ओवैसी ने कहा, "राम मंदिर का मुद्दा यूपी पुलिस के मुंह से निकली ठांय-ठांय जैसा है"
एजेंडा आज तक में केटीएस तुलसी, असदुद्दीन ओवैसी और सुधांशु त्रिवेदी वाले सेशन के महत्वूर्ण अंश.

17 दिसंबर, 2018 को 'एजेंडा आज तक' के सातवें संस्करण का आगाज किया गया. दो दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम में हर साल की तरह इस साल भी वो लोग शामिल हो रहे हैं जिन्होंने राजनीति, व्यापार, बॉलीवुड और क्रिकेट में कामयाबी की बुलंदियां हासिल की हैं.
इसके एक सेशन में जाने माने वकील और राज्य सभा के सदस्य केटीएस तुलसी, AIMIM के प्रेजिडेंट असदुद्दीन ओवैसी और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी के बीच भी बातचीत या यूं कहिए बहस हुई. इस सेशन का नाम था ‘कानून से बनेगा राम मंदिर?’
45 मिनट तक चले इस सेशन को होस्ट कर रहीं थी आज तक की वरिष्ठ एंकर श्वेता सिंह.
सेशन की शुरुआत बेशक केटीएस तुलसी ने की लेकिन वो पूरे सेशन के दौरान सबसे कम बोलने वाले रहे.
आइए क्रोनिलॉजिकल ऑर्डर में जानते हैं पूरे सेशन का सार -
# केटीएस तुलसी ने सेशन की शुरुआत में कहा कि उनका विश्वास है कि श्रीराम की जन्मभूमि वहीं (अयोध्या) है.# सुधांशु त्रिवेदी का कहना था कि राम मंदिर वाला केस पूरी दुनिया का एकमात्र केस है जिसमें ईश्वर एक मुद्दई है. उन्होंने बताया कि दिसंबर, 1961 से पहले मुस्लिम प्रतिनिधियों की तरफ से कोई विवाद नहीं खड़ा किया गया था, जबकि 1949 में ही अयोध्या के उस एरिया की खुदाई में मूर्तियां निकलने लग गई थीं.
# ओवैसी ने इसकी काट करते हुए बताया कि मूर्तियां खुदाई में नहीं मिली बल्कि वहां पर रखी गई थीं और इस पूरे मामले को लेकर कोर्ट में एक क्रिमिनल केस लंबित है. ओवैसी ने सरकार को ललकारते हुए कहा कि वो इसके (राम मंदिर के) लिए कानून बना ही नहीं सकती, ऑर्डिनेंस ला ही नहीं सकती. खासतौर पर तब जबकि संविधान में ऐसा न करने के पक्ष में कई नियम-ओ-क़ानून हैं जैसे आर्टिकल 123 या कृष्ण कुमार जजमेंट.
केटीएस तुलसी (तस्वीर उनके ट्विटर अकाउंट से ली गई है)# सुधांशु त्रिवेदी का कहना था कि इस पूरे विवाद को कभी भी बाबरी मस्ज़िद बनाम राम मंदिर कहा ही नहीं गया, बल्कि उसे तो हमेशा डिस्प्यूटेड लैंड बनाम राम मंदिर ही कहा जाता रहा है.
# श्वेता के ये पूछने पर कि क्या राम मंदिर मुद्दे को राजनीति के मुद्दे से हटकर एक आस्था के मुद्दे के रूप में क्यूं नहीं लिया जा सकता, ओवैसी का दो टूक जवाब था कि मुल्क आस्था पर नहीं चल सकता. ये एक टाइटल स्यूट (मालिकाना हक़ संबंधित मुकदमा) है जिसका निर्णय सबूतों के आधार पर होगा. साथ ही कोर्ट को भी किसी आस्था के साथ नहीं जाना चाहिए.# केटीएस तुलसी का कहना था कि ऐसी ही (राम मंदिर विवाद सरीखी) एक मुश्किल सिख धर्म में भी आई जब लाहौर में गुरु अर्जुन देव के शहीद स्थल पर गुरुद्वारा गिरा के मस्ज़िद बना दी गई थी. बाद में कोर्ट ने माना कि जो उससे पहले मस्ज़िद थी उसका सबूत नहीं था और वहां पर गुरुद्वारा बनना चाहिए. आज भी वहां पर गुरुद्वारा है. उनका कहना था कि कोर्ट के माध्यम से पूरी तरह इंसाफ होना/करना मुश्किल है.
# सबूतों की बात पर राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने बताया कि राम मंदिर के पक्ष में एक नहीं हज़ारों सबूत हैं. उनका कहना था कि मुगलों के ज़माने के कई रेकॉर्ड्स हैं, मीर बाक़ी के पत्थर पर भी लिखा है – फ़रिश्ते के उतरने की जगह. उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि जहां मुस्लिम इतिहासकारों और कवियों के भगवान राम को लेकर हज़ारों रेफ्रेंसेज़ भरे पड़े हैं वहीं बाबर के बारे में, जिसने जनता दल से भी कम समय शासन किया, की बात कोई नहीं करता. उनके इस लॉजिक का निष्कर्ष ये था कि ये हिंदू मुस्लिम नहीं मूल भारतीयों और विदेशी आक्रमणकारियों के बीच का मुद्दा है, जिसमें भारतीय मुसलमानों को भी राम मंदिर बनाए जाने के पक्ष में खड़ा होना चाहिए. उन्होंने इंडोनेशिया से लेकर साउथ कोरिया तक के उदाहरणों के माध्यम से सिद्ध करने की कोशिश की कि राम सर्वमान्य हैं और इसलिए ये मामला कतई तकनीकी नहीं है.
# इस पूरे लॉजिक के जवाब में AIMIM के प्रेजिडेंट असदुद्दीन ओवैसी का कहना था कि ये सारी रिटोरिक (अलंकारपूर्ण) बातें वोट पाने के लिए तो ठीक हैं लेकिन ये सब कोर्ट में नहीं चलेंगी.# सुधांशु त्रिवेदी ने तथ्य रखा कि कुछ साल पहले तक कहा जाता था कि भगवान श्रीराम का कोई अस्तित्व नहीं है, अब जब सारे सबूत इसके पक्ष में हैं तो मुद्दा टाइटल सूट पर आ गया है. उनके अनुसार शिया वक्फ बोर्ड भी राम मंदिर के समर्थन में है और कार सेवा में 300 मुस्लिमों के शामिल होने की बात भी उन्होंने कही. इसे उन्होंने एक तरह का पैराडाइम शिफ्ट बताया. उन्होंने ये कहा कि हमारे सबूत इतने ठोस हैं कि कोर्ट में हम केस हार ही नहीं सकते.
# एक प्रश्न के उत्तर में ओवैसी ने श्वेता को धन्यवाद कहा क्यूंकि श्वेता ने ओवैसी को हिंदुस्तानी कहकर संबोधित किया था. उन्होंने अपने पूर्वजों के भारत में ही रह जाने के पक्ष में एक शेर भी पढ़ डाला –
हिजरत के नाम पर फरार की ज़िंदगी मत गुज़ारोउनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट लॉजिक के आधार पर चलेगा, जबकि आस्था लॉजिकल भी हो सकती है. उस जमाने में बाबर था लेकिन संविधान नहीं था. उनका सवाल ये भी था कि भाजपा को 1989 के बाद ही राम मंदिर की याद क्यूं आती है. अब ये यूपी में अपनी 80 सीट बचाने की कवायद है.
सुधांशु त्रिवेदी (तस्वीर उन्हीं के ट्विटर अकाउंट से ली गई है)# इसके जवाब में सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि ये मुद्दा 1983 से ही उठाया जा रहा है. अपना निजी अनुभव शेयर करते हुए उन्होंने बताया कि जब वो लगभग 12 साल के थे तो उन्होंने महंत अवैद्यनाथ की संकल्प रैली अटेंड की थी जिसमें महंत ने भविष्यवाणी की थी कि कुछ ही वर्षों के बाद जन-जन के ह्रदय में राम होंगे.
# ओवैसी ने एक न्यूज़ का हवाला देते हुए बताया कि अयोध्या में आयोजित की गई दीवाली में जो दिए जलाए गए थे उसके तेल को एक ग़रीब महिला इकट्ठा कर रही थी, ताकि घर में भोजन बना सके.# इस ‘खबर’ के जवाब में सुधांशु आरएसएस की कई योजनाएं गिनवा दीं जैसे – सेवा भारती, वनवासी कल्याण आश्रम, विद्या भारती. साथ ही सुधांशु ने कहा कि सच्चर कमिटी की रिपोर्ट में सबसे ज़्यादा दयनीय हालत मुसलमानों की है, तो क्यूं नहीं वो ये सारे मंदिर मस्ज़िद के मुद्दे भूल के अपने विकास पर ध्यान देती?
# लेकिन ओवैसी ने टोकते हुए कहा कि सुधांशु भाजपा के प्रवक्ता है न कि आरएसएस के. साथ ही सच्चर कमिटी की सिफारिशों को भी सरकार को ही लागू करना चाहिए. क्यूं नहीं मुसलमानों को आरक्षण दिया जाना चाहिए, तब जबकि येदुरप्पा मराठाओं को आरक्षण दे सकते हैं.
# सुधांशु ने सरकार की कई योजनाएं गिनवाई जिसमें किसी को कोई भी फेवर नहीं दिया जाता फिर चाहे वो स्किल इंडिया हो या उज्ज्वल योजना या हुनर. उन्होंने गुज़ारत, यूपी और पूरे भारत के आकड़ों की बौछार करते हुए कहा कि मुस्लिमों में अनपढ़ता आज़ादी के बाद से उत्तरोत्तर बढ़ती चली गई है. नौकरियों की बात करें तो गुजरात में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व पश्चिम बंगाल की तुलना में कहीं ज़्यादा है, तब जबकि पश्चिम बंगाल में गुजरात की तुलना में कहीं ज़्यादा मुस्लिम हैं.
# इस पूरे डेटा पर ओवैसी ने अपनी सहमति जताई और सरकार से आरक्षण की मांग की, जिसके उत्तर में सुधांशु ने उत्तर दिया कि उन्हें आरक्षण दिया जा सकता है जिन्हें पढ़ने के मौके नहीं मिले, जिन्होंने पढ़ना ही न चाह उन्हें कैसे मौके दिए जा सकते हैं?
#WATCH
— ANI UP (@ANINewsUP) October 13, 2018
: Police personnel shouts 'thain thain' to scare criminals during an encounter in Sambhal after his revolver got jammed. ASP says, 'words like 'maaro & ghero' are said to create mental pressure on criminals. Cartridges being stuck in revolver is a technical fault'. (12.10) pic.twitter.com/NKyEnPZukh
# ठीक इसी वक्त ओवैसी ने पूरे ‘राम मंदिर विवाद’ की तुलना संभल के उस वायरल वीडियो से कर डाली जिसमें पुलिस वाले गोली ख़त्म हो जाने की दशा में मुंह से ठांय-ठांय करते हुए दिखते हैं. उनका कहना था कि जैसे उस वीडियो में पुलिस की गोलियां ख़त्म हो गईं थीं वैसे ही ‘राम मंदिर मुद्दे’ की पॉलिटिकल यूटिलिटी भी ख़त्म हो चुकी है.
# तुलसी ने ओवैसी की ‘आरक्षण’ वाली बात का समर्थन करते हुए कहा कि आरक्षण आज के हिसाब से मिलना चाहिए जबकि सुधांशु का कहना था कि धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए. 1916 में ऐसे ही एक आरक्षण के चलते भारत के दो टुकड़े हुए थे साथ ही आरक्षण यदि हिस्टोरिकल डिप्रोविज़न (ऐतिहासिक रूप से वंचितों) के चलते होता है तो मुस्लिमों का इतिहास तो वंचितों वाला नहीं दमनकर्ताओं वाला रहा है.# ओवैसी ने मुंबई उच्च न्यायालय के एक निर्णय और आर्टिकल 15, 16 का हवाला देते हुए सरकार से फिर से मुस्लिम या मुस्लिम धर्म में कुछ जातियों के लिए आरक्षण की मांग की. उन्होंने कहा कि इसका संविधान में भी प्रोविजन है. बात घूम-फिर के अभी-अभी समाप्त हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों पर आ टिकी.
# जहां ओवैसी का कहना था कि भाजपा धीरे-धीरे देश से गायब होती जा रही है, वहीं सुधांशु ने बताया कि मध्यप्रदेश में उनकी हार तकनीकी थी, राजस्थान में मामूली लेकिन छत्तीसगढ़ में व्यवहारिक थी. उनका कहना था कि भाजपा कोई पहली बार नहीं हारी, उन्होंने अज्ञेय की कविता भी पढ़ डाली. और उन्होंने अंत में कहा कि मंदिर बनाना संतों और श्री राम जन्म भूमि न्यास का कार्य है. लेकिन वो (भाजपा सरकार) मंदिर निर्माण के मार्ग को प्रशस्त करेगी और मंदिर भव्य बनेगा.
असदुद्दीन ओवैसी (तस्वीर - रॉयटर्स)# अंत किया ओवैसी ने – बयानों में ज़्यादा मुमकिन है.
दो दिन तक चलने वाले 'एजेंडा आजतक' में केंद्र सरकार के कई आला मंत्रियों समेत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के अलावा राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और अन्य नेता भी शिरकत करेंगे.वीडियो देखें:
चुनाव जीतने के बाद कांग्रेसियों की ऐसी हरकत राहुल गांधी को भी सही नहीं लगी होगी! -

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