संडे की सुबह यूं ही भी अच्छी लगने लगी है, क्योंकि एक चिट्ठी पढ़ने को मिल जातीहै. वरना ये फेसबुक और Whats App के जमाने में चिट्ठी नाम की चिड़िया देखने को नहींमिलती. अब ये बताने की जरूरत तो है नहीं कि ये संडे वाली चिट्ठी दिव्य प्रकाश दुबेलिखते हैं. इतनी सारी संडे वाली चिट्ठी आप पढ़कर मुस्कुरा ही चुके हैं. आज भी संडेवाली चिट्ठी आ चुकी है. इस बार डीपीडी बाबू ने 'आपकी सुनती हो' से अपने 'डियर ए जी'को चिट्ठी लिखवाई है. आप भी पढ़िए. हम तो पढ़ चुके. :)-------------------------------------------------------------------------------- डीयर ए जी,आपको अभी चिट्ठी से पहले कभी ए.जी. नहीं बोले लेकिन मम्मी पापा को जब ए.जी. बोलतीथीं तो बड़ा ही क्यूट लगता था. आपने कभी सोचा है हम लोग प्यार करने में बोलने मेंअपने मम्मी पापा की नकल करना चाहते हैं. जैसे मम्मी पापा से जिद्द करती थीं वैसे हीहम आपसे जिद्द करना चाहते हैं. जैसे मम्मी गुस्सा होने का नाटक करती थी पापा के साथवैसे ही हम भी नाटक करना चाहते हैं. अखबार में पढ़ते हैं तो लगता है टाइम बदल गया.प्यार करने के जताने के तरीके बदल गए हैं. लड़कियां बदल गईं, लड़के भी बदल गए हैं.लोगों के सवाल बदल गए हैं. हां इतना तो बदल गया है कि दुनिया की सबसे अच्छी परवल कीसब्जी जो आपकी नानी बना लेती. जो आपकी मम्मी बना लेतीं थीं वो अब केवल मुझे हीबनानी नहीं आती आपको भी आती है. आपकी तारीफ करेंगे तो आप सर पे चढ़ने लगेंगे लेकिनहम आपको बता दें सुबह जो पहली चाय आप बना देते हैं वो हमें बड़ा ही अच्छा लगता है.मम्मी के यहां से भी हमारी आदत थी बिना चाय पिये आंख नहीं खुलती थी. कभी-कभी शाम कोजब आप ऑफिस से हमसे पहले आ जाते हैं तब जब आप मैगी बना देते हैं तब लगता दिन भर कीथकावट मिट गई. देखिए जब हम शादी के लिए हां बोले थे तब हमें आपसे बहुत उम्मीद नहींथी. ये बात हम लोगों को ज़िन्दगी में में जल्द ही समझ लेनी चाहिए कि परफेक्ट जैसाहोता ही नहीं. सही बता रहे हैं ये जो लड़कियां सपनों का राजकुमार ढूंढती है तो बड़ीदया आती है. ये जो पिक्चर परफेक्ट है न ये कुछ होता ही नहीं. हमें लगता है जिसकेसाथ भी हम इतमिनान से बोर हो सकते हैं उसके साथ ही बुड्ढा होने का सोचना चाहिए औरआप हमें बड़ा अच्छा बोर करते हैं. हमें नहीं मालूम हम टाइम के साथ एडवांस हो रहेहैं या नहीं, हमें शायद फ़र्क भी नहीं पड़ता. शादी कोई शकुन्तला देवी की पज़ल कीकिताब थोड़े है. जहां सब कुछ हाई-फंडू हो. मालूम है दिक्कत क्या है, जब तक लोग शादीमें न्यूज़आवर की डिबेट ढूंढते रहेंगे परेशान रहेंगे. कोई हम लोगों की बातें सुनेतो हंसेगा, आधे टाइम तो हम लोग घर में क्या क्या नहीं है उसकी ही लिस्ट बनाते रहतेहैं. ऐसे ही रोज़ अधूरी लिस्ट पूरी करते करते हमारी ज़िन्दगी बीत जाएगी. अगले जन्मको तो मानते नहीं अगर होता भी होगा तो कहीं और शादी किया जाएगा, चेंज होते रहनाचाहिए नहीं तो पता कैसे चलेगा हम लोग एक दूसरे में कितना घुले हुए हैं. शादी क्यानहीं है ये तो हम बता दिए, शादी क्या है ये कभी आगे किसी चिट्ठी में लिखेंगे. अच्छायार सुनिए अब मज़े से चिट्ठी पढ़ना बन्द करिए. ए.जी. उठिये चलिए चाय बनाइये, हमाराचाय पीने का मन हो रहा है. आपकी 'सुनती हो' दिव्य प्रकाशपढ़िए संडे वाली चिट्ठी- 'बेटी मैं तुम पर कुछ भी थोपना नहीं चाहता, तुम्हारी‘आज़ादी’ भी नहीं'