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'अगर दुनिया मां से प्यार करती तो दुनिया ऐसी नहीं होती'

मदर्स डे पर पढ़िए संडे वाली चिट्ठी. 'मैं बचपन में तुमसे शादी करना चाहता था मां.'

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8 मई 2016 (अपडेटेड: 7 मई 2016, 03:09 AM IST)
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symbolic image, pc- reuters
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डीपीडी उर्फ दिव्य प्रकाश दुबे
दिव्य प्रकाश दुबे

मां. इस शब्द के जुबां पर आते ही जीभ चिपकने लगती हैं. लिखने बैठूं तोउंगलियां इधर उधर भागने लगती हैं. कुछ लिखा नहीं जाता. लगता है कि कहीं लिखते हुए बेईमानी न हो जाए. कुछ रह न जाए. यूं तो हमारे दिन मां के दिए हुए हैं. और हमारी मम्मियों की मानें तो उनके सारे दिन हमारे हैं. मां कह रही हैं तो सच ही कह रही होंगी. लेकिन बिजी शेड्यूल वाली दुनिया ने खुशियों के दिन बांट रखे हैं. सही गलत आप समझिए. वो हमें नहीं पता. हमें जो पता है वो ये कि आज संडे है. और मदर्स डे भी. तो बस इस बार दिव्य प्रकाश दूबे की संडे वाली चिट्ठी आ गई है. मां के नाम चिट्ठी. पढ़िए.


 
सुनो यार मम्मी,
हर संडे तुम छोले बनाकर सही नहीं करती हो. तुमने बचपन से हर संडे छोले खिलाकर ऐसा कर दिया है कि अब हर संडे न छोले खाते बनते है न छोड़ते.
देखो तुमने जो मुझको पैदा करके एहसान वहसान किया ठीक है, लेकिन मैंने भी तो तुम्हें मां बनने का मौक़ा दिया. तुमने सोचा है कभी कि तुम्हारे मां वाले प्रोफ़ाइल की उम्र और मेरी उम्र बराबर है. ये जो हम लोग चिल्लाते रहते हैं न कि कोई भी सबसे ज़्यादा प्यार अपनी मां से करता है. ये सब झूठ है. अगर दुनिया मां से प्यार करती तो दुनिया ऐसी नहीं होती. कभी कभी मुझे ये सोचकर बड़ा डर लगता है कि एक दिन तुम मर जाओगी और फिर भी मैं ये दुनिया झेल लूंगा. मैं क्या मेरे सारे दोस्त झेल लेंगे.
मैं सब कुछ तुम्हारे साथ ही तो किया है, पहली बार कुछ पीने से लेकर पहली बार छूने तक. पहली बार रोने से लेकर तुतलाने तक. पहली बार ज़िद करने से लेकर नाराज़ होने तक. बचपन में मैं पहली शादी भी तुमसे ही करना चाहता था. बाकी दुनिया को कुछ भी समझाने के लिए तो मुझे बोलना पड़ता है, तुम तो मेरी हर एक बात तब से समझ रही हो जब मैं बोलना भी नहीं जानता था.
वैसे तुमसे वादा लेने की ज़रूरत तो है नहीं, तुम ऐसे ही सब कुछ पूरा कर देती हो. जब तुम मरने वाली होना तो मुझे पहले बता देना. अपनी आख़िरी सांस मेरे हाथों में मेरी गोदी में लेना. पता नहीं जब मैं पैदा हुआ था तो तुम होश में थी या नहीं, लेकिन मैं तुम्हें अपने पूरे होशो हवास में मरते हुए देखना चाहता हूं. मैं चाहता हूं तुम इतनी बुड्ढी हो जाओ कि बोलना भूल जाओ. मैं चाहता हूं तुम बस इस लायक बचो कि केवल इशारों में बात कर पाओ. मैं तुम्हारे हर एक इशारे को समझूं. तुम्हें बिना बात रोने लगो, तुम सब कुछ भूल जाओ और मैं तुम्हें गले लगाकर ठीक वैसे ही सहलाऊं जैसे तुमने मुझे सहलाया था. मैं चाहता हूं कि मरने से पहले तुम बच्ची हो जाओ और मैं तुम्हारी मां हो जाऊं.
अगर ऐसा इस दुनिया में हो गया तो ठीक, नहीं तो अगर कहीं कोई दूसरी दुनिया होती होगी तो मुझको कभी एक बार ये मौक़ा देना कि मैं तुम्हें पैदा कर पाऊं. तब जाकर शायद मेरे जन्म पूरे हो पाएं. सुनो यार मम्मी आज संडे तुम पास नहीं हो लेकिन घर पर छोले बने हैं.
तुम्हारा बिट्टू


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