The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Lallankhas
  • RBI Surplus : Modi government wanted more, but Bimal Jalan Committee denied to do so, pressurised finance secretary Rajiv Kumar

मोदी सरकार को तो बहुत पैसा चाहिए था, आरबीआई ने कम ही दिया

जानिए किसकी वजह से सरकार बस इतना ही पैसा ले पाई.

Advertisement
pic
28 अगस्त 2019 (अपडेटेड: 28 अगस्त 2019, 02:15 PM IST)
Img The Lallantop
मोदी सरकार को बहुत पैसा चाहिए था.
Quick AI Highlights
Click here to view more
आरबीआई ने सरकार को पैसा दिया है. 1.76 लाख करोड़. इस ट्रांसफर के लिए सरकार ने बाकायदे आरबीआई पर दबाव बनाया. पूर्व गवर्नर बिमल जालान की अध्यक्षता में कमिटी बना दी. कमिटी ने कहा कि इतना पैसा दिया जा सकता है. कमिटी के सुझावों को आरबीआई के बोर्ड ने मान लिया. और सरकार को पैसे अब मिलके रहेंगे.
लेकिन बिमल जालान की कमिटी और सरकार के बीच में जो बातचीत हुई है, वो बातचीत बहुत ज़रूरी है. उस बातचीत में कमिटी की रिपोर्ट शामिल है और रिपोर्ट में कुछ बातें हैं जिनसे पता चलता है कि सरकार जैसा फायदा चाह रही थी, वैसा फायदा सरकार को नहीं मिलने वाला.
सरकार को बिमल जालान कमिटी से ये आशा थी कि सरकार को ज्यादा पैसे मिलेंगे. पहले ही 3.96 लाख करोड़ की मांग हो चुकी थी. जिस पर आरबीआई ने लाल झंडी दिखा दी थी. लेकिन जब बिमल जालान की कमिटी बनी. कमिटी से मांग हुई कि अभी मिले 1.76 लाख करोड़ रूपए से लगभग 54 हज़ार करोड़ रूपए ज्यादा दिए जाएं. अगर जोड़जाड़कर देखें तो, आरबीआई की बैलेंस शीट का कुल 1.5 प्रतिशत.
अगर ये डिमांड मान ली जाती तो ज़ाहिर है कि सरकार को जायदा पैसे मिलते. लेकिन बिमल जालान कमिटी ने इस मांग को मानने से इंकार कर दिया. क्योंकि कमिटी को इसमें रिस्क नज़र आया.
रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर बिमल जालान की अगुवाई वाली कमिटी ने सरकार की कम मदद की.
रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर बिमल जालान की अगुवाई वाली कमिटी ने सरकार की कम मदद की.

सोमवार को आरबीआई ने कमिटी की सिफारिशें मान लीं. पैसे मिलने के बाद वित्त सचिव राजीव कुमार आए. कहा कि आरबीआई की रिस्क फंड 3 परसेंट पर रखा जा सकता है. रिस्क फंड यानी, उतना पैसा, जो आरबीआई को हर हाल में रखना पड़ता है. मौजूदा समय में ये 4.5 से 5.5 प्रतिशत पर रखा जाता है.
इन्डियन एक्सप्रेस ने छापा है कि राजीव कुमार ने कहा कि बिमल जालान कमिटी ने जो खतरे गिनाए हैं, वैसे खतरे आने लगभग नामुमकिन हैं. कमिटी की रिपोर्ट ने भी ऐसा ही कह दिया कि राजीव कुमार ऐसी बातें कर रहे थे.
राजीव कुमार
वित्त सचिव राजीव कुमार

लेकिन बिमल जालान कमिटी ने ऐसा करने से मना कर दिया. ज्ञात हो कि राजीव कुमार वो ही वित्त सचिव हैं, जिन्हें वित्त मंत्रालय में पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग को बिजली मंत्रालय में ट्रांसफर करने के बाद वित्त सचिव बनाया गया था. अगर बिमल जालान कमिटी ये सिफारिशें मां लेती तो सरकार को कुल 2.3 लाख करोड़ रूपए दिए जाते.
आरबीआई ने जो पैसे सरकार को दिए हैं, उन पैसों का सरकार क्या करेगी, इस बार में अभी तक कोई स्थिति साफ़ नहीं हो सकेगी. इन पैसों में आरबीआई को 2018-19 में हुई कमाई और 2019-20 तक के वित्तीय वर्ष में अब तक की हुई कमाई जोड़जाड़कर दे दी गयी.
उर्जित पटेल
उर्जित पटेल

इसी फंड के ट्रांसफर को लेकर आरबीआई और सरकार में खींचतान होती रहती है. जिस समय सरकार ने ये मांग उठायी थी, उस समय उर्जित पटेल गवर्नर थे. कहा जाता है उसी समय उर्जित पटेल और सरकार के बीच खींचतान शुरू हुई. लेकिन दिसंबर 2018 में इस खींचतान से उकताकर उर्जित पटेल ने इस्तीफा दे दिया. सरकार के एक फैसले के तीन हफ्ते बाद. फैसला क्या? कि आरबीआई बोर्ड ने उर्जित पटेल की गवर्नरशिप के अधीन ही कमिटी गठित कर दी.


लल्लनटॉप वीडियो : रिजर्व बैंक ने सरप्लस फंड से मोदी सरकार को पैसा क्यों दे दिया है

Advertisement

Advertisement

()