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झारखंड के छात्र अपने ही राज्य के लोक सेवा आयोग को भंग करने की मांग क्यों कर रहे?

JPSC Result में कथित धांधली के खिलाफ कई दिनों से आंदोलनरत हैं छात्र.

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20 दिसंबर 2021 (अपडेटेड: 21 दिसंबर 2021, 07:19 AM IST)
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झारखंड स्टूडेंट यूनियन ने JPSC के खिलाफ़ CBI जांच की मांग कर रहा है (फोटो सोर्स - #CBI4JPSC/ट्विटर)
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झारखंड छात्र संघ (JSU) और BJP के नेता झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) के डायरेक्टर अमिताभ चौधरी को हटाए जाने की मांग कर रहे हैं. इसे लेकर बीती 14 दिसंबर 2021 को ट्विटर पर #CBI4JPSC ट्रेंड भी हुआ. छात्रों और विपक्ष के नेताओं का आरोप है कि JPSC की परीक्षा में धांधली हुई है. इसके खिलाफ झारखंड छात्र संघ 50 दिनों से भी ज्यादा समय से मूवमेंट चला रहा है जिसे BJP ने हाथोंहाथ ले लिया है. उसके नेता सड़क से विधानसभा तक राज्य सरकार को घेरने में जुटे हैं. क्या है पूरा मामला? JPSC ने 19 सितंबर 2021 को 7th से 10th सिविल सर्विसेज के अलग-अलग पदों के लिए प्रारंभिक परीक्षा कराई थी. झारखंड के 24 जिलों के 1102 सेंटर्स पर साढ़े तीन लाख से ज्यादा कैंडिडेट्स ने ये प्रीलिम्स एग्जाम दिए थे. इनका रिजल्ट JPSC ने 1 नवंबर 2021 को जारी कर दिया. लेकिन रिजल्ट जारी होते ही कैंडिडेट्स की तरफ़ से JPSC पर रिजल्ट में धांधली करने के आरोप लगने शुरू हो गए. उन्होंने JSU के बैनर तले धरना शुरू कर दिया.
JPSC के खिलाफ़ धरने पर बैठे छात्र (फोटो सोर्स -आज तक)
JPSC के खिलाफ़ धरने पर बैठे छात्र (फोटो सोर्स -आज तक)

विरोध प्रदर्शन के दौरान स्टूडेंट्स का एक डेलीगेशन 16 नवंबर को कमीशन के सेक्रेटरी रनेंद्र कुमार से मिला. इसके बाद 18 नवंबर को लिखित शिकायतें JPSC को सौंप दी गईं. 23 नवंबर को 15 लोगों का एक डेलीगेशन दोबारा JPSC के चेयरमैन अमिताभ चौधरी से मिला. इस बार इस डेलीगेशन को झारखंड BJP के विधायक नवीन जायसवाल, भानु प्रताप शाही और लम्बोदर महतो लीड कर रहे थे. इसके बाद भी स्टूडेंट्स के इस प्रतिनिधि मंडल ने दो बार JPSC को लिखित शिकायतें भेजीं. कैंडिडेट्स के आरोप और मांगें
# ज्यादा मार्क्स लाने वाले कई कैंडिडेट्स फेल कर दिए गए जबकि कम मार्क्स वाले कई कैंडिडेट्स पास कर दिए गए.
# लोहरदगा, साहेबगंज और लातेहार जिलों के कई एग्जाम सेंटर्स पर धांधली हुई, या एग्जाम का इनविजीलेशन ठीक से नहीं हुआ और एक ही सीरियल वाले कैंडिडेट्स को पास कर दिया गया. एक साथ सभी काबिल कैंडिडेट्स एक ही एग्जाम हॉल में हों ये संभव नहीं है.
# एग्जाम के दौरान कैंडिडेट्स को अनुचित तरीके से लाभ पहुंचाया गया. पूरे देश में JPSC ही ऐसा अकेला आयोग है जो एक ही एग्जाम हाल में बैठे कैंडिडेट्स को पास कर देता है, अगर वो सभी कैंडिडेट्स इतने प्रतिभाशाली हैं तो JPSC उनकी OMR शीट पब्लिक करे.
# JPSC द्वारा कैटेगरी के अनुसार कट-ऑफ मार्क्स जारी नहीं किए गए, जबकि दूसरे प्रदेशों में ऐसा होता है. हैंडीकैप्ड कैटेगरी का भी कट-ऑफ जारी नहीं किया गया है.
# एक ही कैटेगरी में कम मार्क्स वाले कैंडिडेट को पास कर दिया गया है, जबकि ज्यादा मार्क्स लाने वाले को फेल कर दिया गया है. सभी कैंडिडेट्स, चाहें वो पास हों या फेल सभी की मार्कशीट जारी की जानी चाहिए.
# पेपर लीक होने की चर्चा भी है, आयोग एक कमेटी बनाकर इसकी जांच करवाए. आयोग सभी आरोपों को गंभीरता से लेते हुए प्रीलिम्स एग्जाम्स रद्द करे.
#सभी पदों के लिए UPSC से एग्जाम कराए जाएं, और JPSC को भंग कर दिया जाए.
तमाम आरोपों और राजनीतिक दबाव के चलते 27 नवंबर को JPSC ने तीनों शिकायतों का लिखित जवाब दिया. क्या कहा, वो भी जान लेते हैं. JPSC के जवाब
# शिकायत में तर्क दिया गया है कि एक अभ्यर्थी जिसका रोल नंबर 52077036 है, उसको 266 मार्क्स मिले हैं और उसको फेल कर दिया गया है. कट-ऑफ कितना है बिना जाने ऐसा कहना तर्कहीन है. फिर भी ये साफ़ किया जाता है कि उस अभ्यर्थी को 266 नहीं बल्कि 240 अंक ही मिले हैं, जबकि इस कैटेगरी का कट-ऑफ़ 260 है.
# सिर्फ दो जिलों लोहरदगा आयर साहेबगंज में लगातार सीरियल नंबर से एग्जाम देने वाले कई कैंडिडेट पास हुए हैं और ऐसा इस बार पिछले सालों से कई गुना ज्यादा कैंडिडेट होने के चलते हुआ है. फिलहाल ऐसे कैंडिडेट्स को पास किया जा रहा है और आगे जांच चलती रहेगी. एक छोटे नंबर के चलते पूरा रिजल्ट नहीं रोका जा सकता था. परीक्षा केंद्रों पर नक़ल जैसा कुछ न हो इसलिए हमने राज्य में उपलब्ध सर्वोत्तम संसाधनों का इस्तेमाल किया है.
# कट-ऑफ न जारी करने के पीछे आयोग की मंशा किसी तथ्य को छिपाने की नहीं है. आयोग UPSC की प्रक्रिया को अपनाने की मंशा रखता है, जिसमें कट-ऑफ फाइनल रिजल्ट के वक़्त ही जारी किया जाता है. अभ्यर्थियों को किसी निहित उद्देश्य के चलते भ्रमित किए जाने की कोशिशें हो रही हैं, इसलिए आयोग ने कैटेगरी के हिसाब से कट-ऑफ जारी कर दिए हैं.
# एग्जाम सेंटर के एक ही कमरे के कैंडिडेट पास किए जाने का दावा तथ्यों से परे है, इस पर कोई टिप्पणी करने की आवश्यकता नहीं है.
# दिव्यांग या किसी भी अन्य श्रेणी में खाली पदों के 15 गुना तक अभ्यर्थियों का चयन किया जाता है. दिव्यांग श्रेणी में 7 पद खाली थे, जिनके लिए 107  अभ्यर्थियों का चयन किया गया है जोकि 15 गुना से ज्यादा है. हालांकि इस संख्या को जारी करने के लिए आयोग बाध्य नहीं है, फिर भी ऐसा इसलिए कर रहे हैं ताकि स्टूडेंट्स को भड़काने की सारी कोशिशें असफल हों.
# सभी कैंडिडेट्स की मार्कशीट जारी करने की मांग पर कमीशन ने कहा- ये गैर-ज़रूरी है, इंडिविजुअली हर कैंडिडेट को उसकी OMR की कार्बन-कॉपी दी जा चुकी है.
# पेपर लीक होने के मामले कुछ ही पलों में सब जान जाते हैं. एग्जाम हुए 2 महीने हो गए हैं. ऐसा कोई भी साक्ष्य सामने नहीं आया है, ऐसे में पेपर लीक का दावा निरर्थक है.
# मुख्य परीक्षा को स्थगित करने और प्रारंभिक परीक्षा को स्थगित करने के लिए कोई वजह नहीं है.
# और JPSC को भंग करने की मांग पर कमीशन ने कहा- आयोग इस बिंदु पर टिप्पणी को उचित नहीं मानता है. यानी ‘नो कमेंट्स’.
कमीशन ने जवाब तो दे दिए. लेकिन बात इतने से कहां बननी थी. BJP के नेता और JSU दोनों JPSC के खिलाफ़ CBI जांच की मांग पर अड़े हैं. BJP इस मुद्दे पर हेमंत सोरेन सरकार को सड़क से लेकर विधानसभा तक घेर रही है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को हटाने की मांग की जा रही है.
झारखंड की राजमहल विधानसभा से BJP विधायक अनंत ओझा का ये वीडियो देखिए- झारखंड बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने ट्वीट किया,
‘झारखंड के युवाओं को न्याय दिलाने के लिए BJP लड़ती रहेगी. सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रहेगा.’

झारखंड के युवाओं को न्याय दिलाने के लिए भाजपा लड़ती रहेगी.

सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रहेगा.#CBI4JPSC
pic.twitter.com/KaI9I26QlM

— Deepak Prakash (@dprakashbjp) December 17, 2021

इधर सीरियल में एक के बाद एक आने वाले जिन 49 कैंडिडेट्स को JPSC ने पास किया था, दबाव बढ़ने के बाद उन्हें फेल कर दिया गया था. # विधानसभा में हंगामा-   विधानसभा में JPSC के मुद्दे पर हंगामा चल रहा है, 20 दिसंबर 2021 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा,
'JPSC एग्जाम में काफ़ी कैंडिडेट्स शामिल हुए हैं. ये पहली बार है कि इतने बड़े पैमाने पर नियुक्ति हो रही है़. जनरल कोटा में भी आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्ग के लोग आए हैं. आज जब कमजोर, दलित, आदिवासी और पिछड़ा वर्ग के बच्चे आगे आ रहे हैं, तो मनुवादी लोगों के पेट में दर्द हो रहा है़. सदन में बैठा कोई भी सदस्य यह नहीं कह सकता कि सरकार ने JPSC के मामले में कोई भी हस्तक्षेप किया है या एग्जाम को टेम्पर करने का प्रयास किया है. आंदोलन प्रायोजित है़ विश्व हिंदू परिषद के लोगों को धरना पर बैठाया जा रहा है़, आंदोलन करने वालों को बैक डोर से विपक्ष पैसा दे रहा है, JPSC मिलने के लिए बुलाती है तो वहां भी स्टूडेंट नहीं जाते हैं.'
इस पर हमने झारखण्ड स्टूडेंट यूनियन से जुड़े मनोज यादव से बात की, उन्होंने कहा,
'तमाम कैंडिडेट्स को बिना कॉपी के पास कर दिया गया है, हम 21 दिसंबर को JPSC की शवयात्रा निकाल रहे हैं, आन्दोलन JPSC को भंग किए जाने तक लगातार चलता रहेगा. आंदोलन कर रहे हमारे तमाम साथियों को गिरफ्तार किया गया था, कहा गया था कि धारा 144 के तहत गिरफ्तार किया गया है, बाद में कोर्ट में पेश किया गया. रांची SDM ने मुझे भी वारंट भेजकर शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार करने की धमकी दी है. '
हेमंत सोरेन के मनुवादियों के पेट में दर्द हो रहा है वाले बयान पर मनोज कहते हैं,
'मुख्यमंत्री को मालूम ही नहीं है,करीब 60 फ़ीसद आलरेडी रिजर्व्ड है, करीब 26 फ़ीसद ST, 11 फ़ीसद SC, 14 OBC का रिज़र्व है और 10 फ़ीसद EWS का रिज़र्व है. जितना रिज़र्व कोटा है उसमें तो हम स्थानीय पास ही होंगें.  ये मामला सीटों का नहीं है कि किसको कितनी सीटें मिलीं, मामला करप्शन का है.'
# परीक्षा रद्द नहीं होगी-  21 दिसंबर 2021 तक JPSC के खिलाफ़ धरने को 51 दिन हो गए हैं, 7 दिन से स्टूडेंट यूनियन के कुछ लोग आमरण अनशन पर भी बैठे हैं. विधानसभा में भी इस मुद्दे पर हंगामा चल रहा है. सरकार का कहना है कि विपक्ष इस मुद्दे को बेवजह तूल दे रहा है और JPSC ने इस बीच प्रेस रिलीज़ जारी कर कह दिया है कि प्रेलिम्स एग्जाम रद्द नहीं होंगें और मेंस की तारीखें भी घोषित कर दी हैं. प्रेस रिलीज़ के मुताबिक 28 से 30 जनवरी 2022 तक रांची के एग्जाम सेंटर्स पर दो पालियों में मुखय परीक्षाएं आयोजित की जायेंगीं. आगे इस मामले में जो भी नया अपडेट आता है, आपको बताएंगे.

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