बालाकोट एयर स्ट्राइक का सबूत क्यों नहीं दिखाया गया? पूर्व एयरफोर्स चीफ ने ही जवाब दे दिया
Air Chief Marshal BS Dhanoa कहते हैं कि तीन चीजें ऐसी हैं जिनसे ये साफ था कि हमने उन्हें हिट किया है. पहली कि जो डैमेज हुआ वो साफ दिख रहा था. दूसरा जो उन्होंने टूटी हुई छत की मरम्मत की, वो भी दिख रहा था. तीसरा कारण जो एयर चीफ बताते हैं, वो काफी दिलचस्प है.
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भारत ने बालाकोट एयर स्ट्राइक के वक्त पाकिस्तानी ठिकाने पर गाइडेड बम गिराये थे, जो एक बिल्डिंग की छत को भेदकर अंदर जा गिरी थी. इस गाइडेड बम को स्पाइस कहा जाता है. ये ऐसा बम है, जो किसी भी बिल्डिंग को छेदते हुए जितनी अंदर जा सकती है, वहां तक जाती है और फिर फट जाती है. भारत के इस हमले पर पाकिस्तान ने कहा था कि उसकी धरती पर भारतीय अटैक सफल नहीं रहा. वहां उसे कोई नुकसान नहीं हुआ लेकिन भारतीय एयरफोर्स के पूर्व चीफ बीएस धनोआ (ACM BS Dhanoa) ने दी लल्लनटॉप से बातचीत में खुद बताया है कि हमले में पाकिस्तान को काफी नुकसान हुआ था.
उन्होंने इसके सबूत भी बताए और कहा कि बालाकोट होने के बाद एयर चीफ और वाइस चीफ ने एक फोटो दिखाई थी. इनमें एक बहावलपुर की एयर स्ट्राइक की सैटेलाइट इमेज थी, जिसमें बिल्डिंग में छेद बने दिखते हैं. उस समय लोग कह रहे थे कि पाकिस्तान में कुछ नहीं हुआ, जबकि उसी तरह के छेद वहां की बिल्डिंग की छत पर बने थे.

भारत की ओर से जारी की गई तस्वीरों पर ACM बीएस धनोआ ने कहा,
जो कमर्शियल सैटेलाइट की इमेजरी होती है, उसका रिजॉल्यूशन क्लासिफाइड इमेजरी से अलग होता है. आपने 60-70 सेंटीमीटर जितना भी बड़ा होल बनाया है, तो उसे देखने के लिए आपको बेहतर रिजॉल्यूशन चाहिए. अगर आपकी रिजॉल्यूशन 2 मीटर है तो पता भी नहीं चलेगा कि छेद कहां है. इसके लिए 15-20 सेंटीमीटर का रिजॉल्यूशन चाहिए.
धनोआ ने बताया कि सेना की क्लासिफाइड इमेजरी को पब्लिक नहीं की जा सकती. जब कमर्शियल इमेजरी में पाकिस्तान पर हमले के सबूत साफ देखे जा सकते थे तो हम अपनी क्लासिफाइड तस्वीरें क्यों दिखाते.
ACM धनोआ ने कहा कि तीन चीजें ऐसी हैं जिनसे ये साफ था कि हमने पाकिस्तान को हिट किया है. पहला कि जो डैमेज हुआ वो साफ दिख रहा था. दूसरा जो उन्होंने टूटी हुई छत की मरम्मत की, वो भी दिख रहा था. तीसरा कारण जो एयर चीफ बताते हैं, वो काफी दिलचस्प है. वो कहते हैं,
चलो मान लेते हैं कि हमने नहीं मारा. तो 40 दिनों तक तो पाकिस्तान ने किसी को वहां जाने ही नहीं दिया और लेकर गए तो कहां? एक मस्जिद में, जिसे हमने मारा ही नहीं था. हमने तो मदरसे को हिट किया था.
आगे ACM धनोआ से पूछा गया कि ऑपरेशन सिंदूर में हमने सैटेलाइट इमेजरी दिखाई थी लेकिन बालाकोट के समय ऐसा क्यों नहीं किया? इसके जवाब में ACM धनोआ कहते हैं,
बालाकोट के समय सैटेलाइट इमेज में पहली दिक्कत तो बादलों की थी. फिर दूसरी इमेजरी हमें जिससे मिलती है, उसे सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) कहते हैं. SAR की इमेजरी क्लासीफाइड (गोपनीय) होती है. ऑपरेशन सिंदूर में भी SAR की इमेज नहीं दिखाई होगी. कमर्शियल इमेज ही दिखाई गई. सिर्फ एक डिबेट जीतने के लिए हम अपनी क्लासीफाइड इमेजरी क्यों दिखाएं?
बता दें कि भारतीय सेना क्लासिफाइड इमेजरी को गोपनीय दस्तावेज की तरह किसी को नहीं दिखाती है.
इसके अलावा पूर्व एयर चीफ ने बालाकोट के समय 'क्लाउड बेनिफिट' से लेकर एयरफोर्स की स्थिति पर बात की. क्या बातें हुईं एयरफोर्स चीफ से, ये जानने के लिए लल्लनटॉप की वेबसाइट और यूट्यूब चैनल पर गेस्ट इन द न्यूजरूम का पूरा एपिसोड उपलब्ध है.
वीडियो: गेस्ट इन द न्यूजरूम: ऑपरेशन सिंदूर में जेट गिरा? अभिनंदन की पूरी कहानी क्या है? ACM बीएस धनोआ ने सब बताया

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