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"सनातनी हिंदू हूं, गीता और संविधान में से किसी एक चुनना हो तो...", कुमार विश्वास ने क्या जवाब दिया?

कुमार विश्वास अपने कवि सम्मेलनों में खुद को ‘हिंदू राष्ट्रवादी’ न कहकर ‘राष्ट्रवादी हिंदू’ कहते हैं. इस पर जब सवाल किया गया तो उन्होंने बताया...

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22 जून 2023 (अपडेटेड: 22 जून 2023, 12:09 AM IST)
GITN: Kumar Vishwas on Hindu Nationalism, says we have to be Indian first
कुमार विश्वास- फोटो (फेसबुक)
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कवि और लेखक कुमार विश्वास लल्लनटॉप के शो ‘गेस्ट इन दी न्यूज रूम’ का हिस्सा बने. शो के 52वें एपिसोड में आए कुमार विश्वास ने अपने करियर से लेकर राजनीतिक सफर और निजी जीवन के बारे में काफी कुछ साझा किया. उन्होंने भगवान राम और राम कथा से जुड़े कई किस्सों पर भी चर्चा की.

कुमार विश्वास अपने कवि सम्मेलनों में खुद को ‘हिंदू राष्ट्रवादी’ न कहकर ‘राष्ट्रवादी हिंदू’ कहते हैं. इस पर जब सवाल किया गया तो उन्होंने बताया,

“क्योंकि मेरी अलग-अलग धर्म के लोगों से दोस्ती है. हमारा एक परिवार है जो इस्लाम मानता है. मेरे अत्यंत निकट लोग हैं वो. इनमें से कोई देश में पढ़ता है, कोई विदेश में पढ़ता है. कोई कॉर्पोरेट में काम करता है. एक दिन मेरे घर पर चर्चा चल रही थी कि अल्पसंख्यकों के साथ ऐसा किया जा रहा है, वैसा किया जा रहा है.”

कुमार विश्वास ने आगे कहा,

“एक बिटिया ने मुझसे पूछा कि अंकल ये सब कैसे रुकेगा. पांच लोग बैठे हुए थे, तो मैंने कहा कि मैं सनातनी हिंदू हूं, ब्राह्मण हूं. गीता पढ़ता हूं. वेद पढ़ता हूं. जितना समझ आता है मानस पढ़ता हूं. पर अगर कभी मेरे सामने ये चुनाव आए कि मुझे गीता और संविधान में किसे चुनना है. तो मैं एक सेकेंड के सौवें हिस्से को व्यर्थ किए बिना संविधान को चुन लूंगा.”

उन्होंने आगे कहा अगर मेरे पास कभी ये चुनाव आए कि सनातनी होने में या भारतीय होने में किसे चुनना है, तो मैं भारतीय होने को चुनूंगा. कुमार ने आगे बताया,

“मैंने बिटिया से कहा कि बेटा अब इसी बात को मेरे साथ दोहराओ. अगर मेरे पास ये निर्णय आए कि मैं कुरान शरीफ और संविधान में से एक को चुन लूंगा. मैं पूज्य गुरु ग्रंथ साहिब जी और संविधान में से एक को चुन लूंगा. अगर इसमें चार सेकेंड की देर लग रही है तो बहुत मुश्किल है इस आग को खत्म करना. इस भेदभाव को खत्म करना. जिस दिन 140 करोड़ लोग ऐसा सोचना शुरू कर देंगे…

कुमार ने आगे कहा कि 'मैं भारतीय हिंदू हूं’, ‘मैं भारतीय मुसलमान हूं’, ‘मैं भारतीय सिख हूं’, ‘मैं भारतीय ईसाई हूं’, ‘मैं भारतीय बौद्ध हूं’, यही हम सबको बनना है. इससे क्या होगा कि ऊपर भारत होगा, उसके नीचे सारे लोग होंगे. अभी सब में झगड़ा चल रहा है, भारतीय कोई है ही नहीं.

वीडियो: गेस्ट इन द न्यूज़रूम: कुमार विश्वास ने रामकथा और कविता के भविष्य पर बात की, केजरीवाल और सिसोदिया से रिश्तों पर भी बोले

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