एक कविता रोज़ - पाश की कविता 'दो और दो तीन'
'कचहरियों, बस-अड्डों और पार्कों में/सौ-सौ के नोट घूमते फिरते हैं.'
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बेशक पाश पंजाबी कवि थे मगर उनकी कविताओं को हिंदी में बाहें पसारे स्वीकारने वाले इतने लोग हैं कि उन्हें किसी हिंदी कवि से कम प्रसिद्धि प्राप्त नहीं.
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