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भारत और चीन खत्म करेंगे अमेरिका की बादशाहत! एलन मस्क ने भी माना- बदल रही है दुनिया

Global Power Shift India China USA: ग्लोबल GDP की ग्रोथ में अकेले भारत का जितना योगदान है, उतना अमेरिका और यूरोप मिलकर भी नहीं दे पाते हैं. वहीं भारत के साथ चीन को मिला दें तो दोनों पूरी दुनिया की ग्रोथ में 40% से ज्यादा अकेले योगदान देते हैं.

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india china dominance on Global GDP growth musk reacts on us global power shift
ग्लोबल जीडीपी ग्रोथ में भारत-चीन का योगदान लगभग 43% है, वहीं अमेरिका का काफी कम. (Photo: ITG/File)
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सचिन कुमार पांडे
2 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 2 फ़रवरी 2026, 03:07 PM IST)
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अमेरिका आज अपनी इकोनॉमी और मिलिट्री के दम पर पूरी दुनिया में एक तरह से दादागिरी चलाता है. डॉनल्ड ट्रंप रोज उठकर एक नए देश पर टैरिफ की घोषणा कर देते हैं और उस पर अपनी शर्तें मानने का दबाव डालते हैं. काफी हद तक देशों को यह शर्तें माननी भी पड़ती है, क्योंकि आज ग्लोबल इकोनॉमी से लेकर फाइनेंसियल सिस्टम और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी पर अमेरिका का दबदबा है. लेकिन इकोनॉमिक रिपोर्ट्स और एक्सपर्ट्स की मानें तो ऐसा ज्यादा लंबे समय तक नहीं चल पाएगा. जल्द ही कुछ देश अमेरिका के एकतरफा दबदबे को चुनौती देने की हालत में होंगे, और उनमें एक देश भारत भी हो सकता है.

ऐसी चर्चा इसलिए चल पड़ी है, क्योंकि हाल ही में इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने 2026 के लिए अपनी जो इकोनॉमिक रिपोर्ट पेश की है, उसमें कुछ चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. सबसे पहले तो IMF ने बताया है कि 2026 में ग्लोबल ग्रोथ यानी पूरी दुनिया की ग्रोथ 3.3% रह सकती है. वहीं 2027 में यह 3.2% रहने का अनुमान है. इसके अलावा IMF ने अलग-अलग देशों की ग्रोथ का भी अनुमान बताया है.

ग्लोबल GDP में योगदान

अब IMF की रिपोर्ट के आधार पर Visual Capitalist नाम के एक पब्लिशर ने कुछ आंकड़े निकाले हैं. यह आंकड़े बताते हैं कि दुनिया की GDP की जो कुल ग्रोथ है, उसमें भारत-चीन मिलकर अकेले 43% का योगदान देते हैं. इसमें भारत का योगदान 17% और चीन का 26.6% है. हैरानी वाली बात यह है कि इसमें अमेरिका का केवल 9.9% योगदान है. और अगर अमेरिका के साथ यूरोपियन यूनियन का योगदान भी मिला दें तो यह 16% होता है. यानी भारत से भी कम.

This visualization ranks countries by their share of global real GDP growth in 2026, showing the nations driving global economic growth.
(Photo: visualcapitalist.com)

यह आंकड़े काफी दिलचस्प हैं. बताते हैं कि दुनिया की ग्रोथ किस हद तक अब भारत और चीन पर टिकी हुई है. ये दो देश मिलकर कुल ग्रोथ में लगभग आधे का योगदान दे रहे हैं. इसकी वजह यह है कि दोनों देश दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं हैं. भारत इस मामले में लगातार कई साल से नंबर 1 बना हुआ है और अभी भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. साल 2026 के लिए भारत की GDP ग्रोथ 6.4% रहने का अनुमान लगाया गया है, जो कि दुनिया में सबसे अधिक है. साल 2027 में भी इसी गति से भारत की अर्थव्यवस्था के बढ़ने का अनुमान है.

मस्क ने भी मानी ताकत

ऐसे में अगर भारत और चीन इसी गति से आगे बढ़ना जारी रखते हैं, तो वह दिन दूर नहीं होगा, जब अमेरिका की बादशाहत को वह सीधे टक्कर देने की स्थिति में होंगे. खुद दुनिया की सबसे अमीर शख्सियतों में से एक और स्पेस एक्स और टेस्ला जैसी कंपनियों के मालिक एलन मस्क ने भी ऐसी ही कुछ बात कही है. वर्ल्ड ऑफ स्टैटिस्टिक्स नाम के पेज ने एक्स पर जब यही आंकड़े शेयर किए, जिसमें ग्लोबल GDP में योगदान देने वाले टॉप 10 देशों का नाम था. इस पर रिप्लाई करते हुए एलन मस्क ने लिखा कि 'The Balance of Power is Changing' यानी कि दुनिया में शक्ति का संतुलन बदल रहा है.

elon musk on india china global power
Photo: X
बदल रहा है शिफ्ट

यानी मस्क यही कहना चाहते हैं कि अब अकेले अमेरिका महाशक्ति नहीं रहेगा. दूसरी शक्तियां भी उसे टक्कर देने के लिए आगे आएंगी. जाहिर तौर पर भारत और चीन इसमें सबसे आगे होंगे. दिल्ली यूनिवर्सिटी में इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर सिद्धार्थ राठौड़ का भी मानना है कि इकोनॉमिक पावर का सेंटर एशिया में शिफ्ट हो रहा है. यह ट्रेंड जारी रहा तो दुनिया मल्टीपोलर हो जाएगी और इस पर किसी एक देश का दबदबा नहीं होगा. दि लल्लनटॉप से बात करते हुए उन्होंने कहा, 

भारत और चीन मिलकर ग्लोबल GDP ग्रोथ में बहुत बड़ा योगदान दे रहे हैं, जिससे पता चलता है कि इकोनॉमिक पावर का केंद्र एशिया की ओर शिफ्ट हो रहा है. इससे ट्रेड पर बातचीत, सप्लाई चेन और इन्वेस्टमेंट फैसलों में उनका दबदबा बढ़ता है, क्योंकि देश और कंपनियां तेजी से उस तरफ जा रही हैं, जहां भविष्य में डिमांड और प्रोडक्शन बढ़ रहा है. अगर यह ट्रेंड जारी रहता है, तो सिस्टम ज्यादा मल्टीपोलर हो जाएगा. स्टैंडर्ड और नियम (डिजिटल, इंडस्ट्रियल, क्लाइमेट) एशियाई प्राथमिकताओं को ज़्यादा दिखाएंगे. और मार्केट और पार्टनरशिप के जरिए प्रभाव बढ़ेगा. लेकिन अमेरिका और EU के पास अभी भी एडवांस्ड टेक, फाइनेंस, गठबंधन और मिलिट्री पावर में बड़ी ताकतें हैं. इसलिए यह बदलाव धीरे-धीरे हो रहा है, अचानक कब्जा नहीं.

तेजी से बढ़ रहा है भारत

अकेले भारत की बात करें तो वह 2025 में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन चुका है. वहीं फोर्ब्स की एक रिपोर्ट के अनुसार 2028 में जर्मनी को पीछे छोड़कर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. यही नहीं, रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2047 तक भारत की इकोनॉमी 30 ट्रिलियन डॉलर की हो जाएगी. संदर्भ के लिए बता दें कि अभी अमेरिका की इकोनॉमी की साइज 30 से 31 ट्रिलियन के बीच मानी जाती है. वहीं चीन की GDP 18-19 ट्रिलियन डॉलर के आस-पास मानी जाती है. यानी भारत 2047 तक अमेरिका की अभी की GDP के बराबर हो सकता है.

अब यह तर्क दिया जा सकता है कि अमेरिका भी तो तब तक बढ़कर आगे पहुंच जाएगा. लेकिन अभी जिस हिसाब से भारत की ग्रोथ तेज है और उसके मुकाबले अमेरिका की काफी कम, तो आने वाले सालों में दोनों की इकोनॉमी की साइज का अंतर भी कम होगा. और 15-20 सालों में अगर भारत उम्मीद के मुताबिक ग्रो करता है, तो कहना गलत नहीं होगा कि दुनिया के सबसे अहम आर्थिक शक्तियों में से एक होगा. अनुमानों के मुताबिक चीन भी तब तक अमेरिका के काफी नजदीक पहुंच चुका होगा. ऐसे में उम्मीद लगाई जा सकती है कि आगे आने वाले सालों में भारत और चीन अमेरिका की बादशाहत को टक्कर दे सकते हैं.

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यह बात अलग-अलग एक्सपर्ट भी कई मौकों पर कहते रहे हैं कि आने वाले सालों में दुनिया की तस्वीर कुछ और होगी. आज के विकासशील देश, तब विकसित होंगे और विश्व में उनकी ताकत भी बढ़ जाएगी. चीन अभी ही आर्थिक महाशक्ति माना जाता है. भारत भी इस तमगे को पाने से ज्यादा दूर नहीं है, अगर उम्मीद के मुताबिक आगे बढ़ता रहता है तो.

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