'तेजी से बढ़ती इकॉनमी, 70 हजार स्टार्टअप', PM मोदी ने SCO में बताईं भारत की उपलब्धियां
दुनिया के दूसरे नेताओं ने अपने संबोधन में क्या कहा?

इन दिनों पूरी दुनिया के राजनेताओं और राजनैतिक पंडितों की नज़र उज़्बेकिस्तान के ऐतिहासिक शहर समरकंद पर टिकी है. जो समरकंद में घट रहा है, वो पहले भी होता रहा है. लेकिन इस बार का मौका बेहद ख़ास है. पहले से क्या होता रहा है? शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गेनाइज़ेशन यानी SCO की समिट.
SCO है क्या?ये एशिया और यूरोप के कुछ चुनिंदा देशों का संगठन है.
इसके आठ स्थायी सदस्य हैं - चीन, रूस, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज़्बेकिस्तान, कज़ाकस्तान, भारत और पाकिस्तान. ईरान के एप्लीकेशन को मंज़ूरी मिल गई है. 2023 में वो नौवां स्थायी सदस्य बन जाएगा.
इन देशों के अलावा, कुछ देशों को ऑब्ज़र्वर स्टेट और डायलॉग पार्टनर का दर्ज़ा मिला हुआ है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 10 और देशों ने SCO का मेंबर बनने की इच्छा जताई है. इन देशों के नाम अभी बाहर नहीं आए हैं. लेकिन इससे SCO की अहमियत का अंदाज़ा ज़रूर मिलता है.
- SCO में शामिल देशों में दुनिया की कुल आबादी का 40 प्रतिशत हिस्सा रहता है.
- दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देश, भारत और चीन, SCO का हिस्सा हैं.
- यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में वीटो पावर रखने वाले दो देश, रूस और चीन भी SCO में हैं.
- आतंकवाद की समस्या के उद्गमों में से एक पाकिस्तान भी SCO का मेंबर है.
- पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का सामना कर रहे दो बड़े देश, रूस और ईरान भी SCO में हैं.
SCO की स्थापना 2001 में हुई थी. इसका शुरुआती उद्देश्य आतंकवाद, चरमपंथ और अलगाववाद जैसी समस्याओं से मिलकर लड़ना था. बाद में इसमें अर्थव्यवस्था और विकास के स्तर पर भी सहयोग को लेकर समझौते होने लगे. स्थापना के बाद से हर साल SCO के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष, सरकार के मुखिया और विदेशमंत्रियों की अलग-अलग बैठक होती रही है. इस साल 15 और 16 सितंबर को समरकंद में सदस्य देशों की सरकारों के मुखिया की बैठक हो रही है.
इस बार का आयोजन ख़ास क्यों है? कई कारण हैं.- पहला, कोरोना महामारी के कारण SCO की बैठकें वर्चुअल मीडियम से आयोजित होतीं थी. दो साल के अंतराल के बाद ये नेता आमने-सामने बैठकर बात करने वाले हैं.
- दूसरा, ये बैठक रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच में हो रही है. छह महीने बीतने के बाद भी रूस मनचाहा रिजल्ट हासिल नहीं कर सका है. पश्चिमी देशों ने रूस के गैस और तेल पर कई तरह के बैन लगाए हैं. इसके कारण यूरोप में ऊर्जा संकट पैदा हुआ है. यूरोप के देश बैन लागू रखने को लेकर दुविधा में हैं.
- तीसरा, कोरोना महामारी के बाद पहली बार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने देश से बाहर निकले हैं. पिछले कुछ समय में चीन के ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और अमेरिका से रिश्ते खराब हुए हैं. शिनजियांग में उइग़र मुस्लिमों के नरसंहार का आरोप हो या नैन्सी पेलोसी की ताइवान यात्रा, अमेरिका और दूसरे पश्चिमी देशों ने चीन के ख़िलाफ़ स्टैंड लिया है. चीन अमेरिका और यूरोप के प्रभाव से मुक्त रहने वाला गुट बनाने का इच्छुक है. उसे ये संभावना SCO से दिख रही है.
- चौथा कारण, भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री सालों बाद एक मंच पर आमने-सामने आए. भारत पाकिस्तान से आने वाले आतंकवाद से पीड़ित है. उसका एक स्टेक अफ़ग़ानिस्तान में भी है. पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान तक पहुंचने का ट्रांजिट रूट है.
ऐसे ही SCO के अलग-अलग देशों के अपने हित और अपनी उम्मीदें हैं. इस लिहाज से समरकंद में हो रही समिट पर पूरी दुनिया का ध्यान जाना लाज़िमी था.
आज हम जानेंगे,
- SCO की समिट के दूसरे दिन क्या-क्या हुआ?
- प्रधानमंत्री मोदी और दूसरे अहम नेताओं ने अपने संबोधन में क्या कहा?
- और, इस बार की समिट का हासिल क्या रहा?
जहां आज बात समरकंद में चल रही SCO समिट की होगी.
इस साल की SCO समिट 15 सितंबर को शुरू हुई. पहले दिन कई अहम मुलाक़ातें हुईं. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाक़ात की. दोनों नेताओं की पिछली मुलाक़ात फ़रवरी 2022 में हुई थी. तब पुतिन विंटर ओलंपिक्स के आयोजन में हिस्सा लेने चीन आए थे.
समरकंद में पुतिन और जिनपिंग की बातचीत का फ़ोकस रूस-यूक्रेन युद्ध पर रहा. पुतिन ने वन चाइना पॉलिसी को फ़ुल सपोर्ट देने की बात कही. शी जिनपिंग ने रूस के साथ मिलकर काम करने का दावा किया.
पहले दिन पुतिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़, ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के अलावा किर्गिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति से भी मिले. इसके बाद रूस, चीन और मंगोलिया की त्रिपक्षीय बातचीत हुई. इसमें ऊर्जा सहयोग पर सहमति बनी. रूस, चीन और मंगोलिया को गैस की सप्लाई करने के लिए एक पाइपलाइन पर काम कर रहा है. यूक्रेन युद्ध के बाद से यूरोप के देश रूस के गैस पर निर्भरता कम करने की बात कर रहे हैं. रूस की आमदनी का बड़ा हिस्सा तेल और गैस के निर्यात से आता है. उसे एक नए मार्केट की ज़रूरत है. रूस को उम्मीद है कि SCO से उसकी मार्केट की ज़रूरत पूरी हो सकती है.
15 सितंबर की रात समरकंद में मौजूद नेताओं के लिए डिनर पार्टी का आयोजन किया गया. इसमें प्रधानमंत्री मोदी को छोड़कर लगभग सभी नेताओं ने भाग लिया. भारतीय प्रतिनिधिमंडल का समरकंद दौरा 15 सितंबर की रात दस बजे शुरू हुआ. भारत की तरफ़ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसमें हिस्सा लेना था. उनके साथ विदेशमंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल भी पहुंचे थे. पीएम मोदी 15 सितंबर की देर रात समरकंद पहुंचे. SCO के बाकी सात स्थायी सदस्य देशों के नेता उनसे पहले ही पहुंच चुके थे. इस वजह से पीएम मोदी डिनर और दूसरे अनौपचारिक आयोजनों में हिस्सा नहीं ले पाए. कहा गया कि वो चीन और पाकिस्तान के नेताओं के साथ सहजता बरतने से बचना चाहते थे. भारत का चीन और पाकिस्तान के साथ लंबे समय से तनाव चल रहा है.
16 सितंबर को समिट का दूसरा और आख़िरी दिन है. इस दिन SCO की दो अहम बैठक हुई. पहली बैठक में सिर्फ़ स्थायी देशों के नेताओं ने हिस्सा लिया. दूसरी बैठक में ऑब्जर्वर्स और डायलॉग पार्टनर्स को भी हिस्सा लेने दिया गया.
पहली बैठक में क्या हुआ? किन नेताओं ने क्या कहा?SCO की पहली समिट दोपहर में शुरू हुई. इसमें सभी स्थायी सदस्य देशों के नेता शामिल हुए. एक-एक कर अहम बयानों के बारे में जान लेते हैं.
भारत की तरफ़ से पीएम मोदी का संबोधन हुआ. पीएम मोदी बोले,

- दुनिया अब कोरोना महामारी पर काबू पा रही है. यूक्रेन संकट और कोरोना की वजह से ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित हुई है. लेकिन ये समय के साथ ठीक होता जा रहा है. हम भारत को निर्माण का केंद्र बनाना चाहते हैं.
- इस साल भारत की अर्थव्यवस्था के साढ़े सात फीसदी की दर से बढ़ने की उम्मीद है. मुझे खुशी है कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक भारत की है. हम जन-केंद्रित विकास मॉडल पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. हम हर क्षेत्र में नए आइडियाज को अपना रहे हैं. आज हमारे देश में 70 हज़ार से अधिक स्टार्ट-अप और 100 से अधिक यूनिकॉर्न हैं. इस क्षेत्र में हमारा अनुभव SCO देशों के काम आ सकता है. हम SCO सदस्य देशों के साथ अनुभव साझा करने के लिए तैयार हैं.
- SCO के सदस्य देश वैश्विक GDP में लगभग 30 प्रतिशत का योगदान देते हैं. विश्व की 40 प्रतिशत जनसंख्या भी SCO देशों में रहती है. भारत SCO सदस्यों के बीच अधिक सहयोग और आपसी विश्वास का समर्थन करता है.
- महामारी और यूक्रेन संकट से ग्लोबल सप्लाई चेन्स में कई बाधाएं पैदा की हैं. इस वजह से दुनिया आज खाद्य संकट के तौर पर एक बड़ी चुनौती का सामना कर रही है.
- पीएम नरेंद्र मोदी ने SCO समिट में खाद्य संकट को दूर करने के लिए जरूरी उपाय सुझाए. उन्होंने कहा कि मिलेट्स या बाजरे की खेती और इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देना एक बड़ा समाधान हो सकता है.
- उन्होंने ये भी कहा कि साल 2023 को यूएन इंटरनैशनल ईयर ऑफ मिलेट्स के तौर पर मनाया जाएगा. ऐसे में एससीओ के अंतर्गत एक मिलेट्स फूड्स फेस्टिवल का आयोजन किया जाना चाहिए.
पीएम मोदी के बाद शहबाज़ शरीफ़ की बात. उन्होंने क्या कहा?

शरीफ़ ने अपने भाषण की शुरुआत अफ़ग़ानिस्तान से की. शरीफ़ बोले,
- पाकिस्तान और अफगानिस्तान पड़ोसी मुल्क हैं. पाकिस्तान की शांति इस बात पर है निर्भर करती है कि अफगानिस्तान में कैसे हालात हैं. उसी तरह जो अफगानिस्तान के लिए अच्छा होगा वो पाकिस्तान के लिए भी अच्छा होगा. ये बातें इस पूरे इलाके की शांति के लिए भी ज़रूरी हैं. इसके लिए हम सबको मिलकर अफगानिस्तान की बेहतरी के लिए सोचना होगा. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमें अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था को सपोर्ट करने की ज़रूरत है.
- पाकिस्तान आतंकवाद का शिकार हुआ है, हमारे हजारों लोगों ने इसकी वजह से जाने गवाई हैं. मैं SCO के मेम्बर से आग्रह करता हूं कि आइए साथ मिलकर, आतंकवाद को इस दुनिया से मिटाते हैं
- पाकिस्तान हाल ही में बाढ़ से जूझा है. इससे लाखों जिंदगियां प्रभावित हुई हैं. 14 सौ लोगों की इसमें जान गई है. जिनमें 400 बच्चे भी शामिल हैं. बाढ़ की वजह से लाखों घर तबाह हो गए हैं. इन घरों में रहने वाले लोग अब खुले आसमान के तले सो रहे हैं. दुनिया में क्लाइमेट चेंज एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है. ये बाढ़ भी कहीं ना कहीं इसी का परिणाम है.
अब बात रूसी राष्ट्रपति पुतिन की. उन्होंने SCO के भविष्य पर ज़ोर दिया. पुतिन ने कहा,
- मैं चाहता हूं कि अमेरिका के नेतृत्व वाले पश्चिमी दुनिया का, SCO एक विकल्प बनकर उभरे.
- SCO के देशों को अलग से खेलों का आयोजान करना चाहिए. इसके लिए SCO मिलकर एक स्पोर्ट्स एसोसिएशन भी बना सकता है.
- ईरान का SCO से जुड़ना एक बेहतर कदम है. हमें विश्वास है कि ईरान की SCO में भागीदारी, संगठन के काम पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगी. क्योंकि ईरान यूरेशियन क्षेत्र और पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस दौरान क्या कहा? अब वो जान लेते हैं.

उन्होंने कहा कि वर्ल्ड लीडर्स को ज़्यादा न्यायपूर्ण और तर्कसंगत ढंग से अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को कायम रखने के लिए एक साथ काम करना चाहिए.
बैठक के बाद सभी नेताओं ने फ़ोटो शूट कराया. प्रधानमंत्री मोदी चीनी राष्ट्रपति के बाजू में खड़े थे. लेकिन दोनों नेताओं ने आपस में हाथ नहीं मिलाया. संभावना जताई जा रही थी कि समिट से इतर दोनों देशों की द्विपक्षीय मुलाक़ात भी हो सकती है. वो भी नहीं हो सका. जानकारों की मानें तो LAC पर चल रही तल्खी कम नहीं हुई है.
भारत और पाकिस्तान के नेता भी सालों के बाद भी एक साथ आमने-सामने एक ही मंच पर थे. लेकिन दोनों देशों की अलग मीटिंग संभव नहीं हो सकी. इसपर पाकिस्तान के विदेशमंत्री बिलावल भुट्टो का बयान आया. बिलावल ने कहा कि पाकिस्तान SCO में भारत के साथ काम करता रहेगा. अगले साल का SCO समिट भारत में होना है. बिलावल भुट्टो ने कहा कि हम सोचेंगे कि भारत में आयोजित होने वाली बैठक में हिस्सा लेना है या नहीं.
अब SCO समिट के बाकी अपडेट्स जान लेते हैं.
- रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पाकि पीएम शहबाज़ शरीफ़ आपसी मीटिंग के दौरान अजीबगरीब हरकत हुई. मीटिंग के बीच में ही शरीफ़ के माइक में कुछ दिक्कत आ गई थी, माइक बार-बार शहबाज़ शरीफ़ के कान से फिसल जा रहा था. इस दौरान पुतिन की हंसी छूट गई. ये क्लिप सोशल मीडिया में ख़ूब वायरल है.
- पुतिन और शरीफ़ की मीटिंग में गैस पाइपलाइन पर बातचीत हुई.
- समिट के एक दिन पहले हुए डिनर में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग नहीं पहुंचे थे. जिनपिंग को समरकंद में कई मौकों पर मास्क लगाए देखा गया. कहा जा रहा है कि कोरोना के कारण जिनपिंग बहुत घुलने-मिलने से बच रहे हैं.
- 16 सितंबर को पीएम मोदी तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन से मिले. इस मीटिंग का कार्यक्रम पहले से तय नहीं था. मोदी और अर्दोआन की मुलाक़ात में व्यापार संबंधों पर चर्चा हुई.
- मोदी और शी जिनपिंग के बीच वन ऑन वन मीटिंग होगी या नहीं, इस पर अभी तक कोई स्पष्टता नहीं है.
- जिस समय ये शूट चल रहा है, उस समय पीएम मोदी और व्लादिमीर पुतिन की मुलाक़ात शुरू हो चुकी है. इससे जुड़े अपडेट्स आपको लल्लनटॉप पर मिलते रहेंगे.
- अगले साल SCO देशों की मेज़बानी भारत करने वाला है. इसके लिए शी जिनपिंग और पुतिन ने भारत को बधाई दी है. जिनपिंग ने कहा कि उनका देश इस आयोजन में भारत के साथ खड़ा है. वो भारत को पूरी मदद देगा.
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