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तानाशाह Kim Jong Un जिस बुलेटप्रूफ ट्रेन से रूस गए, उसकी ये खासियतें चौंका देंगी!

जहाज से सफर करने में किम और उनके पिता को डर लगता रहा है. इसीलिए उनके पास कम से कम 90 हाई सिक्योरिटी ट्रेनें हैं.

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12 सितंबर 2023 (अपडेटेड: 12 सितंबर 2023, 04:38 PM IST)
kim jong un russia north korea bulletproof train
किम जोंग-उन, अभी तक सभी विदेश यात्राओं पर ट्रेन से गए हैं (फोटोसोर्स- आजतक और Korean Central News Agency, via Reuters)
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उत्तरी कोरिया (North Korea) के तानाशाह किम जोंग-उन (Kim Jong-un). वो और उनका देश, दोनों रहस्यों से भरे हैं. क्योंकि बाकी दुनिया से कटे रहने वाले नॉर्थ कोरिया से कोई पुख्ता जानकारी बाहर नहीं आ पाती. खैर, अभी पता चला है कि किम ट्रेन से रूस जा रहे हैं. तो इस विदेश यात्रा के साथ ही उनकी हरे रंग की ट्रेन भी चर्चा में आ गई है. बेहद खास, बुलेटप्रूफ, लक्जरी ट्रेन. ट्रेन इसलिए क्योंकि किम और उनके परिवार को जहाज से सफ़र करने में डर लगता है. ये बात भी उन्होंने खुद नहीं बताई. दशकों से ये बात कही जाती रही है. क्योंकि किस्से बस ट्रेन से सफ़र के ही मौजूद हैं. अब तक किम जोंग-उन ट्रेन से चार बार चीन और एक बार वियतनाम गए हैं. 2019 में जब किम रूस जाकर पुतिन से मिले, तब भी ट्रेन में ही चढ़कर गए. अब फिर ट्रेन से गए हैं.

ट्रेन से रूस

अंग्रेजी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स की एक खबर के मुताबिक, 11 सितंबर को ऐसी ही एक ट्रेन दिखी, नॉर्थ कोरिया, रूस और चीन की सीमा पर. ये व्लादिवोस्तॉक की तरफ जा रही थी. ये रूस का बंदरगाह वाला शहर है. यहां रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) एक मीटिंग करने वाले हैं. मंगलवार को नॉर्थ कोरिया की सरकारी न्यूज़ मीडिया ने पुष्टि करते हुए कहा कि किम, राजधानी प्योंगयांग से उसी बख्तरबंद ट्रेन से निकल चुके हैं. इधर रूस ने भी कहा कि किम आने वाले दिनों में रूस के दौरे पर होंगे. इससे पहले, साल 2019 में किम, व्लादिवोस्तॉक में ही पुतिन से मिले थे. ट्रेन से ही. ये यात्रा, किम और तत्कालीन अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के बीच परमाणु निरस्त्रीकरण वार्ता विफल होने के बाद हुई थी.

किम की बुलेटप्रूफ ट्रेन

किम की बुलेटप्रूफ ट्रेन का इस्तेमाल उनके पिता किम जोंग-इल और दादा किम इल-सुंग भी करते थे. इस ट्रेन से वो चीन, रूस (तत्कालीन सोवियत यूनियन) जाया करते थे. कहा जाता है कि ये लोग सोवियत के वक़्त के अपने जहाजी बेड़े को लंबी उड़ान के लिए फिट नहीं मानते थे. इसलिए ट्रेन से ही सफ़र करना सुरक्षित समझते थे.

न्यूयॉर्क टाइम्स अख़बार लिखता है कि इस ट्रेन के बारे में सारी जानकारी इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स, नॉर्थ कोरिया की सरकारी न्यूज़ मीडिया और उन अधिकारियों की याद के आधार पर है जिन्हें इस तानाशाह परिवार के साथ ट्रेन में ट्रैवेल करने का मौका मिला था.

-साल 2009 की साउथ कोरियन मीडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा माना जाता है कि किम के परिवार के पास कम से कम 90 हाई सिक्योरिटी ट्रेनें हैं. किम जोंग-इल, अपने दौर में तीन ट्रेनों से चलते थे. एक में खुद रहते थे, दूसरी में सुरक्षा के इंतजाम होते थे और और तीसरी में उनके बॉडीगार्ड्स और बाकी रसद वगैरह होती थी.
-ये सभी ट्रेनें पूरी तरफ बुलेटप्रूफ हैं. इसलिए सामान्य ट्रेनों की तुलना में कहीं ज्यादा भारी हैं. इसीलिए इनकी स्पीड बहुत कम है. सिर्फ 37 मील प्रति घंटा. 
-एक खबर के मुताबिक, किम जोंग-इल के दौर में 100 सुरक्षा अधिकारी एक अलग ट्रेन में चलते थे. और हर स्टेशन पर बम या किसी दूसरी तरह के खतरे और ट्रेन की ट्रैक की सुरक्षा जांच करते थे. इसके अलावा अतिरिक्त सिक्योरिटी कवर के लिए मिलिट्री हेलीकॉप्टर और प्लेन ट्रेनों के ऊपर उड़ते थे.
-किम जोंग-उन के पर्सनल यूज़ के लिए पूरे नॉर्थ कोरिया में 20 रेलवे स्टेशन बनाए गए हैं.

ये भी पढ़ें: किम जोंग की 'लेडी जासूस' जो साइनाइड खाकर भी न मरी!

ट्रेन में आराम का सब सामान है

नॉर्थ कोरिया की सरकारी मीडिया ने कई बार अपने तानाशाहों की ट्रेन से सफ़र करते वक़्त की तस्वीरें ली हैं. इस दौरान ट्रेन के अंदर रखी उनकी ख़ास कारों की भी झलक दिखी. साल 2018 में किम जोंग-उन जब चीन की यात्रा पर गए थे. उस वक़्त चीने के एक सीनियर अधिकारी को उनकी ट्रेन में चढ़ते देखा गया. ट्रेन में गुलाबी रंग के सोफ़े सजे हुए थे. इसी तरह साल 2015 में उन्हें ट्रेन के अंदर एक ऐसे कमरे में बैठा देखा गया, जो किसी कॉन्फ्रेंस रूम की तरह लग रहा था, इसमें एक बड़ी सफ़ेद मेज दिख रही थी. अलग-अलग मौकों पर ट्रेन के इन कमरों में फ्लैट टीवी स्क्रीन, लैपटॉप, खूबसूरत पर्दे वगैरह भी लगे देखे गए हैं. एक वीडियो और आया था, इसमें किम के पिता एक लक्जरी कार में बैठे हैं, ये एक डाइनिंग कार है. उनके सामने वाली मेज खाने की चीजों से भरी हुई है और सामने कुछ लोग किम के पिता को एंटरटेन करने के लिए परफॉर्म कर रहे हैं. किम-जोंग इल के ऑफिस की एक कार, आज भी राजधानी प्योंग्यांग के एक म्यूजियम में रखी है.

साल 2011 में किम जोंग-इल के साथ सफ़र करने वाले एक रूसी अधिकारी कॉन्सटैन्टिन पुलिकोव्स्की ने ओरिएंट एक्सप्रेस नाम से इस यात्रा के बारे में एक संस्मरण लिखा है.

वो लिखते हैं,

"उनके साथ ये संभव था कि आप रशियन, चाइनीज, कोरियन, जापानी या फ्रेंच खाने में से कोई भी डिश ऑर्डर कर सकते थे. किम ने जोर देकर कहा था कि रूस के सफ़र पर साइबेरिया पार करते वक़्त ट्रेन में झींगा मछली और दूसरी ताजी डिशेज पहुंचाई जाएं. बोर्डो और बरगंडी वाइन के डिब्बे पेरिस से लाए गए थे. किम जब बोर हो जाते थे तो कुछ रशियन और कोरियन बोलने वाली महिलाएं उनका मनोरंजन करती थीं."

हालांकि किम जोंग-उन मनोरंजन के लिए क्या करते हैं, और ट्रेन में सफ़र के दौरान क्या खाना पसंद करते हैं, ये कोई नहीं जानता. लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें स्विस चीज़, क्रिस्टल शैम्पेन और हेनेसी शराब पसंद है.

ट्रेन में ही इल की मौत हुई

साल 2004 में चीनी सीमा के पास विस्फोटकों से लदी दो ट्रेनें आपस में टकरा गईं. 160 से ज्यादा लोग मारे गए. किम जोंग-इल की ट्रेन कुछ ही घंटे पहले उसी ट्रैक से गुजरी थी. इसलिए ये भी कहा गया कि ये उन्हें मारने की साजिश थी. फिर दिसंबर 2011 में नॉर्थ कोरिया की मीडिया ने खबर दी कि इल की मौत, ट्रेन में ही दिल का दौरा पड़ने से हो गई है.

किम, रूस क्यों गए?

अमेरिका का कहना है कि रूस और नॉर्थ कोरिया के बीच यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर हथियारों को लेकर बातचीत चल रही है. अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा था कि रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने नॉर्थ कोरिया से गोला-बारूद मांगे थे. कहा जा रहा है कि रूस को 122 MM और 152 MM के गोले की ज़रूरत है. क्योंकि उसके पास इन गोलों का स्टॉक ख़त्म हो रहा है. हालांकि ये किसी को नहीं पता कि नॉर्थ-कोरिया के तोपखाने में कितना माल-पानी इकठ्ठा है. 
 

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