The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Lallankhas
  • Is India stopping buying russian oil as US Trump Claims explained

क्या वाकई रूस से तेल खरीदना बंद करने जा रहा है भारत, ट्रंप का दावा सच है या झूठ?

India-Russia Oil US Claim Fact Check: डॉनल्ड ट्रंप और अमेरिका का दावा है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा. उसकी जगह US और वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदेगा. लेकिन भारत ने इस पर कुछ भी नहीं कहा है. ऐसे में हमने जानने की कोशिश की कि क्या ट्रंप और अमेरिका का दावा सही है. या फिर कुछ और.

Advertisement
Is India stopping buying russian oil as US Trump Claims explained
अमेरिका का दावा है कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा. (Photo: ITG/File)
pic
सचिन कुमार पांडे
4 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 12:42 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर सहमति बनने के बाद शेयर बाजार उछाल मार रहा है. एक्सपोर्टर्स और इंडस्ट्री ने डील पर खुशी जताई है और इसका स्वागत किया है. लेकिन इस डील को लेकर कुछ आशंकाएं भी बनी हुई हैं. खासकर उन दो-तीन चीजों को लेकर, जिनका दावा अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने डील फाइनल होने की घोषणा करते वक्त किया था.

इसमें रूसी तेल की खरीद पर रोक, अमेरिका से एग्रीकल्चर प्रोडक्ट का इम्पोर्ट और US में 500 बिलियन डॉलर का भारतीय निवेश. एग्रीकल्चर इम्पोर्ट पर कॉमर्स मिनिस्टर ने साफ कर दिया है कि किसानों के हित के साथ समझौता नहीं किया जाएगा. 500 बिलियन डॉलर पर भी कहा जा रहा है कि यह दोनों देशों का लक्ष्य है कि 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार (Bilateral Trade) को इतना लेकर जाया जाए.

रूसी तेल की खरीद पर असमंजस

लेकिन एक सवाल जो अभी भी अनसुलझा है, वो ये है कि क्या भारत सच में रूसी तेल की खरीद बंद करने जा रहा है. अब तक भारत सरकार ने इस पर कोई भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया है. मालूम हो कि अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल खरीदने के कारण अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगा रखा था. इस तरह भारत पर कुल टैरिफ 50% था. अब ट्रेड डील के बाद अमेरिका ने यह टैरिफ 18% करने की बात कही है. यानी रूसी तेल खरीदने की एवज में लगाया गया एक्स्ट्रा 25% टैरिफ भी अमेरिका हटाने जा रहा है.

डॉनल्ड ट्रंप का दावा है कि भारत रूस से तेल खरीद पर रोक लगाएगा. इसकी जगह वो अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदने को राजी हो गया है. 4 फरवरी को व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने भी ट्रंप के इसी दावे को दोहराया. रूस से भी अमेरिका के इस दावे पर सवाल किया गया. इस पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि उन्हें इस मामले पर अब तक भारत की तरफ से कोई बयान नहीं मिला है.

सच हो सकता है दावा!

ऐसे में फिलहाल यह साफ नहीं है कि ट्रंप ने भारत के रूसी तेल की खरीद पर रोक का जो दावा किया है, वो सच है या नहीं. लेकिन अगर इसका जवाब ढूंढने की कोशिश की जाए तो इस बात की संभावना अधिक दिखती है कि ट्रंप का दावा सच हो. हालांकि, पूरी तरह से नहीं, बल्कि आंशिक रूप से. समझाते हैं कैसे.

इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट बताती है कि भारतीय कंपनियां अमेरिका के साथ हुए समझौते के तहत रूस से कच्चे तेल की खरीद पर रोक लगा सकती हैं. रिपोर्ट में एक न्यूज एजेंसी ने मामले की जानकारी रखने वाले तीन सूत्रों के हवाले से बताया कि भारतीय तेल कंपनियां इसकी तैयारी कर रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय रिफाइनरीज पहले से किए गए ऑर्डर और कमिटमेंट का सम्मान करते हुए उनकी डिलीवरी लेंगी, लेकिन उसके बाद नया ऑर्डर नहीं लेंगी.

यानी सूत्रों का कहना है कि अब तक रूस से तेल के जो ऑर्डर कंपनियों ने दे दिए हैं, उसके बाद नए ऑर्डर नहीं दिए जाएंगे. हालांकि एक कंपनी ऐसी है, जो अभी भी रूस से तेल खरीदना जारी रख सकती है. वो है नायरा एनर्जी. दरअसल, इस कंपनी की 49% हिस्सेदारी रूस की सबसे बड़ी तेल कंपनी रोसनेफ्ट के पास है. इस कंपनी पर अमेरिका और यूरोपीय देश पहले ही यूक्रेन युद्ध के चलते प्रतिबंध लगा चुके हैं. बाद में नायरा एनर्जी पर भी प्रतिबंध लगाए गए थे.

Image embed
नायरा एनर्जी पर 49% हिस्सेदारी रूसी तेल कंपनी रोसनेफ्ट की है. (Photo: File/Reuters)

रिपोर्ट के अनुसार इन प्रतिबंधों के कारण, कोई भी बड़ा सप्लायर कंपनी के साथ कॉमर्शियल ट्रांजैक्शन के लिए तैयार नहीं है. ऐसे में उसे रूसी तेल खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. सूत्रों ने न्यूज एजेंसी बताया कि नायरा आने वाले समय में भी गैर-प्रतिबंधित संस्थाओं से रूसी तेल की खरीदारी जारी रख सकती है. सूत्रों ने यह भी बताया कि भारतीय अधिकारियों ने दिसंबर में अमेरिकी ट्रेड अधिकारियों से बातचीत के दौरान भी रिफाइनरी की इस खास स्थिति के बारे में बताया गया था. कहा था कि नायरा को रूसी तेल न खरीदने की पॉलिसी से छूट देनी पड़ सकती है. या फिर उसके लिए कोई खास व्यवस्था बनानी पड़ सकती है.

कई कंपनियां पहले ही लगा चुकी हैं रोक 

वहीं रिपोर्ट के अनुसार कई भारतीय रिफाइनरीज पहले ही रूस से तेल खरीदना बंद कर चुकी हैं. इनमें हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL), मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) और HPCL-मित्तल एनर्जी लिमिटेड (HMEL) जैसी कंपनियां शामिल हैं. जानकारी के मुताबिक इन कंपनियों ने अगस्त 2025 में रूस की दो प्रमुख तेल कंपनियों पर अमेरिका की ओर से लगाए गए सैंक्शन के बाद से ही उनसे तेल खरीदना बंद कर दिया था.

अब बताया जा रहा है कि अमेरिका भारत के हुए हालिया समझौते के बाद इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) जैसी अन्य कंपनियां भी अपनी खरीद कम कर देंगी. इसके अलावा भारत की सबसे बड़ी खरीदार रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने भी पिछले साल अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद रूसी तेल की खरीद रोक दी थी. हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने 100,000-150,000 बैरल का ऑर्डर फिर से दिया था, जिसकी डिलीवरी के बाद वह खरीद बंद कर सकती है.

Image embed
रिलायंस इंडस्ट्रीज का जामनगर रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स. (Photo: ril.com)
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

यानी रिपोर्ट की मानें तो ट्रंप के दावों में कुछ हद तक सच्चाई है और भारतीय कंपनियां रूस से तेल खरीद में लगाम जरूर लगाएंगी. लेकिन कुछ जानकारों का यह भी मानना है कि यह इतना आसान नहीं है और भारत अभी भी रूस से तेल खरीदना जारी रख सकता है. नहीं तो ग्लोबल मार्केट भी प्रभावित हो सकता है.

एनर्जी सेक्टर के एक्सपर्ट नरेन्द्र तनेजा ने लल्लनटॉप से बात करते हुए कहा कि रूस से भारत के तेल न खरीदने का दावा डॉनल्ड ट्रंप ने किया है, लेकिन भारत ने अभी इस पर कुछ नहीं कहा है. वह कहते हैं,

Image embed

यह भी पढ़ें- टैरिफ पर कहीं पलट न जाएं ट्रंप? ट्रेड डील पर उनके दावों ने बढ़ाईं धड़कनें

नरेंद्र तनेजा आगे कहते हैं,

Image embed

यानी कुल मिलाकर अभी भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं है कि भारत में रूसी तेल की खरीद का भविष्य क्या होगा. असल जवाब के लिए हमें तस्वीर साफ होने का इंतजार करना होगा. लेकिन इतना जरूर है कि अमेरिकी दबावों और फिर हाल ही में हुई डील से भारत पर दबाव बढ़ा है कि वह एनर्जी के लिए दूसरे सोर्स तलाशे. इस बात की भी संभावना काफी अधिक है कि भारत अब वेनेजुएला से तेल खरीदेगा और अमेरिका से भी खरीद बढ़ा सकता है. 

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: भारत-US ट्रेड डील के बाद रूसी तेल पर चुप क्यों है सरकार?

Advertisement

Advertisement

()