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PFI बैन पर RSS को घेरते हुए लालू यादव ने भयंकर गलती कर दी है!

लालू यादव ने कहा - "सबसे पहले RSS को बैन करिए, ये उससे भी बदतर संगठन है."

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28 सितंबर 2022 (अपडेटेड: 28 सितंबर 2022, 02:16 PM IST)
Lalu Yadav on PFI Ban
ये तो लालू यादव की फ़ोटो है, मीम हमने बनाया है (photo - India Today)
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PFI पर बैन लग गया है. लेकिन इस बैन के साथ है नेताओं की प्रतिक्रियाएं। और एक प्रतिक्रिया आई है राजद प्रमुख लालू यादव की. उन्होंने बैन लगाने का विरोध नहीं किया है, लेकिन कहा है कि ऐसे जो दूसरे संगठन हैं, उन पर भी बैन लगाया जाए. लालू यादव ने खास तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS का नाम लिया.

लालू उवाच,

"PFI की तरह जितने भी नफ़रत और द्वेष फैलाने वाले संगठन हैं सभी पर प्रतिबंध लगाना चाहिए जिसमें RSS भी शामिल है. सबसे पहले RSS को बैन करिए, ये उससे भी बदतर संगठन है."

लालू आगे उवाच,

"RSS पर दो बार पहले भी बैन लग चुका है. सनद रहे, सबसे पहले RSS पर प्रतिबंध लौह पुरुष सरदार पटेल ने लगाया था."

लालू का पहले वाला उवाच उनकी अपनी प्रतिक्रिया है. लेकिन बाद वाले उवाच में फैक्चुअल मिस्टेक है. तथ्यात्मक चूक. सही तथ्य ये है कि RSS पर बैन तो लगा है लेकिन दो बार नहीं. एक बार नहीं. टोटल तीन बार.

पहली बार : साल 1948

30 जनवरी 1948 को दिल्ली के बिड़ला हाउस में नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी. इस हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया. देश ही नहीं बल्कि दुनिया को झकझोर दिया. इस घटना के बाद RSS के लोगों पर इसकी साज़िश रचने का शक जाहिर किया जाने लगा. नतीजा ये हुआ कि 5 दिन बाद यानी 4 फरवरी 1948 को सरकार ने RSS पर बैन लगा दिया. RSS के तत्कालीन सरसंघचालक एमएस गोलवलकर समेत संघ के कई कार्यकर्ता अरेस्ट कर लिए गए.

11 जुलाई 1949 को RSS पर से प्रतिबंध हटा लिया गया. लेकिन ध्यान रखिए, यह प्रतिबंध सशर्त हटाया गया था. प्रतिबंध हटाने की शर्त यह थी कि

1 - RSS अपना संविधान बनाएगा और अपने संगठन में चुनाव करवाएगा.
2 - RSS किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा नहीं लेगा और खुद को सांस्कृतिक गतिविधियों तक सीमित रखेगा.

दूसरी बार : साल 1975

इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 की रात देश में इमरजेंसी लगाने का ऐलान कर दिया. 26 जून को मीडिया की आवाज दबाने के इरादे से प्रेस सेंसरशिप को भी लागू कर दिया गया. तमाम विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया जा रहा था. स्वतंत्र सोच रखनेवाले कांग्रेस के नेता भी अरेस्ट किए गए. साथ-साथ RSS के सरसंघचालक बाला साहब देवरस भी. स्टूडेंट्स और विपक्षी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ संघ के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में गिरफ्तार किए गए. 4 जुलाई 1975 को RSS पर एक बार फिर प्रतिबंध लगा दिया गया.

बाद में जब इमरजेंसी हटी और चुनाव हुए, तब उस चुनाव में इंदिरा गांधी की हार हो गई और विपक्षी एकता के नाम पर बनी जनता पार्टी सत्ता में आ गई. जनता पार्टी ने सत्ता संभालते ही RSS पर से प्रतिबंध हटा लिया.

तीसरी बार : साल 1992

6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में उन्मादी, अराजक और सिरफिरे लोगों की भीड़ ने बाबरी मस्जिद को गिरा दिया. इस घटना के बाद भारत को अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी धर्मनिरपेक्ष पहचान को लेकर चिंता सताने लगी. देश में दंगे हुए. इस घटना में भाजपा और विश्व हिंदू परिषद के साथ-साथ RSS के शामिल होने की बात कही जाने लगी. नतीजतन तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव ने यूपी समेत 4 राज्यों की भाजपा सरकारों को बर्खास्त कर दिया और विध्वंस की घटना के 4 दिन बाद 10 दिसंबर 1992 को RSS पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया. इसके बाद एक बार फिर पुलिस इंक्वायरी हुई. लेकिन इस इंक्वायरी में भी सीधे तौर पर RSS के खिलाफ कुछ नहीं मिला. 4 जून 1993 को सरकार ने RSS पर से प्रतिबंध हटा लिया.

वीडियो : PFI पर 5 साल का बैन लगाते हुए गृह मंत्रालय ने क्या कहा?

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