जंग के बीच PM मोदी यूक्रेन क्यों जा रहे हैं? पुतिन से दोस्ती टूट जाएगी?
ये दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब यूक्रेन की फ़ौज रूस के अंदर घुसती जा रही है. इसने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को सकते में डाल दिया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 अगस्त 2024 को यूक्रेन जा रहे हैं. 19 अगस्त को विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि कर दी. ये न सिर्फ़ पीएम मोदी का पहला यूक्रेन दौरा है, बल्कि 1992 में यूक्रेन के साथ डिप्लोमेटिक संबंध बनने के बाद से किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला दौरा होगा. ये दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब यूक्रेन की फ़ौज रूस के अंदर घुसती जा रही है. इसने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को सकते में डाल दिया है. भारत और रूस की क़रीबी जगजाहिर है. जुलाई में पीएम मोदी रूस गए थे. अब वो यूक्रेन जा रहे हैं.
इसलिए, आशंका जताई जा रही है कि इसका असर भारत-रूस के रिश्तों पर पड़ सकता है. आइए समझते हैं.
- भारत-यूक्रेन संबंधों का इतिहास क्या है?
- जंग के बीच पीएम मोदी यूक्रेन क्यों जा रहे हैं?
- और, पीएम मोदी के दौरे में क्या-क्या हो सकता है?
यूक्रेन से पहले पीएम मोदी 21 और 22 अगस्त को पोलैंड के दौरे पर भी होंगे. पिछले 45 सालों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का ये पहला पोलैंड दौरा होगा. डॉनल्ड टुस्क पोलैंड के प्रधानमंत्री हैं. उन्हीं के आमंत्रण पर पीएम मोदी पोलैंड जा रहे हैं.
पोलैंड, सेंट्रल यूरोप में बसा है. क्षेत्रफल लगभग 3 लाख 22 हज़ार वर्ग किलोमीटर है. भारत के मध्य प्रदेश राज्य के बराबर. पोलैंड की ज़मीनी सीमा सात देशों से लगती है - जर्मनी, चेक रिपब्लिक, स्लोवाकिया, यूक्रेन, बेलारूस और लिथुआनिया. इसके अलावा रूस का कालिनिग्राद प्रांत भी पोलैंड की सीमा से मिलता है. कालिनिग्राद रूसी मेनलैंड से अलग बसा है. पोलैंड की राजधानी वारसॉ है. नई दिल्ली से हवाई दूरी लगभग 6 हज़ार किलोमीटर दूर है. जनसंख्या 3 करोड़ 80 लाख. सबसे ज़्यादा 73 फीसदी लोग ईसाई है.
भारत-पोलैंड के रिश्ते कैसे रहे हैं?दूसरे विश्व युद्ध के दौरान भारत की रियासतों ने हज़ारों पोलिश नागरिकों को अपने यहां शरण दी थी. उस समय भारत ब्रिटिशर्स के कंट्रोल में था. 1947 में आज़ादी मिली. फिर 1954 में भारत और पोलैंड के बीच राजनयिक संबंधों की शुरुआत हुई. जून 1955 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू पोलैंड गए. 1957 में भारत ने वारसॉ में अपना दूतावास खोला. पंडित नेहरू के बाद इंदिरा गांधी ने 1967 में और मोरारजी देसाई ने 1979 में बतौर प्रधानमंत्री पोलैंड का दौरा किया. उसके बाद से सूखा पड़ा रहा. अब पीएम मोदी नई परंपरा शुरू कर रहे हैं.
व्यापारिक संबंध कैसे हैं?
भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक़, 2021-22 में दोनों देशों के बीच 27 हज़ार करोड़ रुपए से ज़्यादा का व्यापार हुआ था.
क्या ख़रीदा-बेचा जाता है?
भारत से पोलैंड: कपड़ा, रसायन, खाद्य उत्पाद, दवाएं, और इंजीनियरिंग के सामान.
पोलैंड से भारत: मशीनरी, इलेक्ट्रिकल उपकरण, रसायन, और कृषि उत्पाद.
पोलैंड में तकरीबन 25 हज़ार भारतीय समुदाय के लोग रहते हैं. इनमें से लगभग 5 हज़ार स्टूडेंट हैं.
यूक्रेन का चैप्टरपीएम मोदी का पोलैंड दौरा 22 अगस्त को खत्म हो जाएगा. फिर वो ट्रेन में बैठकर यूक्रेन की राजधानी किएव पहुंचेगे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, उनकी ट्रेन यात्रा करीब 10 घंटे की होने वाली है.
रूस के हमले के बाद से यूक्रेन ने अपना एयरस्पेस बंद कर रखा है. वहां कमर्शियल या प्राइवेट प्लेन नहीं उड़ रहे हैं. इसलिए, जो भी विदेशी नेता यूक्रेन जाते हैं, उनको पोलैंड से ट्रेन में सफर करना पड़ता है.
यूक्रेन पूर्वी यूरोप में पड़ता है. इसकी ज़मीनी सीमा भी सात देशों से लगती है - पोलैंड, स्लोवाकिया, हंगरी, रोमेनिया, मॉल्दोव, रूस और बेलारूस. यूक्रेन की आबादी भी पोलैंड के बराबर ही है. लगभग तीन करोड़ 80 लाख. सबसे ज़्यादा 85 फीसदी लोग ईसाई हैं. यूक्रेन पिछले ढाई बरसों से इंटरनैशनल पॉलिटिक्स के केंद्र में है. वजह, रूस के साथ चल रही जंग.
भारत और यूक्रेन के संबंध कैसे हैं?भारत और यूक्रेन के बीच अब तक 17 से ज़्यादा द्विपक्षीय समझौते हो चुके हैं. 2000 के दशक में दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ा. 2003 से 2005 के बीच दोनों देशों के बीच व्यापार 8 हज़ार करोड़ रुपए से ज़्यादा पहुंच गया था. 2006 में भारत से यूक्रेन का आयात दोगुना हो गया.
दोनों देश के रिश्ते सही चल रहे थे. फिर आया साल 2014. रूस ने क्रीमिया पर कब्ज़ा कर लिया. ये यूक्रेन का हिस्सा हुआ करता था. विवाद बढ़ा तो मामला संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) भी पहुंचा. यहां ज्यादातर पश्चिमी देशों ने रूस की निंदा की. लेकिन भारत, रूस की आलोचना से बचता रहा. भारत ने रूस की निंदा वाले किसी भी प्रस्ताव के समर्थन में वोटिंग नहीं की. भारत ने सिर्फ इतना कहा कि हम मसले का शांतिपूर्ण निपटारा चाहते हैं. भारत, रूस पर प्रतिबंध लगाने के भी ख़िलाफ़ था.

इन सबके बावजूद भारत के यूक्रेन के साथ रिश्ते सामान्य रहे. 2021 में यूक्रेन ने भारत के साथ लगभग 560 करोड़ रुपए की एक डील साइन की थी. इस डील में यूक्रेन से भारत को कुछ हथियार मिले और यूक्रेन को मिला भारतीय सेना के कुछ हथियारों के मेंटनेंस का कांट्रेक्ट.
फिर फरवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला बोल दिया. पश्चिमी देशों ने रूस की निंदा की. भारत सीधी आलोचना से बचता रहा. उसने रूस पर प्रतिबंध लगाने का भी समर्थन नहीं किया. उल्टा, भारत इसके ख़िलाफ़ गया. उसने प्रतिबंधों के बावजूद रूस से व्यापार जारी रखा. सस्ते दामों पर तेल खरीदा. इससे भारत को बहुत मुनाफ़ा हुआ. UN में रूस की आलोचना वाले प्रस्तावों पर भारत ने वॉकआउट किया.
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फिर जून 2024 में स्विटज़रलैंड में यूक्रेन जंग को लेकर एक समिट आयोजित की गई. इसे यूक्रेन शांति सम्मलेन का नाम दिया गया. 16 जून को इस समिट का साझा बयान आया. इसमें भारत शामिल नहीं था. भारत ने कहा कि इस मसले में दो पक्ष हैं. यहां दूसरा पक्ष यानी रूस मौजूद नहीं है. बिना उसकी सहमति से कोई भी सामाधान निकालना सही नहीं होगा.
यूक्रेन में पीएम मोदी क्या करने वाले हैं?1991 में सोवियत यूनियन के विघटन के बाद यूक्रेन एक स्वतंत्र राष्ट्र बना था. उसी बरस भारत ने यूक्रेन को मान्यता दे दी थी. इसके अगले ही साल 1992 में डिप्लोमेटिक संबंध भी स्थापित हुए थे. अगर यूक्रेन और पोलैंड दौरे का इतिहास देखें तो काफ़ी समानता नज़र आती है. पोलैंड में 45 बरसों के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की विजिट हो रही है. वहीं यूक्रेन में भारतीय प्रधानमंत्री का पहला दौरा हो रहा है. जुलाई में जब ऑस्ट्रिया गए थे, तब 41 बरसों का गैप था.
विदेश मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारी तन्मय लाल ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि दोनों नेताओं के बीच डिफेंस, इकॉनमी, बिजनेस, साइंस और टेक्नॉलजी पर चर्चा होगी. सबसे ज़्यादा चर्चा इस मीटिंग की टाइमिंग पर हो रही है. दो घटनाओं को ध्यान में रखिएगा.
नंबर एक. 08 जुलाई 2024 को पीएम मोदी रूस पहुंचे थे. उसी दौरान रूस ने यूक्रेन में बच्चों के एक अस्पताल पर हमला किया था. इसमें 3 बच्चों की मौत हुई थी. इसकी पश्चिमी दुनिया में खूब आलोचना हुई थी. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा था कि ‘दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेता का दुनिया के सबसे बड़े ख़ूनी अपराधी को गले लगाना शांति की सारी कोशिशों पर पानी फेरता है.’
इसने भारत के लिए दुविधा खड़ी कर दी थी. रूस और पश्चिमी देशों के बीच संतुलन बनाना मुश्किल होने लगा था. इसके कुछ दिनों बाद ही पीएम मोदी के यूक्रेन जाने की अपुष्ट ख़बरें आने लगीं. फिर 19 अगस्त को इसकी पुष्टि भी हो गई.
दूसरी घटना 06 अगस्त की है. जब यूक्रेन की सेना ने रूसी सीमा से लगे कुर्स्क इलाक़े में हमला किया. रूसी नागरिकों से घर खाली करवाए गए. तब से यूक्रेन लगातार बढ़त बना रहा है. उसने कुर्स्क में तीन पुल उड़ा दिए हैं. ज़ेलेंस्की कुर्स्क को बफ़र ज़ोन में तब्दील करना चाहते हैं. इससे रूस भड़का हुआ है.
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