वो 6 चीजें जो प्रधानमंत्री मोदी को इज़रायल से भारत लानी चाहिए
इस छुटकू देश ने कई चीजों में अपनी अलग पहचान बनाई है.
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फोटो - thelallantop
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1947 के आस-पास हिंदुस्तान और इज़रायल लगभग साथ में दुनिया के नक्शे पर उभरे. कायदे से दोनों दोनों देशों को तुरंत दोस्त बन जाना चाहिए था. पर दोनों में इसको ले के हिचक बहुत थी. फिलिस्तीन के मुद्दे को लेकर. फिर 1992 में हिंदुस्तान ने इज़रायल की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा ही दिया. उस बात को 25 साल होने को हैं और इस मौके को यादगार बनाने के लिए भारत के इतिहास में पहली बार कोई प्रधानमंत्री आधिकारिक तौर पर इज़रायल जा रहा है. इज़रायल भी प्रधानमंत्री मोदी की आमद को लेकर गंभीर है और वहां का प्रेस कह रहा है कि जागो, दुनिया का सबसे खास प्रधानमंत्री आ रहा है. अब तक हिंदुस्तान और इज़रायल अगल-अलग क्षेत्रों में एक-दूसरे का साथ देते आए हैं. लेकिन अब ये संबंध गाढ़े होने जा रहे हैं.
चारों तरफ से दुश्मनों से घिरे इस छोटे से देश ने अपनी मेहनत से ऐसा बहुत कुछ हासिल किया है जो हमारे लिए मिसाल की तरह हैं. हमने उन चीज़ों की एक लिस्ट बनाई है जिनसे जुड़े सबक प्रधानमंत्री को अपने साथ वापस लाने चाहिए. पढ़िएः
#1. अपनी संस्कृति को सहेजना
हिंदुस्तान में भाषाओं की बड़ी विविधता रही है. 22 बड़ी भाषाएं हैं. बोलियां गिनें तो संख्या 1635 है. लेकिन यूनेस्को द्वारा जारी की गई ''एटलस ऑफ वर्ल्ड्स लैंग्वेजेज इन डेंजर ऑफ डिसअपियरिंग'' के मुताबिक इनमें से 196 लुप्त होने की कगार पर हैं. मतलब इन्हें बोलने वाले कम होते जा रहे हैं. इस मामले में हम दुनिया में सबसे बुरी स्थिति में हैं. भाषाएं सहेजना हम इज़रायल से सीख सकते हैं. 20 वीं सदी की शुरुआत में हिब्रू यहूदियों के धर्मग्रंथों में सिमट चुकी थी. वैसे ही जैसे आज हमारे यहां संस्कृत हिंदुओं के धर्मग्रंथों तक सीमित है. लेकिन जब यूरोप के अलग-अलग हिस्सों से यहूदी अपना नया मुल्क बसाने फिलिस्तीन आकर बसने लगे, तो पूरे देश को बांधने के लिए एक नई भाषा की ज़रूरत महसूस हुई.

प्राचीन हिब्रू में लिखा 'येरूशलम', 7 सदी ईपू (फोटोःरॉयटर्स)
और इस नए को यहूदियों ने पुराने में तलाशा. लोगों ने आपस में हिब्रू में बात करनी शुरू की. स्कूल खोले गए, जहां सिर्फ हिब्रू में पढ़ाई होती थी. इस तरह धीरे-धीरे हिब्रू का संस्कार लोगों में दोबारा पनपने लगा. इस पूरी कवायद के पीछे एक नाम बड़े अदब से लिया जाता है - एलिज़िर बेन-येदुदा. येदुदा ने आधुनिक हिब्रू डिक्शनरी बनाई थी. हिब्रू 2000 साल पुरानी भाषा है. तो उसमें आइसक्रीम जैसी चीज़ों के लिए शब्द नहीं थे. येदुदा ने इनके लिए भी शब्द तलाशे. आज इज़रायल की 3 बड़ी यूनिवर्सिटीज पूरी तरह से हीब्रू में पढ़ाई कराती हैं, वो भी इंजीनियरिंग जैसे विषयों की. इज़रायल की पढ़ाई का दुनिया लोहा मानती है.
#2. ठसक से खेती करना
हिंदुस्तानी 40 पीढ़ियों से खेती करते आ रहे हैं. हमारे यहां खेती के लिए अकूत संसाधन हैं. लेकिन उपज हो न हो, हमारा किसान आज भी बेहाल है. वहीं इज़रायल छोटा सा देश है, अपने यहां के मिज़ोरम के बराबर. उसमें से भी सिर्फ 20 फीसदी ज़मीन ऐसी है जिस पर खेती हो सकती है - सिर्फ 1 लाख 26 हज़ार एकड़ में. ऊपर से पानी की कमी है. बावजूद इसके इज़रायल खेती के मामले में दुनिया में सबसे अव्वल देशों में गिना जाता है. प्रकृति की चुनौतियों को इज़रायल ने तकनीक से जवाब दिया है. यहां खेती में इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी दुनिया में सबसे उन्नत है. इज़रायल में सिर्फ पौने चार फीसदी लोग खेती करते हैं लेकिन वो अपने देश की ज़रूरत का 95 फीसदी खाना उगा लेते हैं. साथ ही ढेर सारा माल एक्सपोर्ट भी करते हैं.

कुछ इलाकों को छोड़ भारत में खेती में इज़राइल जैसी कोई चुनौती नहीं है. इज़रायल के अनुभवों से हम काफी कुछ सीख सकते हैं, खासकर राजस्थान जैसे सूखे इलाकों में खेती के मामले में.
#3. स्टार्ट-अप कल्चर
भारत में इन दिनों सरकार लगातार स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देने की बात कर रही है. इस एक चीज़ में तो इज़रायल शर्तिया दुनिया का बॉस है. इज़रायल के टेक्नीशियन गूगल और सिस्को जैसी कंपनियों में नौकरियां ही नहीं करते हैं, बल्कि अपने वेंचर भी लॉन्च करते हैं. दुनिया के दूसरे सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नैसडैक (NASDAQ) पर जितनी इज़राइल की कंपनियां लिस्टेड हैं, उतनी उसके बाद के पांच देशों की मिला कर भी नहीं हैं.

हमें इज़रायल से दो सबक सीखने चाहिए - इज़रायल में 'इंटेलिजेंट फेलियर' की बात होती है. माने अगर आपसे पहलकदमी करते हुए गलती हो जाए तो आपका करियर खत्म नहीं माना जाता. तो आदमी बिना डरे रिस्क लेता है. इज़रायली लोग मल्टीटास्किंग में बड़ा विश्वास रखते हैं. एक आदमी एक ही समय में तरह-तरह की चीज़ें आज़मा कर देखता है.
#4. डायस्पोरा का इस्तेमाल
इज़रायल दुनिया भर से आकर बसे लोगों का देश है. तो दुनिया भर के में उनके सगे संबंधी रहते हैं. इस एक चीज़ का एक भी फायदा इज़रायल उठाने से कभी नहीं चूकता. वहां की सरकार जहां गुंजाइश हो, इज़रायल कनेक्शन ढूंढ लेता है और उसे अच्छी तरह भुनाता है. अमरीकी इंडस्ट्री और फिल्म बिज़नेस में यहूदियों की तगड़ी पकड़ है. लाज़मी तौर पर वे इज़रायल से सहानुभूति रखते हैं. तो अमरीकी इंडस्ट्री से इज़रायल को पूरी मदद मिलती है और हॉलिवुड के ज़रिए इज़रायल का नज़रिया दुनिया भर में गूंजता रहता है. ये ठीक वही काम है जो हम दुनिया भर में बसे भारतवंशियों के ज़रिए होते देखना चाहते हैं.

#5. डिफेंस
इज़रायल चारों तरफ से दुश्मन देशों से घिरा है. जॉर्डन, सीरिया, लेबनान और मिस्र के साथ-साथ सभी अरब देश अंदर ही अंदर इज़रायल खिलाफ रार पाले हुए हैं. सब के सब मिल कर इज़रायल पर हमले करते रहे हैं. इनके अलावा गाज़ा और वेस्ट बैंक से हमास और फतेह के उग्रवादी भी इज़रायल के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं. बावजूद इसके इज़रायल आंतरिक और बाहरी दोनों तरह से काफी सुरक्षित है. छोटी मोटी घटनाएं होती रहती हैं लेकिन लंबे समय से कोई बड़ा हमला बिरला ही होता है.
भारत इस मामले में इज़रायल से दो सबक सीख सकता है. पहला इज़रायल की तरह इंटेलिजेंस इकट्ठा करना और उस पर समय रहते अमल करना. दूसरा अपने पास मौजूद तकनीक का भरपूर इस्तेमाल. इज़रायल के आयरन डोम के चलते उसे होने वाला नुकसान हमेशा कम से कम रहता है. आयरन डोम एक मिसाइल डिफेंस टेक्नोलॉजी है.

#6. सोशल सिक्योरिटी और हेल्थ
इज़रायल की सरकार अपने नागरिकों का बड़ा ध्यान रखती है. यहां का सोशल सिक्योरिटी सिस्टम में एक शख्स की पढ़ाई से लेकर उन्हें काम देकर सेटल करने तक ध्यान रखा जाता है. कोई बीमार पड़े तो दुनिया का बेहतरीन हेल्थ केयर सिस्टम तुरंत हरकत में आ जाता है. यहां की एम्बुलेंस सर्विस 'द रेड स्टार ऑफ डेविड' आम इज़रायलियों के साथ-साथ उन सीरियन और अरब लड़ाकों में भी उतनी ही प्रसिद्ध है जो इज़रायल पर हमला करने आते हैं और फौज की कार्रवाई में घायल हो जाते हैं. भारत के सरकारी हेल्थकेयर सिस्टम को अभी बहुत आगे जाना है.
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#1. अपनी संस्कृति को सहेजना
हिंदुस्तान में भाषाओं की बड़ी विविधता रही है. 22 बड़ी भाषाएं हैं. बोलियां गिनें तो संख्या 1635 है. लेकिन यूनेस्को द्वारा जारी की गई ''एटलस ऑफ वर्ल्ड्स लैंग्वेजेज इन डेंजर ऑफ डिसअपियरिंग'' के मुताबिक इनमें से 196 लुप्त होने की कगार पर हैं. मतलब इन्हें बोलने वाले कम होते जा रहे हैं. इस मामले में हम दुनिया में सबसे बुरी स्थिति में हैं. भाषाएं सहेजना हम इज़रायल से सीख सकते हैं. 20 वीं सदी की शुरुआत में हिब्रू यहूदियों के धर्मग्रंथों में सिमट चुकी थी. वैसे ही जैसे आज हमारे यहां संस्कृत हिंदुओं के धर्मग्रंथों तक सीमित है. लेकिन जब यूरोप के अलग-अलग हिस्सों से यहूदी अपना नया मुल्क बसाने फिलिस्तीन आकर बसने लगे, तो पूरे देश को बांधने के लिए एक नई भाषा की ज़रूरत महसूस हुई.

प्राचीन हिब्रू में लिखा 'येरूशलम', 7 सदी ईपू (फोटोःरॉयटर्स)
और इस नए को यहूदियों ने पुराने में तलाशा. लोगों ने आपस में हिब्रू में बात करनी शुरू की. स्कूल खोले गए, जहां सिर्फ हिब्रू में पढ़ाई होती थी. इस तरह धीरे-धीरे हिब्रू का संस्कार लोगों में दोबारा पनपने लगा. इस पूरी कवायद के पीछे एक नाम बड़े अदब से लिया जाता है - एलिज़िर बेन-येदुदा. येदुदा ने आधुनिक हिब्रू डिक्शनरी बनाई थी. हिब्रू 2000 साल पुरानी भाषा है. तो उसमें आइसक्रीम जैसी चीज़ों के लिए शब्द नहीं थे. येदुदा ने इनके लिए भी शब्द तलाशे. आज इज़रायल की 3 बड़ी यूनिवर्सिटीज पूरी तरह से हीब्रू में पढ़ाई कराती हैं, वो भी इंजीनियरिंग जैसे विषयों की. इज़रायल की पढ़ाई का दुनिया लोहा मानती है.
#2. ठसक से खेती करना
हिंदुस्तानी 40 पीढ़ियों से खेती करते आ रहे हैं. हमारे यहां खेती के लिए अकूत संसाधन हैं. लेकिन उपज हो न हो, हमारा किसान आज भी बेहाल है. वहीं इज़रायल छोटा सा देश है, अपने यहां के मिज़ोरम के बराबर. उसमें से भी सिर्फ 20 फीसदी ज़मीन ऐसी है जिस पर खेती हो सकती है - सिर्फ 1 लाख 26 हज़ार एकड़ में. ऊपर से पानी की कमी है. बावजूद इसके इज़रायल खेती के मामले में दुनिया में सबसे अव्वल देशों में गिना जाता है. प्रकृति की चुनौतियों को इज़रायल ने तकनीक से जवाब दिया है. यहां खेती में इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी दुनिया में सबसे उन्नत है. इज़रायल में सिर्फ पौने चार फीसदी लोग खेती करते हैं लेकिन वो अपने देश की ज़रूरत का 95 फीसदी खाना उगा लेते हैं. साथ ही ढेर सारा माल एक्सपोर्ट भी करते हैं.

कुछ इलाकों को छोड़ भारत में खेती में इज़राइल जैसी कोई चुनौती नहीं है. इज़रायल के अनुभवों से हम काफी कुछ सीख सकते हैं, खासकर राजस्थान जैसे सूखे इलाकों में खेती के मामले में.
#3. स्टार्ट-अप कल्चर
भारत में इन दिनों सरकार लगातार स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देने की बात कर रही है. इस एक चीज़ में तो इज़रायल शर्तिया दुनिया का बॉस है. इज़रायल के टेक्नीशियन गूगल और सिस्को जैसी कंपनियों में नौकरियां ही नहीं करते हैं, बल्कि अपने वेंचर भी लॉन्च करते हैं. दुनिया के दूसरे सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नैसडैक (NASDAQ) पर जितनी इज़राइल की कंपनियां लिस्टेड हैं, उतनी उसके बाद के पांच देशों की मिला कर भी नहीं हैं.

हमें इज़रायल से दो सबक सीखने चाहिए - इज़रायल में 'इंटेलिजेंट फेलियर' की बात होती है. माने अगर आपसे पहलकदमी करते हुए गलती हो जाए तो आपका करियर खत्म नहीं माना जाता. तो आदमी बिना डरे रिस्क लेता है. इज़रायली लोग मल्टीटास्किंग में बड़ा विश्वास रखते हैं. एक आदमी एक ही समय में तरह-तरह की चीज़ें आज़मा कर देखता है.
#4. डायस्पोरा का इस्तेमाल
इज़रायल दुनिया भर से आकर बसे लोगों का देश है. तो दुनिया भर के में उनके सगे संबंधी रहते हैं. इस एक चीज़ का एक भी फायदा इज़रायल उठाने से कभी नहीं चूकता. वहां की सरकार जहां गुंजाइश हो, इज़रायल कनेक्शन ढूंढ लेता है और उसे अच्छी तरह भुनाता है. अमरीकी इंडस्ट्री और फिल्म बिज़नेस में यहूदियों की तगड़ी पकड़ है. लाज़मी तौर पर वे इज़रायल से सहानुभूति रखते हैं. तो अमरीकी इंडस्ट्री से इज़रायल को पूरी मदद मिलती है और हॉलिवुड के ज़रिए इज़रायल का नज़रिया दुनिया भर में गूंजता रहता है. ये ठीक वही काम है जो हम दुनिया भर में बसे भारतवंशियों के ज़रिए होते देखना चाहते हैं.

#5. डिफेंस
इज़रायल चारों तरफ से दुश्मन देशों से घिरा है. जॉर्डन, सीरिया, लेबनान और मिस्र के साथ-साथ सभी अरब देश अंदर ही अंदर इज़रायल खिलाफ रार पाले हुए हैं. सब के सब मिल कर इज़रायल पर हमले करते रहे हैं. इनके अलावा गाज़ा और वेस्ट बैंक से हमास और फतेह के उग्रवादी भी इज़रायल के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं. बावजूद इसके इज़रायल आंतरिक और बाहरी दोनों तरह से काफी सुरक्षित है. छोटी मोटी घटनाएं होती रहती हैं लेकिन लंबे समय से कोई बड़ा हमला बिरला ही होता है.
भारत इस मामले में इज़रायल से दो सबक सीख सकता है. पहला इज़रायल की तरह इंटेलिजेंस इकट्ठा करना और उस पर समय रहते अमल करना. दूसरा अपने पास मौजूद तकनीक का भरपूर इस्तेमाल. इज़रायल के आयरन डोम के चलते उसे होने वाला नुकसान हमेशा कम से कम रहता है. आयरन डोम एक मिसाइल डिफेंस टेक्नोलॉजी है.

#6. सोशल सिक्योरिटी और हेल्थ
इज़रायल की सरकार अपने नागरिकों का बड़ा ध्यान रखती है. यहां का सोशल सिक्योरिटी सिस्टम में एक शख्स की पढ़ाई से लेकर उन्हें काम देकर सेटल करने तक ध्यान रखा जाता है. कोई बीमार पड़े तो दुनिया का बेहतरीन हेल्थ केयर सिस्टम तुरंत हरकत में आ जाता है. यहां की एम्बुलेंस सर्विस 'द रेड स्टार ऑफ डेविड' आम इज़रायलियों के साथ-साथ उन सीरियन और अरब लड़ाकों में भी उतनी ही प्रसिद्ध है जो इज़रायल पर हमला करने आते हैं और फौज की कार्रवाई में घायल हो जाते हैं. भारत के सरकारी हेल्थकेयर सिस्टम को अभी बहुत आगे जाना है.
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