क्या BJP अपने नेताओं के इन बेहूदा बयानों का समर्थन करती है?
राजनीति के फेर में महिलाओं का अपमान कर रहे हैं बीजेपी के नेता.
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शिवराज सिंह, कैलाश विजयवर्गीय जैसे नेताओं ने राजगढ़ कलेक्टर निधि निवेदिता और डिप्टी कलेक्टर प्रिया वर्मा पर आपत्तिजनक बयान दिया है.
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बीते दिनों मध्य प्रदेश का राजगढ़ खबरों में रहा. यहां के ब्यावरा में CAA के समर्थन में तिरंगा यात्रा करते BJP नेताओं से प्रशासन के अफसरों की भिड़ंत हुई. महिला अफसरों ने हाथ चला दिए
. वीडियो में नज़र आ रहा था कि डिप्टी कलेक्टर की चोटी खींची गई थी. बात बाहर आई तो हंगामा हुआ. दोनों पक्षों की आलोचना भी हुई. ये बात कही गई कि अफसरों को इस तरह हाथ नहीं चलाने चाहिए. कहा ये भी गया कि अफसरों के साथ बदतमीज़ी भी नहीं होनी चाहिए. होने को इतने पर बात खत्म हो जानी चाहिए थी. लेकिन नहीं हुई. भाजपा हमलावर बनी रही. कमल नाथ सरकार पर भी और स्थानीय प्रशासन पर भी. भाजपा की तैयारी थी कि अफसरों के खिलाफ FIR कराएगी. लेकिन FIR कराने के नाम पर जो हुआ, उसी की वजह से हम राजगढ़ पर फिर से बात कर रहे हैं. भाजपा के कद्दावर नेताओं ने ऐसे-ऐसे बयान दिए जिन्हें सुनकर किसी भी सभ्य नागरिक को आपत्ति होगी.
अपने 'मधुर स्वभाव' के लिए विख्यात शिवराज सिंह चौहान ने कहा,
13 साल मध्यप्रदेश के सीएम रहे और खुद को एमपी का मामा बताने वाले शिवराज सिंह चौहान ने महिलाओं के लिए ताड़का और शूर्पणखा नामों का इस्तेमाल किया. फोटो- PTI
अब एक दूसरे बयान पर चलते हैं.
कैलाश विजयवर्गीय की एक खासियत ये भी है कि वो पोहा खाने का तरीका देखकर पता लगा लेते हैं कि बंदा किस देश का है.
अब तीसरे बयान पर चलते हैं.
राजगढ़ कलेक्टर निधि निवेदिता जिन्हें लेकर मध्यप्रदेश बीजेपी के नेता लगातार आपत्तिजनक बयान दे रहे हैं. फोटो- फेसबुक
बयान अब भी खत्म नहीं हुए हैं. एक और बयान है. भाजपा नेता बद्रीलाल यादव का. इनका बयान इतना गलीज़ है कि हम यहां लिख भी नहीं सकते. वो बयान आपको राजगढ़ के लोग बता देंगे. हम बस यादव जी से ये पूछना चाहते हैं कि दूध पिलाने जैसी चीज़ को लेकर उनके दिमाग में ये सब आया कहां से. मां और बच्चे के बीच इस दुनिया में पहला संबंध ही दूध पिलाने से शुरू होता है. तो फिर ऐसी बातें उनके दिमाग में आईं कहां से. और आईं, तो क्या उनकी पार्टी भाजपा इन बातों का समर्थन करती है.
हम अपनी बात खत्म करें उससे पहले क्रोनोलॉजी भी समझ लीजिए. 19 जनवरी से पहले भाजपा ज़िले में CAA के समर्थन में दो रैलियां कर चुकी थी. ये तीसरी रैली थी जिसके लिए प्रशासन ने इजाज़त नहीं दी. और किसी को तिरंगा उठाने या वंदे मातरम कहने के लिए हिरासत में नहीं लिया गया. धारा 144 के उल्लंघन के लिए कार्रवाई हुई. चलते-चलते एक आखिरी सवाल उस भीड़ से भी जो इन चारों नेताओं के बयानों पर तालियां और सीटियां बजा रही थी. आप एक बार अपने दिल पर हाथ रखकर सोचिए. जो कहा गया, उसे सही तरीके से लेने का कौनसा तरीका है. अगर तरीका नहीं है, तो फिर आपने ताली क्यों बजाई.
वीडियो- बीजेपी नेता राजगढ़ जिले की महिला अधिकारी पर लगातार आपत्तिजनक बयान दे रहे हैं
. वीडियो में नज़र आ रहा था कि डिप्टी कलेक्टर की चोटी खींची गई थी. बात बाहर आई तो हंगामा हुआ. दोनों पक्षों की आलोचना भी हुई. ये बात कही गई कि अफसरों को इस तरह हाथ नहीं चलाने चाहिए. कहा ये भी गया कि अफसरों के साथ बदतमीज़ी भी नहीं होनी चाहिए. होने को इतने पर बात खत्म हो जानी चाहिए थी. लेकिन नहीं हुई. भाजपा हमलावर बनी रही. कमल नाथ सरकार पर भी और स्थानीय प्रशासन पर भी. भाजपा की तैयारी थी कि अफसरों के खिलाफ FIR कराएगी. लेकिन FIR कराने के नाम पर जो हुआ, उसी की वजह से हम राजगढ़ पर फिर से बात कर रहे हैं. भाजपा के कद्दावर नेताओं ने ऐसे-ऐसे बयान दिए जिन्हें सुनकर किसी भी सभ्य नागरिक को आपत्ति होगी.
#WATCH
— ANI (@ANI) January 19, 2020
Madhya Pradesh: A protestor pulls hair of Rajgarh Deputy Collector Priya Verma, after she hits BJP workers and drags them. The clash broke out during a demonstration in support of #CAA
. pic.twitter.com/7ckpZaFBkJ
अपने 'मधुर स्वभाव' के लिए विख्यात शिवराज सिंह चौहान ने कहा,
''...और इनको क्या कहूं मैं? जड़ यहां नहीं है. जड़ तो दिल्ली में बैठी है. अब रावण तो लंका में बैठते थे. लेकिन मारीच, सुबाहु, ताड़का... ये सब अलग-अलग जगह तंग करते थे लोगों को. शूर्पणखा...''ये शिवराज सिंह चौहान थे. 13 साल तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री. संघ की परंपरा से आने वाले नेता. कहने को कांग्रेस नेताओं की तुलना राक्षसों से कर रहे थे. राजनैतिक मर्यादा की बात नहीं करेंगे. वो अब कहीं नहीं बची. वाजपेयी वाला सांचा टूट गया है. हमारा ध्यान गया दो नामों पर - ताड़का और शूर्पणखा. ये बताने का कोई तरीका नहीं है कि शिवराज ने ये दो नाम किसी कांग्रेस नेता के लिए इस्तेमाल किए या किसी सरकारी अधिकारी के लिए. लेकिन इतना कहा जा सकता है कि वो ये रूपक हवा में नहीं उछाल रहे थे. शिवराज को ये बताना चाहिए कि कौन ताड़का है. ताड़का के सुबाहू और मारीच कौन हैं. और शूर्पणखा कौन है. और फिर भारतीय जनता पार्टी को ये बताना चाहिए कि देश की औरतों के लिए इस तरह के रूपक उन्हें पसंद आते हैं या नहीं.
13 साल मध्यप्रदेश के सीएम रहे और खुद को एमपी का मामा बताने वाले शिवराज सिंह चौहान ने महिलाओं के लिए ताड़का और शूर्पणखा नामों का इस्तेमाल किया. फोटो- PTIअब एक दूसरे बयान पर चलते हैं.
''मैं तो सीधी कार्रवाई में विश्वास रखता हूं एकदम. आप लोगों को मालूम है कि नहीं? आप लोगों को मालूम है कि नहीं कि मैं संगीत का शौकीन हूं? मालूम है? किस-किस को मालूम है जरा बताओ. सबको मालूम है संगीत का एक सूत्र है जो जैसा गाए वैसे अपने को बजाना चाहिए. क्या सूत्र बताया मैंने? जो जैसा गाए वैसा हमको बजाना चाहिए राजगढ़ के लोग थोड़ा सा पिछड़ गए''ये कैलाश विजयवर्गीय थे. भाजपा के कद्दावर नेता. इतने कद्दावर कि शिवराज को सीएम रहते हुए इन्हें दिल्ली भेजना पड़ा था. आज ये बंगाल में पार्टी की कमान संभाले हुए हैं. इन्होंने अपनी बात मातृ शक्ति को प्रणाम करके शुरू की थी. हम कैलाश जी से पूछना चाहते हैं कि बजाने का मतलब क्या है. राजगढ़ के लोगों को क्या बजा लेना चाहिए था. क्या वो भीड़ को हिंसा के लिए उकसा रहे थे? एक बात तो विजयवर्गीय जी ने विशुद्ध रूप से गलत कही. निधि निवेदिता जेएनयू से पढ़ी ही नहीं हैं. वो मुंबई यूनिवर्सिटी की पढ़ी हैं. रही बात जेएनयू के वायरस की. तो सेना के अफसर भी जेएनयू से डिग्री लेते हैं. क्या उन सभी में ये वायरस है? क्या निर्मला सीतारमण और एस जयशंकर में भी ये वायरस है? एक यूनिवर्सिटी को बदनाम करके कौनसा चुनाव जीतना चाहते हैं विजयवर्गीय. ये उन्हें बताना चाहिए.
''मुझे पता लगा कि जेएनयू के वायरस यहां आ गए. ये वायरस यहां पर आ गए. मुझे जानकारी प्राप्त हुई कि यहां की जिलाधीश महोदया उस कॉलेज की पढ़ी हुई हैं. मैं चेतावनी देना चाहता हूं कि भारतीय जनता पार्टी का पसीना इतना सस्ता नहीं है. भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं का खून इतना सस्ता नहीं है. कमल नाथ जी, मैं चेतावनी देना चाहता हूं अगर इन अहंकारी अधिकारियों के खिलाफ आपने कार्रवाई नहीं की तो भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता आपके खिलाफ भी और आपके अधिकारियों के खिलाफ भी सीधी कार्रवाई करेगा. मैं चेतावनी देना चाहता हूं.''
कैलाश विजयवर्गीय की एक खासियत ये भी है कि वो पोहा खाने का तरीका देखकर पता लगा लेते हैं कि बंदा किस देश का है.अब तीसरे बयान पर चलते हैं.
''अरे मैडम संविधान के अंतर्गत तुम्हारी नियुक्ति हुई है UPSC से और दूसरी उनकी दूसरी जूनियर मैडम. वह भी बहुत गर्मी दिखा रही थी (भीड़ हंसती ताली बजाती है) उनकी भी जो नियुक्ति हुई है PSC से. मैं कहना चाहता हूं दोस्तों उसी संविधान के अंतर्गत जिस संविधान के लिए वो हमारे कार्यकर्ता उस संशोधन के लिए वहां पर औचित्य बताने को खड़े थे, उसी संविधान के अंतर्गत ये सारे के सारे पद उनके लिए मिले हैं. यदि भारत का संविधान नहीं होता तो तुम घर बैठे रोटी बना रही होती तुम घर में चूल्हा चौका कर रही होती ( भीड़ हंसती है ताली बजाती है)''ये गोपाल भार्गव हैं. मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष. उससे पहले 15 साल तक लगातार कैबिनेट मंत्री. जिस संविधान की चिंता भार्गव जी को है, उसी संविधान से मिली शक्तियों के तहत राजगढ़ प्रशासन ने धारा 144 लगाई थी. उसे तोड़कर प्रदर्शन करने में संविधान का कितना सम्मान हुआ. भाजपा लगातार केरल को संविधान की दुहाई दे रही है. उत्तर प्रदेश में हुई पुलिस की बर्बर कार्रवाई को संविधान सम्मत बता रही है. क्या मध्यप्रदेश भाजपा के नेता उस दुहाई में यकीन नहीं करते. क्या बाकी देश की भाजपा और मध्यप्रदेश भाजपा संविधान को लेकर अलग-अलग राय रखती है? अपनी पसंद का काम चुनना और उसे करना, ये संविधान में हक के तौर पर दिया गया है. भार्गव जी चाहें तो नोट कर सकते हैं - भारतीय संविधान का Article 19 (1) (g) कहता है कि कोई भी नागरिक अपनी पसंद का काम कर सकता है. चूल्हा चौका भी. और IAS भी. और ये हक है. इसे बयां करते हुए किसी तरह का दंभ आवाज़ में होना बताता है कि भार्गव संविधान को जानते नहीं. जानते हों, तो ठीक से समझते नहीं. हम सबके घर में मांओं ने चूल्हा चौका किया है. अगर ये अपमान की बात है. तो क्या भार्गव की बात को देश की सभी मांओं का अपमान मान लिया जाए? इसका जवाब गोपाल भार्गव को देना चाहिए.
राजगढ़ कलेक्टर निधि निवेदिता जिन्हें लेकर मध्यप्रदेश बीजेपी के नेता लगातार आपत्तिजनक बयान दे रहे हैं. फोटो- फेसबुकबयान अब भी खत्म नहीं हुए हैं. एक और बयान है. भाजपा नेता बद्रीलाल यादव का. इनका बयान इतना गलीज़ है कि हम यहां लिख भी नहीं सकते. वो बयान आपको राजगढ़ के लोग बता देंगे. हम बस यादव जी से ये पूछना चाहते हैं कि दूध पिलाने जैसी चीज़ को लेकर उनके दिमाग में ये सब आया कहां से. मां और बच्चे के बीच इस दुनिया में पहला संबंध ही दूध पिलाने से शुरू होता है. तो फिर ऐसी बातें उनके दिमाग में आईं कहां से. और आईं, तो क्या उनकी पार्टी भाजपा इन बातों का समर्थन करती है.
हम अपनी बात खत्म करें उससे पहले क्रोनोलॉजी भी समझ लीजिए. 19 जनवरी से पहले भाजपा ज़िले में CAA के समर्थन में दो रैलियां कर चुकी थी. ये तीसरी रैली थी जिसके लिए प्रशासन ने इजाज़त नहीं दी. और किसी को तिरंगा उठाने या वंदे मातरम कहने के लिए हिरासत में नहीं लिया गया. धारा 144 के उल्लंघन के लिए कार्रवाई हुई. चलते-चलते एक आखिरी सवाल उस भीड़ से भी जो इन चारों नेताओं के बयानों पर तालियां और सीटियां बजा रही थी. आप एक बार अपने दिल पर हाथ रखकर सोचिए. जो कहा गया, उसे सही तरीके से लेने का कौनसा तरीका है. अगर तरीका नहीं है, तो फिर आपने ताली क्यों बजाई.
वीडियो- बीजेपी नेता राजगढ़ जिले की महिला अधिकारी पर लगातार आपत्तिजनक बयान दे रहे हैं

