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फेडरर-नडाल रास्ता दो, कि जोकोविच आते हैं

फ्रेंच अोपन की यह जीत साबित करती है कि विश्व नम्बर एक नोवाक जोकोविच टेनिस के 'तीसरे' नहीं, पहले खिलाड़ी हैं

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मियां मिहिर
6 जून 2016 (Updated: 6 जून 2016, 05:07 PM IST)
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"ये बहुत खास पल है. शायद मेरे पूरे करियर का सबसे बड़ा. शुक्रिया (दर्शकों से मुखातिब होकर). आखिर सूरज निकल रहा है. 10 बरसात भरे दिनों के बाद सूरज को देखना अच्छा लगता है ऐसा मैंने कभी महसूस नहीं किया था, मेरे लिए सबसे ज़रूरी बात यही है मैंने गूगा (गुस्ताव कुएर्टन) की तरह कोर्ट पर दिल बना दिया. ये मेरा दिल है, जो मैं चाहनेवालों को भेज रहा हूं."नोवाक जोकोविच, 5 जून, 2016



वे दो थे. रोज़र फेडरर सबका चहेता चैम्पियन था. पारिवारिक, सरल, प्रतिद्वंद्वी की इज़्ज़त करनेवाला. खेल में शहद सी तरलता रखनेवाला. राम की तरह का आदर्श नायक. जो विश्व का सबसे महान टेनिस प्लेयर बनना अपनी किस्मत में लिखवाकर लाया था. विश्व का सबसे सौम्य टेनिस प्लेयर. सबसे कमाल भी. किसी वटवृक्ष सी घनघोर गहराई अपने भीतर समाए.

अौर सामने खड़ा था दूसरा खिलाड़ी. चैंलेजर. अंडरडॉग. रफेल नडाल. खेल के शहंशाह के ताज को चुनौती देनेवाला युवा राजकुमार. उसके खेल में किसी अफ्रीकी देश के चैम्पियन मैराथन धावक सी खुद्दारी दिखाई देती थी. किसी ग्रीक त्रासदी का नायक हो जैसे. अपनी किस्मत में अंतिम बाधा पर रथ का पहिया टूटना लिखवाकर लाया था. युवा, बेचैन, लेकिन उतना ही गजब का प्रतिभाशाली.


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इन दोनों के बीच टेनिस की दुनिया बंटी थी. नई सदी में फेडरर का साम्राज्य था, अौर नडाल वो चुनौती था, जिसे उन्हें खुद को साबित करने के लिए हर बार जीतना था. इन्हीं दोनों खिलाड़ियों के बीच चारों ग्रैंड स्लैम बंटे थे. तीन फेडरर की ज़मीन थे, तो फ्रैंच अोपन की लाल बालू नडाल का होम ग्राउंड थी. टेनिस की दुनिया की हर चर्चा इन्हीं दोनों खिलाड़ियों के प्रतिद्वंद्विता में सिमट गई थी. इसे खेल में देखी गई आज तक की सबसे चमत्कारी प्रतिद्वंद्विता कहा गया. दोनों एक-दूसरे के खेल को मिथकों की उंचाइयों तक लेकर जाने वाला मुकाबला करते थे. इसकी चकाचौंध ऐसी थी कि किसी अन्य खिलाड़ी का नज़र भी आना मुश्किल था.


लेकिन इसके बीच ही एक लड़का अौर उभर रहा था.

इस ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्विता के किनारे खड़ा वो अपनी बारी का इंतज़ार कर रहा था. नाम − नोवाक जोकोविच.

दो ध्रुवों में बंटी इस टेनिस की दुनिया में नोवाक ने धीरे-धीरे, लेकिन मज़बूती के साथ टेनिस की दुनिया में अपनी जगह बनाई. 2005 में ग्रैंड स्लैम टेनिस करियर शुरू करनेवाले जोकोविच 2008 में अॉस्ट्रेलियन अोपन पहली बार जीतने के समय विश्व नम्बर तीन थे. लेकिन उनकी यह पहली खिताबी विजय एक अौर वजह से याद की जाती है टेनिस की दुनिया में. 2008 का यह फाइनल तीन साल में पहला ऐसा फाइनल था, जिसे जीतनेवाला फेडरर अौर नडाल में से कोई एक नाम नहीं था. ये अॉस्ट्रेलियन अोपन युग संक्रमण की पहली निशानी था.

एक अौर चीज़ इसके अलावा मैच में खास थी. फ्रेंच खिलाड़ी सोंगा के खिलाफ़ यह फाइनल खेलते हुए मेलबर्न के मैदान में जनता लगातार बीस साला युवा नोवाक के खिलाफ़ हूटिंग कर रही थी. यह अलग था, क्योंकि परंपरा तो यही रही है खेलों की, कि नए खिलाड़ी को आम तौर पर पक्षहीन जनता का सपोर्ट मिलता है. इसकी वजह यहां ये बताई गई कि शायद नोवाक ने सेमीफाइनल में जनता के चहेते रोज़र फेडरर को हरा दिया है, अौर इसी वजह से दर्शक अपने चहेते फेडरर को एक अौर टाइटल जीतते देखने से वंचित रह गए है. वही बदला फाइनल में जनता नोवाक के खिलाफ़ निकाल रही है.


लेकिन वो मैच नज़ीर बन गया नोवाक जोकोविच के करियर की. जनता का एकछत्र प्यार नोवाक को कभी नसीब नहीं हुआ. वे विश्वविजेता तो बने, लेकिन किसी चहेते चैम्पियन की तरह चाहनेवालों के दिलों में जगह नहीं बना पाए.

वैसे अगर शुद्ध खेल की अौर नतीजों की बात करें तो 2008 के उस पहले फाइनल की जीत से आज तक, नोवाक के टेनिस में आगे बढ़ने की राह पगडण्डी से पक्की सड़क अौर सड़क से राजमार्ग में बदलती गई है. आज उनके नाम 12 ग्रैंड स्लैम खिताब हैं अौर उन्हें वर्तमान टेनिस का सबसे महान खिलाड़ी कहनेवालों की संख्या लगातार बढ़ रही है. लेकिन इसके बावजूद, उन्हें चाहनेवालों का वैसा कल्ट अभी तक उभरकर सामने नहीं आया है, जैसा फेडरर अौर काफ़ी हद तक नडाल के केस में है.

इसकी वजह की तलाश करते हुए आलोचक उनके शुरुआती करियर के 'घमंडी' व्यवहार को दोष देते हैं, तो कई इसकी वजह उनके खेल में 'कलात्मकता' की कमी को बताते हैं. वैसे आप नोवाक जोकोविच के प्रदर्शनकारी व्यक्तित्व को देखें तो उनका जनता का सबसे चहेता ना बनना भी एक रहस्य ही है. 


नोवाक मुखर हैं. मैदान पर अौर मैदान से बाहर शायद सबसे मनोरंजक खिलाड़ी. प्रदर्शनी मैचों में दर्शकों के मनोरंजन के लिए उनके द्वारा उतारी गई दूसरे खिलाड़ियों की नकल उनके खिलंदड़ स्वभाव की निशानी है. इसके अलावा वे एक शानदार खिलाड़ी भी हैं. संभवत: वर्तमान टेनिस जगत में मौजूद सबसे फ्लेक्सिबल बॉडी के मालिक, अौर उसके साथ चालाक दिमाग़, जो मिलकर एक डेडली कॉम्बिनेशन है. मशहूर कोच निक बोलेटिरी ने उन्हें पर्फेक्ट 'मशीन' बताते हुए शरीर की तुलना एफ़-18 लड़ाकू विमान से की. मारक, सटीक गति.

फिर भी वे जनता के चहेते क्यों ना बने? इसकी असली वजह कहीं अौर, दो अन्य नामों अौर उनकी नामी प्रतिद्वंद्विता में छिपी है.

दरअसल बीते दशक में नोवाक के खिलाफ सिर्फ़ दो महान खिलाड़ी नहीं खड़े रहे हैं. उनके खिलाफ टेनिस को चाहनेवालों की सालों में कमाई आदत अौर नॉस्टेल्जिया रहा है. फेडरर अौर नडाल के प्रति जनता का प्रेम कुछ कुछ वैसा ही है, जैसे हम क्रिकेट प्रेमी देश के लोग द्रविड़, गांगुली, लक्ष्मण अौर सचिन की बल्लेबाज़ी के दिनों को याद करते हैं. यह उन वक्तों के प्रति प्रेम ज़्यादा है, जो शायद आज के मुकाबले ज़्यादा सरल था, सीधा लगता था. टेनिस के चाहनेवालों को रोज़र फेडरर अौर रफेल नडाल की अद्वितीय प्रतिद्वंद्विता की आदत पड़ चुकी थी, अौर वो इसे छोड़ना नहीं चाहते थे. रोज़र फेडरर अौर रफेल नडाल जैसे खुद में छप्पन भोग की थाली थे, जिसमें भोजन के तमाम स्वाद सम्मिलित थे. वे दोनों एक-दूसरे के ऐसे स्वाभाविक पूरक थे, कि उनके बीच किसी अन्य की ज़रूरत या जगह की कल्पना भी नहीं संभव थी.


लेकिन फिर, वो खेल ही क्या जिसमें असंभव की कल्पना ना हो.

नोवाक इस स्वर्गिक जोड़ी के मध्य आए अौर अपनी पहचान स्थापित की. उन्होंने अपने बेदाग़ खेल के दम पर वो उपलब्धियां हासिल की हैं, जो आज फेडरर अौर नडाल के नाम पर भी नहीं हैं. लेकिन तमाम कीर्तिमानों के बाद भी एक चीज़ उन्हें नहीं हासिल हुई. दर्शकों का वैसा एकछत्र प्यार जैसा नोवाक के इन दोनों समकालीनों को मिला है.


इस प्यार को हासिल करने के लिए नोवाक ने सब कुछ किया. बीते 4-5 सालों में नोवाक के व्यक्तित्व में आया परिवर्तन भारतीय क्रिकेट कप्तान विराट कोहली के ट्रांसफर्मेशन की याद दिलाता है. उन्होंने आक्रामकता के साथ स्थिरता को धारण किया है. इस साल फ्रैंच अोपन में वे गेंद उठानेवाले बच्चों के साथ जिस प्यार से मस्ती करते देखे गए, उनकी कोशिश साफ़ नज़र आ रही थी.

Image : REUTERS
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एक सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी जनता से अपने हिस्से का प्यार मांग रहा था.

अौर फिर वो मौका आता है.

जून 5, 2016. रोलैंड गैरोस, पेरिस. नोवाक काली धारियों वाली गहरे लाल रंग की टीशर्ट पहनकर  मैदान में थे. लाल बजरी पर लाल खिलाड़ी. चौथे सेट में 5-4 पर नोवाक सर्व कर रहे थे. अंतिम पॉइंट पर रैली लम्बी चली, लेकिन जब मरे का रिटर्न बैकहैंड नेट में फंसा तो नोवाक वहीं लाल बजरी पर गिर गए. नारंगी लाल पर सुर्ख लाल. फिर उन्होंने कुछ ऐसा किया जो ब्राज़ीलियन खिलाड़ी गुस्ताव कुएर्टन के 2001 में फ्रेंच अोपन जीतने के बाद वाले सेलेब्रेशन की याद दिलाता था. नोवाक ने बाद में बताया भी, कि उन्होंने गुस्ताव से पहले ही इसकी इजाज़त ली थी.


नोवाक ने अपना रैकेट उठाया अौर बजरी पर दिल की आकृति बना दी, अौर खुद उसके भीतर समा गए.

नोवाक के करियर का यह बारहवां ग्रैंड स्लैम था. महानता की अोर अग्रसर खिलाड़ी के करियर में आने वाला एक अौर पड़ाव. उनकी फॉर्म का अन्दाज़ा आप सिर्फ़ इस तथ्य से लगा सकते हैं कि पिछले साल यहीं लाल बजरी पर वावारिंका से हारने के बाद से नोवाक लगातार 28 ग्रैंड स्लैम मैच जीत चुके हैं. इसमें 2015 का विम्बलडन, यूएस अोपन अौर 2016 का अॉस्ट्रेलियन अोपन खिताब शामिल हैं. अौर अब फ्रैंच अोपन.


Image : Reuters
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इस जीत के साथ उन्होंने टेनिस में कैसा 'भूतो ना भविष्यति' रिकॉर्ड कायम किया है, यह इससे जानें कि पेरिस के फिलिप चैट्रियर कोर्ट की दर्शकदीर्घा में बैठा पचास साल से कम उम्र का हर दर्शक मैदान पर यह कारनामा होता पहली बार देख रहा था. 1969 के बाद यह पहला मौका है कि चारों ग्रैंडस्लैम खिताब एक ही खिलाड़ी के हाथ में हैं. ऐसा चमत्कार जो उनके मुकाबले खड़े रोज़र फेडरर अौर रफेल नडाल भी कभी नहीं कर पाए. उनके खिलाफ़ खेल रहे एंडी मरे ने मैच के बाद कहा, 'यह टेनिस के सबसे दुर्लभ क्षणों में से एक है. इतना कि इसे दोबारा होने में बहुत लम्बा समय लगने वाला है.'


लेकिन यह सब कुछ नोवाक के लिए उस पल के सामने छोटा था. वो पल, जब रोलैंड गैरोस पर पहली बार एक स्वर में दर्शकदीर्घा उनका नाम पुकार रही थी 'नो-ले!' नो-ले!'

नोवाक ने जो दिल मैदान पर उकेरा, वो उन्हें उसी शाम मिला था. पहली बार मिला था, अौर बिना किसी शर्त के मिला था. पहली बार दर्शकों ने उन्हें बिना किसी 'if' या 'but' के स्वीकार किया है. नोवाक के लिए यह भले ही बारहवां ग्रैंड स्लैम खिताब हो, यह 'एकनिष्ठ दिल' उन्हें चाहनेवालों ने पहली बार दिया है. यही है जो इस मौके को उनके लिए, अौर समूचे टेनिस के लिए भी सबसे खास बनाता है. आज टेनिस को प्यार करनेवालों की किताब में उनका नाम फेडरर अौर नडाल के बाद नहीं, उनसे पहले है.


कह सकते हैं कि ग्यारह साल, 20 ग्रैंड स्लैम फाइनल, 12 ग्रैंड स्लैम खिताबों अौर 200 से ज़्यादा हफ़्ते नम्बर 1 पर बने रहने के बाद आखिरकार, नोवाक जोकोविच का सूरज वाकई बादलों से बाहर आ गया है.

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