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पार्थ पवार कौन हैं? अजित पवार के बेटे जिनका नाम 300 करोड़ की लैंड डील घोटाले में फंस गया है

Who is Parth Pawar: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के बेटे पार्थ पवार एक जमीन सौदे में गड़बड़ी के मामले में फंसे हैं. कथित तौर पर वह इस कंपनी के साझेदार हैं, जिसने सरकारी जमीन की खरीद में गड़बड़ी की है.

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Parth pawar
पार्थ पवार विवादित जमीन सौदे के मामले में फंसे हैं (india today)
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राघवेंद्र शुक्ला
7 नवंबर 2025 (अपडेटेड: 7 नवंबर 2025, 03:22 PM IST)
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मुंबई के ऑल-बॉयज कैंपियन स्कूल में फुटबॉल खेलने वाला एक लड़का जिंदगी को पूरी तरह से जी लेना चाहता है. उसे लगता है कि राजनीतिक परिवार में पैदा होने की वजह से उसे आज नहीं तो कल जनसेवा (राजनीति) में उतरना ही है. इसलिए समय रहते उसे जिंदगी की सारी मौज-मस्ती कर लेनी चाहिए. वह कहता है कि ‘जब जनसेवा में जाऊंगा तो फिर ये सब नहीं कर पाऊंगा.’ इसलिए वह लंदन चला गया. बिजनेस की पढ़ाई पढ़ने. 

रेजेंट्स यूनिवर्सिटी में एडमिशन हो गया लेकिन पिता अजित पवार उतने पैसे नहीं भेजते थे कि मौज-मस्ती हो पाए. लिहाजा लंदन में मन नहीं लगा. जिसका बचपन ही पुलिस सिक्योरिटी और मंत्रियों-मुख्यमंत्रियों के बीच ‘स्पेशल ट्रीटमेंट’ का मजा लेते बीता हो. उसे लंदन की ‘गुमनाम’ जिंदगी कैसे अच्छी लगती.

दो साल विदेश रहने के बाद वह मुंबई यूनिवर्सिटी से अपनी बैचलर्स की डिग्री पूरी करने वापस आ गया. डिग्री पूरी हुई लेकिन यहां मन तो राजनीति में लगने लगा था. जिसके दादा मुख्यमंत्री रहे. पिता उपमुख्यमंत्री. उसे चुनाव लड़ने की तलब कैसे न उठे. वह साल 2019 में दादा से बगावत कर चुनावी मैदान में उतरता है लेकिन हार का स्वाद चखने वाला पहला ‘पवार’ बन जाता है.

बागी तेवर से ही अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाला वह लड़का कदम-कदम पर पार्टी से लेकर परिवार खासतौर पर दादा शरद पवार की ‘विचारधारा’ को चैलेंज करता है. वह पार्टी लाइन के विपरीत राम मंदिर के शिलान्यास पर खुशी जताता है. सुशांत राजपूत की मौत की सीबीआई जांच की मांग का विरोध कर रहे दादा शरद पवार के उलट इस मांग का समर्थन करता है और अब जमीन सौदे में भ्रष्टाचार के एक मामले में उसका नाम आने के बाद फिर से पवार परिवार की प्रतिष्ठा पर मुसीबत का कारण बन गया है.

हम बात पार्थ पवार की कर रहे हैं. पार्थ पवार जो महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के बेटे और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार के पोते हैं. 

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सुनेत्रा पवार, अजित पवार (सोफे पर). पीछे जय पवार (बायें), पार्थ पवार (दायें)
पवार परिवार में पार्थ

महाराष्ट्र के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके शरद पवार अपने 11 भाई-बहनों में 8वें नंबर पर आते हैं. कुल 7 भाई और 4 बहन. शरद पवार के अलावा उनकी पीढ़ी से और कोई राजनीति में नहीं आया. उनकी एकमात्र बेटी सुप्रिया सुले हैं, जो बारामती से सांसद हैं. अजित पवार शरद पवार के भाई अनंत राव पवार के बेटे हैं. अजित के दो बेटे हैं. पार्थ जो राजनीति में हैं और जय कारोबारी हैं. रोहित पवार शरद पवार के बड़े भाई अप्पासाहेब पवार के पोते हैं. इन सबके अलावा पवार परिवार में कोई और सक्रिय राजनीति में नहीं हैं. रोहित के पिता राजेंद्र पवार कृषि व्यापार से जुड़े हैं. परिवार के बाकी सदस्य अलग-अलग कारोबार में हैं.

अजित के बेटे पार्थ पवार मुंबई के एचआर कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स से पढ़े हैं. यहां से उन्होंने कॉमर्स की डिग्री हासिल की है. बिजनेस की पढ़ाई के लिए वह लंदन भी गए. वहां से वापस आने के बाद ही उनकी दिलचस्पी राजनीति में बढ़ी. ET को दिए एक इंटरव्यू में पार्थ अपने बारे में कहते हैं कि उनका दिमाग ‘राजनीति की तरह चलता है.’ उन्होंने '48 लॉज ऑफ पावर' पढ़ी है, जिसमेंपहला नियम ये है कि चमकने के बाद अपने मास्टर को कभी पीछे मत छोड़ो. दोस्तों को पास रखो. दुश्मनों को और पास.’ वह कहते हैं,

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लेकिन लगता है, ये ‘ज्ञान’ भी पार्थ को सियासत में सफलता के करीब भी नहीं ले जा पा रहा क्योंकि राजनीति में उनके पहले दांव का ही नतीजा ऐसा रहा, जो उन्होंने कभी नहीं सोचा होगा.

राजनीति में पहला कदम लड़खड़ाया

21 मार्च 1990 को जन्मे पार्थ पहली बार चर्चा में 2019 में तब आए थे, जब वह पुणे जिले की मावल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे. उनके पिता अजित पवार की भी यही इच्छा थी लेकिन दादा शरद पवार राजी नहीं थे. अपनी पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी (अविभाजित) में उन्होंने एक रूल बनाया था. ‘एक साथ कई पवार चुनाव नहीं लड़ेंगे.’ उन्होंने अपनी बेटी सुप्रिया सुले को बागमती सीट से प्रत्याशी घोषित किया था. वह खुद भी चुनावी मैदान में उतरना चाहते थे. लेकिन पोते की जिद के आगे उन्हें झुकना पड़ा और अपनी उम्मीदवारी की कीमत पर पार्थ को चुनाव लड़ने की मंजूरी देनी पड़ी. शरद पवार को डर था कि ऐसा नहीं किया तो पार्टी टूट सकती है, जो बाद में टूट ही गई. 

दरअसल, साल 2012 तक पार्थ के पिता अजित पवार की सियासत कई विवादों में फंसी थी. एक व्हिसलब्लोअर की ओर से उनके पानी संसाधन विभाग में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे. इससे उनकी छवि को तगड़ा नुकसान पहुंचा था. उन्हें अपना डिप्टी सीएम पद भी छोड़ना पड़ा था. इसी दौरान 7 अप्रैल 2013 को अजित पवार ने एक विवादित बयान दिया. सूखे और अकाल से बेहाल महाराष्ट्र के एक सवाल पर वह बोले

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इसकी बड़ी आलोचना हुई. ET को दिए एक इंटरव्यू में पार्थ बताते हैं कि उस समय उनका राजनीति से मन भर गया था. अच्छा काम करने के बाद भी उनके पिता को ऐसे स्कैम के लिए कोसा जा रहा था, जिसका वह हिस्सा नहीं थे. पार्थ का मानना था कि उनकी PR टीम ने भी अच्छा काम नहीं किया और उनके पिता की इमेज खराब हो गई थी. 

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2024 में बारामती सीट पर पार्थ पवार ने अपने पिता के लिए कैंपेन किया (india today)

पार्थ ने अपने पिता की इमेज बेहतर बनाने के लिए कुछ समय तक उनके सोशल मीडिया का काम भी देखा. पिता को उनका काम पसंद आ रहा था और उन्होंने ही सजेस्ट किया कि वह मावल सीट से चुनाव लड़ें? लेकिन शरद पवार इसके खिलाफ थे. वह कह रहे थे कि राजनीति में आना है तो पहले दो-तीन साल जमीन पर काम करो. लेकिन अजित पवार की सोच अलग थी. उन्हें लगता था कि पार्थ अगर शरद पवार की विरासत के दम पर चुनाव जीत सकता है तो वह क्यों न चुनाव में खड़ा हो? 

शरद पवार दोनों बाप-बेटे को मना नहीं पाए. खुद का नाम वापस ले लिया और पार्थ को लड़ने दिया. हालांकि, ये पहला चुनाव पार्थ के लिए काफी भारी पड़ा. मावल सीट पर वह टिक नहीं पाए और तकरीबन 2 लाख वोटों से चुनाव हार गए. 

ऐसा पहली बार हुआ था, जब पवार परिवार का कोई व्यक्ति चुनाव हार गया था. इसके बाद से पार्थ पवार संगठन का ही काम देखते हैं. उनका ध्यान पार्टी की युवा विंग पर खासतौर पर है. अब वह सीधे चुनाव लड़ने की बजाय पर्दे के पीछे से काम करने वाले नेता हैं.

एनसीपी के बंटवारे के बाद से वह अपने पिता के साथ हैं. वह पार्टी की यूथ विंग को मजबूत करने के काम में लगे हैं. 

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शरद पवार के साथ पार्थ पवार (india today)
PPF की स्थापना

राजनीति के अलावा पार्थ समाजसेवा में भी एक्टिव हैं. उन्होंने ‘पार्थ पवार फाउंडेशन’ (PPF) की स्थापना की है, जो एक गैर-लाभकारी संगठन (NGO) है. यह महाराष्ट्र और भारत के अलग-अलग इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका (लिवलीहुड) के क्षेत्रों में काम करता है. फाउंडेशन का फोकस ग्रामीण विकास और जरूरतमंदों की मदद पर रहता है. 

पार्थ के पास कितनी संपत्ति है

पवार परिवार के वंश पार्थ के पास संपत्ति करोड़ों में है. यह उनकी खुद की संपत्ति है. उनके पिता अजित या मां सुनेत्रा की नहीं. संपत्ति के मामले में अभी उनकी क्या स्थिति है, इसके बारे में साफ-साफ नहीं कहा जा सकता लेकिन साल 2019 के लोकसभा चुनाव में उनके हलफनामे से 6 साल पहले की उनकी प्रॉपर्टी की जानकारी मिलती है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जायदाद के कागजों में पार्थ ने सिर्फ अपनी खुद की संपत्ति दिखाई है. अपने पिता अजीत पवार या मां सुनेत्रा पवार की कोई भी संपत्ति इसमें शामिल नहीं की है

उनके नाम पुणे के पॉश इलाके भोसलानगर में ई-स्क्वायर के पास स्थित ‘जिजाई बंगलो’ है, जिसकी कीमत 13.16 करोड़ रुपये बताई गई है.

– उनके पास 3.69 करोड़ रुपये की चल संपत्ति जैसे- बैंक बैलेंस, गाड़ियां आदि हैं और 16.42 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है. मुल्शी तालुका के घाटवडे में एक फार्महाउस भी पार्थ के नाम है.

– पार्थ ने 9.36 करोड़ रुपये का कर्ज भी घोषित किया है, जिसमें 7.13 करोड़ रुपये उनकी मां सुनेत्रा पवार से लिया गया कर्ज है और 2.23 करोड़ रुपये भाई जय पवार से लिया गया है.

– पार्थ पवार के बैंक खाते पुणे जिला सहकारी बैंक और बारामती सहकारी बैंक में हैं. उनकी सेविंग्स अनंत नागरी सहकारी बैंक में रखी गई हैं.

विवादों में पार्थ पवार

पार्थ पवार के कारोबार के बारे में विवादित खुलासा हाल ही में हुआ है, जब पता चला कि वह ‘Amedia Holdings LLP’ कंपनी से भी जुड़े हैं. इस कंपनी पर भूमि सौदों को लेकर गड़बड़ी करने का आरोप लगा है. मामला ये है कि कंपनी ने पुणे में लगभग 300 करोड़ रुपये में एक जमीन खरीदी, जिसकी असल कीमत कथित तौर पर 1,800 करोड़ रुपये थी. आरोप है कि इस सौदे को पूरा करने के लिए स्टैंप ड्यूटी भी नहीं चुकाया गया. दावा किया गया कि इतनी बड़ी जमीन खरीद में नियमों की अनदेखी कर सिर्फ ‘500 रुपये की स्टैंप ड्यूटी’ भरी गई.

ये भी पढ़ेंः उस लैंड डील की कहानी जिसकी जांच की आंच अजित पवार के बेटे तक पहुंच सकती है

पहले भी रहे विवादों में

पार्थ पवार का विवादों से नाता नया नहीं है. पिछले साल पार्थ की एक फोटो बहुत वायरल हुई, जिसमें वह एक गैंगस्टर गजानन मार्ने के साथ दिखाई दिए थे. यह फोटो सामने आने के बाद पार्थ के पिता अजित पवार भी असहज हो गए थे. उन्होंने कहा था कि ये गलत है. पार्थ को किसी गैंगस्टर से नहीं मिलना चाहिए था.  

जब एनसीपी का विभाजन नहीं हुआ था, तब पार्थ अपने पिता अजित पवार की तरह ही पार्टी के भीतर अलग लाइन लेने के लिए जाने जाते रहे. यह कई मौकों पर साफ-साफ दिखा. साल 2020 में तत्कालीन उद्धव ठाकरे सरकार ने सुशांत सिंह राजपूत मामले की जांच CBI से कराए जाने का विरोध किया था. लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट ने CBI को जांच सौंपने की अनुमति दी तो पार्थ पवार ने एक ट्वीट कर लिखा- “सत्यमेव जयते!” तब महाराष्ट्र में गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी एनसीपी के पास थी. खुद शरद पवार भी CBI जांच की मांग का विरोध कर रहे थे. उन्होंने पार्थ की सीबीआई जांच की मांग को 'बचकाना' बताया था.

इससे पहले कोविड महामारी के दौरान जब अयोध्या में राम मंदिर का शिलान्यास हो रहा था तो शरद पवार ने इस समारोह का विरोध किया था. उन्होंने कहा था कि इससे देश में महामारी की समस्या का समाधान नहीं होगा. इस दौरान पार्थ एक बार फिर आगे आए और राम मंदिर निर्माण की तारीफ की थी.

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