क्रिप्टो में निवेश के ये नुकसान-फायदे जानना ज़रूरी है
क्रिप्टोकरेंसी की दिक्कतें और सामाजिक-राजनीतिक पहलू क्या है?
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क्रिप्टोकरेंसी, निवेश और लेन-देन दोनों के लिए दुनिया भर के कई देशों में इस्तेमाल की जाती है, भारत में अभी लेनदेन को लेकर स्पष्ट नियम नहीं है (प्रतीकात्मक फोटो -gettyimages)
एक नया पैसा: पार्ट-6
क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी हमारी ख़ास सीरीज़, ‘एक नया पैसा’ का ये छठा पार्ट है. अभी तक हमने क्रिप्टोकरेंसी का अर्थशास्त्र, विज्ञान और दर्शनशास्त्र के माध्यम से तो समझ लिया. अब रह जाती है इसकी सामाजिक और राजनैतिक विवेचना. जिसकी चर्चा हम इस पार्ट में करेंगे.
# ग्रे एरिया-
आपको पहला एपिसोड याद है. जहां हमने आपको पैरलल करेंसी के बारे में विस्तार से बताया था और साथ में ये भी कि प्रॉमिस किया था कि इसके लीगल पहलू पर एक बार फिर से बात करेंगे. तो पैरलल करेंसी से क्यूं भारत या कई अन्य देशों की सरकारें डरती हैं? इसलिए, क्यूंकि उन्हें लगता है कि अवैध कार्यों के लिए पैरलल करेंसी ज़्यादा प्रेफ़र की जाती है. हालांकि कुछ रेग्युलेशन के साथ सभी देशों की सरकारें इस डर से उबर सकती हैं. सरकारों को ये भी एक डर है कि इससे सेंट्रल करेंसी की साख पर भी असर पड़ेगा.
अब ये क्रिप्टो करेंसी से जुड़ा एक ऐसा फ़ैक्ट है जो ठीक-ठीक एडवांटेज़ या डिसएडवांटेज़ वाले खाने में नहीं रखा जा सकता. एक और पॉइंट, जो क्रिप्टो का एडवांटेज़ है या डिसएडवांटेज़ कहना मुश्किल है. और वो है इसकी वैल्यू का तेज़ी से बढ़ना-घटना. मतलब क्रिप्टो करेंसी हाइली वोलेटाइल है.
अब सोचिए न अगर करेंसी के दाम ही इतना तेज़ी से घट बढ़ रहा हो, उससे किसी और चीज़ का दाम कैसे लगाया जाए? वो कविता याद है, जिसमें चांद की मां कहती थी कि तेरे लिए स्वेटर कैसे बुन दूं, तू तो रोज़ घटता बढ़ता है. और इसी बात की चर्चा हमने दूसरे एपिसोड में भी की थी कि क्यूं क्रिप्टोकरेंसी, थ्योरी में एक करेंसी होकर भी व्यावहारिक रूप से करेंसी नहीं बन पा रही.
क्रिप्टोकरेंसी के दामों में तेज़ी से उतार-चढ़ाव होता है (प्तातीकात्मक फोटो - आज तक)
हालांकि क्रिप्टो के मूल्य का घटना-बढ़ना ही वो सबसे महत्वपूर्ण कारण भी है, जिसके चलते लोग इसके पीछे बहुत तेज़ भाग रहे हैं. ‘जब वी मेट’ की गीत की तरह. इसलिए ही तो लोगों को क्रिप्टोकरेंसी बाक़ी तरह की मुद्राओं का तो विकल्प नहीं लगती, लेकिन फिर भी उन्हें ये पसंद है, क्योंकि इसका मूल्य बढ़ रहा है और वे लोग क्रिप्टोकरेंसी को एक इंवेस्टमेंट या एसेट की तरह देखते हैं. # क्रिप्टो के फ़ायदे- ऊपर हमने क्रिप्टो के कुछ ऐसे एसपेक्ट्स बताए जिनका फायदा या नुकसान इस पर निर्भर करता है कि आप किस नज़रिए से देख रहे हैं या फिर आप किस पाले में हैं. लेकिन फिर हर किसी शै की तरह क्रिप्टो के भी कुछ ऐसे एसपेक्ट्स हैं जिन्हें साफ-साफ फायदे या नुकसान की कैटेगरी में रखा जा सकता है. तो चलिए सबसे पहले क्रिप्टो के फायदों के बारे में जानते हैं.
रेट ऑफ़ एक्सचेंज ही नहीं, थर्ड पार्टी वैरिफ़िकेशन जैसी कई और जटिलताएं भी पारंपरिंक मनी ट्रांसफ़र की रफ़्तार धीमा कर देती हैं. जबकि क्रिप्टोकरेंसी के लेन देन ‘पीयर-टू-पीयर’ हैं, इसलिए तेज़.
हालांकि ऐसा ही कुछ शेयर्स के मामले में भी है, लेकिन फिर भी क्रिप्टो इसलिए लिक्विडिटी के मामले में बेहतर साबित होती हैं क्यूंकि शेयर्स के उलट इसकी ट्रेडिंग 24 घंटे सातों दिन होती है. साथ ही शेयर्स इनकैश करवाने के 2 दिन बाद आपके अकाउंट में पैसे आते हैं, जबकि क्रिप्टो तुरंत इनकैश करवाए जा सकते हैं.
क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सरकार कुछ क़ानून बनाने जा रही है (फोटो सोर्स -आज तक)
बिटकॉइन की कीमत इतनी अस्थिर है कि टॉप इन्वेस्टर्स और बड़े कॉर्पोरेट मालिकों के एक बयान से इसकी कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आ जाता है (प्रतीकात्मक फोटो- gettyimages)
तो क्रिप्टो से जुड़े फ़ायदे-नुक़सान जानने के बाद आख़िर में सवाल यही रह जाता है कि, ‘टू बी ऑर नॉट टू बी?’ इसमें इंवेस्ट करें या न करें? भई हमारा काम तटस्थ रूप से इसके फ़ायदे नुक़सान गिनाना बाकी ‘लास्ट से’ तो आपका होगा. वो एक दूरदर्शन का एड था न ,’मर्ज़ी है आपकी, आख़िर सिर है आपका.’
क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सरकार कुछ क़ानून बनाने जा रही है (फोटो सोर्स -आज तक)
अभी के लिए विदा. हम धीरे-धीरे इस सीरीज़ के समापन की ओर बढ़ते जा रहे हैं. आपके कोई सवाल या कोई राय हों तो ज़रूर कमेंट बॉक्स में बताएं, अंतिम एपिसोड में जितने संभव हो सके कमेंट लेने का प्रयास करेंगे. शुक्रिया. नमस्कार.
अब ये क्रिप्टो करेंसी से जुड़ा एक ऐसा फ़ैक्ट है जो ठीक-ठीक एडवांटेज़ या डिसएडवांटेज़ वाले खाने में नहीं रखा जा सकता. एक और पॉइंट, जो क्रिप्टो का एडवांटेज़ है या डिसएडवांटेज़ कहना मुश्किल है. और वो है इसकी वैल्यू का तेज़ी से बढ़ना-घटना. मतलब क्रिप्टो करेंसी हाइली वोलेटाइल है.
अब सोचिए न अगर करेंसी के दाम ही इतना तेज़ी से घट बढ़ रहा हो, उससे किसी और चीज़ का दाम कैसे लगाया जाए? वो कविता याद है, जिसमें चांद की मां कहती थी कि तेरे लिए स्वेटर कैसे बुन दूं, तू तो रोज़ घटता बढ़ता है. और इसी बात की चर्चा हमने दूसरे एपिसोड में भी की थी कि क्यूं क्रिप्टोकरेंसी, थ्योरी में एक करेंसी होकर भी व्यावहारिक रूप से करेंसी नहीं बन पा रही.
क्रिप्टोकरेंसी के दामों में तेज़ी से उतार-चढ़ाव होता है (प्तातीकात्मक फोटो - आज तक)
हालांकि क्रिप्टो के मूल्य का घटना-बढ़ना ही वो सबसे महत्वपूर्ण कारण भी है, जिसके चलते लोग इसके पीछे बहुत तेज़ भाग रहे हैं. ‘जब वी मेट’ की गीत की तरह. इसलिए ही तो लोगों को क्रिप्टोकरेंसी बाक़ी तरह की मुद्राओं का तो विकल्प नहीं लगती, लेकिन फिर भी उन्हें ये पसंद है, क्योंकि इसका मूल्य बढ़ रहा है और वे लोग क्रिप्टोकरेंसी को एक इंवेस्टमेंट या एसेट की तरह देखते हैं. # क्रिप्टो के फ़ायदे- ऊपर हमने क्रिप्टो के कुछ ऐसे एसपेक्ट्स बताए जिनका फायदा या नुकसान इस पर निर्भर करता है कि आप किस नज़रिए से देख रहे हैं या फिर आप किस पाले में हैं. लेकिन फिर हर किसी शै की तरह क्रिप्टो के भी कुछ ऐसे एसपेक्ट्स हैं जिन्हें साफ-साफ फायदे या नुकसान की कैटेगरी में रखा जा सकता है. तो चलिए सबसे पहले क्रिप्टो के फायदों के बारे में जानते हैं.
- स्पीड 5G वाली, दाम जियो वाले -
रेट ऑफ़ एक्सचेंज ही नहीं, थर्ड पार्टी वैरिफ़िकेशन जैसी कई और जटिलताएं भी पारंपरिंक मनी ट्रांसफ़र की रफ़्तार धीमा कर देती हैं. जबकि क्रिप्टोकरेंसी के लेन देन ‘पीयर-टू-पीयर’ हैं, इसलिए तेज़.
- जब बुलाओगे चले आएंगे-
हालांकि ऐसा ही कुछ शेयर्स के मामले में भी है, लेकिन फिर भी क्रिप्टो इसलिए लिक्विडिटी के मामले में बेहतर साबित होती हैं क्यूंकि शेयर्स के उलट इसकी ट्रेडिंग 24 घंटे सातों दिन होती है. साथ ही शेयर्स इनकैश करवाने के 2 दिन बाद आपके अकाउंट में पैसे आते हैं, जबकि क्रिप्टो तुरंत इनकैश करवाए जा सकते हैं.
- आज रात 12 बजे के बाद-
क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सरकार कुछ क़ानून बनाने जा रही है (फोटो सोर्स -आज तक)
- नया दौर-
- तेरी गठरी में लागा चोर-
- हरि अनंत हरि कथा अनंता-
- आज मैं ऊपर, आसमां नीचे-
बिटकॉइन की कीमत इतनी अस्थिर है कि टॉप इन्वेस्टर्स और बड़े कॉर्पोरेट मालिकों के एक बयान से इसकी कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आ जाता है (प्रतीकात्मक फोटो- gettyimages)
- तुझे दिल में बंद कर लूं, दरिया में फैंक दूं चाबी-
- मैं तेजा हूं, मार्क इधर है-
- बहुत कठिन है डगर पनघट की-
- कोई जाए ज़रा ढूंढ के लाए-
तो क्रिप्टो से जुड़े फ़ायदे-नुक़सान जानने के बाद आख़िर में सवाल यही रह जाता है कि, ‘टू बी ऑर नॉट टू बी?’ इसमें इंवेस्ट करें या न करें? भई हमारा काम तटस्थ रूप से इसके फ़ायदे नुक़सान गिनाना बाकी ‘लास्ट से’ तो आपका होगा. वो एक दूरदर्शन का एड था न ,’मर्ज़ी है आपकी, आख़िर सिर है आपका.’
क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सरकार कुछ क़ानून बनाने जा रही है (फोटो सोर्स -आज तक)
अभी के लिए विदा. हम धीरे-धीरे इस सीरीज़ के समापन की ओर बढ़ते जा रहे हैं. आपके कोई सवाल या कोई राय हों तो ज़रूर कमेंट बॉक्स में बताएं, अंतिम एपिसोड में जितने संभव हो सके कमेंट लेने का प्रयास करेंगे. शुक्रिया. नमस्कार.

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