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  • India's 'Kaal Bhairava' Goes Viral in Europe: First Indian AI Combat Aircraft to be Manufactured in Portugal for NATO.

यूरोप में बनेगा भारत का AI फाइटर जेट 'काल भैरव', रफाल को देगा टक्कर

Kaal Bhairava Drone: भारतीय स्टार्टअप FWDA का AI कॉम्बैट ड्रोन 'काल भैरव' अब पुर्तगाल में बनाया जाएगा. 3000 किमी की रेंज और बिना पायलट के 30 घंटे उड़ने की ताकत रखने वाला ये ड्रोन नाटो देशों के लिए गेमचेंजर साबित होगा.

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15 मई 2026 (पब्लिश्ड: 12:29 PM IST)
AI Combat Aircraft
भारत का 'काल भैरव' अब यूरोप में मचाएगा तहलका (फोटो- PTI)
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अभी तक हम और आप यही सुनते आए थे कि भारत ने फ्रांस से रफाल खरीदा, रूस से सुखोई लिया या अमेरिका से प्रीडेटर ड्रोन की डील की. यानी हम दुनिया के सबसे बड़े 'खरीदार' थे. लेकिन कहानी अब पूरी तरह पलट गई है. भारत के एक स्टार्टअप ने ऐसा 'हवाई शिकारी' तैयार किया है कि अब यूरोप वाले कह रहे हैं- "साहब, ये हमारे यहां बनाओ." नाम है- 'काल भैरव'. भारत का पहला AI कॉम्बैट एयरक्राफ्ट.

आज के लल्लनटॉप एक्सप्लेनर में समझेंगे कि आखिर इस ड्रोन में ऐसा क्या है जो पुर्तगाल जैसा देश इसे बनाने के लिए तैयार हो गया और ये कैसे युद्ध के मैदान में रफाल जैसा भौकाल काटेगा. क्या अब महंगे फाइटर जेट्स का जमाना लदने वाला है? क्या भारत अब सिर्फ हथियार खरीदेगा नहीं, बल्कि दुनिया को अपनी उंगलियों पर नचाएगा? इस पूरी कहानी के हर पेच को आसान भाषा में डिकोड करते हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो ये डील सिर्फ पुर्तगाल तक सीमित नहीं है. इसकी धमक नाटो तक देखी जा सकती है.

मेक इन इंडिया का अगला लेवल: डिजाइन इंडिया, मैन्युफैक्चर फॉर वर्ल्ड

अमूमन होता क्या है? कोई विदेशी कंपनी भारत आती है, अपनी फैक्ट्री लगाती है और हम कहते हैं कि 'मेक इन इंडिया' हो गया. लेकिन 'काल भैरव' की कहानी इससे कोसों आगे है. इसे बनाने वाली कंपनी है FWDA यानी फ्लाइंग वेज डिफेंस एंड एयरोस्पेस. यह एक शुद्ध देसी भारतीय स्टार्टअप है. इन्होंने पुर्तगाल की कंपनी 'स्केचपिक्सेल' (SKETCHPIXEL) के साथ हाथ मिलाया है. डील ये है कि तकनीक भारत की होगी, दिमाग भारत का होगा, पेटेंट भारत का होगा, लेकिन इसकी फैक्ट्री पुर्तगाल में लगेगी.

इसे कहते हैं 'रिवर्स ग्लोबल डील'. दुनिया की बड़ी कंपनियां जैसे एप्पल अपना फोन कैलिफोर्निया में डिजाइन करती हैं और चीन या भारत में असेंबल करवाती हैं. अब भारत डिफेंस सेक्टर में वही 'एप्पल' वाली पोजीशन ले रहा है. यह भारत के डिफेंस इकोसिस्टम के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है क्योंकि पहली बार किसी भारतीय कंपनी की बौद्धिक संपदा (IP Rights) का इस्तेमाल यूरोप अपनी जमीन पर उत्पादन के लिए कर रहा है.

काल भैरव का टेक्निकल भौकाल: क्या है इसकी ताकत?

अब बात करते हैं उस 'पक्षी' की जिसने पूरी दुनिया के डिफेंस एक्सपर्ट्स की नींद उड़ा दी है. 'काल भैरव' कोई छोटा-मोटा फोटोग्राफी वाला ड्रोन नहीं है. इसे तकनीकी भाषा में MALE यानी मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस ऑटोनॉमस कॉम्बैट एयरक्राफ्ट कहा जाता है. आसान भाषा में कहें तो ये आसमान का वो शिकारी है जो बहुत ऊंचाई पर उड़ता है और बहुत देर तक हवा में टिका रह सकता है.

FWDA के मुताबिक, इस ड्रोन की सबसे बड़ी खूबी है इसकी 3000 किलोमीटर की रेंज. इसका मतलब समझते हैं? अगर ये दिल्ली से उड़ान भरे तो ये सीमा पार जाकर दुश्मन के ठिकानों की खबर ले सकता है और वापस भी आ सकता है. दूसरी बड़ी बात है इसका 30 घंटे से ज्यादा का एंड्योरेंस. यानी ये बिना रुके लगातार डेढ़ दिन तक आसमान में रह सकता है. रफाल जैसे फाइटर जेट्स को भी कुछ घंटों बाद ईंधन भरने की जरूरत पड़ती है या उनके पायलट थक जाते हैं, लेकिन काल भैरव न थकता है और न रुकता है.

Kaal Bhairava Drone
नाटो देशों की नजर में आया ‘काल भैरव’ (फोटो-FWDA)

पुर्तगाल का चुनाव और NATO का सीक्रेट रास्ता

अब आपके मन में सवाल आएगा कि पुर्तगाल ही क्यों? भारत में क्यों नहीं? दरअसल इसके पीछे एक गहरी कूटनीति और व्यापारिक समझ है. पुर्तगाल 'नाटो' (NATO) का एक महत्वपूर्ण सदस्य है. नाटो यानी वो संगठन जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे शक्तिशाली देश शामिल हैं. अगर भारत का AI एयरक्राफ्ट पुर्तगाल में बन रहा है, तो इसका सीधा मतलब है कि भारतीय तकनीक को नाटो के मानकों (Standards) के हिसाब से ढालना आसान हो जाएगा.

नाटो के एक्सपर्ट पुर्तगाल को अपना दरवाजा मानते हैं. इस हिसाब से यह भारत के लिए नाटो देशों के विशाल बाजार में घुसने का एक 'चोर दरवाजा' या कहें कि 'शानदार एंट्री गेट' है. एक बार अगर यूरोप की जमीन पर बना ये भारतीय ड्रोन सफल हो जाता है, तो कल को पोलैंड, जर्मनी या खुद फ्रांस भी इसे खरीदने के लिए लाइन लगा सकते हैं. यह भारत की 'हार्ड पावर' और 'सॉफ्ट पावर' का एक ऐसा मेल है जो आने वाले दशकों में भारत की डिफेंस इकॉनमी की दिशा बदल देगा.

AI कॉम्बैट और स्वार्म वारफेयर: भविष्य का युद्ध कैसा होगा?

पुराने जमाने के युद्ध में हजारों सैनिक आमने-सामने होते थे. फिर टैंक आए, फिर फाइटर जेट्स आए. लेकिन अब जमाना है 'स्वार्म वारफेयर' का. DRDO के मुताबिक 'स्वार्म' (Swarm Technology) का मतलब होता है मधुमक्खियों का झुंड. कल्पना कीजिए कि आसमान में एक 'काल भैरव' उड़ रहा है और उसके पीछे-पीछे 50 छोटे-छोटे ड्रोन चल रहे हैं. ये सब आपस में एक-दूसरे से बात कर रहे हैं और दुश्मन के रडार को भ्रमित कर रहे हैं.

काल भैरव में लगा AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इतना शातिर है कि ये खुद तय कर सकता है कि नीचे दिख रही गाड़ी किसी आम नागरिक की है या दुश्मन के कमांडर की. इसमें 'ऑटोनॉमस किलिंग' की क्षमता है, हालांकि नैतिक रूप से इस पर हमेशा इंसान का कंट्रोल रहता है. लेकिन तकनीक के मामले में ये इतना एडवांस है कि ये खुद खतरों को भांपकर अपना रास्ता बदल सकता है.

रफाल बनाम काल भैरव: क्या महंगे जेट्स की छुट्टी हो जाएगी?

ये सवाल सबसे जरूरी है. एक रफाल की कीमत करीब 1600 करोड़ रुपये के आसपास बैठती है. उसे चलाने के लिए करोड़ों का तेल चाहिए, एक ट्रेंड पायलट चाहिए जिसकी जान का हमेशा जोखिम रहता है और करोड़ों का मेंटेनेंस चाहिए. दूसरी तरफ काल भैरव जैसे AI ड्रोन इसकी तुलना में काफी सस्ते हैं. अगर युद्ध में एक ड्रोन गिर भी जाए, तो सिर्फ मशीन का नुकसान होता है, किसी मां का बेटा या बेटी शहीद नहीं होती.

डिफेंस एक्सपर्ट्स डीके पांडेय का मानना है कि, 

भविष्य के युद्ध 'हाइब्रिड' होंगे. रफाल जैसे जेट्स तो रहेंगे, लेकिन उनके साथ 'विंगमैन' के तौर पर ये AI ड्रोन उड़ेंगे. यानी जानलेवा मिशन पर पहले काल भैरव जाएगा और जब रास्ता साफ हो जाएगा, तब महंगे फाइटर जेट्स एंट्री मारेंगे. 

FWDA के सीईओ सुहास तेजसकांडा के मुताबिक उनकी कंपनी का लक्ष्य भी यही है कि भारत को इस 'लो-कॉस्ट, हाई-इम्पैक्ट' वारफेयर में नंबर वन बनाया जाए.

आम आदमी और मिडिल क्लास पर इसका क्या असर होगा?

आप सोच रहे होंगे कि भाई ड्रोन पुर्तगाल में बने या पाताल में, मेरी जेब पर क्या असर पड़ेगा? असर पड़ेगा और बहुत बड़ा पड़ेगा. भारत अपनी जीडीपी का एक बहुत बड़ा हिस्सा हथियार खरीदने में खर्च करता है. जब हम रूस या अमेरिका से हथियार खरीदते हैं, तो हमारा विदेशी मुद्रा भंडार कम होता है और हम उन देशों की नीतियों पर निर्भर हो जाते हैं.

लेकिन जब 'काल भैरव' जैसे प्रोजेक्ट्स सफल होते हैं, तो भारत 'नेट एक्सपोर्टर' बनता है. यानी हम हथियार बेचकर डॉलर कमाते हैं. नीति आयोग की रिपोर्ट “बूस्टिंग डिफेंस स्टार्टअप्स एंड जीडीपी इम्पैक्ट” (Boosting Defence Startups and GDP Impact) के मुताबिक जब देश की कमाई बढ़ती है, तो सरकार के पास इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा होता है. इसके अलावा, इस तरह के स्टार्टअप्स से भारत में हाई-टेक नौकरियों की बाढ़ आती है. आज हमारे इंजीनियर गूगल और माइक्रोसॉफ्ट में कोड लिख रहे हैं, कल वो भारत की डिफेंस कंपनियों में 'काल भैरव' के लिए AI कोड लिखेंगे.

ये भी पढ़ें: रूस-यूक्रेन युद्ध के मलबे से खड़ा हुआ सेकंड हैंड हथियारों का बाजार, भारत के लिए मौका या खतरा?

एक नए भारत की दस्तक

कुल मिलाकर बात ये है कि 'काल भैरव' का पुर्तगाल जाना सिर्फ एक बिजनेस डील नहीं है. यह इस बात का सबूत है कि भारतीय दिमाग अब नकल करना छोड़ चुका है और अब हम 'ओरिजिनल' चीजें बना रहे हैं. वह भी ऐसी चीज जिसे दुनिया का सबसे एडवांस मिलिट्री ब्लॉक यानी नाटो भी अपनाने को तैयार है. यह सफर 'क्रेता' (Buyer) से 'विक्रेता' (Seller) बनने का है.

आने वाले वक्त में अगर आप आसमान में कोई ऐसा विमान देखें जिसमें पायलट न हो लेकिन वो रफाल जैसी दहाड़ मार रहा हो, तो समझ जाइएगा कि वो हिंदुस्तान का 'काल भैरव' है जो अब पूरी दुनिया की हिफाजत (या दुश्मनों की शामत) के लिए तैयार खड़ा है.

वीडियो: रखवाले: Mk1 BVR मिसाईल अब रफाल में भी लगेगी, बालाकोट जैसी जुर्रत नहीं कर पाएगा पाकिस्तान

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