The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Lallankhas
  • Ek Naya Paisa Episode 6: Social and political aspects and drawbacks of cryptocurrency

क्रिप्टो में निवेश के ये नुकसान-फायदे जानना ज़रूरी है

क्रिप्टोकरेंसी की दिक्कतें और सामाजिक-राजनीतिक पहलू क्या है?

Advertisement
Img The Lallantop
क्रिप्टोकरेंसी, निवेश और लेन-देन दोनों के लिए दुनिया भर के कई देशों में इस्तेमाल की जाती है, भारत में अभी लेनदेन को लेकर स्पष्ट नियम नहीं है (प्रतीकात्मक फोटो -gettyimages)
pic
दर्पण
28 अक्तूबर 2021 (अपडेटेड: 14 दिसंबर 2021, 05:16 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share
एक नया पैसा: पार्ट-6 क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी हमारी ख़ास सीरीज़, ‘एक नया पैसा’ का ये छठा पार्ट है. अभी तक हमने क्रिप्टोकरेंसी का अर्थशास्त्र, विज्ञान और दर्शनशास्त्र के माध्यम से तो समझ लिया. अब रह जाती है इसकी सामाजिक और राजनैतिक विवेचना. जिसकी चर्चा हम इस पार्ट में करेंगे. # ग्रे एरिया- आपको पहला एपिसोड याद है. जहां हमने आपको पैरलल करेंसी के बारे में विस्तार से बताया था और साथ में ये भी कि प्रॉमिस किया था कि इसके लीगल पहलू पर एक बार फिर से बात करेंगे. तो पैरलल करेंसी से क्यूं भारत या कई अन्य देशों की सरकारें डरती हैं? इसलिए, क्यूंकि उन्हें लगता है कि अवैध कार्यों के लिए पैरलल करेंसी ज़्यादा प्रेफ़र की जाती है. हालांकि कुछ रेग्युलेशन के साथ सभी देशों की सरकारें इस डर से उबर सकती हैं. सरकारों को ये भी एक डर है कि इससे सेंट्रल करेंसी की साख पर भी असर पड़ेगा. 
अब ये क्रिप्टो करेंसी से जुड़ा एक ऐसा फ़ैक्ट है जो ठीक-ठीक एडवांटेज़ या डिसएडवांटेज़ वाले खाने में नहीं रखा जा सकता. एक और पॉइंट, जो क्रिप्टो का एडवांटेज़ है या डिसएडवांटेज़ कहना मुश्किल है. और वो है इसकी वैल्यू का तेज़ी से बढ़ना-घटना. मतलब क्रिप्टो करेंसी हाइली वोलेटाइल है. 
अब सोचिए न अगर करेंसी के दाम ही इतना तेज़ी से घट बढ़ रहा हो, उससे किसी और चीज़ का दाम कैसे लगाया जाए? वो कविता याद है, जिसमें चांद की मां कहती थी कि तेरे लिए स्वेटर कैसे बुन दूं, तू तो रोज़ घटता बढ़ता है. और इसी बात की चर्चा हमने दूसरे एपिसोड में भी की थी कि क्यूं क्रिप्टोकरेंसी, थ्योरी में एक करेंसी होकर भी व्यावहारिक रूप से करेंसी नहीं बन पा रही.
क्रिप्टोकरेंसी के दामों में तेज़ी से उतार-चढ़ाव होता है (प्तातीकात्मक फोटो - आज तक)

क्रिप्टोकरेंसी के दामों में तेज़ी से उतार-चढ़ाव होता है (प्तातीकात्मक फोटो - आज तक)

हालांकि क्रिप्टो के मूल्य का घटना-बढ़ना ही वो सबसे महत्वपूर्ण कारण भी है, जिसके चलते लोग इसके पीछे बहुत तेज़ भाग रहे हैं. ‘जब वी मेट’ की गीत की तरह. इसलिए ही तो लोगों को क्रिप्टोकरेंसी बाक़ी तरह की मुद्राओं का तो विकल्प नहीं लगती, लेकिन फिर भी उन्हें ये पसंद है, क्योंकि इसका मूल्य बढ़ रहा है और वे लोग क्रिप्टोकरेंसी को एक इंवेस्टमेंट या एसेट की तरह देखते हैं. # क्रिप्टो के फ़ायदे- ऊपर हमने क्रिप्टो के कुछ ऐसे एसपेक्ट्स बताए जिनका फायदा या नुकसान इस पर निर्भर करता है कि आप किस नज़रिए से देख रहे हैं या फिर आप किस पाले में हैं. लेकिन फिर हर किसी शै की तरह क्रिप्टो के भी कुछ ऐसे एसपेक्ट्स हैं जिन्हें साफ-साफ फायदे या नुकसान की कैटेगरी में रखा जा सकता है. तो चलिए सबसे पहले क्रिप्टो के फायदों के बारे में जानते हैं. 
  1. स्पीड 5G वाली, दाम जियो वाले -
आपको सिर्फ़ पिछले एपिसोड्स का रिवीज़न करना होगा ये जानने के लिए कि क्रिप्टोकरेंसी को दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने में ट्रांसफ़र करने में पारंपरिंक मुद्राओं की तुलना में कहीं कम शुल्क या ट्रांज़ेक्शन चार्ज़ देना पड़ता है. साथ ही ये ट्रांसफ़र तुलनात्मक रूप से काफ़ी तेज़ भी होता है, ख़ास तौर पर इंटरनैशनल मामलों में. कारण कई हैं. जैसे जब आप कोई पारंपरिक मुद्रा एक देश से दूसरे देश में ट्रांसफ़र करते हो तो रेट ऑफ़ एक्सचेंज वग़ैरह भी पिक्चर में रहते हैं. क्यूंकि भारत से ट्रांसफ़र किए गए रुपये अमेरिका में डॉलर के रूप में प्राप्त होंगे. वहीं यहां जो क्रिप्टोकरेंसी है (माना बिटकॉइन), अमेरिका में भी वही रहेगी.  
रेट ऑफ़ एक्सचेंज ही नहीं, थर्ड पार्टी वैरिफ़िकेशन जैसी कई और जटिलताएं भी पारंपरिंक मनी ट्रांसफ़र की रफ़्तार धीमा कर देती हैं. जबकि क्रिप्टोकरेंसी के लेन देन ‘पीयर-टू-पीयर’ हैं, इसलिए तेज़. 
  1. जब बुलाओगे चले आएंगे-
अब अगर सिर्फ़ इन्वेस्टमेंट के लिहाज़ से बात करें तो क्रिप्टो में इन्वेस्ट करने के बाद आप जब चाहे तब अपने क्रिप्टो को भुना (इनकैश) करवा सकते हो. यूं लिक्विडिटी वाले पॉईंट ऑफ़ व्यू से इसकी तुलना किसी और इन्वेस्टमेंट, जैसे गोल्ड, रियल इस्टेट या ULIP वग़ैरह से करने पर क्रिप्टो इक्कीस साबित होती है. 
हालांकि ऐसा ही कुछ शेयर्स के मामले में भी है, लेकिन फिर भी क्रिप्टो इसलिए लिक्विडिटी के मामले में बेहतर साबित होती हैं क्यूंकि शेयर्स के उलट इसकी ट्रेडिंग 24 घंटे सातों दिन होती है. साथ ही शेयर्स इनकैश करवाने के 2 दिन बाद आपके अकाउंट में पैसे आते हैं, जबकि क्रिप्टो तुरंत इनकैश करवाए जा सकते हैं.  
  1. आज रात 12 बजे के बाद-
हम जानते हैं कि ये एक विकेंद्रित मुद्रा है. मतलब दुनिया की किसी भी सरकार या केंद्रीय बैंक का क्रिप्टो पर कोई कंट्रोल नहीं. यानी दुनिया की कोई भी सरकार आपके बिटकॉइन के सिक्कों को फ्रीज नहीं कर सकती, उन्हें चोरी नहीं किया जा सकता है, और सरकार उन्हें जब्त नहीं कर सकती. कुछ साल पहले जब मोदी सरकार ने 500 और 1,000 के नोटों पर बैन लगा दिया था तो लोगों के लाखों रूपये कागज के टुकड़े भर बनकर रह गए थे. ज़ाहिर है, बिटकॉइन के साथ ऐसा कुछ नहीं है.
क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सरकार कुछ क़ानून बनाने जा रही है (फोटो सोर्स -आज तक)

क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सरकार कुछ क़ानून बनाने जा रही है (फोटो सोर्स -आज तक)
  1. नया दौर-
आप किसी शो रूम में जाते हैं. उसके काँच वाले एंट्री गेट में लिखा रहता है: ऑल क्रेडिट कार्ड एक्सेपटेड. ये आज से कुछ दशक पहले दुकान की शू-शा दिखाने का बढ़िया ज़रिया था. लेकिन अब हर छोटा-बड़ा दुकानदार क्रेडिट कार्ड एक्सेप्ट करता है. सोचिए क्या हो अगर आप किसी दुकान में जाएं और लिखा हो: ऑल क्रिप्टो एक्सेपटेड. दुकान का अलग ही भोकाल न होगा. बेशक आप उसे पेमेंट कैश से ही करें. हालांकि आने वाले समय में न केवल ये शो ऑफ़ का साधन बल्कि एक आवश्यक-वैकल्पिक मुद्रा बन जाएगी. कितना बड़ा पैराडॉक्स है न आवश्यक-वैकल्पिक. बहरहाल अभी दिक्कत है तो इसकी स्टेबिल्टी और इसकी स्वीकार्यता की.  
  1. तेरी गठरी में लागा चोर-
“भाई IFSC कोड भी बताना.” ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने के लिए नाम और अकाउंट नंबर पूछने के बाद ये सुना-सुनाया डॉयलॉग है. पारंपरिंक ऑनलाइन ट्रांसफर के लिए अकाउंट नंबर, नाम आदि डिटेल्स की ज़रूरत पड़ती है. इस जानकारी के गलत हाथों में पड़ जाने का खतरा बना रहता है. क्रिप्टो के लेन-देन के लिए आपको किसी भी तरह की निजी जानकारी किसी को देने की ज़रूरत नहीं होती. आप जिससे भी क्रिप्टो खरीदते या बेचेते हैं उसे आपके बारे में कोई जानकारी नहीं होती. ये सब क्रिप्टो को पारंपरिंक मुद्रा के मुकाबले कहीे अधिक सुरक्षित और गोपनीय बनाता है.
  1. हरि अनंत हरि कथा अनंता-
यदि आप इकॉनमी के बेसिक कॉन्सेप्ट्स को समझते हैं तो आप मोनोेपॉली या एकाधिकार के बारे में तो जानते ही होंगे. अगर मार्केट में किसी एक कंपनी की मोनोेपॉली हो जाए तो कंपनी अपनी मनमानी कर सकती है और ग्राहकों को ना चाहते हुए भी उसी कम्पनी के पास जाना पड़ता है. इसी लिए सरकारें ऐसे नियम बनाती हैं ताकि बाज़ार में किसी एक कंपनी का एकाधिकार न हो सके. मार्केट में कॉम्पीटीशन के चलते फायदा कस्टमर्स का होता है. कुछ ऐसा ही हाल है क्रिप्टोकरेंसी की मार्केट का. इस मार्केट में नई-नई करेंसीज़ आ रही हैं. जो कस्टमर्स को अपनी तरफ खींचने के लिए काफी सारी स्कीमों का यूज करती है जिससे फायदा कस्टमर्स का होता है. फिलहाल बिटकॉइन क्रिप्टोकरेंसी के मार्केट की बेताज बादशाह है.  # क्रिप्टोकरेंसी के नुकसान- चलिए अब फटाफट क्रिप्टो के कुछ ड्रॉबैक्स की बात कर ली जाए.
  1. आज मैं ऊपर, आसमां नीचे- 
क्रिप्टोकरेंसी का मूल्य थोड़े समय में काफी बदल सकता है. अब जैसे, बिटकॉइन की कीमत जनवरी 2018 में $17,000 तक पहुंच गई थी लेकिन सिर्फ एक महीने से भी कम समय में बिटकॉइन की कीमत $ 7,000 तक गिर गई. इसलिए आप अगर इसमें इन्वेस्ट करते हैं तो यह जरूरी नहीं है कि आपको फायदा ही होगा, कही ऐसा ना हो कि गए तो थे लखपति बनने और आ गए सड़क पर. हालिया उदाहरण देखें तो टेस्ला के मालिक ऐलन मस्क के एक ट्वीट से बिटकॉइन और डॉज कॉइन की कीमत में काफी उतार चढ़ाव हुआ. किसी इनवेस्टमेंट एसेट का इतना वोलेटाइल होना रीटेल इनवेस्टर्स के लिए बहुत जोखिम भरा हो सकता है.
बिटकॉइन की कीमत इतनी अस्थिर है कि टॉप इन्वेस्टर्स और बड़े कॉर्पोरेट मालिकों के एक बयान से इसकी कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आ जाता है (प्रतीकात्मक फोटो- gettyimages)

बिटकॉइन की कीमत इतनी अस्थिर है कि टॉप इन्वेस्टर्स और बड़े कॉर्पोरेट मालिकों के एक बयान से इसकी कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आ जाता है (प्रतीकात्मक फोटो- gettyimages)

 
  1. तुझे दिल में बंद कर लूं, दरिया में फैंक दूं चाबी- 
चाहे कितनी ही सुरक्षित हो, क्रिप्टोकरेंसी है तो डिजिटल ही. आप इसे सोने या पैसों की तरह तिजोरी या बैंक के लॉकर में नहीं रख सकते. बैंकिंग में आपके साथ कोई धोखाधड़ी हो जाए तो आप शिकायत दर्ज़ करने के लिए पुलिस, बैंक और नियामक संस्थाओं के पास जा सकते हैं. क्रिप्टोकरेंसी, यूं तो काफ़ी सुरक्षित है पर फिर भी हैक कर लिए जाने की स्थिति में आप कुछ नहीं कर पाएंगे. क्योंकि अधिकतर देशों में क्रिप्टो को लेकर ना नियम हैं, ना ऐसी कोई एज़ेंसी, जिसके पास जाकर आप शिकायत कर सकें. लेकिन यहां पर भी वही बात कि क्रिप्टोकरेंसी, एक मातृभाषा की तरह अस्तित्व में आई. जिसे बोलना तो सब सीख गए पर ग्रामर नहीं सीखे. तो उम्मीद है कि एक दिन इसकी प्रॉपर ग्रामर भी बन जाएगी. और इससे जुड़े हुए सारे डर एड्रेस हो जाएंगे.  
  1. मैं तेजा हूं, मार्क इधर है- 
सरकारें डरती हैं कि विकेंद्रित और गोपनीय होने के कारण क्रिप्टोकरेंसी का यूज़ गलत और गैर कानूनी चीज़ों के लिए भी किया जाता है. लेकिन जैसे चाकू का इस्तेमाल टेस्टी डिश बनाने के लिए, किसी की सर्जरी करके उसकी जान बचाने के लिए और साथ ही किसी का क़त्ल करने के लिए भी किया जा सकता है. वैसे ये दोष क्रिप्टो कॉन्सेप्ट का निहित या इनहेरेटेंट दोष नहीं लगता और जैसा शुरू में बताया था, इससे पार पाना मुश्किल नहीं.   
  1. बहुत कठिन है डगर पनघट की-
कुछ ऑनलाइन स्टोर्स, ब्रांड और दुनिया के कुछ जगहों में दुकानों में भी क्रिप्टो को स्वीकार किए जाने की छिटपुट ख़बरें तो आती रहती हैं, पर अभी भी यह सामान्य लेन-देन में दिखाई नहीं देती. तो अभी इसे फ़्रंटलाइन करेंसी बनने में काफ़ी समय लगने वाला है.
  1. कोई जाए ज़रा ढूंढ के लाए- 
अगर आपकी हार्ड ड्राइव क्रैश हो जाती है या वायरस आपकी वॉलेट फ़ाइल में घुस जाता है,  तो आप अपने बिटकॉइन खो सकते हैं. आप एक पल में ही अमीर से दिवालिया हो सकते हैं, जिसके बाद कुछ नहीं किया जा सकता.
तो क्रिप्टो से जुड़े फ़ायदे-नुक़सान जानने के बाद आख़िर में सवाल यही रह जाता है कि, ‘टू बी ऑर नॉट टू बी?’ इसमें इंवेस्ट करें या न करें? भई हमारा काम तटस्थ रूप से इसके फ़ायदे नुक़सान गिनाना बाकी ‘लास्ट से’ तो आपका होगा. वो एक दूरदर्शन का एड था न ,’मर्ज़ी है आपकी, आख़िर सिर है आपका.’
क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सरकार कुछ क़ानून बनाने जा रही है (फोटो सोर्स -आज तक)

क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सरकार कुछ क़ानून बनाने जा रही है (फोटो सोर्स -आज तक)

अभी के लिए विदा. हम धीरे-धीरे इस सीरीज़ के समापन की ओर बढ़ते जा रहे हैं. आपके कोई सवाल या कोई राय हों तो ज़रूर कमेंट बॉक्स में बताएं, अंतिम एपिसोड में जितने संभव हो सके कमेंट लेने का प्रयास करेंगे. शुक्रिया. नमस्कार.

Advertisement

Advertisement

()