जापान में अचानक प्रधानमंत्री क्यों बदलने वाला है?
फ़ुमियो किशिदा का कार्यकाल अक्टूबर 2025 तक चलने वाला था. मगर उससे पहले ही उन्होंने लीडरशिप छोड़ने की घोषणा कर दी है. इसके बाद कई नाम उभरे हैं. जो LDP का प्रेसिडेंशियल इलेक्शन लड़ सकते हैं.

जापान के प्रधानमंत्री फ़ुमियो किशिदा ने अपनी पार्टी की लीडरशिप छोड़ने का फ़ैसला लिया है. किशिदा सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के नेता हैं. दूसरे विश्वयुद्ध के बाद इसी पार्टी ने सबसे ज़्यादा समय तक सरकार चलाई है. जापान में सत्ताधारी पार्टी या गठबंधन का नेता ही प्रधानमंत्री होता है. LDP में नेता का चुनाव हर तीन बरस पर होता है. पार्टी के इंटरनल इलेक्शन में. अगला इंटरनल इलेक्शन सितंबर 2024 में होना है. इसमें किशिदा उम्मीदवार नहीं होंगे. उनका नाम बैलेट पर नहीं होगा. यानी, इस चुनाव के बाद कोई और व्यक्ति LDP का लीडर होगा. जैसे ही नए लीडर का चुनाव होगा, किशिदा को प्रधानमंत्री की कुर्सी भी छोड़नी होगी. वो भी उस स्थिति में, जबकि प्रधानमंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल में 13 महीने बचे हुए हैं.
मगर किशिदा बीच में कुर्सी क्यों छोड़ रहे हैं?वो अक्टूबर 2021 में प्रधानमंत्री बने थे. कोविड-19 के दौर में उनके काम को सराहा भी गया. मगर पिछले कुछ बरसों में उनकी पार्टी की छवि ख़राब हुई है. LDP के नेताओं पर करप्शन के आरोप लगे हैं. महंगाई और ख़राब अर्थव्यवस्था की चुनौती भी बढ़ी है. इसके चलते किशिदा सरकार की अप्रूवल रेटिंग गिरी है.
किशिदा की कहानी क्या है?पैदाइश जुलाई 1957 की है. पिता फुमितके किशिदा मिनिस्ट्री ऑफ़ इकोनमी ट्रेड एंड इंडस्ट्री में अधिकारी थे. किशिदा का परिवार मूल रूप से हिरोशिमा का था. वो छुट्टियों में वहां जाते थे. उनके ग्रैंडपेरेंट हिरोशिमा में गिराए गए बम से मारे गए थे. किशिदा के पिता अमेरिका शिफ्ट हुए तो उन्हें भी परिवार के साथ वहां जाना पड़ा. वहीं उनकी पढ़ाई-लिखाई हुई. पढ़ाई खत्म करने के बाद उन्होंने लॉन्ग-टर्म क्रेडिट बैंक ऑफ़ जापान में काम किया. फिर राजनीति का रुख कर लिया. 1993 में पहली बार संसद पहुंचे. उन्हें 2008 में तत्कालीन प्रधानमंत्री यासुओ फुकुदा की कैबिनेट में जगह मिली. उन्होंने कंज्यूमर अफेयर्स एंड फ़ूड सेफ्टी मिन्सिट्री संभाली.

2012 में शिंज़ो आबे देश के प्रधानमंत्री बने. इनकी सरकार में किशिदा को विदेश मंत्री बनाया गया. वो विश्वयुद्ध के बाद सबसे लंबे समय तक जापान के विदेश मंत्री रहे. 2021 से पार्टी के अध्यक्ष और देश के प्रधानमंत्री हैं.
चुनाव का प्रोसेस क्या है?LDP के इंटरनल इलेक्शन में सांसद और पार्टी के रजिस्टर्ड कार्यकर्ता वोट डालते हैं. एक सांसद का वोट काउंट एक है. जबकि कार्यकर्ताओं को सांसदों की कुल संख्या के अनुपात में बांटा जाता है.
जापान की संसद में दो सदन हैं. ऊपरी सदन को हाउस ऑफ़ काउंसिलर्स कहते हैं. इसके सदस्यों की कुल संख्या 248 है. जबकि निचले सदन का नाम है, हाउस ऑफ़ रेप्रजेंटेटिव्स. इसमें 465 सदस्य होते हैं. अगर किसी कैंडिडेट को पहले राउंड में बहुमत नहीं मिलता, फिर दूसरे राउंड की वोटिंग कराई जाती है. दूसरे राउंड में पहले राउंड के टॉप-टू कैंडिडेट्स के बीच मुकाबला होता है.
LDP के पास दोनों सदन मिलाकर 369 सांसद हैं. रजिस्टर्ड पार्टी मेंबर्स की संख्या लगभग 11 लाख है.
जैसे ही LDP नया लीडर चुन लेगी, वैसे ही संसद के दोनों सदनों की साझा बैठक बुलाई जाएगी. उसमें सभी सांसद वोट डालेंगे. जो भी कैंडिडेट वहां पर बहुमत हासिल करेगा, उसको प्रधानमंत्री की कुर्सी मिलेगी. LDP के पास दोनों सदनों में बहुमत है. इसलिए, उसके नेता का प्रधानमंत्री बनना तय है.
LDP की छवि ख़राब हुई है? 2 बिंदुओं में समझिए
नंबर 1. करप्शन –पार्टी के नेताओं पर कई तरह के करप्शन के आरोप लगे हैं. सबसे ज़्यादा चर्चा में है चंदा चोरी स्कैम है. DLP के अंदर कई गुट बने हुए हैं. ये रिवायत पार्टी बनने के साथ ही 1955 से चली आ रही है. इसमें सबसे ताकतवर गुट सबसे ताकतवर और सबसे ज़्यादा सरकारी पद की मांग करता है. फिर पार्टी के अंदर के गुट अपने अपने स्तर पर पार्टी के लिए चंदा जुटाने के लिए फंड रेज़िंग करते हैं. इसका सही लेखा जोखा पार्टी को देना होता है. आरोप हैं कि कई पार्टी के नेताओं ने चंदे का पैसा अपनी जेब में रख लिया. और इसका गलत लेखा जोखा पार्टी को सौंपा. इसमें सबसे बदनाम शिंजो आबे गुट हुआ है. जुलाई 2022 में आबे की हत्या के बाद ये गुट और मज़बूत हुआ है. वो आबे के नाम पर लोगों से फंड मांगता है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस गुट के नेताओं पर 60 करोड़ रुपए का घोटाला करने के आरोप हैं. ये तो एक तरह का स्कैम हुआ. इसके आलावा DLP के सांसदों पर अवैध रूप से जमीन खरीदना, काम में कांट्रेक देने में फेवर करने जैसे आरोप भी लगे हैं. उदाहरण के लिए 2017 में एक ज़मीन की ख़रीद से जुड़े मामले में शिंज़ो आबे का नाम भी उछाला गया था. शिंज़ो आबे पर अपने गुट के लोगों को करप्शन केस से बचाने के लिए न्यायपालिका में छेड़छाड़ के आरोप भी लगे हैं. आरोप ये कि आबे न्यायपालिका में ऐसे लोगों के रिटायर्मेंट की तारीख बढ़ाना चाहते थे जो उनके करीबी हैं. ताकि उनकी पार्टी के जिन लोगों पर करप्शन का केस है उसे रफ़ा दफा किया जा सके. ये तो पार्टी की छवि ख़राब होने की एक वजह हुई.
दूसरी वजह है ख़राब अर्थव्यवस्था-जापान की अर्थव्यवस्था लगातार ख़राब होती जा रही है. पिछले 2 सालों में देश की GDP में तुलनात्मक रूप से गिरावट आई है. फरवरी 2024 में जापान दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था से चौथे नंबर पर आ गया. चूंकि DLP ही सत्ता में है इसलिए इसका दोष भी पार्टी को ही गया. ये तो हुई पार्टी की छवि ख़राब होने की वजह. इसे ठीक करने के लिए फुमियो किशिदा क्या कर रहे हैं?
- पहला तो उन्होंने कई मंत्रियों को सरकार और नेताओं को पार्टी से छुट्टी कर दी है. साथ ही पार्टी के अंदर मौजूद ऐसे कई गुटों को खत्म किया जिनपर चंदा चोरी के आरोप लगते थे.
- दूसरा किशिदा ने राजनीतिक चंदा लेने के लिए कानून सख्त किए.
- इसके अलावा कुछ मौकों पर किशिदा ने करप्शन के लिए जनता से सार्वजनक रूप से माफ़ी भी मांग चुके हैं.
इन सबके बाद भी बात बनी नहीं. पार्टी के अंदर ही कई गुट उनके विरोध में आ गए और उनका गुट पिछड़ता गया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस समय किशिदा का गुट पार्टी के अंदर नंबर 4 पोज़ीशन पर है. अप्रैल 2024 में हुए उपचुनावों में पार्टी ने तीनों सीटें गंवा दी. इससे फिर किशिदा के नेतृत्व के प्रति संदेह पैदा हुआ. और अब खुद उन्होंने पार्टी की लीडरशिप से हटने का एलान किया है.
किशिदा नहीं तो कौन?कई नाम उभरे हैं. जो LDP का प्रेसिडेंशियल इलेक्शन लड़ सकते हैं.
कुछ नामों पर ग़ौर करिए.
- शिगेरु इशिबा.
चार बार पार्टी प्रेसिडेंट का चुनाव लड़ चुके हैं. सितंबर 2007 से अगस्त 2008 तक जापान के रक्षा मंत्री रहे. ओपिनियन पोल्स में उनका नाम सबसे आगे चल रहा है. हालांकि, उन्होंने अभी तक चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं जताई है.
- तोशिमित्सु मोतेगी.
LDP के सेक्रेटरी-जनरल हैं. फ़ॉरेन, ट्रेड और इकॉनमी मिनिस्ट्री संभाल चुके हैं.
- शिनजिरो कोइज़ुमी.
अतीत में पर्यावरण मंत्रालय चला चुके हैं. ओपिनियन पोल में दूसरे नंबर पर चल रहे हैं. उनके पिता जुनीचिरो कोइज़ुमी 2001 से 2006 तक जापान के प्रधानमंत्री थे.
- सनाय ताकाइची.
इकॉनमिक सिक्योरिटी मिनिस्टर रहीं. 2021 के इंटरनल इलेक्शन में किशिदा के ख़िलाफ़ खड़ी हुईं थी.
- तारो कोनो.
विदेश और रक्षा मंत्रालय संभाल चुके हैं. अभी डिजिटल मिनिस्टर हैं.
- योको कामिकावा.
अभी जापान की विदेश मंत्री हैं.
स्थापना 15 नवंबर 1955 को हुई. मुख्यालय जापान की राजधानी टोक्यो में है
1945 में अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु हमला किया. इसके बाद जापान के सम्राट हिरोहितो ने आत्मसमर्पण कर दिया. दूसरा विश्वयुद्ध खत्म हुआ. 1947 में जापान ने संसदीय प्रणाली वाली व्यवस्था अपनाई. उसी साल चुनाव हुए, तेत्सू कातायामा देश के प्रधानमंत्री बने. वो जापान की सोशलिस्ट पार्टी से आते थे. इनकी सरकार एक साल भी नहीं चल पाई. फिर डेमोक्रेटिक पार्टी के हितोशी अशिदा ने देश की कमान संभाली. जापान अभी-अभी युद्ध से बाहर निकला था. वहां राजनीतिक स्थिरता नहीं थी. राजनीतिक दलों में बहुत सारे मतभेद थे.
फिर आया 1955 का साल. जापान की दो बड़ी रूढ़िवादी पार्टियां साथ आई. डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हातोयामा और लिबरल पार्टी के नेता ओगाटा ने नई पार्टी बनाने का फ़ैसला किया. इसका नाम रखा, लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP). तबसे LDP जापान की सत्ता में बनी हुई है.
1960 के बाद LDP जापान की राजनीति में मज़बूत होती गई. 1964 में टोक्यो में ओलंपिक्स हुएए. इससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच जापान की पैठ मज़बूत हुई. अगले 2 दशकों तक पार्टी की कमान इसाकु सातो के पास रही. वो 1964 से 1972 तक जापान के प्रधानमंत्री भी रहे. उनके कार्यकाल में पार्टी अपने सबसे अनुशासित रूप में थी.
लेकिन 70 के दशक के अंत तक पार्टी की क्रेडिबिलिटी कम होने लगी. पार्टी का नाम भ्रष्टाचार और घोटालों में आने लगा. इसकी सबसे बड़ी वजह पार्टी में फूट थी. पार्टी के अंदर मतभेद बढ़ा. 1993 में पार्टी का लिबरल कंज़रवेटिव धड़ा अलग हो गया. उसके 10 नेताओं ने मिलकर नई पार्टी बनाई. नाम रखा साकिगाके. इस पार्टी ने 6 और विपक्षी पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाई. लेकिन 1994 में ये गठबंधन टूट गया और फिर LDP सरकार में आ गई. पहली बार LDP सत्ता से बाहर हुई थी. ऐसा एक मर्तबे और हुआ. 2009 से 2012 तक. इस बीच जापान डेमोक्रेटिक पार्टी ने सरकार बनाई. वो LDP का सबसे बुरा दौर माना जाता है. उस दौरान पार्टी के अस्तित्व पर सवाल उठने लगे थे.
फिर सितंबर 2012 में शिंज़ो आबे ने पार्टी की कमान संभाली. और, पार्टी को लगातार जीत दिलाई. वो 2012 से 2020 तक देश के प्रधानमंत्री थे. आबे ने 2020 में ख़राब हेल्थ के चलते इस्तीफ़ा दे दिया. फिर एक बरस के लिए योशिहिदे सुगा प्रधानमंत्री बने.
आख़िरकार, 2021 का चुनाव LDP ने फ़ुमिया किशिदा के नेतृत्व में लड़ा. पार्टी ने चुनाव जीता. किशिदा प्रधानमंत्री बन गए. उनका कार्यकाल अक्टूबर 2025 तक चलने वाला था. मगर उससे पहले ही उन्होंने लीडरशिप छोड़ने की घोषणा कर दी है.
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