ओमिक्रोन की तीसरी लहर कितनी खतरनाक साबित हो सकती है?
क्या ओमिक्रोन से बचने का उपाए लॉकडाउन है?
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कोरोना के बढ़ते खतरे को देखते हुए हरियाणा और पश्चिम बंगाल सरकार ने नए दिशा निर्देश जारी किए हैं.
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महामारी जब आती है, तो लहरों में आती है. 1918 के स्पैनिश फ्लू से हमने यही सीखा था. कुल तीन लहरें होती हैं. पहली लहर, फिर एक बहुत बड़ी दूसरी लहर. तीसरी लहर जब आती है, तो वो दूसरी और पहली लहर से छोटी होती है. इसीलिए ये 2020 में ही तय हो गया था कि दुनिया को कम से कम तीन बार इस बीमारी का सामना करना है.
भारत के लिए पहली लहर बीमारी और मृत्यु के साथ आर्थिक तबाही भी लाई. साथ में लाई प्रवासियों की पीड़ा जो सैंकड़ों किलोमीटर दूर तक पैदल चलकर अपने घरों को गए. दूसरी लहर के दौरान हमारी स्वास्थ्य सेवाओं की कमर ऐसी टूटी कि अच्छी खासी पहुंच वाले लोग भी बिना इलाज और ऑक्सीजन के मारे गए. मृत्यु का ऐसा भीषण तांडव हुआ कि आर्थिक तबाही की बातें छोटी लगने लगीं. और अब ये लगभग तय है कि भारत को भी तीसरी लहर का सामना करना है. ये लड़ाई हम कैसे लड़ेंगे, इसके लिए किस तरह की सावधानियों की ज़रूरत है, कि क्या ओमिक्रोन वेरिएंट से भी उतना ही खतरा है, जितना डेल्टा वेरिएंट से था.
समाचार एजेंसी AFP का कहना है कि दुनियाभर में एक बार फिर कोरोना संक्रमण न सिर्फ तेज़ी से बढ़ रहा है, बल्कि रिकॉर्ड भी तोड़ रहा है. 22 से 28 दिसंबर के हफ्ते में दुनियाभर में रोज़ाना औसतन 9 लाख 35 हज़ार मामले सामने आए. विश्व स्वास्थ्य के विषय पर शोथ करने वाले वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के ''दी इस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड ईवॉल्यूशन IHME ने दावा किया है कि अगले तीन महीनों में ओमिक्रोन वेरिएंट के 300 करोड़ मामले सामने आ सकते हैं.
भारत में भी मामले तेज़ी से सामने आ रहे हैं. ज़्यादा चिंता यहां भी ओमिक्रोन वेरिएंट को लेकर है. सबसे ज़्यादा मामले अब तक दिल्ली में सामने आए हैं. कुल 238. और इसीलिए सबसे सख्त कदम दिल्ली ने ही उठाए हैं. दिल्ली ने यलो अलर्ट की घोषणा कर दी है और इसी के साथ ढेर सारे प्रतिबंध लागू कर दिए हैं. दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र है. देश के दूसरे राज्यों ने भी अभी से लोगों के इकट्ठा होने को रोकने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. और इस सबने सभी को एक बार फिर परेशानी में डाल दिया है.
प्रवासी इस चिंता में हैं कि क्या उन्हें एक बार फिर अपने घरों की तरफ लौटना होगा? छोटी छोटी कंपनियों में काम करने वाले लोग इस चिंता में हैं कि उन्हें कितने वक्त तक घर पर रहना होगा, क्योंकि कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को घर से काम करने पर आधा वेतन ही दे रही हैं. दूसरी लहर के बाद रफ्तार पकड़ रहे बाज़ार को देखते हुए जिन लोगों ने नए उपक्रमों में निवेश किया था, उन्हें अभी से घाटा का डर सताने लगा है. खास तौर पर हॉस्पिटैलिटी और मनोरंजन के क्षेत्र में.
महामारियों को लेकर हमारा अर्जित ज्ञान ये तो कहता है कि तीसरी लहर दूसरी और पहली से छोटी होगी, लेकिन इस छोटी लहर का असर भारत जैसी विशाल आबादी के लिए कितना घातक हो सकता है? इसे समझने के लिए हमें कुछ बातों पर गौर करना होगा.
कोरोना की पहली लहर ने हमारे स्वास्थ्य ढांचे की परीक्षा ले ली थी और दूसरी लहर ने तो उसे पूरी तरह गौण साबित कर दिया था. क्या इस बार भी ऐसा होगा? इस सवाल का जवाब कई हिस्सों में दिया जा सकता है.दूसरी लहर की तबाही के पीछे मुख्य वजह थी डेल्टा वेरिएंट. अब भारत की बड़ी आबादी को कम से कम एक टीका लग चुका है. तेज़ी से दूसरी खुराक भी लगाई जा रही है. जिन टीकों को भारत में मान्यता मिली हुई है, उन्हें डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ कारगर बताया गया है.
अगर वेरिएंट दर वेरिएंट फर्क न भी किया जाए, तो हम कम से कम इतना तो जान ही गए हैं कि टीका लगने के बाद बीमारी होने की संभावना कम होती है. बीमारी हो जाए, तो उसके गंभीर होने की संभावना कम होती है. रोगी के अस्पताल जाने की संभावना कम होती है. और अगर ये सब किसी वजह से घट जाए, तो प्राण जाने की संभावना भी कम ही होती है. क्या हमारे टीके ओमिक्रोन वेरिएंट को लेकर भी उतने ही कारगर होंगे जितने डेल्टा के मामले में थे? जानिए विशेषज्ञ क्या कहते हैं
डॉक्टर मोनिका लांबा जो पैथोलॉजिस्ट साइंटिस्ट है. उन्होंने हमें बताया
फ़ाइज़र वैक्सीन का जो नया डेटा अभी आया है उसमें हम देखते हैं कि न्यूट्रीलाइज़िंग एंटीबॉडी जो ओमिक्रॉन के ख़िलाफ़ हैं उसमें गिरावट आयी है. लेकिन जैसे ही वैक्सीन का बूस्टर डोज़ लगता है वैक्सीन की इफेक्टिवनेस वापस से बढ़कर 70-75 % हो जाती है. वैक्सीन लगे हुए व्यक्तियों को अस्पताल में भर्ती होने के चांस कम हैं. जब हम अमेरिका यूरोप के केस देखते हैं तो पता चलता है कि अस्पताल में भर्ती होने वाले और मरने वाले लोगों में ज़्यादातर वह जिन्होंने वैक्सीन नहीं लगवाई है. इसलिए अपने आप को वैक्सीननेट करना बहुत ज़रूरी है.अब तीसरी लहर ओमिक्रोन वेरिएंट के चलते ही आएगी, तो हमारे पास टीके के रूप में एक सुरक्षा कवच तो है. साउथ अफ्रीका और ब्रिटेन के अनुभव से अब हम जानते हैं कि ओमिक्रोन वेरिएंट डेल्टा वेरिएंट से कम घातक है. रोगियों के hospitalisation में 30 से 70 फीसदी की कमी भी है. लेकिन एक समस्या अब भी है. ओमिक्रोन वेरिएंट की संक्रामकता डेल्टा वेरिएंट से ज़्यादा है. अगर एक बार फिर बहुत बड़ी संख्या में एक साथ लोग बीमार पड़ गए तो स्वास्थ्य सेवाएं दबाव में आ जाएंगी. क्या यहां भी फिर एक कोलैप्स देखने को मिल सकता है? एक बड़ा सवाल ऑक्सीजन की ज़रूरत को लेकर भी है. पहली और दूसरी लहर ने हमें बता दिया है कि कोविड के मरीज़ों को ऑक्सीजन की अतिरिक्त ज़रूरत पड़ती है. दूसरी लहर के दौरान कई मरीज़ों की जान इसलिए भी चली गई थी क्योंकि वो घर पर थे, और परिजन ऑक्सीजन का इंतज़ाम नहीं कर पाए थे. ओमिक्रोन वेरिएंट से ग्रसित मरीज़ों के मामले में ऑक्सीजन की कितनी ज़रूरत पड़ती है, डॉक्टर मोनिका लांबा जो पैथोलॉजिस्ट साइंटिस्ट है. उन्होंने हमें बताया
डेल्टा वेरिएंट में बुखार सर्दी खाँसी इन सब के लक्षण ज़्यादा देखने को मिलते थे, वहीं ओमिक्रॉन वेरिएंट की संक्रमण करने की शक्ति डेल्टा वेरिएंट से ज़्यादा है. जितना भी डेटा अभी तक निकलकर हमारे सामने आया है उससे पता चलता है कि हॉस्पिटलाइजेशन में ओमिक्रॉन के मरीज़ डेल्टा की तुलना में कम हो रहे हैं.भारत सरकार कह तो रही है कि इस बार ऑक्सीजन की कमी नहीं होने दी जाएगी. बड़े अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए हैं. और जहां प्लांट नहीं हैं, वहां ऑक्सीजन पहुंचाने की समुचित व्यवस्था की जाएगी. लेकिन ये वो बातें हैं, जिनका सही गलत हमें तभी मालूम चलेगा, जब इस तंत्र की आवश्यकता पड़ेगी. वैसे हम नहीं चाहेंगे कि कभी ये नौबत आए. अब आते हैं इस विषय के दूसरे पक्ष पर. राज्यों और केंद्र ने जो एहतियाती कदम उठाए हैं, वो बिलकुल वैसे ही हैं जैसे दूसरी लहर के वक्त है. सख्त लॉकडाउन नहीं लगाया गया है, लेकिन नाइट कर्फ्यू आ गया है. दिल्ली में तो दुकानों के ऑड ईवन मॉडल तक को लागू किए जाने की योजना है. स्कूल बंद कर दिए गए हैं और दूसरे राज्यों की सरकारें भी इस दिशा में विचार शुरू कर चुकी हैं. ये प्रतिबंध इस लहर को रोकने में कितने कारगर हो सकते हैं, डॉक्टर मोनिका लांबा ने इसपर कहा
रिस्ट्रिक्शन कि हमें अब ज़रूरत वाक़ई हो गई है. इस वायरस को आय दो साल हो गए हैं. पहले हमें इसकी ज़्यादा जानकारी नहीं थी. अब हमें इससे कैसे निपटना है या पता चल रहा है. तो अभी बिलकुल कड़ा लॉकडाउन लगाने की ज़रूरत नहीं है. इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह होनी चाहिए कि जिन भी लोगों ने अभी तक वैक्सीन नहीं लिया है वो वैक्सीन लें.इन सारी बातों के साथ एक अंतिम बात भी हमारी तरफ से. सावधानी रखिए. लेकिन खौफ मत खाइए. अगर आप टीके के लिए पात्र हैं, तो टीके लगवाइए. और जो लोग चोरी से बूस्टर्स लगा रहे हैं, उनसे हमारी अपील है कि कृपया ऐसा न करें. अपनी बारी का इंतज़ार करें.

