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नए संसद का उद्घाटन राष्ट्रपति से कराने के लिए संविधान के जिन अनुच्छेदों की बात हुई, वे क्या कहते हैं?

बीजेपी और कांग्रेस दोनों एक-दूसरे को संविधान पढ़ने की नसीहत दे रहे हैं.

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New Parliament building inauguration row
नए संसद भवन के उद्घाटन पर मचा है बवाल. (फोटो- आजतक)
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शिवेंद्र गौरव
24 मई 2023 (Updated: 24 मई 2023, 07:45 PM IST)
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार, 28 मई को नए संसद (New Parliament Building Inauguration) का उद्घाटन करने वाले हैं. लेकिन उससे पहले ही कांग्रेस समेत ज्यादातर विपक्षी दलों ने इस उद्घाटन कार्यक्रम का बहिष्कार करने का फैसला लिया है. उनका कहना है कि संविधान के नियमों के मुताबिक राष्ट्रपति संसद का अहम हिस्सा हैं, इसलिए मौजूदा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से नए संसद भवन का उद्घाटन करवाया जाना चाहिए. विपक्षी दलों का कहना है कि राष्ट्रपति को उद्घाटन समारोह से दूर रखना उनका अपमान है. 

उनकी इस आपत्ति पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की प्रतिक्रिया आई. उन्होंने दलील दी कि राष्ट्रपति संसद के किसी भी सदन के सदस्य नहीं होते हैं, लिहाजा नए संसद भवन के उद्घाटन को लेकर कांग्रेस बेमतलब बवाल खड़ा कर रही है. इस पर कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने हरदीप पुरी को संविधान पढ़ने की नसीहत दे डाली. मल्लिकार्जुन खरगे, शशि थरूर और मनीष तिवारी जैसे अनुभवी नेताओं ने संविधान और उसके अनुच्छेदों का हवाला देकर कहा कि उद्घाटन राष्ट्रपति से कराया जाना चाहिए. हालांकि इस पर पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संविधान के अनुच्छेदों का गलत तरीके से उल्लेख किया जा रहा है.

तो जानेंगे कि संविधान के ये अनुच्छेद कौन से हैं और कांग्रेस के नेताओं ने इनका उल्लेख करते हुए क्या कहा है?

कांग्रेस की तरफ से किसने क्या कहा?

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 22 मई को ट्वीट करके कहा कि ऐसा लगता है कि मोदी सरकार ने सिर्फ चुनावी वजहों से दलित और आदिवासी समुदाय से भारत के राष्ट्रपति चुने हैं. उन्होंने लिखा,

“संसद देश की सर्वोच्च विधायी संस्था है और भारत का राष्ट्रपति इसका सबसे बड़ा संवैधानिक पद है. राष्ट्रपति अकेले ही सरकार, विपक्ष और देश के हर नागरिक का समान रूप से प्रतिनिधित्व करती हैं. वो देश की पहली नागरिक हैं.”

खरगे के इस ट्वीट को शशि थरूर ने शेयर किया और संविधान के आर्टिकल 60 और 111 का हवाला देते हुए पार्टी अध्यक्ष के बयान का समर्थन किया. उन्होंने लिखा,

“हां, खरगे जी सही कह रहे हैं. संविधान के अनुच्छेद 60 और 111 से ये स्पष्ट होता है कि राष्ट्रपति संसद का मुखिया होता है. ये विचित्र है कि जब संसद भवन बनना शुरू हुआ तो शिलान्यास प्रधानमंत्री ने किया. और ये असंवैधानिक है कि भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति नहीं कर रही हैं.”

इसके बाद कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी संविधान के आर्टिकल 79 का हवाला दिया और राष्ट्रपति के अपमान की बात कही.

संविधान क्या कहता है?

शशि थरूर ने संविधान के आर्टिकल 60 का हवाला दिया है. इस आर्टिकल में राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण के शब्द लिखे हैं,

"मैं, ईश्वर की शपथ लेता हूं और पूरी सत्यनिष्ठा से पुष्टि करता हूं कि मैं राष्ट्रपति के कार्यालय के काम को या भारत के राष्ट्रपति के कार्यों का निर्वहन ईमानदारी से पूरा करूंगा. और मैं अपनी पूरी क्षमता से संविधान और क़ानून का संरक्षण, सुरक्षा और बचाव करूंगा. और यह कि मैं खुद को भारत के लोगों की सेवा और भलाई के लिए समर्पित करूंगा."

वहीं संविधान का अनुच्छेद 111 संसद द्वारा विधेयकों के पारित किए जाने के बाद राष्ट्रपति की सहमति की जरूरत के बारे में बात करता है.

बवाल के बीच कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने संविधान के अनुच्छेद 79 का उल्लेख करते हुए हरदीप पुरी के बयान पर पलटवार किया था. इस आर्टिकल के हवाले से उन्होंने कहा था,

"आर्टिकल 79 कहता है कि संघ (भारतीय संघ) के लिए एक संसद होगी. जिसमें राष्ट्रपति और दो सदन शामिल होंगे. जिन्हें काउंसिल ऑफ़ स्टेट्स और हाउस ऑफ़ द पीपल के बतौर जाना जाएगा. और अगर मैं गलत उल्लेख कर रहा हूं तो हरदीप सिंह पुरी गलत संविधान पढ़ रहे हैं.

संविधान के आर्टिकल 79 में भी यही लिखा है कि संघ (भारतीय संघ) की संसद में राष्ट्रपति और दो सदन शामिल होंगे, जिन्हें काउंसिल ऑफ़ स्टेट्स यानी राज्यसभा और हाउस ऑफ़ द पीपल यानी लोकसभा के रूप में जाना जाएगा. 

बीजेपी के मंत्री क्या बोले?  

कांग्रेस नेताओं के इन बयानों पर बीजेपी ने कहा कि विपक्षी दल संविधान के अनुच्छेदों की गलत व्याख्या कर रहा है. केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता अपने पाखंड को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं. और उन्होंने संविधान के जिन अनुच्छेदों का उल्लेख किया है, उसका उनके उपद्रव से कोई लेना देना नहीं है. 

आगे उन्होंने भी कांग्रेस नेताओं कोथोड़ा होमवर्क’ करने की सलाह दे दी. साथ ही दलील दी कि प्रधानमंत्री सरकार का मुखिया होता है और संसद का नेतृत्व करता है. राष्ट्रपति संसद के किसी सदन के सदस्य नहीं होते, जबकि प्रधानमंत्री होता है. दोनों तरफ से हो रही बयानी रस्साकशी के बीच AIMIM प्रमुख ने कहा है कि नए संसद का उद्घाटन ना तो पीएम मोदी को करना चाहिए, ना ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को. उनके मुताबिक लोकसभा स्पीकर कस्टोडियल हैं, लिहाजा उनसे ही उद्घाटन करवाया जाना चाहिए.

वीडियो: संसद भवन की नई बिल्डिंग का उद्घाटन सावरकर जयंती पर - सुनियोजित या महज़ इत्तेफ़ाक़?

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