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न्यूज़ीलैंड की किस्मत में लिखा था टी-20 चैम्पियन बनना

न्यूज़ीलैंड टी-20 टीम रैंकिंग में सबसे ऊपर पहुंच गयी है. बावजूद इसके कि वर्ल्ड कप वेस्ट-इंडीज़ ने जीता था. न्यूज़ीलैंड के खून में टी-20 बसा है.

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5 मई 2016 (अपडेटेड: 5 मई 2016, 04:53 PM IST)
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न्यूजीलैंड आईसीसी रेंकिंग में टी20 की नम्बर 1 टीम बन गया है. बहुत लोगों के लिए यह आश्चर्य का विषय है, बहुत लोगों के लिए दुविधा का. आश्चर्य इसलिए क्योंकि न्यूजीलैंड को पारंपरिक रूप से क्रिकेट की टॉप टीमों में नहीं गिना जाता. दुविधा इसलिए क्योंकि अभी कुछ दिन पहले हुए टी20 विश्वकप में जीतनेवाली टीम न्यूजीलैंड नहीं थी, वेस्टइंडीज़ थी.

दरअसल यह रेटिंग एक पुरानी गलती को सही करती है. गलती, कि हमने न्यूजीलैंड को टी-20 की टॉप टीम क्यों नहीं माना अौर गिना. उनकी टॉप रेटिंग आज उनकी प्रदर्शन में निरंतरता को दिखाती है. लेकिन उनके खेल के इस सबसे नए अौर सबसे एग्रेसिव फॉर्मेट में सफलता का राज तो उनके क्रिकेट इतिहास में छिपा है.

सच्चाई हम बताते हैं. पांच किस्से उनके इतिहास से, जो साबित करते हैं कि टीम न्यूजीलैंड तो बनी ही टी20 क्रिकेट खेलने के लिए थी.

1. अोपनिंग पर स्पिनर

दीपक पटेल. दायें हाथ के अॉफ ब्रेक बॉलर. बैंटिंग भी ठीक-ठाक कर लेते थे. इंग्लैंड के लिए काउंटी क्रिकेट खेलना शुरु किया, लेकिन टीम में जगह नहीं मिली. न्यूजीलैंड ने मौका दिया. पहला टेस्ट खेला 1987 में. कुल सैंतीस टेस्ट खेले. अौसत रिकॉर्ड रहा. लेकिन 1992 में इन्हीं दीपक पटेल की गेंदबाजी अजूबा बन गई, जब मार्टिन क्रो ने उन्हें अॉस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉलिंग अोपन करने उतार दिया.

होम टीम थी न्यूजीलैंड. 1992 के विश्व कप में. लेकिन कोई उन्हें विजेता बनने की गिनती में नहीं रख रहा था. यहीं न्यूजीलैंड ने वनडे क्रिकेट में अनदेखा प्रयोग करते हुए स्पिनर से गेंदबाजी की शुरुआत करवा दी.

टूर्नामेंट फेवरिट धुरंधर अॉस्ट्रेलिया मैच हार गया. पटेल ने 10 अोवर में सिर्फ 36 रन दिए अौर विपक्षी कप्तान बॉर्डर को आउट किया. टूर्नामेंट पलट गया.

एक मैच में किया ये प्रयोग इतना सफल हुआ कि न्यूजीलैंड ने इसे आगे भी दोहराया. अकल्पनीय प्रदर्शन के साथ न्यूजीलैंड विश्वकप में लगातार 7 मैच जीता अौर ग्रुप टॉप किया. अगर सेमी फाइनल में जवान इंजमाम उल हक के चमत्कारी 37 गेंद पर 60 आड़े ना होते तो न्यूजीलैंड को जीत से रोकना असंभव था.

आज जब टी-20 मैच में अोपनिंग पर उतरे क्रिस गेल के आतंक से पार पाने के लिए कप्तान धोनी टीम के स्पिनर रविचंद्रन अश्विन से गेंदबाज़ी शुरू करवाते हैं तो इसका थोड़ा श्रेय 92 के विश्वकप में न्यूजीलैंड की उस प्रयोगशील शुरुआत को भी जाता है.

2. छक्के पर आठ रन, चार स्टंप

क्रिकेट मैक्स टी-20 की पापा थी. न्यूज़ीलैंड के सुपरहिट क्रिकेट कप्तान मार्टिन क्रो ने 1996 में ही इसे ईज़ाद कर दिया था. इंग्लैंड बोर्ड ने 2003 में टी-20 क्रिकेट शुरू किया, उसके भी सात साल पहले. क्रिकेट मैक्स तो टी-20 से भी कहीं ज्यादा रंगबिरंगी थी. दोनों टीमों की दो पारियां लेकिन अोवर सिर्फ 10-10. खेल का लक्ष्य एग्रेसिव क्रिकेट को एक फॉर्म के तौर पर स्थापित करना था. मार्टिन क्रो ने ईज़ाद पर कहा था, 'मैंने क्रिकेट मैक्स की ईज़ाद की क्योंकि मुझे लगा कि हमारे दर्शक अौर टीवी अॉडियंस के लिए एक ऐसा खेल चाहिए जिसमें समय कम लगे अौर वो बहुत रंगबिरंगा हो. कुछ पुरानी चीज़ों को बचाए रखते हुए भी खेल में सबसे बेहतर स्किल्स को उभारे'. सुनने में यह पूरा ज्योग्राफिया टी-20 क्रिकेट वाला ही लगता है.

कई नॉवल प्रयोग थे इस क्रिकेट में. नो बॉल पर फ्री हिट का कॉन्सेप्ट इसी क्रिकेट मैक्स ने शुरू किया. वाइड के एक की बजाए दो रन. गेंदबाज़ का एक मैच में चार अोवर का कोटा भी इसी क्रिकेट मैक्स ने सेट किया. इसमें तो कई ऐसे प्रयोग भी थे जिनको भविष्य के किसी टी-20 मैच में देखा जा सकता है. जैसे मैदान के बीच में एक मैक्स ज़ोन, जहां शॉट मारने पर डबल रन मिलेंगे. या गेंदबाज की मदद के लिए तीन के बजाए चार स्टम्प का प्रयोग!

3. दो अौर दो पांच करते क्रिकेटर

आईपीएल की बोली देखी है ना आपने? आज टी20 में सबसे बड़ी कीमत उन खिलाड़ियों की है जिनके पास दोहरी या तिहरी प्रतिभा है. हर अन्तरराष्ट्रीय टीम में भी इसके लिए मारामारी है. लेकिन न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम में तो अॉलराउंडर्स की भरमार रही है. जैसे वे सदी भर पहले से टी-20 क्रिकेट खेलने को तैयार हों. उनके गेंदबाज बल्लेबाजी कर लेते हैं, अौर बल्लेबाज गेंदबाजी.

रिचर्ड हैडली जैसे शानदार अॉल राउंडर न्यूजीलैंड के लिए तब खेले जब टी-20 क्रिकेट की शुरुआत भी नहीं हुई थी. क्रिस केर्न्स, क्रिस हैरिस अौर नाथन एस्टल जैसा क्रिकेट नब्बे के दशक में खेलते थे, टी-20 क्रिकेट स्टाइल वाले खेल की स्थापना उन्होंने पहले ही न्यूजीलैंड क्रिकेट में कर दी थी.

ऐसे में न्यूजीलैंड के लिए यह स्टाइल अॉफ क्रिकेट तो 'घर की खेती' थी. इसके साथ न्यूजीलैंड फील्डिंग में भी हमेशा से जीनियस रही. इतनी कि पुराने दौर में हम उनकी मैदान पर डाइव्स देखकर आहें भरते थे.

4. पिंच हिटर

पिंच हिटर. हमने ये नाम सुना 1996 में, जब श्रीलंका के सनथ जयसूर्या अौर रोमेश कालूवितर्ना ने विश्व कप में एक के बाद एक टीमों की लापसी-पूड़ी तोलना शुरू किया था. लेकिन वनडे में अोपनिंग पर इस किस्म की बल्लेबाजी का अाविष्कार किया था 1992 विश्वकप में न्यूजीलैंड के मार्क ग्रेटबैच ने. वे न्यूजीलैंड की शुरुआती टीम का हिस्सा नहीं थे. कैप्टन क्रो ने ग्रेटबैच को विश्वकप के तीसरे मैच में जॉन राइट के घायल होने पर अोपनिंग पर उतारा था. अौर ग्रेटबैच ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी अौर छक्के मारकर पहले पन्द्रह अोवर में ही मैचों का नक्शा बदलना शुरू कर दिया. उन्होंने मैल्कम मार्शल अौर कर्टली एम्ब्रोस जैसे तेज गेंदबाजों का आतंक ध्वस्त कर दिया.

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ग्रेटबैच के टूर्नामेंट में स्कोर 68, 15, 63, 73, 35, 42 अौर 17 रहे. उन्होंने धुरंधर तेज गेंदबाजों को शुरुआती अोवरों में छक्के मारे, जिससे उनका विश्वास डोल गया. गेंदबाजी की ऐसी नींव खोदी की पूछो मत. इसी जांबाज बल्लेबाजी पर मध्यक्रम के बल्लेबाज मार्टिन क्रो ने अपने फन की इमारत खड़ी की अौर टूर्नामेंट में मैन अॉफ द सीरीज़ बने. लेकिन सबसे खास था ग्रेटबैच की बल्लेबाजी का अंदाज, जिसने वनडे में पहले पन्द्रह अोवर में फील्डिंग प्रतिबंधों का मतलब ही बदल दिया.

उससे पहले तक वनडे में पहले पन्द्रह अोवर में फील्डिंग प्रतिबंधों की वजह थी बल्लेबाज को तेज गेंदबाज के आतंक से बचाना. लेकिन न्यूजीलैंड के इस प्रयोग ने ऐसा पांसा पलटा कि एकदिवसीय के शुरुआती अोवर बल्लेबाजों के आतंक की कहानी बन गए. जयसूर्या से लेकर सचिन तक, एकदिवसीय के हर अोपनिंग बैट्समैन ने फिर इन प्रतिबंधों का ऐसे ही मार फायदा उठाया. आज जब टी-20 में मैच ही कुल बीस अोवरों में सिमट गया है, सारे खिलाड़ी उन्हीं पूर्वज मार्क ग्रेटबैच के अवतार हैं.

5. मैकुलम ने बदला नक्शा

ब्रेंडन मैकुलम सिर्फ एक खिलाड़ी का नाम नहीं है, वो स्वयं में एक विचार हैं.

ये मैकुलम ही थे जिन्होंने 2008 में आईपीएल की शुरुआत पर पहले ही मैच में 158 रन बनाकर इस फॉर्मेट में मौजूद गजब की संभावनाअों के द्वार खोले थे. वे ही टी-20 इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले क्रिकेटर हैं. वे निर्भय क्रिकेटर हैं. टी-20 क्रिकेट में शायद यही खूबी सबसे खास होती है. अौर फिर उनकी कप्तानी. क्रिकेट में कहते हैं कि फॉर्मेट जितना छोटा हो, कप्तान का रोल उतना ही बढ़ जाता है. मैकुलम जैसा कप्तान हो तो किसी भी टीम को शुरुआती एज मिल जाता है.

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न्यूजीलैंड की आज की सफलता में मैकुलम वाला कप्तानी का दौर अौर उसका रिकॉर्ड भी शामिल है. अौर उनकी स्टाइल को उनके नए कप्तान क्रेग विलियमसन ने भी बखूबी अपनाया है. 2015 वर्ल्ड-कप सेमी फाइनल में ग्रांट ईलियट के सामने डेल स्टेन थे. 6 गेंद में 12 रन चाहिए थे. ऐसे में स्टेन को छक्का मारकर उसकी आत्मा को मार देने की ताकत रखने के पीछे बहुत कुछ ऐसा था जो मैकुलम की लेगसी का गवाह था. जब 2016 के टी-20 विश्वकप में विलियमसन बोल्ट अौर साउदी को टीम से बाहर कर तीन स्पिनरों के साथ भारत के खिलाफ मैच में उतरे, तो कई चाहनेवालों को मैकुलम की कमाल इमैजिनेशन याद आयी थी. यही इमैजिनेशन अौर भिड़ जाने की कुव्वत आज न्यूजीलैंड को टी20 में टॉप पर लेकर आई है.

मान लो, न्यूजीलैंड को तो एक ना एक दिन टी20 का सिरमौर होना ही था. वे लिखवा कर लाए थे ये अपनी मेहनत के पसीने से.

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