The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Lallankhas
  • Mexico ex-security minister Genaro Garcia Luna convicted of drug trafficking el chapo

वॉर ऑन ड्रग्स में मंत्री हीरो बना, जब सच पकड़ा गया तो सबके होश क्यों उड़े?

मंत्री ने वॉर ऑन ड्रग्स की आड़ में क्या कांड किया?

Advertisement
pic
22 फ़रवरी 2023 (अपडेटेड: 22 फ़रवरी 2023, 09:44 PM IST)
मंत्री ने वॉर ऑन ड्रग्स की आड़ में क्या कांड किया?
मंत्री ने वॉर ऑन ड्रग्स की आड़ में क्या कांड किया?
Quick AI Highlights
Click here to view more

एक महशूर कहावत है,

‘जेब में छुरी और मुहं में राम-राम’

माने ज़बान से तो आप एक बात कह रहे हों. लेकिन आपका अमल उसके एकदम उलट हो. ये कहावत मेक्सिको के पूर्व पब्लिक सिक्योरिटी मिनिस्टर गेनेरो गार्सिया लूना पर एकदम सटीक बैठती है. ऐसा क्या किया उन्होंने? लूना ने 2006 से 2012 तक मेक्सिको में कैबिनेट मंत्री के तौर पर काम कर  थे. जिस बरस वो मंत्री बने थे, उसी बरस मेक्सिको सरकार ने ड्रग कार्टेल्स के ख़िलाफ़ एक बड़ा ऑपरेशन शुरू किया था. इस ऑपरेशन को ‘वॉर ऑन ड्रग्स’ का नाम दिया गया था. वॉर ऑन ड्रग्स के तहत मेक्सिको सरकार ने ड्रग माफ़ियाओं के कारोबार पर नकेल कसा था. इस सफ़लता के लिए सबसे ज़्यादा शाबासी तत्कालीन रक्षामंत्री गार्सिया लूना ने बटोरी. उन्हें ड्रग्स माफ़िया का सबसे बड़ा दुश्मन बताया जाता था. अख़बारों में उनकी प्रशंसा में बड़े-बड़े लेख छपते थे. अमेरिका उन्हें रोल मॉडल की तरह पेश करता था.

कट टू 2023.

अमेरिका की एक अदालत ने गार्सिया लूना को ड्रग कार्टेल्स का साथ देने और करोड़ों की रिश्वत लेने का दोषी पाया है. अदालत ने माना कि लूना की मदद के बिना सिनालाओ कार्टेल इतना बड़ा नहीं बन पाता. मौजूदा समय में सिनालोआ कार्टेल मेक्सिको का सबसे बड़ा और सबसे ख़तरनाक गिरोह है. इसे अल मायो चलाता है. इसका एक और सरगना अल चापो अमेरिका की जेल में सज़ा काट रहा है. उसके ऊपर अरबों की ड्रग तस्करी और अनगिनत हत्याओं का आरोप था. लूना पर वॉर ऑन ड्रग्स के दौरान सिनालोआ कार्टेल को संरक्षण देने का आरोप सही साबित हुआ है. इस मामले में उन्हें कम से कम 20 साल की सज़ा होगी.

तो आइए जानते हैं,

- लूना ने वॉर ऑन ड्रग्स की आड़ में क्या कांड किया?

- लूना के पाप का घड़ा कैसे फूटा?

- और, अदालत ने लूना पर क्या कुछ कहा?

आज कहानी एक भ्रष्ट मंत्री के काले कारनामों की.

सबसे पहले उस ड्रग तस्कर के बारे में जान लीजिए, जिसे गार्सिया लूना ने पाल-पोसकर दैत्य बना दिया था. इतना बड़ा कि, एक समय उसकी संपत्ति 8 हज़ार करोड़ रुपयों से भी ज़्यादा हो गई थी. उसको फ़ोर्ब्स मैगज़ीन ने दुनिया का 55वां सबसे ताकतवर आदमी घोषित किया था. वो गिरफ़्तार होता और अपनी मर्ज़ी से टहलते हुए जेल से फरार हो जाता था. वो अल चापो था. उसकी कहानी भी बड़ी दिलचस्प है. वो 1957 में सिनालोआ में पैदा हुआ था. पिता किसानी और चरवाही करते थे. लड़का छोटे घर और ग़रीबी से परेशान था. उसने अमीरी को अपनी ज़िंदगी का इकलौता मकसद बना लिया. 15 साल की उम्र में उसने पहली बार भांग की खेती की.बढ़िया कमाई हुई तो उसने इसी को अपना कैरियर बनाने की प्लानिंग की. इसके लिए वो आठ सौ किलोमीटर दूर गुआदलहारा चला गया. उस समय गुआदलहारा कार्टेल सबसे बड़ा था. वहां अल चापो को कॉन्ट्रैक्ट किलिंग का काम मिला. वो गज़ब का चालाक था. उसने कार्टेल का काम और मुनाफ़ा दोनों बढ़ा दिया था. फिर एक दिन उसको सुपरबॉस से मिलवाया गया. उसका नाम था, अल बेदरीनो. इसका शाब्दिक अर्थ होता है, गॉडफ़ादर. कहा जाता है कि मेक्सिको के इतिहास में उससे बड़ा ड्रग्स तस्कर कोई नहीं हुआ.

गिरफ्तारी के वक्त अल चापो 

इसके बाद अल चापो का कद अचानक से बढ़ गया. वो अल बेदरीनो का सबसे ख़ास आदमी बन चुका था. फिर 1989 में खेल हो गया. एक मर्डर के केस में अल बेदरीनो पकड़ा गया. उसे 37 साल की सज़ा हुई. अल बेदरीनो के जाते ही गुआदलहारा कार्टेल बिखर गया. अलग-अलग गुट बन गए. इसमें से एक गुट की कमान आई अल चापो के हाथ में. इसका नाम रखा गया सिनालोआ कार्टेल.

आज हमारा फ़ोकस गार्सिया लूना पर रहेगा.

1993 की बात है. अल चापो का एक विरोधी गैंग के साथ झगड़ा हुआ. इस झगड़े में चर्च से जुड़ा एक व्यक्ति मारा गया. आरोप अल चापो पर लगा. सरकार पर दवाब बढ़ा. अल चापो को अरेस्ट कर लिया गया. उसे 20 साल की सज़ा सुनाई गई. 8 साल उसने जेल में काटे. 2001 में वो जेल से भाग गया. जेल में रहने के दौरान भी उसका धंधा बंद नहीं हुआ था. वो सलाखों के पीछे बैठकर सब मेनेज कर रहा था. बाहर आने के बाद उसे अपना बिजनेस बढ़ाना था.

जिस वक्त अल चापो जेल से बाहर आया, उसी समय मेक्सिको की राजनीति में एक शख्स का कद बढ़ रहा था. उसका सत्ता के पायदान पर चढ़ना अल चापो के लिए किसी नेमत से कम था. वो शख़्स गार्सिया लूना थे. 2001 में उन्हें किडनैपिंग के मामलों की जांच करने वाली एजेंसी की कमान सौंपी गई. उनकी सरपरस्ती में एजेंसी ने अच्छा काम किया. इसके लिए अवॉर्ड भी मिला. इसकी बदौलत लूना का रसूख बढ़ा. 2006 में उन्हें पब्लिक सिक्योरिटी डिपार्टमेंट की कमान सौंप दी गई. ये एक तरह से गृहमंत्री वाली ज़िम्मेदारी थी. पूरे मुल्क़ की पुलिस उनको रिपोर्ट करती थी. लूना को देश के अंदर लॉ एंड ऑर्डर मेंटेन रखनी थी.

लूना के मंत्री बनने से पहले मेक्सिको में एक और बड़ी घटना हुई थी. 2000 के चुनाव में इंस्टिट्यूशन रेवॉल्युशनरी पार्टी (PRI) को हार का सामना करना पड़ा था. PRI 71 सालों से सरकार में थी. ड्रग तस्करों के साथ उनकी पुरानी सांठ-गांठ थी. इस सपोर्ट सिस्टम के दम पर ड्रग कार्टेल्स अमेरिका में नशे का कारोबार धड़ल्ले से चला रहे थे. जैसे ही सरकार बदली, सपोर्ट कमज़ोर पड़ गया. नई सरकार पर अमेरिका का दबाव पड़ा.  उसने ड्रग कार्टेल के ऊपर शिकंजा कसना शुरू किया. तब सिनालोआ कार्टेल ने हिंसा का रास्ता लिया. सैकड़ों बेगुनाह मारे गए. फिर 2006 में मेक्सिको सरकार ने ड्रग कार्टेल के ख़िलाफ़ फ़ाइनल जंग छेड़ने का ऐलान किया. इसमें अमेरिका ने मेक्सिको का साथ दिया. अल चापो उनका दुश्मन नंबर एक था.

फिर आया 2006 का साल. मेक्सिको सरकार ने आधिकारिक तौर पर वॉर ऑन ड्रग्स की शुरुआत की. इस ऑपरेशन का खाक़ा लूना ने ही तैयार किया था. ऑपरेशन के दौरान मेक्सिको की पुलिस और सेना ने कई गिरोहों को तबाह किया. कुछ गैंग्स तो हमेशा के लिए मिटा दिए गए. इस ऑपरेशन के दौरान पुलिस पर गैर-न्यायिक हत्या के आरोप भी लगे. फिर भी लूना पीछे नहीं हटे. हालांकि, उसी समय एक दिलचस्प चीज हो रही थी. बाकी ड्रग गैंग्स तो नुकसान झेल रहे थे, लेकिन सिनालोआ कार्टेल लगातार फलता-फूलता जा रहा था. अल चापो फ़ोर्ब्स की लिस्ट में शामिल हो चुका था. 

गिरफ्तारी के वक्त अल चापो 

अमेरिका ने उसके ऊपर करोड़ों का इनाम घोषित कर रखा था. मगर वो पकड़ में नहीं आ रहा था. इसका भंडा कई बरस बाद जाकर फूटा. जब सच बाहर आया, तब पता चला कि अल चापो और सिनालोआ कार्टेल को बचाने में सबसे बड़ी भूमिका लूना की थी. वो पैसे खाकर अल चापो के विरोधियों को ठिकाने लगवा देते थे. पुलिस भी उनके साथ मिली हुई थी. इतना ही नहीं, लूना के एजेंट सिनालोआ कार्टेल के लिए ड्रग्स के शिपमेंट को सुरक्षा देते थे. इसके बदले में लूना को यूएस डॉलर में रिश्वत दी जाती थी. घूस के पैसे अलग-अलग जगहों पर सूटकेस में भरकर दिए जाते थे.

अदालती डॉक्यूमेंट्स के अनुसार, अल चापो ने बदले में चार मांगें की थीं. क्या-क्या?

- नंबर एक. सिनालोआ कार्टेल को को पूरा सरंक्षण मिलेगा. कोई गिरफ्तारी नहीं होगी.  

- नंबर दो. कोकीन और दूसरे ड्रग्स की शिपमेंट के लिए सुरक्षित मार्ग मुहैया करवाना होगा.

- नंबर तीन. अगर कोई छापेमारी होने वाली होगी तो सबसे पहली जानकारी उसे मिलेगी.

- नंबर चार. विरोधी ग्रुप से जुड़ी हर खूफिया जानकारी उसे मिलती रहेगी.

लूना के लिए इन मांगों को पूरा करना आसान बात थी. उन्होंने इसके लिए हामी भर दी. बदले में अल चापो ने लूना को पैसों से तोल दिया. ये खेल 2012 तक चलता रहा. 2012 में लूना को पद से हटा दिया गया. फिर वो परिवार के साथ अमेरिका चले आए. 2018 में उन्होंने नागरिकता के लिए अप्लाई किया. इसमें उन्होंने अपनी पिछली करतूतों को छिपा लिया था.
उधर, मेक्सिको में अल चापो की उलटी गिनती शुरू हो गई. फ़रवरी 2014 में उसे तीन बार पकड़ने की कोशिश की गई. दो बार तो वो भाग निकला. लेकिन तीसरी बार में वो हाथ आ गया. वहां से अरेस्ट कर उसे अल्टापीनो में रखा गया. जुलाई 2015 में अल चापो वहां से सुरंग बनाकर भाग गया. फिर छह महीने बाद ख़बर आई कि मेक्सिकन मरीन्स के एक ऑपरेशन में अल चापो पकड़ा गया है. 2017 में उसको अमेरिका प्रत्यर्पित कर दिया गया. जुलाई 2019 में न्यू यॉर्क की एक अदालत ने उसको आजीवन क़ैद के अलावा तीस साल की सज़ा सुनाई. मतलब ये कि वो अब अमेरिका की जेल में ही मरेगा.

मेक्सिको के पूर्व पब्लिक सिक्योरिटी मिनिस्टर गेनेरो गार्सिया लूना

अल चापो की नैया तो डूब चुकी थी. अब धीर-धीरे उसके गैंग के मेंबर भी दबोचे जाने लगे थे. इन सबके बीच लूना अमेरिका में सेटल होने की कोशिश कर रहे थे. लूना के पास कई लग्जरी घर और दूसरी संपत्तियां इकट्ठा हो चुकीं थी. इसे सरकारी सैलरी से कभी खरीदा नहीं जा सकता था. मेक्सिको की जांच ऐजेंसियों की नज़र उनपर पड़ी. साल 2018 में उनके ऊपर जांच बैठी. वो अपनी संपत्ति सफ़ेद साबित करने में असफल रहे. उनके ऊपर कोई एक्शन लिया जाता उससे पहले वो अमेरिका फरार हो गए.  अल चापो के कई शागिर्द भी जेल में बंद थे. अमेरिकी पुलिस उनसे मुहं खुलवाना बखूबी जानती थी. 2018 में पहली बार लूना के ख़िलाफ़ एक गवाही आई. अल चापो के एक गैंग मेंबर की. उसने कहा कि लूना रिश्वत लेकर हमारे गैंग को सुरक्षा देते थे. कुछ दिनों के अंतराल में गवाहों की संख्या बढती गई. अब लूना को अमेरिका की पुलिस खोजने में जुट गई. दिसंबर, 2019 में लूना को गिरफ़्तार कर लिया गया.

अमेरिका में ही उनके ख़िलाफ़ रिश्वत लेकर ड्रग कार्टेल की मदद करने का केस चला. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लूना के खिलाफ सबूत के तौर पर चार छापों में जब्त की गई 75 किलोग्राम कोकीन और 4 किलोग्राम हेरोइन पेश की गई थी. 2020 में लूना ने बेल मांगी लेकिन अमेरिकी अदालत ने उनकी बेल ख़ारिज कर दी. आरोप ये भी लगा कि तत्कालीन मेक्सिकन राष्ट्रपति फेलिप काल्डोरोन को लूना और अल चापो की सांठ गांठ के बारे में पहले से पता था. फेलिप ने इस आरोप से इंकार किया है.

लूना का केस एक महीने पहले ब्रुकलिन की एक डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में शुरू हुआ था. 21 फरवरी, 2023 को अदालत ने लूना को दोषी ठहरा दिया है. अब सज़ा का फ़ैसला होना बाकी है. यूएस के डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस ने कहा है कि उन्हें कम से कम 20 साल की सज़ा हो सकती है. लूना अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों से इनकार करते हैं. उनका कहना है कि वो बेक़सूर हैं. मेक्सिको के राष्ट्रपति एंड्रेस मैनुअल लोपेज़ के एक प्रवक्ता ने अदालत के फैसले की तारीफ़ की है और पूर्व राष्ट्रपति फ़ेलिप को इसके लिए ज़िम्मेदार बताया.

ये तो थी अल चापो और लूना की मिलीभगत की कहानी. लेकिन क्या ऐसा पहली बार हो रहा है, जब सरकार का कोई प्रतिनिधि ड्रग्स माफियाओं के लिए काम करता पकडाया गया है? इसका जवाब है नहीं. अक्टूबर 2020 में मेक्सिको के पूर्व रक्षा मंत्री जनरल सल्वाडोर सिएनफ्यूगोस को ऐसे ही मामले में अमेरिका में गिरफ्तार किया गया था. उनपर आरोप था कि उन्होंने मेक्सिको से अमेरिका तक ड्रग्स को लाने ले जाने की अनुमति दी थी. लेकिन बाद में उन्हें बाइज्ज़त बरी कर दिया गया था. 

वीडियो: दुनियादारी: यूक्रेन में हो रही बमबारी के बीच जो बाइडन ने कीव का सीक्रेट दौरा कैसे किया?

Advertisement

Advertisement

()