BJP नेता केजरीवाल के घर धरना देने गए, उन्हें नहीं पता था उनके साथ क्या खेल होने वाला है
आप खाएं थाली में, मुन्ने को दें प्याली में?
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फोटो - thelallantop
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इस मुल्क ने हर शख्स को इक काम सौंपा था,
हर शख्स ने उस काम की मा...चिस जला के छोड़ दी.
ये गुलाल का एक प्रसिद्ध जुमला है. लेकिन ऐसा लगता है कि पूरे देश ने एक साथ पीयूष मिश्रा के ट्विटर अकाउंट को अनफॉलो कर दिया है. क्यूंकि कुछ दिनों से देश का हर आदमी अब अपने ‘स्किल सेट’ के हिसाब से काम करता दिख रहा है.

अनिल बैजल ('प्रथम कटे तो' वाली पहेली खेलने का मन करता है इनके लास्ट नेम के साथ.)
तो खबर ये है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री, केजरीवाल पिछले दो दिनों से धरने में हैं. धरना दिया है एलजी यानी उपराज्यपाल के निवास पर. कारण है – अरे वही जो हर धरने का कारण होता है – हमारी मांगे पूरी करो.
हां तो इस पीजे के बाद वापस मुद्दे की बात पर आते हैं.
मुद्दा ये कि दो दिन से धरने पर बैठे केजरीवाल और उनके तीन मंत्री वहीं उठ, बैठ, खा, सो आदि आदि रहे हैं.
खैर आवास एलजी का इसलिए उसका वोटिंग रूम भी कोई रेलवे का वेटिंग रूम तो होगा नहीं. पूरी सुविधाओं से सुसज्जित रूम है. एकदम. मतलब सोफे-वोफे सब.

थोड़ा है, थोड़े की ज़रूरत है, ज़िंदगी फिर भी बड़ी खूबसूरत है.
उधर एलजी हैं कि ‘लाईफ इज़ गुड’ कहकर अंगड़ाई लेते हुए सो गए हैं.
मगर एलजी संज्ञान न भी लें तो क्या, लोकतंत्र का ये मेला बिना सर्कस देखे खत्म हो जाएगा क्या? बोलो, क्या ख़तम हो जाएगा क्या? नहीं न?
तो लोकतंत्र के बचाने को आई है भाजपा. एक बार फिर से. जी वही भाजपा जिसके पास आज़ादी के बाद से आज तक विपक्ष में रहने का लंबा चौड़ा वर्क एस्क्पिरियेंस है.

जब केजरीवाल के 'नजीब' में ही 'जंग' हो तो कोई क्या ही कर सकता है! (पूर्व राज्यपाल नजीब जंग)
बेशक दिल्ली को चार साल पहले अरविंद ने ‘भाजपा मुक्त दिल्ली’ बना दिया था. लेकिन फिर भी जिस तरह रस्सी जल जाती है मगर बल नहीं जाता, उसी तर्ज पर भाजपा अपने ‘एक्सपर्टीज़’ का तीन विधायकों के रहते हुए भी प्रदर्शन कर ही दिया है.
किया क्या है?
वही – विरोध का उल्टा.
अरे समर्थन नहीं, विरोध का विरोध - वे लोग भी पहुंच गए हैं, मुख्यमंत्री के ऑफिस में धरना देने के लिए. राम, लक्ष्मण, हनुमान और विभीषण की तर्ज़ पर - विजेंद्र गुप्ता, मजेंदर सिंह सिरसा, प्रवेश वर्मा और कपिल मिश्रा.

एल जी के घर अख़बार भी 'हिंदू' आता है. ये मिले हुए हैं जी!
तो यूं रोज़ नए रंग दिखाने वाला राजनीति का गिरगिट फिर अपने कलर कॉन्ट्रास्ट से जनता का मनोरंजन कर रहा है. भारत में वैसे भी लोग साधु हैं. उन्हें गड्ढा मुक्त सड़क मिले न मिले, उन्हें बिजली, पानी मिले न मिले मनोरंजन की नियमित डोज़ मिलती रहनी चाहिए. और इसी को सुनिश्चित करने के लिए वो लोकतंत्र नाम के रियल्टी शो में सबसे बड़े इंटरटेनर को दबा के वोट देते हैं. जो जितना बड़ा इंटरटेनर वो उतने आगे जाएगा, ग्रैंड फिनाले जीत के आएगा, हलुआ पुड़ी खाएगा, मंदिर वही बनाएगा...
लेकिन भाजपा की इतनी बड़ी और इतनी अक्लमंद टीम एक बार फिर इस दिल्ली के लौंडे केजरीवाल के चक्कर में फंस गई है. ये आईआईटीयन बड़े जालिम होते हैं जी.

केजरीवाल को शायद मालूम था कि ऐसा कुछ होगा. इसी के चलते उन्होंने सोफे में बैठने का कोई विकल्प ही नहीं रखा है. मतलब ये कि आप खुद तो बैठोगे, सोओगे एलजी के सोफे में और कभी कोई आपके घर में धरने में आए तो वो कुर्सी पर बैठे. कितनी देर बैठेगा? आपने सोफे पर लेटकर 3 दिन धरना दिया. उसे तो लेटने के लिए दरी चटाई बोरी की व्यवस्था खुद करनी होगी. ऐसा कोई करता है. वो भी अतिथि देवो भवः वाले इस भारतवर्ष में? - कैसी तेरी खुदगर्जी?

आई मीन लड़ाई का भी कोई प्रोटोकॉल होना चाहिए कि नहीं?
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ये गुलाल का एक प्रसिद्ध जुमला है. लेकिन ऐसा लगता है कि पूरे देश ने एक साथ पीयूष मिश्रा के ट्विटर अकाउंट को अनफॉलो कर दिया है. क्यूंकि कुछ दिनों से देश का हर आदमी अब अपने ‘स्किल सेट’ के हिसाब से काम करता दिख रहा है.
# राहुल गांधी सालों बाद फिर से फॉर्म में आए हैं. सभी संभावनों (आशंकाओं) को धता बतलाते हुए वापस उनकी स्टैंडअप कॉमेडी में धार आ चुकी है.मैं ये सब क्यूं कह रहा हूं, वो बताता हूं. राहुल गांधी और भाजपा का हिसाब किताब तो आपको पता ही होगा. बचे बीच दो पॉइंट.
# दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जिस काम के लिए जाने जाते थे, युगों बाद उसी काम को फिर से तत्परता से अपना लिया है – धरना.
# दिल्ली के वर्तमान एल जी - बैजल, होते होते नज़ीब जंग का नास्टैल्जिया हो गए हैं.
# भाजपा सालों बाद विपक्ष की भूमिका में दिख रही है.

अनिल बैजल ('प्रथम कटे तो' वाली पहेली खेलने का मन करता है इनके लास्ट नेम के साथ.)
तो खबर ये है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री, केजरीवाल पिछले दो दिनों से धरने में हैं. धरना दिया है एलजी यानी उपराज्यपाल के निवास पर. कारण है – अरे वही जो हर धरने का कारण होता है – हमारी मांगे पूरी करो.
बाई दी वे अगर ममता कुलकर्णी को धरना देना होता तो वो नारे देतीं – करो, मांग पूरी करो!"सर, सोमवार को आपने कहा था मुझे और टाईम दो. हम तब से यहीं बैठे हैं, 48 घंटे होने को हैं, उम्मीद है आपने कुछ ठोस कदम उठाए होंगे,दिल्ली की जनता को आपके जवाब का इंतज़ार है"
LG साहब के नाम, राजनिवास के वेटिंग रूम से @msisodia
का पत्र👇 pic.twitter.com/AUf49xszFX
— AAP (@AamAadmiParty) June 13, 2018
@BJP4Delhi
dharna is against @ArvindKejriwal
and his team. Due to neglect by @AamAadmiParty
Water and Electricity is in a state of crisis for Delhiites. AAP leaders sitting in AC room Enjoying Paid Holiday at the Cost of Citizens Woes... https://t.co/YS0OSSxmJ2
— Manoj Tiwari (@ManojTiwariMP) June 13, 2018
हां तो इस पीजे के बाद वापस मुद्दे की बात पर आते हैं.
मुद्दा ये कि दो दिन से धरने पर बैठे केजरीवाल और उनके तीन मंत्री वहीं उठ, बैठ, खा, सो आदि आदि रहे हैं.
खैर आवास एलजी का इसलिए उसका वोटिंग रूम भी कोई रेलवे का वेटिंग रूम तो होगा नहीं. पूरी सुविधाओं से सुसज्जित रूम है. एकदम. मतलब सोफे-वोफे सब.

थोड़ा है, थोड़े की ज़रूरत है, ज़िंदगी फिर भी बड़ी खूबसूरत है.
उधर एलजी हैं कि ‘लाईफ इज़ गुड’ कहकर अंगड़ाई लेते हुए सो गए हैं.
मगर एलजी संज्ञान न भी लें तो क्या, लोकतंत्र का ये मेला बिना सर्कस देखे खत्म हो जाएगा क्या? बोलो, क्या ख़तम हो जाएगा क्या? नहीं न?
तो लोकतंत्र के बचाने को आई है भाजपा. एक बार फिर से. जी वही भाजपा जिसके पास आज़ादी के बाद से आज तक विपक्ष में रहने का लंबा चौड़ा वर्क एस्क्पिरियेंस है.

जब केजरीवाल के 'नजीब' में ही 'जंग' हो तो कोई क्या ही कर सकता है! (पूर्व राज्यपाल नजीब जंग)
बेशक दिल्ली को चार साल पहले अरविंद ने ‘भाजपा मुक्त दिल्ली’ बना दिया था. लेकिन फिर भी जिस तरह रस्सी जल जाती है मगर बल नहीं जाता, उसी तर्ज पर भाजपा अपने ‘एक्सपर्टीज़’ का तीन विधायकों के रहते हुए भी प्रदर्शन कर ही दिया है.
किया क्या है?
वही – विरोध का उल्टा.
अरे समर्थन नहीं, विरोध का विरोध - वे लोग भी पहुंच गए हैं, मुख्यमंत्री के ऑफिस में धरना देने के लिए. राम, लक्ष्मण, हनुमान और विभीषण की तर्ज़ पर - विजेंद्र गुप्ता, मजेंदर सिंह सिरसा, प्रवेश वर्मा और कपिल मिश्रा.

एल जी के घर अख़बार भी 'हिंदू' आता है. ये मिले हुए हैं जी!
तो यूं रोज़ नए रंग दिखाने वाला राजनीति का गिरगिट फिर अपने कलर कॉन्ट्रास्ट से जनता का मनोरंजन कर रहा है. भारत में वैसे भी लोग साधु हैं. उन्हें गड्ढा मुक्त सड़क मिले न मिले, उन्हें बिजली, पानी मिले न मिले मनोरंजन की नियमित डोज़ मिलती रहनी चाहिए. और इसी को सुनिश्चित करने के लिए वो लोकतंत्र नाम के रियल्टी शो में सबसे बड़े इंटरटेनर को दबा के वोट देते हैं. जो जितना बड़ा इंटरटेनर वो उतने आगे जाएगा, ग्रैंड फिनाले जीत के आएगा, हलुआ पुड़ी खाएगा, मंदिर वही बनाएगा...
लेकिन भाजपा की इतनी बड़ी और इतनी अक्लमंद टीम एक बार फिर इस दिल्ली के लौंडे केजरीवाल के चक्कर में फंस गई है. ये आईआईटीयन बड़े जालिम होते हैं जी.

केजरीवाल को शायद मालूम था कि ऐसा कुछ होगा. इसी के चलते उन्होंने सोफे में बैठने का कोई विकल्प ही नहीं रखा है. मतलब ये कि आप खुद तो बैठोगे, सोओगे एलजी के सोफे में और कभी कोई आपके घर में धरने में आए तो वो कुर्सी पर बैठे. कितनी देर बैठेगा? आपने सोफे पर लेटकर 3 दिन धरना दिया. उसे तो लेटने के लिए दरी चटाई बोरी की व्यवस्था खुद करनी होगी. ऐसा कोई करता है. वो भी अतिथि देवो भवः वाले इस भारतवर्ष में? - कैसी तेरी खुदगर्जी?

आई मीन लड़ाई का भी कोई प्रोटोकॉल होना चाहिए कि नहीं?
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सुनीता केजरीवाल ने दिल्ली के एलजी अनिल बैजल को ये क्या कह दिया है?
दिल्ली के सलाहकारों के लिए बना नियम मध्यप्रदेश के ‘सलाहकारों’ पर लागू क्यों नहीं है?
AAP की ये स्कीम अगर पूरे देश में लागू हो जाए तो 15 नहीं, 30-30 लाख रुपए खाते में आ जाएंगे
दिल्ली सरकार के बजट की वो खास बात, जिसे हर सरकार को आंख मूंदकर अपना लेना चाहिए
अरविंद केजरीवाल की टेंशन बढ़ाने वाले ये तीन लोग कौन हैं?
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