The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Lallankhas
  • CBI raided delhi deputy cm manish sisodia s property trouble is increasing in the excise scam case

मनीष सिसोदिया के घर CBI ने क्यों मारा छापा

जिस दिन CBI ने छापा मारा, उसी दिन न्यू यॉर्क टाइम्स में दिल्ली के सरकारी स्कूलों में सुधार की सराहना की गई.

Advertisement
pic
19 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 19 अगस्त 2022, 11:19 PM IST)
Delhi's deputy CM manish sisodia
दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (फोटो: पीटीआई)
Quick AI Highlights
Click here to view more

शराब पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, लेकिन शराब पिलाना राजस्व के लिए फायदेमंद होता है. यकीन नहीं आता तो आप देश के तमाम राज्यों के बजट उठाकर देख लीजिए कि उनकी कमाई का कितना हिस्सा शराब की बिक्री से आता है. जिन राज्यों में नाम के लिए शराब बंदी है, वहां बिक रही शराब से राजनीति और सरकारी तंत्र में कितनों के हाथ गर्म होते हैं, वो भी किसी से छिपा नहीं है. देश भर में शराब के ठेके कैसे बंटते हैं और किन्हें बंटते हैं, उनपर तो अलग सए बात करनी पड़ेगी.

2012 का नवंबर भारत के राजनैतिक इतिहास के लिहाज़ से महत्वपूर्ण था. क्योंकि अरसे बाद एक आंदोलन से किसी पार्टी का जन्म हुआ था. अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी, खेल के नियम बदलने की बात करती थी. टिप्पणीकार, उसे political disrupter कहते थे. एक दौर था, जब आम आदमी पार्टी इस शब्द को बहुत गंभीरता से लेती थी. अरविंद और उनकी पार्टी बिना चुनाव हर छोटी-बड़ी लड़ाई में उलझ जाते थे. तब उनके लिए एक और शब्द का इस्तेमाल होने लगा - confrontational. और ताली एक ही हाथ से नहीं बज रही थी. कौन भूल सकता है, जब एक के बाद एक आप विधायक दिल्ली पुलिस की कस्टडी में नज़र आते थे. फिर वो दौर बीता और थोड़ी शांति पनपी.

लेकिन पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की जीत ने सब कुछ बदल दिया. पहले सत्येंद्र जैन को ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया. उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लगी, जिसमें फ्रीबीज़ पर रोक लगाने की मांग हुई. और याचिका में आम आदमी पार्टी का नाम से उल्लेख हुआ. और फिर आता है 19 अगस्त 2022 का दिन. जब CBI की टीम आम आदमी पार्टी में दूसरे सबसे ताकतवर नेता और दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के घर छापा मारने पहुंच जाती है.

चूंकि सारा मामला दिल्ली की उस नई एक्साइज़ पॉलिसी से जुड़ा हुआ है जिसे अब वापस ले लिया गया है, इसीलिए पहले आपको इसके बारे में बता देते हैं. फिर छापे पर आएंगे.
दिल्ली की नई एक्साइज़ पॉलिसी का प्रस्ताव आया था 2020 में, और ये नवंबर 2021 से लागू हुई. इसके तहत सरकार ने अपनी दुकानों से शराब बेचना बंद किया. और सारी दुकानें निजी हाथों में चली गईं. ये दुकान मालिक शराब को MRP से कहीं कम दाम पर बेच सकते थे. इसीलिए दुकानदारों ने ग्राहक बटोरने के लिए भारी डिस्काउंट देने शुरू किये. चूंकि बिक्री ज़्यादा हो रही थी, इसीलिए दिल्ली सरकार को मिलने वाला राजस्व भी बढ़ने लगा. कुल बढ़त थी 27 फीसदी. वैसे जब भारी डिस्काउंट्स का विरोध हुआ, तब डिस्काउंट कम किए गए. दिल्ली में विपक्ष में बैठी भाजपा शुरुआत से नई शराब नीति का विरोध कर रही है.

इस पॉलिसी को लेकर असल दिक्कत पैदा हुई इस साल जुलाई में. जब दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी नरेश कुमार ने एक रिपोर्ट दिल्ली के उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को सौंपी. इसमें आरोप लगाया गया था कि नई एक्साइज़ नीति के तहत शराब कार्टेल को फायदा पहुंचाने के लिए कोरोना महामारी के बहाने लाइसेंस फीस में 144 करोड़ 36 लाख रुपए की छूट दे दी गई. चूंकि एक्साइज़ विभाग मनीष सिसोदिया के तहत आता है, इसीलिए आरोप सीधे उनपर लगा. दो हफ्तों के भीतर विनय कुमार सक्सेना ने इस रिपोर्ट के आधार पर CBI जांच के आदेश दे दिए. इसके बाद दिल्ली सरकार ने नई एक्साइज़ नीति को वापस ले लिया. और पहले से चली आ रही एक्साइज़ नीति पुनः लागू हो गई.

इसके बाद आता है आज का दिन, जब CBI की टीम ने देश भर में 21 जगहों पर एक साथ छापा मारा, जिनमें मनीष सिसोदिया का दिल्ली स्थित घर भी शामिल था. CBI ने अपनी FIR में 15 लोगों को नामित किया है, जिनमें से पहला नाम मनीष सिसोदिया का है. इसके बाद दिल्ली सरकार के पूर्व और मौजूदा एक्साइज़ विभाग अधिकारियों के नाम हैं. छापे के दौरान मौके पर आम आदमी पार्टी के समर्थक और कार्यकर्ता पहुंच गए और विरोध करने लगे. पुलिस के अधिकारी इन्हें लाउड स्पीकर पर याद दिलाते देखे गए कि इस इलाके में प्रदर्शन करना मना है.

संयोग से जिस दिन सीबीआई का छापा पड़ा, उसी दिन आम आदमी पार्टी पर एक रिपोर्ट न्यू यॉर्क टाइम्स में छपी थी, जिसमें दिल्ली के सरकारी स्कूलों में हुए सुधार की सराहना की गई थी. अखबार ने ये रिपोर्ट 16 अगस्त को अपनी वेबसाइट पर छापी था और 18 अगस्त को प्रिंट के अंतरराष्ट्रीय अंक में. इसमें स्कूल के बच्चों के साथ मनीष सिसोदिया भी नज़र आ रहे हैं. वैसे ज़िक्र आतिशि मर्लेना का भी है.

आज जब छापे की बात सामने आई, तो अरविंद केजरीवाल ने प्रतिक्रिया देते हुए NYT की रिपोर्ट का उल्लेख भी किया. उन्होंने ट्विटर पर लिखा,

''जिस दिन अमेरिका के सबसे बड़े अख़बार NYT के फ़्रंट पेज पर दिल्ली शिक्षा मॉडल की तारीफ़ और मनीष सिसोदिया की तस्वीर छपी, उसी दिन मनीष के घर केंद्र ने CBI भेजी. CBI का स्वागत है. पूरा cooperate करेंगे. पहले भी कई जांच/रेड हुईं. कुछ नहीं निकला. अब भी कुछ नहीं निकलेगा.''

केजरीवाल के इस ट्वीट में सिसोदिया का भी ट्वीट नत्थी था. इसमें उन्होंने लिखा,

“सीबीआई आई है. उनका स्वागत है. हम कट्टर ईमानदार हैं. लाखों बच्चों का भविष्य बना रहे हैं. बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे देश में जो अच्छा काम करता है उसे इसी तरह परेशान किया जाता है. इसीलिए हमारा देश अभी तक नम्बर-1 नहीं बन पाया.”

सिसोदिया के पक्ष में आज केजरीवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की. केजरीवाल NYT के लेख की बात कर रहे थे, तो रमेश बिधूड़ी समेत दूसरे भाजपा नेताओं ने उसे विज्ञापन बताना शुरू कर दिया. साथ में खलीज टाइम्स नाम के एक अखबार के लेख का ज़िक्र होने लगा. आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने भी पेड प्रमोशन वाली बात कह दी. लेकिन न्यू यॉर्क टाइम्स ने इंडिया टुडे को दिए अपने जवाब में साफ कर दिया है कि अखबार में छपी रिपोर्ट स्वतंत्र मैदानी कवरेज के नतीजे में तैयार हुई है. न ये विज्ञापन है और न ही इसके लिए किसी तरह का कोई भुगतान लिया गया. अखबार ने ये भी कहा कि दूसरे मीडिया संस्थान नियमित रूप से उसके रिपोर्ट को अपने यहां विधिवत रूप से छापते हैं. तो इतनी बात तो स्थापित हो जाती है कि NYT में जो छपा, वो विज्ञापन नहीं, खबर ही थी.

लेकिन आज का मुद्दा NYT नहीं, सीबीआई का छापा है. सो हम उसी तरफ लौटते हैं. एक तरफ टीवी पर छापे के विज़ुअल चल रहे थे, दूसरी तरफ भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा प्रेस में बयान दे रहे थे. उन्होंने सिसोदिया पर बड़े गंभीर आरोप लगाए. भाजपा की तरफ से ये सवाल भी बार-बार पूछा गया कि अगर दिल्ली सरकार की एक्साइज़ नीति में कोई समस्या थी ही नहीं, तो फिर उसे वापस क्यों लिया गया? भाजपा और आम आदमी पार्टी आमने सामने हुए, तो कांग्रेस ने भी मौका ताड़ लिया. इन सारे आरोपों पर जवाब देते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि उनकी पार्टी जांच से नहीं डरती.

ये किसी से छिपा नहीं है कि अरविंद केजरीवाल के मंसूबे राष्ट्रीय स्तर के हैं. 2014 के अरविंद केजरीवाल से 2022 के अरविंद केजरीवाल ने काफी कुछ सीख लिया है. और इसीलिए 2024 वाले केजरीवाल को लेकर राजनैतिक टिप्पणीकार तरह-तरह से कयास लगाते हैं. इन कयासों की परीक्षा जल्द ही हिमाचल और गुजरात में होने वाली है. क्या इन छापों का असर विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की तैयारी पर पड़ेगा, समय ही बता सकता है.

वीडियो: मनीष सिसोदिया पर CBI कार्रवाई के पीछे एक्साइज पॉलिसी है या कुछ और?

Advertisement

Advertisement

()