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क्या था 'ब्रिटिश पोस्ट ऑफ़िस स्कैंडल', जिस पर सीरीज़ बनी तो ऋषि सुनक सरकार प्रेशर में आ गई?

ग़लती जापानी सॉफ्टवेयर की थी, बर्बाद ब्रिटेन के पोस्ट मास्टर हुए. मामला खुला तो ब्रिटिश सरकार सन्नाटे में आ गई. अब मुआवज़े बांटे जा रहे हैं.

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12 जनवरी 2024 (अपडेटेड: 13 जनवरी 2024, 09:12 AM IST)
post office scandal uk
2000 से ज़्यादा लोगों का जीवन प्रभावित हुआ इस स्कैंडल से (फ़ोटो - BBC)
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इसी साल की जनवरी में स्ट्रीमिंग प्लैटफ़ॉर्म ITV पर एक चार पार्ट की सीरीज़ आई है: ‘मिस्टर बेट्स वर्सेज़ द पोस्ट ऑफ़िस: द रियल स्टोरी’. इस ब्रिटिश ड्रामा सीरीज़ में टोबी जोन्स हैं. लिखा है, ग्वेनेथ ह्यूग्स ने और डायरेक्ट किया है, जेम्स स्ट्रॉन्ग ने. ये एक सब-पोस्टमास्टर की कहानी है, जिस पर धोखाधड़ी के आरोप लग जाते हैं. और सिर्फ़ उस पर नहीं, 3,500 से ज़्यादा कर्मियों पर आरोप लगते हैं. कुछ को जेल जाना पड़ा, कुछ दिवालिया हो गए, कितनों की शादियां टूट गईं और कुछ की मौत हो गई. बाद में पता चलता है कि ये आरोप झूठे थे. सॉफ़्टवेयर की ग़लती की वजह से ऐसा हुआ था. इन आरोपों का उनपर क्या असर पड़ता है और वो अपने सत्य के लिए कैसे संघर्ष करते हैं, यही सीरीज़ में दिखाया गया है. मगर ये कहानी काल्पनिक नहीं है, 'रियल स्टोरी' है.

इसे ‘ब्रिटिश पोस्ट ऑफ़िस स्कैंडल’ कहा जाता है. सीरीज़ के आने के बाद से बड़े पैमाने पर भुक्तभोगियों के लिए मुआवज़े और दोषमुक्ति की मांग उठ रही है. बुधवार, 11 जनवरी को ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कहा कि वो दोषसिद्धि को उलटने के तरीक़े खोजेंगे.

इसीलिए आपको इस घोटाले के बारे में बताते हैं. क्या आख़िरकार एक टीवी शो के बदौलत भोगियों को न्याय मिल पाएगा?

घोटाला हुआ कैसे?

ब्रिटेन में डाकघर शाखा के प्रबंधकों को सब-पोस्टमास्टर या उप-डाकपाल कहा जाता है. लोग अक्सर अपनी बचत डाकघरों में जमा करवाते हैं और पेंशन का भी काम यहीं से होता है. साल 1999 में सरकारी पोस्ट-ऑफ़िस ने सेल्स की अकाउंटिंग और स्टॉक-टेकिंग के लिए होराइज़न IT प्रणाली शुरू की. इसे जापानी कंपनी फ़ुजित्सु ने बनाया था.

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कुछ ही दिनों में अलग-अलग पोस्ट ऑफ़िसों में घाटा दिखने लगा. हज़ारों पाउंड्स का घाटा. चूंकि घाटा उनके पोस्ट ऑफ़िस में दिख रहा था तो सब-पोस्टमास्टरों के कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक़, ये घाटा उनकी जेब से काटा जाना था. उच्च अधिकारियों से शिकायत की, तो वो नए IT सिस्टम से आश्वस्त थे और उन्होंने सब-पोस्टमास्टरों पर ही भ्रष्टाचार के आरोप मढ़ दिए.

साल 2000 से 2014 के बीच 900 उप-डाकपालों पर फ़्रॉड के आरोप लगे. आने वाले सालों में कितनों की नौकरियां चली गईं, कुछ चोरी के आरोप में जेल चले गए, कुछ बैंकरप्ट हो गए. कुछ ने आत्महत्या का प्रयास किया, और कुछ ने तो आत्महत्या कर ही ली. न्यूज़ एजेंसी AP की रिपोर्ट के मुताबिक़, कुल 2,000 से ज़्यादा लोग इस घोटाले से प्रभावित हुए थे.

घोटाला खुला कैसे?

2009 में 'कंप्यूटर वीकली' नाम की पत्रिका ने पोस्टमास्टरों के साथ हुए अन्याय और होराइज़न की खामियों पर एक रिपोर्ट छापी. डाकघर ने जांच बैठाई. लेकिन 2015 में डाकघर के CEO पाउला वेनेल्स ने संसदीय समिति को बता दिया कि किसी भी तरह की गड़बड़ी का कोई सबूत नहीं मिला है.

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इसके बाद 2016 में कुछ पीड़ित डाक-कर्मचारी पोस्ट ऑफ़िस के ख़िलाफ़ कोर्ट चले गए. आख़िरकार 2019 में - बीस साल बाद - लंदन के हाईकोर्ट ने पीड़ितों के पक्ष में फ़ैसला सुनाया. कहा कि होराइज़न में कई बग, त्रुटियां और खामियां थीं और डाकघर के अफ़सर इनके बारे में जानते थे.

घोटाले के बाद क्या हुआ?

हाई कोर्ट के फ़ैसले के बाद पोस्ट ऑफ़िस प्रशासन 555 सब-पोस्टमास्टरों को 58 मिलियन पाउंड (614 करोड़ रुपए) का मुआवज़ा देने के लिए सहमत हो गया. सरकार का दावा है कि अभी तक जोड़-जाड़ के 2,700 से ज़्यादा दावेदारों को मुआवज़ा मिल भी चुका है. हालांकि, कई पोस्टमास्टरों को अभी तक मुआवज़ा नहीं मिला है, न ही उनकी दोषसिद्धि रद्द हुई है. कई पीड़ितों ने ये भी बताया कि जितना मुआवज़ा मिला है, उससे ज़्यादा तो वकील की फ़ीस देने में लग गया.

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, आज तक किसी भी वरिष्ठ अफ़सर को कोई सज़ा नहीं मिली है.

CEO वेनेल्स के सात साल के कार्यकाल में वेतन और बोनस मिलाकर उन्होंने 47 करोड़ रुपए कमाए. साल 2019 में पोस्ट ऑफ़िस सर्विसेज़ और दान के लिए उन्हें CBE सम्मान तक दिया गया. घोटाला खुला, तो 2019 में उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया. और, ITV के शो के प्रसारण के बाद CBE सम्मान भी वापस कर दिया. केस उनपर अब भी नहीं हुआ है.

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डाक मामलों के पूर्व-मंत्री एड डेवी भी सुर्खियों में आ गए थे. लेकिन उन्होंने समय रहते कन्नी काट ली. कह दिया कि डाकघर के अफ़सरों ने उन्हें गुमराह किया था.

जापानी कंपनी फ़ुजित्सु का क्या हुआ? कुछ नहीं हुआ. वो अभी तक पोस्ट ऑफ़िसों में अपना सिस्टम बैठाए हुए हैं. उसके बाद भी उन्हें कई और सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स मिल चुके हैं. कंपनी का कहना है कि घोटाले में उनकी भूमिका के लिए वो माफ़ी मांग चुके हैं और जो स्वतंत्र जांच चल रही है, उसका समर्थन कर रहे हैं. 

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