सकारात्मक नज़र से देखते हैं. जिंदगी और 'स्क्विड गेम' में क्या समानता है पूछे जाने पर अली ने कहा,

"जीवन में भी 'स्क्विड गेम्स' वाली सिचुएशन आती है. आप भले ना जीतो लेकिन आप जीना सीख जाते हो".


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