गद्दाफ़ी की बेटी पैसे क्यों बांट रही है?
ऐसे स्कैम वाले मेसेज आने पर क्या करें?

बहुत सारा पैसा चाहिए? कितना?
ढाई लाख. ढाई करोड़. ढाई अरब.
इतना पैसा चाहिए तो एक मेसेज पढ़िए.
हम समझेंगे,
- गद्दाफ़ी की बेटी इतने पैसे बांट क्यों रही है?
- और, इस तरह के मेल्स के पीछे का सच क्या होता है?
कुछ दिनों पहले ही ये मेल हमारे इनबॉक्स में आया था. पहले-पहल तो इसपर हमारा ध्यान नहीं गया. लेकिन फिर हमने सोचा, इसके बारे में आपको बताया जाए. ताकि आप सतर्क और सावधान रहें.
पूरा मेल 359 शब्दों का है. अंग्रेज़ी में है. हम हिंदी में उसके मुख्य बिंदु बता देते हैं. ये भी इसमें तथ्य क्या हैं और भरम क्या?
- मेल की शुरुआत में परिचय लिखा है,
मैं लीबिया के युद्धरत राष्ट्रपति मुअम्मार गद्दाफ़ी की इकलौती बेटी आएशा मुअम्मार गद्दाफ़ी हूं.
> ये पॉइंट कई स्तरों पर भ्रामक है.
ये सच है कि मुअम्मार गद्दाफ़ी लीबिया का राष्ट्रपति था. लेकिन ये ग़लत है कि वो अभी युद्ध से जूझ रहे हैं. मुअम्मार गद्दाफ़ी की मौत हो चुकी है. अक्टूबर 2011 में नाटो के हवाई हमले के बाद उसको अपना महल छोड़कर भागना पड़ा था. वो सिर्ते में रेगिस्तान के पास एक पाइप में छिपकर बैठ गया था. तब विद्रोहियों ने उसे पीट-पीटकर मार दिया था.
मुअम्मार गद्दाफ़ी की एक सगी बेटी है. उसका नाम आएशा गद्दाफ़ी है. गद्दाफ़ी की एक मुंहबोली बेटी भी है. नाम है, हना. 1986 में वेस्ट जर्मनी के एक क्लब पर बम हमला हुआ था. इसमें कई अमेरिकी सैनिक घायल हुए थे. इसमें लीबिया की भूमिका सामने आई. उस समय गद्दाफ़ी लीबिया का राष्ट्रपति था. तब अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के आदेश पर एयरफ़ोर्स, नेवी और मरीन कोर ने गद्दाफ़ी के ठिकानों पर हमले किए. गद्दाफ़ी का दावा है कि इस हमले में उसकी मुंहबोली बेटी हना मारी गई. लेकिन कई बरस बाद एक वीडियो बाहर आई. इसमें हना को गद्दाफ़ी के दूसरे बच्चों के साथ खेलते देखा गया. 2011 में गद्दाफ़ी की मौत के बाद उसके कई सीक्रेट दस्तावेज सामने आए. इनमें से एक हना से भी जुड़ा हुआ था. पता चला कि हना ने डॉक्टरी की पढ़ाई की और लंबे समय तक त्रिपोली मेडिकल सेंटर में काम भी किया.
- अब अगले पॉइंट की तरफ़ चलते हैं.
आगे लिखा है.
ये मेल आपको आश्चर्यजनक लग सकता है क्योंकि आप मुझे नहीं जानते. लेकिन मैं अकारण ही बुर्किना फासो के वाल्गादुगू में एक रेफ़्यूजी कैंप में फंसी हुई हूं. इसी वजह से मैंने आपको कॉन्टैक्ट करने का फ़ैसला किया.
ये फ़ैक्ट है कि वाल्गादुगू बुर्किना फ़ासो की राजधानी है.
लेकिन इस बात का कोई सबूत नहीं मिलता कि आएशा वहां के रेफ़्यूजी कैंप में फंसी हुई है. जब 2011 में लीबिया में क्रांति शुरू हुई, तब गद्दाफ़ी परिवार जान बचाने के लिए इधर-उधर भटक रहा था. इस दौरान आएशा उसके साथ ही थी. जब गद्दाफ़ी को महसूस हुआ कि उसका बचना मुश्किल है, तब उसने आएशा को अल्जीरिया जाने की सलाह दी. अल्जीरिया सरकार ने आएशा, उसकी मां और उसके एक भाई को अपने यहां शरण दी. अल्जीरिया पहुंचने के तीन दिनों के बाद आएशा ने एक बच्चे को जन्म दिया. वो वहां रेफ़्यूजी के तौर पर रहने लगीं. कुछ समय बाद उसने टीवी चैनलों पर राजनैतिक बयान देने शुरू किए. उसने अपने पिता के समर्थकों को लीबिया की अस्थायी सरकार के ख़िलाफ़ प्रोटेस्ट करने के लिए उकसाया. बात तब बिगड़ गई, जब आएशा पर आरोप लगा कि उसने अल्जीरिया के राष्ट्रपति की फ़ोटो जलाई है.
इसके बाद अल्जीरिया सरकार ने आएशा को देश छोड़कर जाने के लिए कह दिया. आएशा ने इराक़ समेत कई अरब देशों से शरण की गुहार लगाई. लेकिन सबने इनकार कर दिया. बस ओमान ने हामी भरी. द टेलीग्राफ़ की रिपोर्ट के अनुसार, आएशा ने अक्टूबर 2012 में ओमान चली गईं. 2016 में आएशा के परिवार को लीबिया लौटने की इजाज़त दी गई. लेकिन जब वे वहां गए तो उन्हें वापस लौटने के लिए कहा गया. अप्रैल 2021 में यूरोपियन यूनियन ने आएशा गद्दाफ़ी को प्रतिबंधित लोगों की लिस्ट से हटा दिया. मीडिया रपटों के मुताबिक, आएशा अभी भी ओमान की राजधानी मस्कट में ही रह रही है. उन्हें वहां राजनैतिक शरण मिली हुई है.
इसलिए, मेल में लिखा ये दावा सरासर ग़लत है कि आएशा गद्दाफ़ी बुर्किना फ़ासो के किसी रेफ़्यूजी कैंप में फंसी हुई है.
- अगला दावा.मेरे पिता ने लगभग 250 करोड़ रुपये की रकम बुर्किना फ़ासो के एक बैंक में जमा कराई थी. उन्होंने इस पैसों के वारिस के तौर पर मेरा नाम लिखवाया था.
बुर्किना फ़ासो से मुअम्मार गद्दाफ़ी का पुराना कनेक्शन रहा है. बुर्किना फासो की सैन्य सरकार को लीबिया ने हमेशा मदद की. अगस्त 2011 में बुर्किना फ़ासो की सरकार ने गद्दाफ़ी परिवार को अपने यहां शरण देने का ऑफ़र दिया था. लेकिन हमें इस बात का कोई सबूत नहीं मिला कि मुअम्मार गद्दाफ़ी ने बुर्किना फ़ासो के बैंक में 250 करोड़ रुपये जमा किए हों.
कुल जमा बात ये कि पूरा मेल झूठे दावों पर बुना हुआ है.
फ़ैक्ट्स क्या हैं?- मुअम्मार गद्दाफ़ी की अक्टूबर 2011 में मौत हो चुकी है.
- गद्दाफ़ी की बेटी बुर्किना फ़ासो के किसी कैंप में नहीं, बल्कि ओमान की राजधानी मस्कट में रह रही है. उसके चार बच्चे हुए. इनमें से दो की मौत लड़ाई के दौरान ही हो गई थी.
- बुर्किना फ़ासो के बैंक में 250 करोड़ रुपये जमा होने के सबूत भी नहीं मिलते.
ये स्कैम आज से नहीं, बल्कि पिछले 11 बरस से चल रहा है. उससे भी पहले सद्दाम हुसैन की बेटी से जुड़े मेल आते रहते थे. इसमें लिखा होता था कि सद्दाम की बेटी आपसे अपने पैसे शेयर करना चाहती है. इस तरह के कई मेल्स आए दिन आपके मेलबॉक्स में आते होंगे. अगर आपके पास भी इस टाइप का कोई मेल आया है तो आज का शो आपके लिए ही है. पहली बात, इस तरह का ऑफ़र पाने वाले आप इकलौते इंसान नहीं हैं. ये खेल लंबे समय से चल रहा है. दुनिया के कई देशों में इसका दूसरी बात, कभी इस तरह का मेल आए तो पहली फुरसत में डिलीट फरमा दें. वरना आप किसी बड़े जाल में फंस सकते हैं.
- अगर आपने अपना बैंक अकाउंट शेयर किया तो हो सकता है कि आपकी डिटेल्स चुराई जा सकती है. हो सकता है कि स्कैमर्स आपका अकाउंट खाली कर दें.
- आपकी निजी पहचान चुराई जा सकती है. इसका ग़लत इस्तेमाल हो सकता है.
इससे बचने के लिए ज़रूरी है कि आप इस तरह के फ़र्ज़ी मेल्स पर कतई ध्यान ना दें. अगर ध्यान देने का मन करे तो पहले तथ्यों की पुष्टि करें. इंटरनेट पर थोड़ा सा सर्च करके आप जालसाजी का शिकार होने से बच सकते हैं.
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