क्या है इस कंपनी का KGF कनेक्शन, जिसमें से सरकार अपनी हिस्सेदारी बेच रही?
जानिए मेट्रो और ट्रेन के बड़े-बड़े पहिए बनाने वाली ये कंपनी डिफ़ेंस मिनिस्ट्री के अंडर क्यूं आती है.
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मशहूर कन्नड़ फिल्म KGF का पोस्टर (लेफ़्ट में) . राइट में BEML, बेंगलुरु का सीएनसी मशीन केन्द्र. (तस्वीर: bemlindia.in)
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2020 में सरकार ने BEML यानी भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड के डिसइन्वेस्टमेंट (विनिवेश) के लिए सैद्धांतिक मंज़ूरी दी थी. इस मंज़ूरी के बाद, सरकार ने इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए लेन-देन सलाहकार, कानूनी सलाहकार और एसेट वेल्यूअर नियुक्त किए. नियुक्त सलाहकारों ने एक्सप्रेशन ऑफ़ इंट्रेस्ट (EOI) डॉक्यूमेंट सरकार को सौंप दिया. अब सरकार ने 3 जनवरी को इसे ज़ारी कर दिया है.
ज़ारी कर दिया है मतलब, जिन कंपनियों या संस्थानों को BEML में हिस्सेदारी चाहिए, वो सरकार के सामने इस EOI के माध्यम से अपनी इच्छा ज़ाहिर कर सकते हैं. EOI जमा करने की अंतिम तिथि है, 1 मार्च 2021. EOI को किसी बिडिंग प्रक्रिया का पहला स्टेप कहा जा सकते है. दूसरे शब्दों में कहें तो BEML में सरकार की 26% हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. BEML का KGF कनेक्शन KGF. कन्नड़ की अब तक की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली मूवी मानी जाती है. इसका पार्ट-2 फ़रवरी 2021 में आना है. लेकिन कोविड-19 और एक्टर संजय दत्त की बीमारी के चलते शायद इसमें अभी थोड़ा और वक्त लगेगा.
ख़ैर हम इस मूवी में ज्यादा नहीं जाते. हमारा मतबल बस इसके नाम से है. KGF बोले तो ‘कोलार गोल्ड फ़ील्ड्स’. बेंगलुरु से लगभग 50 किलोमीटर दूर KGF भारत की कुछ सबसे पुरानी सोने की खदानों में से एक है. मतलब 100-200 साल नहीं. 1,000 से 1,200 साल पुरानी. पहले इसने चोल साम्राज्य को पैसे कमा के दिए, फिर विजयनगर साम्राज्य, फिर टीपू सुल्तान और उसके बाद अंग्रेजों को. इतनी पुरानी खदान होने के कारण अब खोदते-खोदते इसकी गहराई 4 किलोमीटर के क़रीब हो चुकी है.
कोलार गोल्ड फ़ील्ड्स की एक पुरानी, 1913 की तस्वीर.
हालांकि 2001 में सरकारी कंपनी ‘भारत गोल्ड माइंस लिमिटेड’ ने यहां पर खुदाई बंद कर दी. क्यूंकि खुदाई की लागत, निकाले गए सोने के क़रीब या उससे ज़्यादा ही पड़ रही थी. लेकिन खंडहर हो रही इस गोल्ड माइन को अब प्राइवेट हाथों में सौंपने की बात हो रही है. साथ ही प्राइवेटाइज़ेशन की बात हो रही है एक और कंपनी की, जिसकी स्थापना, यहीं, KGF में हुई थी. कंपनी का नाम है BEML यानी भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड है. लेकिन इनकी ऑफ़िशियल वेबसाइट से लेकर हर जगह ये लिखा है कि BEML पहले भारत अर्थ मूवर्स कहलाती थी.
बात बेंगलुरु के ‘IT हब’ बनने से बहुत पहले की है. 1964-65 की. वैसे तो BEML 1964 में ही अस्तित्व में आ गई थी लेकिन इसने अपना काम शुरु किया 1 जनवरी, 1965 से. #BEML कैसे बनी पब्लिक लिमिटेड कंपनी BEML को बनाया गया था रेल के कोच और उसके स्पेयर पार्ट्स के साथ-साथ खनन कार्य में प्रयोग होने वाले उपकरण तैयार करने के लिए. और इसी के चलते BEML की स्थापना होते ही ‘हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड’ का रेल कोच डिपार्टमेंट और उससे जुड़ी कई परिसंपत्तियां BEML को ट्रान्सफ़र कर दी गईं.
30 सालों तक, यानी 1995 तक इस कंपनी का मालिक भारत सरकार का ‘रक्षा मंत्रालय’ था. इसे ‘कंपनीज़ एक्ट’ के अंतर्गत 11 मई 1964 को एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में स्थापित किया गया था. लेकिन BEML को 1992 में पब्लिक लिमिटेड कंपनी बना दिया गया. यानी इसके छोटे-छोटे हिस्से (इक्विटी) करके कुछ हिस्से IPO के माध्यम से आम-जन को बेच दिए गए. कुल 25%. बाद में 2007 में FPO के माध्यम से इसकी कुछ और हिस्सेदारी बेची गई. और इससे BEML में सरकार की हिस्सेदारी 54.03 प्रतिशत रह गई. अब सरकार इसमें से अपनी 26% हिस्सेदारी बेचना चाह रही है.
BEML शेयर प्राइस. 4 जनवरी, 2021. (स्क्रीनग्रैब: गूगल फ़ाइनेंस)
4 जनवरी, 2021 को शेयर मार्केट बंद होते वक्त इसके एक शेयर का मूल्य 1,007 रुपये था. यूं इसका मार्केट कैप, 3.23% की बढ़त के साथ क़रीब 4,203 करोड़ रुपए हो गया है. मतलब इसकी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी 4203 करोड़ की. और इस तरह 26 प्रतिशत हिस्सेदारी का मूल्य हुआ क़रीब 1,090 करोड़ रुपए. या इसे यूं भी कह सकते हैं कि सरकार अपनी हिस्सेदारी बेचकर हज़ार करोड़ रुपए के क़रीब कमाना चाहेगी. # BEML, रक्षा मंत्रालय के अंडर में क्यूं है? अब सवाल ये भी है कि ‘रेल’ या मैन्यूफ़ैक्चरिंग वाली कंपनी रक्षा मंत्रालय के अंडर कैसे आई? गौर से देखिए कि इसे जो परिसंपत्तियां दी गई थीं, वो ‘हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड’ द्वारा दी गई थीं. साथ ही 1901 में स्थापित ‘गन एंड शेल फ़ैक्ट्री’ कंपनी ने 1958 में अपना एक ट्रैक्टर प्रोजेक्ट शुरू किया था. इस ट्रैक्टर प्रोजेक्ट को 1965 में कुछ ही महीने पुरानी कंपनी BEML में शिफ़्ट कर दिया गया. ‘गन एंड शेल फ़ैक्ट्री’ फ़ैक्ट्री ‘ऑर्डनेंस फ़ैक्ट्री बोर्ड’ के अंडर में आती है. और ‘ऑर्डनेंस फ़ैक्ट्री बोर्ड’ आता है भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंडर में.
तो यूं समझ में आता है कि इसे ज़्यादातर (शुरुआती) प्रोजेक्ट्स रक्षा मंत्रालय के अंडर आने वाली कंपनियों या संस्थानों से काटकर दिए गए थे. लेकिन BEML को तब भी रक्षा मंत्रालय के अंडर में रहने दिया गया. और आज भी कंपनी के कुल तीन बिज़नेस वर्टिकल्स में से एक वर्टिकल ‘डिफ़ेंस’ ही है. और ये कंपनी रक्षा मंत्रालय के अंडर में आई नहीं, बल्कि शुरु से ही थी.
‘BEML’, ‘ऑर्डनेंस फ़ैक्ट्री बोर्ड’ और ‘हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड’ के लोगो.
# BEML से जुड़े कुछ और फ़ैक्ट्स # पांच करोड़ के टर्नओवर से शुरू हुई BEML आज 3,500 करोड़ के टर्नओवर तक पहुंच गई है. जैसा हमने पहले ही जाना कि कंपनी के कुल तीन बड़े बिज़नेस वर्टिकल्स हैं. इनके नाम हैं:
# BEML की 9 मैन्यूफ़ैक्चरिंग यूनिट्स हैं. ये यूनिट्स 5 इलाक़ों में स्थित हैं: KGF, बेंगलुरु, मैसूर, पलक्कड़ और चिकमंगलूर में.
भारत का नक़्शा, जो दर्शाता है कि BEML के कहां-कहां पर कॉर्पोरेट ऑफ़िस हैं, मैन्यूफ़ैक्चरिंग यूनिट्स हैं, वग़ैरह-वग़ैरह. (तस्वीर: bemlindia.in)
# भारत की पब्लिक सेक्टर कंपनियों को उनकी परफ़ॉर्मेंस, रेवेन्यू, प्रॉफ़िट और नेट वर्थ वग़ैरह के आधार पर चार कैटेगरीज़ में बांटा गया है: महारत्न, नवरत्न, मिनीरत्न (I) और मिनीरत्न (II). इसमें से BEML, ‘मिनीरत्न ( कैटेगरी I)’ में आती है.
# BEML रेल और मेट्रो कोच के अग्रणी निर्माताओं में से एक है. BEML के ‘रोलिंग स्टॉक’ का उपयोग दिल्ली मेट्रो के 500 से अधिक कोचों में, नम्मा मेट्रो के 150 के क़रीब कोच में और जयपुर मेट्रो के क़रीब 40 कोच में होता है.
# बीईएमएल एशिया का दूसरा सबसे बड़ा ‘अर्थ मूविंग इक्विपमेंट’ उत्पादक है, और यह इस क्षेत्र में भारत के 70% बाजार को नियंत्रित करता है.
# KGF यूनिट में ‘हेवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट’ का निर्माण होता है. बेंगलुरु यूनिट में रेलवे रोलिंग स्टॉक, मेट्रो कोच, रक्षा उपकरण वग़ैरह का निर्माण होता है. मैसूर में डंपर, मोटर ग्रेडर, विभिन्न आकारों के इंजन और रक्षा उपकरण बनते हैं.
ज़ारी कर दिया है मतलब, जिन कंपनियों या संस्थानों को BEML में हिस्सेदारी चाहिए, वो सरकार के सामने इस EOI के माध्यम से अपनी इच्छा ज़ाहिर कर सकते हैं. EOI जमा करने की अंतिम तिथि है, 1 मार्च 2021. EOI को किसी बिडिंग प्रक्रिया का पहला स्टेप कहा जा सकते है. दूसरे शब्दों में कहें तो BEML में सरकार की 26% हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. BEML का KGF कनेक्शन KGF. कन्नड़ की अब तक की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली मूवी मानी जाती है. इसका पार्ट-2 फ़रवरी 2021 में आना है. लेकिन कोविड-19 और एक्टर संजय दत्त की बीमारी के चलते शायद इसमें अभी थोड़ा और वक्त लगेगा.
ख़ैर हम इस मूवी में ज्यादा नहीं जाते. हमारा मतबल बस इसके नाम से है. KGF बोले तो ‘कोलार गोल्ड फ़ील्ड्स’. बेंगलुरु से लगभग 50 किलोमीटर दूर KGF भारत की कुछ सबसे पुरानी सोने की खदानों में से एक है. मतलब 100-200 साल नहीं. 1,000 से 1,200 साल पुरानी. पहले इसने चोल साम्राज्य को पैसे कमा के दिए, फिर विजयनगर साम्राज्य, फिर टीपू सुल्तान और उसके बाद अंग्रेजों को. इतनी पुरानी खदान होने के कारण अब खोदते-खोदते इसकी गहराई 4 किलोमीटर के क़रीब हो चुकी है.
कोलार गोल्ड फ़ील्ड्स की एक पुरानी, 1913 की तस्वीर.हालांकि 2001 में सरकारी कंपनी ‘भारत गोल्ड माइंस लिमिटेड’ ने यहां पर खुदाई बंद कर दी. क्यूंकि खुदाई की लागत, निकाले गए सोने के क़रीब या उससे ज़्यादा ही पड़ रही थी. लेकिन खंडहर हो रही इस गोल्ड माइन को अब प्राइवेट हाथों में सौंपने की बात हो रही है. साथ ही प्राइवेटाइज़ेशन की बात हो रही है एक और कंपनी की, जिसकी स्थापना, यहीं, KGF में हुई थी. कंपनी का नाम है BEML यानी भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड है. लेकिन इनकी ऑफ़िशियल वेबसाइट से लेकर हर जगह ये लिखा है कि BEML पहले भारत अर्थ मूवर्स कहलाती थी.
बात बेंगलुरु के ‘IT हब’ बनने से बहुत पहले की है. 1964-65 की. वैसे तो BEML 1964 में ही अस्तित्व में आ गई थी लेकिन इसने अपना काम शुरु किया 1 जनवरी, 1965 से. #BEML कैसे बनी पब्लिक लिमिटेड कंपनी BEML को बनाया गया था रेल के कोच और उसके स्पेयर पार्ट्स के साथ-साथ खनन कार्य में प्रयोग होने वाले उपकरण तैयार करने के लिए. और इसी के चलते BEML की स्थापना होते ही ‘हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड’ का रेल कोच डिपार्टमेंट और उससे जुड़ी कई परिसंपत्तियां BEML को ट्रान्सफ़र कर दी गईं.
30 सालों तक, यानी 1995 तक इस कंपनी का मालिक भारत सरकार का ‘रक्षा मंत्रालय’ था. इसे ‘कंपनीज़ एक्ट’ के अंतर्गत 11 मई 1964 को एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में स्थापित किया गया था. लेकिन BEML को 1992 में पब्लिक लिमिटेड कंपनी बना दिया गया. यानी इसके छोटे-छोटे हिस्से (इक्विटी) करके कुछ हिस्से IPO के माध्यम से आम-जन को बेच दिए गए. कुल 25%. बाद में 2007 में FPO के माध्यम से इसकी कुछ और हिस्सेदारी बेची गई. और इससे BEML में सरकार की हिस्सेदारी 54.03 प्रतिशत रह गई. अब सरकार इसमें से अपनी 26% हिस्सेदारी बेचना चाह रही है.
BEML शेयर प्राइस. 4 जनवरी, 2021. (स्क्रीनग्रैब: गूगल फ़ाइनेंस)4 जनवरी, 2021 को शेयर मार्केट बंद होते वक्त इसके एक शेयर का मूल्य 1,007 रुपये था. यूं इसका मार्केट कैप, 3.23% की बढ़त के साथ क़रीब 4,203 करोड़ रुपए हो गया है. मतलब इसकी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी 4203 करोड़ की. और इस तरह 26 प्रतिशत हिस्सेदारी का मूल्य हुआ क़रीब 1,090 करोड़ रुपए. या इसे यूं भी कह सकते हैं कि सरकार अपनी हिस्सेदारी बेचकर हज़ार करोड़ रुपए के क़रीब कमाना चाहेगी. # BEML, रक्षा मंत्रालय के अंडर में क्यूं है? अब सवाल ये भी है कि ‘रेल’ या मैन्यूफ़ैक्चरिंग वाली कंपनी रक्षा मंत्रालय के अंडर कैसे आई? गौर से देखिए कि इसे जो परिसंपत्तियां दी गई थीं, वो ‘हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड’ द्वारा दी गई थीं. साथ ही 1901 में स्थापित ‘गन एंड शेल फ़ैक्ट्री’ कंपनी ने 1958 में अपना एक ट्रैक्टर प्रोजेक्ट शुरू किया था. इस ट्रैक्टर प्रोजेक्ट को 1965 में कुछ ही महीने पुरानी कंपनी BEML में शिफ़्ट कर दिया गया. ‘गन एंड शेल फ़ैक्ट्री’ फ़ैक्ट्री ‘ऑर्डनेंस फ़ैक्ट्री बोर्ड’ के अंडर में आती है. और ‘ऑर्डनेंस फ़ैक्ट्री बोर्ड’ आता है भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंडर में.
तो यूं समझ में आता है कि इसे ज़्यादातर (शुरुआती) प्रोजेक्ट्स रक्षा मंत्रालय के अंडर आने वाली कंपनियों या संस्थानों से काटकर दिए गए थे. लेकिन BEML को तब भी रक्षा मंत्रालय के अंडर में रहने दिया गया. और आज भी कंपनी के कुल तीन बिज़नेस वर्टिकल्स में से एक वर्टिकल ‘डिफ़ेंस’ ही है. और ये कंपनी रक्षा मंत्रालय के अंडर में आई नहीं, बल्कि शुरु से ही थी.
‘BEML’, ‘ऑर्डनेंस फ़ैक्ट्री बोर्ड’ और ‘हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड’ के लोगो.# BEML से जुड़े कुछ और फ़ैक्ट्स # पांच करोड़ के टर्नओवर से शुरू हुई BEML आज 3,500 करोड़ के टर्नओवर तक पहुंच गई है. जैसा हमने पहले ही जाना कि कंपनी के कुल तीन बड़े बिज़नेस वर्टिकल्स हैं. इनके नाम हैं:
# माइनिंग एंड कन्स्ट्रक्शन # डिफ़ेंस एंड एरोस्पेस # रेल एंड मेट्रोइन तीन वर्टिकल्स के तीन अलग-अलग निदेशक हैं, जो कंपनी के हेड, मैनेजिंग डायरेक्टर को रिपोर्ट करते हैं.
# BEML की 9 मैन्यूफ़ैक्चरिंग यूनिट्स हैं. ये यूनिट्स 5 इलाक़ों में स्थित हैं: KGF, बेंगलुरु, मैसूर, पलक्कड़ और चिकमंगलूर में.
भारत का नक़्शा, जो दर्शाता है कि BEML के कहां-कहां पर कॉर्पोरेट ऑफ़िस हैं, मैन्यूफ़ैक्चरिंग यूनिट्स हैं, वग़ैरह-वग़ैरह. (तस्वीर: bemlindia.in)# भारत की पब्लिक सेक्टर कंपनियों को उनकी परफ़ॉर्मेंस, रेवेन्यू, प्रॉफ़िट और नेट वर्थ वग़ैरह के आधार पर चार कैटेगरीज़ में बांटा गया है: महारत्न, नवरत्न, मिनीरत्न (I) और मिनीरत्न (II). इसमें से BEML, ‘मिनीरत्न ( कैटेगरी I)’ में आती है.
# BEML रेल और मेट्रो कोच के अग्रणी निर्माताओं में से एक है. BEML के ‘रोलिंग स्टॉक’ का उपयोग दिल्ली मेट्रो के 500 से अधिक कोचों में, नम्मा मेट्रो के 150 के क़रीब कोच में और जयपुर मेट्रो के क़रीब 40 कोच में होता है.
# बीईएमएल एशिया का दूसरा सबसे बड़ा ‘अर्थ मूविंग इक्विपमेंट’ उत्पादक है, और यह इस क्षेत्र में भारत के 70% बाजार को नियंत्रित करता है.
# KGF यूनिट में ‘हेवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट’ का निर्माण होता है. बेंगलुरु यूनिट में रेलवे रोलिंग स्टॉक, मेट्रो कोच, रक्षा उपकरण वग़ैरह का निर्माण होता है. मैसूर में डंपर, मोटर ग्रेडर, विभिन्न आकारों के इंजन और रक्षा उपकरण बनते हैं.

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