The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Lallankhas
  • masala chai fame writer divya prakash dubey writes sunday letter for the lallantop this time its written by a wife to husband

'अधूरी लिस्ट पूरी करते-करते हमारी ज़िन्दगी बीत जाएगी'

पढ़िए डीपीडी की संडे वाली चिट्ठी.

Advertisement
Img The Lallantop
Symbolic Image
pic
लल्लनटॉप
27 मार्च 2016 (Updated: 27 मार्च 2016, 08:41 AM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share
संडे की सुबह यूं ही भी अच्छी लगने लगी है, क्योंकि एक चिट्ठी पढ़ने को मिल जाती है. वरना ये फेसबुक और Whats App के जमाने में चिट्ठी नाम की चिड़िया dpd-pic_140216-040741-600x400देखने को नहीं मिलती. अब ये बताने की जरूरत तो है नहीं कि ये संडे वाली चिट्ठी दिव्य प्रकाश दुबे लिखते हैं. इतनी सारी संडे वाली चिट्ठी आप पढ़कर मुस्कुरा ही चुके हैं. आज भी संडे वाली चिट्ठी आ चुकी है. इस बार डीपीडी बाबू ने 'आपकी सुनती हो' से अपने 'डियर ए जी' को चिट्ठी लिखवाई है. आप भी पढ़िए. हम तो पढ़ चुके. :)

डीयर ए जी,

आपको अभी चिट्ठी से पहले कभी ए.जी. नहीं बोले लेकिन मम्मी पापा को जब ए.जी. बोलती थीं तो बड़ा ही क्यूट लगता था. आपने कभी सोचा है हम लोग प्यार करने में बोलने में अपने मम्मी पापा की नकल करना चाहते हैं. जैसे मम्मी पापा से जिद्द करती थीं वैसे ही हम आपसे जिद्द करना चाहते हैं. जैसे मम्मी गुस्सा होने का नाटक करती थी पापा के साथ वैसे ही हम भी नाटक करना चाहते हैं. अखबार में पढ़ते हैं तो लगता है टाइम बदल गया. प्यार करने के जताने के तरीके बदल गए हैं. लड़कियां बदल गईं, लड़के भी बदल गए हैं. लोगों के सवाल बदल गए हैं. हां इतना तो बदल गया है कि दुनिया की सबसे अच्छी परवल की सब्जी जो आपकी नानी बना लेती. जो आपकी मम्मी बना लेतीं थीं वो अब केवल मुझे ही बनानी नहीं आती आपको भी आती है. आपकी तारीफ करेंगे तो आप सर पे चढ़ने लगेंगे लेकिन हम आपको बता दें सुबह जो पहली चाय आप बना देते हैं वो हमें बड़ा ही अच्छा लगता है. मम्मी के यहां से भी हमारी आदत थी बिना चाय पिये आंख नहीं खुलती थी. कभी-कभी शाम को जब आप ऑफिस से हमसे पहले आ जाते हैं तब जब आप मैगी बना देते हैं तब लगता दिन भर की थकावट मिट गई. देखिए जब हम शादी के लिए हां बोले थे तब हमें आपसे बहुत उम्मीद नहीं थी. ये बात हम लोगों को ज़िन्दगी में में जल्द ही समझ लेनी चाहिए कि परफेक्ट जैसा होता ही नहीं. सही बता रहे हैं ये जो लड़कियां सपनों का राजकुमार ढूंढती है तो बड़ी दया आती है. ये जो पिक्चर परफेक्ट है न ये कुछ होता ही नहीं. हमें लगता है जिसके साथ भी हम इतमिनान से बोर हो सकते हैं उसके साथ ही बुड्ढा होने का सोचना चाहिए और आप हमें बड़ा अच्छा बोर करते हैं. हमें नहीं मालूम हम टाइम के साथ एडवांस हो रहे हैं या नहीं, हमें शायद फ़र्क भी नहीं पड़ता. शादी कोई शकुन्तला देवी की पज़ल की किताब थोड़े है. जहां सब कुछ हाई-फंडू हो. मालूम है दिक्कत क्या है, जब तक लोग शादी में न्यूज़आवर की डिबेट ढूंढते रहेंगे परेशान रहेंगे. कोई हम लोगों की बातें सुने तो हंसेगा, आधे टाइम तो हम लोग घर में क्या क्या नहीं है उसकी ही लिस्ट बनाते रहते हैं. ऐसे ही रोज़ अधूरी लिस्ट पूरी करते करते हमारी ज़िन्दगी बीत जाएगी. अगले जन्म को तो मानते नहीं अगर होता भी होगा तो कहीं और शादी किया जाएगा, चेंज होते रहना चाहिए नहीं तो पता कैसे चलेगा हम लोग एक दूसरे में कितना घुले हुए हैं. शादी क्या नहीं है ये तो हम बता दिए, शादी क्या है ये कभी आगे किसी चिट्ठी में लिखेंगे. अच्छा यार सुनिए अब मज़े से चिट्ठी पढ़ना बन्द करिए. ए.जी. उठिये चलिए चाय बनाइये, हमारा चाय पीने का मन हो रहा है. आपकी 'सुनती हो'दिव्य प्रकाश

पढ़िए संडे वाली चिट्ठी- 'बेटी मैं तुम पर कुछ भी थोपना नहीं चाहता, तुम्हारी ‘आज़ादी’ भी नहीं'

Advertisement

Advertisement

()