17 अगस्त को एक बेहद रोचक मुग़ल बादशाह का जन्मदिन होता है.भारत में मुग़ल बादशाहों का एक अलग अंदाज रहा है. बाबर, हुमायूं, अकबर, जहांगीर,शाहजहां, औरंगजेब और आखिरी बहादुर शाह जफ़र. सब के सब किसी ना किसी चीज के लिए जानेजाते हैं. पर इन सबकी चकाचौंध में भारत ने एक मुग़ल बादशाह को भुला दिया, जो इन सबसेजुदा थे. शायद दुनिया के बादशाहों में उसके जैसे बहुत ही कम होंगे. पर उनके बारेमें जब भी लिखा गया, उनका मजाक बनाया गया. क्योंकि वो चंगेज खान, नादिरशाह औरऔरंगजेब वाले सांचे में फिट नहीं बैठते थे. तलवार की बजाय उन्हें लड़कियों के कपड़ेऔर शायरी ज्यादा प्रिय थी. मुहम्मद शाह नाम था उनका. पर इतिहास उन्हें मुहम्मद शाहरंगीला के नाम से जानता है. वो बादशाह, जिनके नाम पर दिल्ली में एक सड़क तक नहीं है.औरंगजेब से बिल्कुल उल्टे थे बादशाह रंगीलाऔरंगजेब के मरने के बाद हिंदुस्तान में राजशाही बड़ी खतरनाक हो गई थी. तीन बादशाहोंका क़त्ल हो गया था. एक को तो अंधा कर दिया गया था. वजीर बादशाहों को नचाते थे. इसकेपहले औरंगजेब ने तो दिल्ली राज की बत्ती गुल कर दी थी. पूरे जीवन लड़ते रहे. मरे भीलड़ाई के बीच. पर मुग़लिया शासन के कल्चर को ध्वस्त कर के गए थे. गीत-संगीत, साहित्य,नाच-गाना सब बर्बाद कर के गए थे. जो कलाकार मुगलिया राज में ऐश करते थे, औरंगजेब केराज में भीख मांगने की नौबत आ गई.पर मुहम्मद शाह रंगीला ने सब बदल दिया. सारे कलाकारों को वापस लिया. उस समय दिल्लीमें कठिन राग ध्रुपद चलता था. रंगीला के आग्रह पर 'खयाल' स्टाइल लाया गया. आज भीयही चलता है. फिर चित्रकारों को विशेष सुविधा दी गयी. निदा मॉल जैसे चित्रकार दरबारमें रहते थे. बादशाह के हर तरह के चित्र बनाये गए. यहां तक कि सेक्स करते हुए भीतस्वीरें हैं. उस वक़्त का ये बादशाह अपनी सोच में कितना आगे था!मुहम्मद शाह की तस्वीर (Photo: British Library, London)शायरी और नाच-गाने का शौक़ीन, जिंदगी पुरसुकून कट रही थीअपने लगभग 30 साल के राज में रंगीला ने खुद कोई लड़ाई नहीं छेड़ी. मस्ती में जीवननिकलता था. सुबह-सुबह कभी मुर्गों की लड़ाई. कभी घुड़दौड़. दिन में तरह-तरह के संगीत.फिर इश्क-मुहब्बत. तरह-तरह के कलाकारों को अपने पास बिठाना. बातें करना. बादशाह केबारे में कहा जाता है कि वो लड़कियों के कपड़े पहन नाचते थे. पर इसमें बुरा क्या था?ये नृत्य के प्रति उनका असीम इश्क था. एक बादशाह का वैसा करना थर्ड जेंडर के लोगोंके लिए बड़ा ही सुकून वाला रहा होगा. इस बादशाह ने वो दिल्ली बनाई थी, जिसके बारेमें मीर तकी मीर ने लिखा था:दिल्ली जो इक शहर था आलम में इन्तिखाब.....मुहम्मद शाह की तस्वीरये भी कहा जाता है कि जब मुगलिया राज का अकूत पैसा देख नादिर शाह अपने लश्कर के साथचला आया, तब अपना बादशाह आराम फरमा रहा था. जब हरकारा चिट्ठी लेकर बादशाह के पासआया, तो बादशाह ने उस चिट्ठी को दारू के अपने प्याले में डुबो दिया और बोले:आईने दफ्तार-ए-बेमाना घर्क-ए-मय नाब उला. इस बिना मतलब की चिट्ठी को नीट दारू मेंडुबा देना बेहतर है.हुक्का भी है बादशाह के साथतभी आ गया जालिम नादिरशाह, कोहिनूर के लिएपर मामला यहीं ख़त्म नहीं हुआ. जब नादिर दिल्ली के पास पहुंचा, तो बादशाह रंगीलाअपनी फ़ौज के साथ खड़े थे दो-दो हाथ करने के लिए. साथ ही सन्देश भी भिजवा दिया किचाहो तो बात कर लो. बात हुई. तय हुआ कि लड़ाई नहीं होगी. नादिर पैसे लेकर लौटजायेगा. डिप्लोमेसी की ये मिसाल थी. जहां हर बात का फैसला तलवार से होता था, बादशाहने बात से निपटा दिया. पर बादशाह के एक धोखेबाज़ सेनापति ने नादिर से कहा कि इनकेपास बहुत पैसा है. सस्ते में छूट रहे हैं. नादिर अड़ गया कि हम को दिल्ली की मेहमानीचाहिए. दिल्ली आ गया. लगा सोना-चांदी उठाने. तीन दिन पड़ा रहा.तभी उसके सैनिकों की बाज़ार में झड़प हो गई. 900 नादिरशाही सैनिक खेत रहे. नादिर कोदया नहीं आती थी. उसके सैनिकों ने दिल्ली में क़त्ल-ए-आम मचा दिया. सड़कें लाशों सेपट गईं. कहते हैं कि बादशाह रंगीला ने अपना खजाना खोल दिया नादिर के लिए. जो चाहे,ले लो. नादिर को जो हाथ लगा, उठा लिया. पर उसे एक चीज नहीं मिली. कोहिनूर का हीरा.वो रंगीला को बड़ा प्रिय था. नादिर उसके लिए मतवाला हो उठा. जाने को तैयार नहीं.बादशाह देने को तैयार नहीं. छुपा दिया कहीं.फिर बादशाह के एक वजीर ने नादिर से बात कर ली. पता नहीं क्या बात की कि नादिर जानेको तैयार हो गया. जब जाने की बेला आई, तब बादशाह रंगीला नादिर को रुखसत करने गए.वहां नादिर ने गले लगाया. भूल-चूक लेनी-देनी की. और बोला: बादशाह, हमारे यहां रिवाजहै कि जाते वक़्त हम अमामे बदल लेते हैं. तो आप मुझे अपना मुकुट दे दो, मेरा ले लो.बादशाह को काटो तो खून नहीं. बादशाह ने कोहिनूर अपने मुकुट में छुपा रखा था. वजीरने यही बात बताई थी नादिर को. ये बात कहानी भी हो सकती है. इतिहास कहानियों में भीचलता है.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:टीपू सुल्तान की जिंदगी का एक दिनदिल्ली के मालचा महल में रहती है एक राजकुमारी, जहां भूत के डर से कोई नहीं जाताइस तैमूर को देखकर 700 सालों की नफरत पानी बनकर बह गईबादशाह अकबर ब्रज बोली में दोहे कहता था, एक उसे मरते वक्त याद आयाऔरंगजेब का वो बेटा जिसे नाखून और बाल तक कटवाना मना था