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इज़रायली कंपनी पर रिपोर्ट, पूरी दुनिया में हड़कंप मचा!

रिपोर्ट में गौरी लंकेश पर क्या कहा गया है?

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ताल हनान (फोटो-सोशल मीडिया)
ताल हनान (फोटो-सोशल मीडिया)
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अभिषेक
16 फ़रवरी 2023 (अपडेटेड: 16 फ़रवरी 2023, 08:45 PM IST)
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08 महीने. 25 देश. 30 मीडिया संस्थान. 100 पत्रकार और, एक पर्दाफाश.

पर्दाफाश ये कि, इज़रायल में बैठे कुछ लोग दुनियाभर में लोकतंत्र का गला घोंट रहे हैं. वे विदेशों में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री वाले चुनावों का नतीजा बदलवा रहे हैं. कैसे? फ़र्ज़ी सोशल मीडिया कैंपेन चलाकर, बोट्स के ज़रिए अफ़वाहें फैलाकर, फ़ोन और वेबसाइट हैक करवाकर आदि. ये तो कुछ ज्ञात तरीके हुए. लेकिन उनका कारनामा यहीं तक सीमित नहीं है. जो लोग ये काम कर रहे हैं, वे इज़रायल डिफ़ेंस फ़ोर्सेस (IDF), इज़रायल की घरेलू खुफिया एजेंसी शिन बेत और विदेशी खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए काम कर चुके हैं. इस ग्रुप के लीडर का नाम ताल हनान है. हनान IDF की एलीट यूनिट में था. वहां से निकलने के बाद उसने प्राइवेट सिक्योरिटी और इंटेलिजेंस के बिजनेस में हाथ आजमाया. 

ये वाला काम वो दुनिया को दिखा रहा था, लेकिन पर्दे के पीछे कुछ और ही खेल चल रहा था. हनान और उसकी टीम अवैध तरीके से सरकार बनाने और गिराने में मदद कर रही थी. उसके इस सीक्रेट धंधे के बारे में पब्लिक को कोई जानकारी नहीं थी. 15 फ़रवरी को ब्रिटिश अख़बार गार्डियन, इज़रायली अख़बार हारेत्ज़, फ़्रेंच अख़बार ला मोन्द, जर्मन मैगज़ीन डेर स्पीगल. अमेरिकी अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट समेत 30 मीडिया संस्थानों ने वो सब खोलकर रख दिया, जिसे ताल हनान दुनिया से छिपा रहा था.
हनान क्या कुछ छिपा रहा था? वो ये छिपा रहा था कि,

> उसकी कंपनी दुनियाभर में अपने क्लाइंट्स के पक्ष में माहौल बना रही थी. आप कहेंगे कि इसमें ग़लत क्या है? ये तो पीआर का मूलमंत्र है. आपकी बात सही है. लेकिन हनान की कंपनी ने ये काम करने के लिए गैर-कानूनी तरीका अपनाया. उन्होंने झूठी सूचनाएं फैलाईं. विरोधियों के ख़िलाफ़ फर्ज़ी कैंपेन चलाया. फ़ेक न्यूज़ फैलाने के लिए नकली वेबसाइट्स तैयार कीं. कई मामलों में उन्होंने असली लोगों के अकाउंट्स से तस्वीरें चुराकर फ़ेक अकाउंट्स भी बनाए.

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ताल हनान

> हनान ने स्टिंग में दावा किया कि उसकी टीम ने 33 देशों के शीर्ष चुनावों को प्रभावित किया. दावे के मुताबिक, 27 चुनावों में रिजल्ट उसके क्लाइंट के पक्ष में आया.

> स्टिंग के दौरान ये भी पता चला कि, हनान की टीम किसी का भी सोशल मीडिया अकाउंट हैक कर सकती है. और, उनके अकाउंट से कुछ भी पोस्ट कर सकती है. उन्होंने इसका उदाहरण भी दिखाया.

> हनान के पास ‘ब्लॉगर मशीन’ नाम का एक सिस्टम है. ये सिस्टम असली लगने वाली वेबसाइट्स तैयार करता है. इन वेबसाइट्स पर मशीन से ही झूठी जानकारियां पोस्ट की जा सकती हैं. बोट्स के ज़रिए इन वेबसाइट्स के लिंक को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर फैलाया जाता है.

> हनान के कुछ प्रोजेक्ट्स को डेमोमैन इंटरनैशनल के थ्रू चलाया जाता है. ये कंपनी इज़रायल की डिफ़ेंस मिनिस्ट्री की वेबसाइट पर डिफ़ेंस एक्सपोर्ट्स को बढ़ावा देने वाली फ़र्म के तौर पर लिस्टेड है. ताल हनान इस कंपनी का फ़ाउंडर और सीईओ है.

> हनान की टीम इस समय अफ़्रीका में एक चुनाव पर काम कर रही है. उसने देश का नाम नहीं बताया. हालांकि, इस समय नाइजीरिया का राष्ट्रपति चुनाव सबसे ज़्यादा चर्चा में है. और, उसकी टीम एक बार 2015 में नाइजीरिया के राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर चुकी है. इसलिए, सारे संकेत नाइजीरिया की तरफ़ ही इशारा करते हैं. हनान की एक टीम ग्रीस और एक टीम यूएई में भी है. उसने ये भी कहा कि कंपनी के दो प्रोजेक्ट्स अमेरिका में चल रहे हैं. अमेरिका में अगले साल राष्ट्रपति चुनाव होने वाला है.

> एक मीटिंग के दौरान हनान ने कुछ उदाहरण दिखाए. ये साबित करने के लिए कि उसकी टीम क्या कुछ कर सकती है? एक उदाहरण केन्या का था. 15 अगस्त 2022 को अंडरकवर पत्रकारों की टीम हनान के साथ मीटिंग कर रही थी. उस रोज़ केन्या के राष्ट्रपति चुनाव का रिजल्ट आने वाला था. हनान ने लाइव डेमो में दिखाया कि उसके पास विलियम रुटो के करीबियों के सोशल मीडिया अकाउंट्स का एक्सेस है. दरअसल, हनान की टीम रुटो को हराने के लिए काम कर रही थी. हालांकि, वे सफ़ल नहीं हो पाए. रुटो चुनाव जीत गए. लेकिन जीतने के अगले ही दिन मीडिया में ख़बरें छपने लगीं कि रुटो ने चुनाव में धांधली की है. इस आरोप का भरपूर प्रचार किया गया. ये साबित करने के लिए रुटो का चुनाव ग़लत है और नतीजे को अवैध घोषित कर देना चाहिए.

अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि, ये राज़ खुला कैसे?

इस मिशन की शुरुआत बेंगलुरु में हुई एक हत्या से हुई थी. वो 05 सितंबर 2017 की रात थी. गौरी लंकेश अपने दफ़्तर का काम निपटाकर घर लौट रहीं थी. जैसे ही उन्होंने अपने घर का दरवाज़ा खोला, घात लगाकर बैठे अपराधियों ने उनके ऊपर गोलियां चलानी शुरू कर दीं. गौरी लंकेश की मौके पर ही मौत हो गई. इस घटना ने भारत और पूरी दुनिया में सनसनी फैला दी. लंकेश कट्टरता के ख़िलाफ़ मुखर थीं. वो फ़ेक न्यूज़ फैलाने वालों का विरोध करतीं थी. उनका अपना एक न्यूज़पेपर था. गौरी लंकेश पत्रिके के नाम से. उनका आख़िरी संपादकीय फ़ेक न्यूज़ फ़ैक्ट्री के ख़िलाफ़ ही था. टाइटल था, इन दी ऐज ऑफ़ फ़ॉल्स न्यूज़. इसमें उन्होंने लिखा था कि वो भी फ़ेक न्यूज़ का शिकार हुईं. लेकिन उनका सांप्रदायिक हिंसा या प्रोपेगैंडा फैलाने का कोई इरादा नहीं था. संपादकीय की आख़िरी पंक्ति में लिखा था, 

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गौरी लंकेश

गौरी लंकेश की हत्या के आरोप में पुलिस ने 17 लोगों को गिरफ़्तार किया. उनका केस अभी भी अदालत में चल रहा है. गौरी लंकेश की हत्या के बाद फ़ॉरबिडन स्टोरीज़ नाम की एक संस्था ने उनका काम आगे बढ़ाने का फ़ैसला किया. फ़ेक न्यूज़ की फ़ैक्ट्रियों का कच्चा-चिट्ठा खोलने का काम. फ़ॉरबिडन स्टोरीज़ एक नॉन-प्रॉफ़िट संस्था है. पेगासस के खुलासे के पीछे इन्हीं का हाथ था. इसका हेडक़्वार्टर फ़्रांस की राजधानी पैरिस में है. ये संस्था किसी भी तरह के ख़तरे का सामना कर रहे पत्रकारों की मदद करती है. सूचनाओं को सुरक्षित रखने में और उन्हें पब्लिश करने में.

अगर आप उनकी वेबसाइट के अबाउट अस सेक्शन में जाएं तो, वहां पहली लाइन में लिखा है,

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तो, फॉरबिडन स्टोरीज़ ने गौरी लंकेश के काम को जारी रखने का फ़ैसला किया. उन्होंने इस प्रोजेक्ट को नाम दिया, स्टोरी किलर्स. इस प्रोजेक्ट में 30 मीडिया संस्थानों के 100 से अधिक पत्रकारों को शामिल किया गया. उन्होंने मिलकर ऐसी कंपनियों को ट्रैक करना शुरू किया, जो विचारों को प्रभावित करने, चुनावों का नतीजा बदलने, किसी की साख खराब करने और सच को दबाने जैसे कामों में जुटीं है. और, इस धंधे में उनका एक ही उसूल है. पैसा. भले ही वो कहीं से भी आता हो.

इसी प्रोजेक्ट के क्रम में पत्रकारों को होहे के बारे में पता चला. तब रेडियो फ़्रांस, हारेत्ज़ और मार्कर के तीन पत्रकारों ने एक टीम बनाई. उन्होंने ख़ुद को क्लाइंट की तरह पेश किया. जुलाई 2022 के आसपास उन्होंने हनान की टीम से बातचीत शुरू कर दी. अंडरकवर पत्रकारों ने बताया कि वे एक अफ़्रीकी देश के चुनाव का नतीजा प्रभावित करना चाहते हैं. हनान इसके लिए राज़ी हो गया. धीरे-धीरे ये बातचीत बढ़ने लगी. दिसंबर 2022 में हना ने तीनों को मिलने के लिए तेल अवीव के पास एक दफ़्तर में बुलाया. उस दफ़्तर में कोई नेम प्लेट नहीं था. वहां कंपनी का नाम तक नहीं लिखा था. हनान ने अपना परिचय जॉर्ज के तौर पर दिया. उसने अपना असली नाम बताने से मना कर दिया. तीनों पत्रकार इस पूरी बातचीत को गुप्त कैमरे से रेकॉर्ड कर रहे थे. अब उन्होंने इस रिकॉर्डिंग को रिलीज़ कर दिया है. इसने इज़रायल के साथ-साथ पूरी दुनिया में हड़कंप मचा दिया है. अभी ये साफ़ नहीं है कि हनान की टीम ने केन्या और नाइजीरिया के अलावा और किन देशों के चुनावों में हेरफेर की. हालांकि, दावा किया जा रहा है कि उनका कारोबार अफ़्रीका और एशिया से लेकर लैटिन अमेरिका तक फैला हुआ है. उन्होंने कुछ कॉर्पोरेट क्लाइंट्स के लिए भी काम किया है.

रिपोर्ट छपने के बाद क्या कुछ हो रहा है?

- ताल हनान ने सभी आरोपों से इनकार कर दिया है. उसने कहा कि मैंने कोई ग़लत काम नहीं किया है.

- इज़रायल के रक्षा मंत्रालय ने बयान देने से मना कर दिया. हनान की कंपनी डिफ़ेंस मिनिस्ट्री की साइट पर लिस्टेड है.

- फ़्रांस के न्यूज़ चैनल BFM टीवी ने एक बड़े ऐंकर को चैनल से सस्पेंड कर दिया है. ऐंकर ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि, रूस पर लगे प्रतिबंधों के कारण मोनाको की याट इंडस्ट्री बर्बाद हो रही है. इस रिपोर्ट को ताल हनान ने अंडरकवर पत्रकारों के सामने दिखाया था. पत्रकारों ने चैनल से इस पर जवाब मांगा. तब चैनल ने इंटरनल जांच बिठाई और ऐंकर को चैनल से बाहर निकाल दिया. ऐंकर ने रिपोर्ट के लिए पैसा लेने के आरोप से इनकार किया है. हालांकि, उन्होंने कहा कि हो सकता है मुझे गुमराह किया गया हो.

ये तो हुई टीम होहे की बात. लेकिन दुष्प्रचार का मसला यहीं तक सीमित नहीं है. फ़ॉरबिडन स्टोरीज़ ने प्रोजेक्ट के तहत पांच रिपोर्ट्स पब्लिश की हैं.

> पहले हिस्से में गौरी लंकेश की हत्या और उसके बाद के घटनाक्रम की चर्चा की गई है.

> दूसरे पार्ट में ताल हनान और टीम होहे का धागा खोला गया है.

> तीसरे पार्ट में एक और इज़रायली कंपनी की पड़ताल की गई है. परसेप्टो इंटरनैशनल ख़ुद को परसेप्शन बनाने के उस्ताद के तौर पर पेश करती है. दावा किया गया है कि, इस कंपनी ने बुर्किना फ़ासो में रेडक्रॉस कमिटी को काबू में रखने के लिए झूठी रपटें छपवाईं थीं.

> चौथे पार्ट में डिजिटल इंफ़्लुएंसर्स पर फ़ोकस किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में डिजिटल इंफ़्लुएंसर्स ने खाड़ी देश के एक पत्रकार को टारगेट किया. आरोप हैं कि उनमें से एक को सऊदी अरब के प्रिंस MBS ने पैसा खिलाया था.

> पांचवां हिस्सा इनसाइर इंटरव्यू का है. इसमें एक डिजिटल पीआर कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर से बात की गई है. रिपोर्ट में मैनेजर की पहचान छिपा ली गई है. उसने दावा किया है कि उसकी कंपनी पिछले दरवाज़े से ग़लत कामों में जुटी हुई है.

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