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AMCA की जगह तेजस-मार्क 2 पर फोकस क्यों, क्या राफेल की छुट्टी होने वाली है?

तेजस मार्क 2 भारत का स्वदेशी 4.5 पीढ़ी का मीडियम मल्टी रोल फाइटर जेट है, जिसे भारतीय वायु सेना की स्क्वाड्रन कमी दूर करने और पुराने मिग विमानों की जगह लेने के लिए विकसित किया जा रहा है. ज्यादा ताकतवर GE-F414 इंजन, आधुनिक AESA रडार, लंबी रेंज, भारी हथियार क्षमता और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम के साथ यह विमान राफेल जैसे हाई-एंड फाइटर्स को सपोर्ट करेगा, जबकि 5वीं पीढ़ी के AMCA के आने तक वायु सेना की रीढ़ बनेगा, जिससे भारत की हवाई ताकत, आत्मनिर्भरता और भविष्य की युद्ध क्षमता को मजबूत किया जा सकेगा.

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23 जनवरी 2026 (अपडेटेड: 23 जनवरी 2026, 10:34 AM IST)
Tejas MK2
DRDO का बड़ा दांव तेजस-मार्क 2 पर, AMCA क्यों पीछे और राफेल क्यों जरूरी
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तेजस मार्क 2 भारत का अगला स्वदेशी लड़ाकू विमान है. इसे आप तेजस मार्क 1 का बड़ा, ताकतवर और ज्यादा समझदार भाई मान सकते हैं. भारतीय वायु सेना को आने वाले दशकों में जिन विमानों की जरूरत होगी, तेजस मार्क 2 उसी खाली जगह को भरने के लिए बनाया जा रहा है.

यह 4.5 पीढ़ी का मल्टी रोल फाइटर जेट होगा. यानी हवा में दुश्मन से लड़ना, जमीन पर हमला करना, समुद्र में टारगेट मारना, हर काम के लिए एक ही विमान.

तेजस मार्क 2 की जरूरत क्यों पड़ी

भारत की वायु सेना इस वक्त स्क्वाड्रन की भारी कमी से जूझ रही है. जरूरत है 42 स्क्वाड्रन की, लेकिन मौजूद हैं करीब 30. पुराने मिग 21, मिग 27 जैसे विमान रिटायर हो चुके हैं या होने वाले हैं. राफेल आए हैं, लेकिन राफेल महंगा है. हर मिशन के लिए राफेल उड़ाना समझदारी नहीं. तेजस मार्क 1 ठीक है, लेकिन उसकी रेंज, पेलोड और ताकत सीमित है.

यहीं से तेजस मार्क 2 की एंट्री होती है. यह मिडियम कैटेगरी का ऐसा फाइटर होगा जो संख्या भी देगा और ताकत भी.

तेजस मार्क 2 और तेजस मार्क 1 में फर्क

तेजस मार्क 1 हल्का लड़ाकू विमान है. तेजस मार्क 2 उससे बड़ा होगा, भारी होगा और ज्यादा हथियार ले जा सकेगा. मार्क 2 में ज्यादा फ्यूल होगा, जिससे इसकी रेंज बढ़ेगी. इंजन ज्यादा ताकतवर होगा, जिससे यह भारी हथियारों के साथ भी आसानी से उड़ सकेगा.

सीधे शब्दों में कहें तो मार्क 1 सीमित लड़ाई के लिए है, मार्क 2 लंबी और कठिन लड़ाई के लिए.

प्रोजेक्ट की शुरुआत कब और कैसे हुई

तेजस मार्क 2 का कॉन्सेप्ट 2010 के आसपास सामने आया. लेकिन असली रफ्तार 2019 के बाद आई, जब वायु सेना ने साफ कह दिया कि सिर्फ लाइट फाइटर से काम नहीं चलेगा. 

2022 में सरकार ने इसके डेवलपमेंट को हरी झंडी दी. डीआरडीओ और एचएएल को इसकी जिम्मेदारी दी गई. इसे आधिकारिक नाम मिला एलसीए मार्क 2.

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बजट कितना है

तेजस मार्क 2 के विकास के लिए सरकार ने करीब 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट मंजूर किया है. इसमें डिजाइन, प्रोटोटाइप, ग्राउंड टेस्ट, फ्लाइट टेस्ट सब शामिल हैं.

अगर यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो आगे चलकर सीरियल प्रोडक्शन में हजारों करोड़ रुपये का काम भारतीय इंडस्ट्री को मिलेगा.

इंजन कौन सा लगेगा

तेजस मार्क 2 में अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक का एफ 414 इंजन लगेगा. यही इंजन सुपर हॉर्नेट जैसे आधुनिक फाइटर में भी इस्तेमाल होता है. यह इंजन करीब 98 किलो न्यूटन थ्रस्ट देता है. यानी तेजस मार्क 1 के इंजन से काफी ज्यादा ताकत.

भविष्य में भारत इस इंजन को देश में बनाने की भी तैयारी कर रहा है, ताकि पूरी तरह आत्मनिर्भर बना जा सके.

रडार और सेंसर कितने ताकतवर होंगे

तेजस मार्क 2 में एईएसए रडार लगेगा. यह वही तकनीक है जो राफेल और एफ 35 जैसे विमानों में होती है. इस रडार से एक साथ कई टारगेट ट्रैक किए जा सकते हैं. हवा और जमीन दोनों पर नजर रखी जा सकती है.

इसके अलावा इसमें एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम होगा, जिससे दुश्मन के रडार को जाम किया जा सकेगा और खुद को बचाया जा सकेगा.

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हथियार कौन से ले जा सकेगा

तेजस मार्क 2 हथियारों का चलता फिरता गोदाम होगा. यह हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें ले जाएगा, जैसे अस्त्र और मेटियोर. हवा से जमीन पर हमला करने के लिए लेजर गाइडेड बम और क्रूज मिसाइलें होंगी.

समुद्र में हमला करने के लिए एंटी शिप मिसाइलें भी फिट की जाएंगी. कुल मिलाकर यह हर मोर्चे पर लड़ने को तैयार रहेगा.

क्या तेजस मार्क 2 के बाद राफेल की जरूरत नहीं पड़ेगी

यह सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल है. जवाब है नहीं. तेजस मार्क 2 और राफेल एक दूसरे के विकल्प नहीं, बल्कि साथी हैं. राफेल हाई एंड मिशन के लिए है. तेजस मार्क 2 रोजमर्रा की लड़ाई के लिए. युद्ध में हर मिशन पर राफेल भेजना ऐसा है जैसे सब्जी लेने फरारी ले जाना. तेजस मार्क 2 वही काम कम खर्च में करेगा.

5वीं पीढ़ी के दौर में 4.5 पीढ़ी का विमान क्यों

यह भी बड़ा सवाल है. जब दुनिया 5वीं पीढ़ी की बात कर रही है, तो भारत 4.5 पीढ़ी पर क्यों काम कर रहा है. असल वजह समय और पैसा है. 5वीं पीढ़ी का विमान बनाना बेहद जटिल और महंगा है. भारत उस पर भी काम कर रहा है, जिसे एएमसीए कहा जाता है.

लेकिन एएमसीए को आने में अभी वक्त लगेगा. तब तक खाली हाथ बैठना समझदारी नहीं. तेजस मार्क 2 इस गैप को भरने का काम करेगा.

क्या इसमें कोई समस्याएं हैं

हां, समस्याएं हैं. सबसे बड़ी चुनौती टाइमलाइन है. भारत के रक्षा प्रोजेक्ट अक्सर देरी का शिकार होते हैं. इंजन की सप्लाई, टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन, हर स्टेज पर अड़चन आ सकती है. इसके अलावा टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी एक संवेदनशील मुद्दा है.

लेकिन अच्छी बात यह है कि तेजस मार्क 1 से जो सबक मिले हैं, वे यहां काम आ रहे हैं.

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भारतीय उद्योग को क्या फायदा होगा

तेजस मार्क 2 सिर्फ एक विमान नहीं है. यह हजारों कंपनियों के लिए काम है. इसमें देश की छोटी बड़ी कंपनियां पार्ट्स बनाएंगी, सॉफ्टवेयर लिखेंगी, मेंटेनेंस करेंगी. इससे रोजगार भी बढ़ेगा और टेक्नोलॉजी भी.

भविष्य की तस्वीर क्या है

अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चलता है, तो 2026 में इसका पहला प्रोटोटाइप उड़ान भरेगा. इसके बाद टेस्टिंग चलेगी और दशक के आखिर तक यह वायु सेना में शामिल हो सकता है. तेजस मार्क 2, एएमसीए और राफेल मिलकर भारत की वायु शक्ति की रीढ़ बन सकते हैं.

आखिर में

तेजस मार्क 2 कोई जादुई समाधान नहीं है, लेकिन यह एक जरूरी कदम है. यह भारत को आत्मनिर्भर बनाएगा, वायु सेना की ताकत बढ़ाएगा और भविष्य की तैयारी करेगा.
सीधे शब्दों में कहें तो तेजस मार्क 2 उस पुल की तरह है, जो आज की जरूरतों को कल की ताकत से जोड़ता है.

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