The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Lallankhas
  • Aravinthan Samuel Indian origin Harvard professor building smart microscope to map the brain wiring faster

ब्रेन को मैप करने वाला SmartEM बनाने वाले अरविंथन सैमुअल कौन हैं? 'स्मार्ट माइक्रोस्कोप' क्या करेगा?

सैमुअल SmartEM नाम के एक सिस्टम के सीनियर रिसर्चर्स में से एक हैं. जो ब्रेन स्कैनिंग को आसान और तेज बनाने पर फोकस करता है. वो बायोलॉजी, कंप्यूटेशन और न्यूरोसाइंस को जोड़ने वाले रिसर्च के लिए मशहूर हैं.

Advertisement
Aravinthan Samuel Indian origin Harvard professor building smart microscope to map the brain wiring faster
सैमुअल और उनकी टीम 'SmartEM' नाम का एक सिस्टम डेवलप कर रही है, जो माइक्रोस्कोप को 'स्मार्ट' बनाता है. (फोटो- हार्वर्ड)
pic
प्रशांत सिंह
20 जनवरी 2026 (Published: 01:19 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

भारतीय मूल के हार्वर्ड प्रोफेसर अरविंथन सैमुअल ब्रेन की जटिल वायरिंग को रिकॉर्ड स्पीड से मैप करने वाला क्रांतिकारी 'स्मार्ट माइक्रोस्कोप' बना रहे हैं. AI से लैस ये तकनीक न्यूरोसाइंस की सबसे बड़ी चुनौती को आसान बनाएगी. ये दिमाग (ब्रेन) की जटिल वायरिंग को पहले से कहीं ज्यादा तेजी से मैप करने में मदद करेगा.

क्या ये ब्रेन मैपिंग को आम बना देगा? कौन हैं सैमुअल, क्या समस्या वो सॉल्व कर रहे हैं, उनका आविष्कार कैसे काम करता है, और इसका क्या असर हो सकता है. इन सब के बारे में विस्तार से जानेंगे.

अरविंथन सैमुअल का बैकग्राउंड

अरविंथन सैमुअल भारतीय मूल के साइंटिस्ट हैं. वो हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं. उनका काम फिजिक्स और ब्रेन साइंस के बीच का है. वे क्वांटिटेटिव मेथड्स का इस्तेमाल करके ये समझते हैं कि लिविंग सिस्टम कैसे व्यवहार करते हैं और ब्रेन कैसे जानकारी को एक्शन में बदलता है.

हार्वर्ड की वेबसाइट के मुताबिक वो बायोलॉजी, कंप्यूटेशन और न्यूरोसाइंस को जोड़ने वाले रिसर्च के लिए मशहूर हैं. सैमुअल हार्वर्ड के ट्रिपल एलुमनाई हैं. उन्होंने यहां से फिजिक्स में BA किया, बायोफिजिक्स में PhD पूरी की, और न्यूरोसाइंस में पोस्टडॉक्टोरल रिसर्च ट्रेनिंग ली.

सैमुअल हार्वर्ड में प्रोफेसर हैं और कई बड़े अमेरिकी रिसर्च अवॉर्ड जीत चुके हैं. मसलन,  NSF CAREER अवॉर्ड, प्रेसिडेंशियल अर्ली कैरियर अवॉर्ड फॉर साइंटिस्ट्स एंड इंजीनियर्स (PECASE), और NIH डायरेक्टर का पायनियर अवॉर्ड. ये अवॉर्ड बोल्ड और हाई-इंपैक्ट साइंटिफिक वर्क के लिए दिए जाते हैं.

सैमुअल SmartEM नाम के एक सिस्टम के सीनियर रिसर्चर्स में से एक हैं. जो ब्रेन स्कैनिंग को आसान और तेज बनाने पर फोकस करता है. सैमुअल की जड़ें भारत से जुड़ी हैं, लेकिन उनका करियर अमेरिका में फला-फूला है. वो ऐसे वैज्ञानिकों का उदाहरण हैं जो भारतीय टैलेंट को ग्लोबल स्टेज पर ले जाते हैं.

ब्रेन मैपिंग में दिक्कत क्या है?

ब्रेन मैपिंग आधुनिक साइंस की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है. ब्रेन में अरबों ब्रेन सेल्स (न्यूरॉन्स) होते हैं, जो एक-दूसरे से कनेक्ट होकर कम्युनिकेट करते हैं. ये सब मिलकर जैसे ब्रेन का 'वायरिंग डायग्राम' बनाते हैं. माने, दिमाग कैसे सोचता है, याद रखता है या फैसले लेता है, इसका ब्लूप्रिंट होता है.

पर इन कनेक्शन्स को मैप करना बहुत धीमा, महंगा और मुश्किल है. साइंटिस्ट ब्रेन टिशू को बेहद पतली स्लाइस में काटते हैं और इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से स्कैन करते हैं. लेकिन बड़े एरिया को स्कैन करने में महीनों या साल लग जाते हैं. डेटा की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. और ये काम दुनिया में सिर्फ कुछ एलीट लैब्स ही कर पाती हैं.

क्यों जरूरी है?

अगर हम ब्रेन की वायरिंग को अच्छे से समझ लें, तो ब्रेन डिसऑर्डर (जैसे अल्जाइमर, डिप्रेशन) का इलाज आसान हो सकता है. हम जान सकते हैं कि अलग-अलग जीवों के ब्रेन कैसे ऑर्गनाइज्ड हैं. या लर्निंग और मेमरी कैसे फिजिकली स्टोर होती है.

इसका एक कारण ये भी है कि ट्रेडिशनल तरीके में कई कमियां हैं. हाई डिटेल इमेजिंग के लिए स्पेशलाइज्ड और महंगे मशीनों की जरूरत पड़ती है, जो हर लैब में उपलब्ध नहीं होतीं. इसका नतीजा ये होता है कि रिसर्च स्लो हो जाती है. इसमें काफी टाइम लग जाता है.

अब इसका उपाय है स्मार्ट माइक्रोस्कोप. पर ये क्या है और कैसे काम करता है, ये जानना जरूरी है.

SmartEM क्या है?

सैमुअल और उनकी टीम 'SmartEM' नाम का एक सिस्टम डेवलप कर रही है, जो माइक्रोस्कोप को 'स्मार्ट' बनाता है. ये मशीन लर्निंग (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एक हिस्सा) से गाइडेड है और ब्रेन स्कैनिंग को तेज, कुशल और सस्ता बनाता है.

कैसे काम करता है?

ट्रेडिशनल तरीका: साइंटिस्ट ब्रेन टिशू की पतली स्लाइस को इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से स्कैन करते हैं. ये हाई डिटेल देता है, लेकिन बड़े एरिया के लिए बहुत टाइम लगता है और डेटा बहुत ज्यादा हो जाता है.
SmartEM का तरीका: ये 'स्मार्ट' स्कैनिंग करता है. पहले एक क्विक स्कैन करता है, जहां AI महत्वपूर्ण स्ट्रक्चर्स (जैसे न्यूरॉन्स के कनेक्शन) को आइडेंटिफाई करता है. फिर, सिर्फ उन इंटरेस्टिंग एरिया पर हाई डिटेल स्कैन करता है. बाकी जगहों पर कम टाइम खर्च करता है. यानी, AI की मदद से ये अपने टारगेट एरिया डिसाइड करता है.

टेक्नोलॉजी: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग इस्तेमाल करता है. ये माइक्रोस्कोप को बताता है कि कहां फोकस करना है. जैसे एक स्मार्ट कैमरा जो ऑटोमैटिकली इंपॉर्टेंट चीजों पर जूम करता है.

खासियत

तेज: ट्रेडिशनल मेथड्स से कहीं ज्यादा स्पीड है. समय और प्रयास बचता है, बिना प्रिसिशन खोए.

सस्ता और एक्सेसिबल: स्पेशलाइज्ड महंगे मशीनों की बजाय, कॉमनली अवेलेबल माइक्रोस्कोप इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे ज्यादा लैब्स और वैज्ञानिक ब्रेन मैपिंग कर पाएंगे.

स्केलेबल: कनेक्टॉमिक्स/Connectomics (ब्रेन कनेक्शन्स का स्टडी) को बड़े स्केल पर आसान बनाता है.

कोलैबोरेशन, फंडिंग और फ्यूचर इंपैक्ट

सैमुअल SmartEM के सीनियर रिसर्चर्स में से एक हैं. उनके साथ इस प्रोजेक्ट पर ईशान चंदोक, यारोन मेइरोविच और जेफ लिच्टमैन भी काम कर रहे हैं.

इस प्रोजेक्ट को NSF, PECASE और NIH जैसे बड़े अवॉर्ड्स से सपोर्ट मिला है, जो हाई-इंपैक्ट रिसर्च को बढ़ावा देते हैं.

SmartEM से क्या होगा?

रिसर्च में तेजी आएगी: ब्रेन डिसऑर्डर, बिहेवियर, लर्निंग और मेमोरी पर तेज डिस्कवरीज होंगी.

ग्लोबल एक्सेस: ब्रेन मैपिंग को रेयर प्रोजेक्ट से रोजाना का टूल बना सकता है, जिससे ज्यादा वैज्ञानिक शामिल हो सकें.

लॉन्ग-टर्म: अलग-अलग स्पीशीज के ब्रेन को कंपेयर करके, हम समझ सकते हैं कि ब्रेन कैसे इवॉल्व हुआ है. ये न्यूरोसाइंस की दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है.

अरविंथन सैमुअल की कहानी दिखाती है कि कैसे भारतीय मूल के वैज्ञानिक ग्लोबल चैलेंजेस सॉल्व कर रहे हैं. उनका स्मार्ट माइक्रोस्कोप ब्रेन साइंस को डेमोक्रेटाइज कर सकता है. यानी इसे सबके लिए आसान बना सकता है. अगर आप न्यूरोसाइंस या AI में इंटरेस्टेड हैं, तो ये एक परफेक्ट एग्जांपल है कि टेक्नोलॉजी कैसे बड़े प्रॉब्लम्स को छोटा कर सकती है. अब देखना ये होगा कि ये कब तक रियलिटी बनेगी? या ये रिसर्च की स्टेज पर ही रुकी रह जाएगी.

वीडियो: आसान भाषा में: क्या है कहानी 'मिडिल-ईस्ट' की जहां शांति ही सबसे बड़ी उपलब्धि है

Advertisement

Advertisement

()