ICICI बैंक की प्रमुख रहीं चंदा कोचर के पति दीपक कोचर को 7 सितंबर को ईडी नेगिरफ्तार कर लिया. लोन फ्रॉड के इस मामले में सीबीआई ने भी जनवरी 2019 में चंदाकोचर, दीपक कोचर और वीडियोकॉन समूह के वेणुगोपाल धूत के खिलाफ एफआईआर किया था.ICICI बैंक ने वीडियोकॉन समूह को अप्रैल, 2012 में 3250 करोड़ रुपए का लोन दिया था.वीडियोकॉन समूह ने इस लोन के 2810 करोड़ रुपए बैंक को नहीं चुकाए. ये लोन ऩॉनपरफॉर्मिंग असेट्स यानी एनपीए में बदल गया. एनपीए उस लोन को कहते हैं, जिसकी वसूलीसंभव नहीं होती. आरोप है कि इस लोन के बदले वेणुगोपाल धूत ने आईसीआईसीआई बैंक की उससमय की एमडी और सीईओ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर को आर्थिक लाभ पहुंचाया. लोनके बदले वीडियोकॉन कंपनी के मालिक वेणुगोपाल धूत ने अपनी दो कंपनियां चंदा कोचर केपति दीपक कोचर को मात्र 9 लाख रुपए में बेच दीं. चंदा कोचर ने वेणुगोपाल धूत कोआईसीआईसीआई बैंक से लोन दिलाने में मदद की. क्या है ये पूरा मामला आइए जानते हैं-दीपक कोचर (बाएं) और वेणुगोपाल धूत ने 2008 में एक नई कंपनी बनाई और नाम रखा न्यूपॉवर.कहानी साल 2008 से शुरू होती हैये कहानी फिल्मी नहीं है. मगर इससे कम भी नहीं है. दो दोस्त हैं नाम है दीपक कोचरऔर वेगुगोपाल धूत. दीपक कोचर कारोबारी हैं और एनर्जी के क्षेत्र में कारोबार करतेहैं. दीपक कोचर की कंपनी का नाम है पिनैकल एनर्जी ट्रस्ट. दीपक कोचर का बड़ा परिचयये है कि वे आईसीआईसीआई बैंक की उस वक्त की सीईओ चंदा कोचर के पति हैं. दूसरीतरफ, वेणुगोपाल धूत नामी कंपनी वीडियोकॉन के चेयरमैन हैं. वीडियोकॉन आप जानते हीहोंगे, टीवी-फ्रिज जैसे इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स वाली कंपनी है. वेणुगोपाल धूत एक औरकंपनी चलाते थे सुप्रीम एनर्जी. मतलब ये कि दोनों दोस्त ऊर्जा के क्षेत्र में कामकरते थे या यूं कहें कि दोनों ने एनर्जी के काम के लिए दो अलग-अलग कंपनियां बना रखीथीं.दिसंबर, 2008 में दीपक कोचर और वेणुगोपाल धूत साथ-साथ काम करने का फैसला करते हैं.दोनों मिलकर एक नई कंपनी बनाते हैं. नाम रखते हैं 'न्यू पॉवर रिन्यूएबल प्राइवेटलिमिटेड.' इस कंपनी में 50 फीसदी हिस्सेदारी वेणुगोपाल धूत और उनके परिवार केसदस्यों की होती है. बाकी की 50 फीसदी की हिस्सेदारी दीपक कोचर और उनके परिवार कीहोती है. इसमें दीपक कोचर के पिता की कंपनी पैसेफिक कैपिटल और चंदा कोचर के भाई कीपत्नी का भी शेयर होता है. यहां तक कोई दिक्कत नहीं थी. कोई भी कंपनी बना सकता हैऔर कारोबार कर सकता है. इन सब लोगों ने भी यही किया. अब आप कहेंगे कि प्रॉब्लम क्याहै?2009 में दीपक कोचर न्यू पॉवर कंपनी के सर्वेसर्वा हो गए.कैसे किया गया घालमेल?इस कहानी में ट्विस्ट कंपनी के गठन के एक महीने बाद ही आ जाता है. जनवरी, 2009 मेंवेणुगोपाल धूत न्यू पॉवर नाम की कंपनी से इस्तीफा दे देते हैं. धूत इस कंपनी मेंडायरेक्टर थे. इस्तीफा देने के साथ ही धूत ऐलान करते हैं कि उन्होंने न्यू पॉवर कीअपनी पूरी हिस्सेदारी दीपक कोचर को बेच दी है. यहां तक भी मामला संदेह के घेरे मेंनहीं आाता है. फिर आता है मार्च 2010. मार्च, 2010 में न्यू पॉवर , जिसके मालिक अबदीपक कोचर हैं, वो वेणुगोपाल धूत की कंपनी सुप्रीम एनर्जी से 64 करोड़ का लोन लेतीहै. ये कुछ वैसा ही होता है, जैसे एक दोस्त दूसरे से कहे भाई मैं संकट में हूं, तुमकुछ रुपए उधार दे दो. बिलकुल घर वाला माहौल. दीपक कोचर को पैसे की जरूरत पड़ी तोउन्होंने धूत से लोन यानी उधार मांग लिए. इस उधार में वेणुगोपाल धूत की एक शर्तथी. उन्होंने कहा कि भाई दोस्ती में उधार तो दे देंगे, लेकिन बदले में हमें न्यूपॉवर में हिस्सेदारी चाहिए. मतलब ये कि जो कंपनी वेणुगोपाल धूत छोड़ चुके थे. उसमेंवे एक बार फिर हिस्सेदारी चाहते थे. अब चूंकि दीपक कोचर को 64 करोड़ रुपए उधारचाहिए थे. इसलिए उन्होंने वेणुगोपाल धूत की शर्त मान ली. वेणुगोपाल धूत को एक बारफिर न्यू पॉवर में हिस्सेदारी मिल गई. मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा. कहानी में एकऔर ट्विस्ट आया.फिर क्या हुआ इस मामले में?दीपक कोचर की कंपनी न्यू पॉवर ने 64 करोड़ रुपए के लोन के बदले पहले तो धूत कोसीमित हिस्सेदारी दी. बाद में दीपक कोचर ने अपना ज्यादातर हिस्सा धूत की कंपनीसुप्रीम एनर्जी को ट्रांसफर कर दिया. यही नहीं दीपक कोचर के पिता की कंपनी पैसेफिककैपिटल और चंदा कोचर के भाई महेण आडवाणी की पत्नी की जो हिस्सेदारी न्यू पॉवर मेंथी, उसे भी सुप्रीम एनर्जी को ट्रांसफर कर दिया गया. नतीजा ये हुआ कि दिसंबर 2008में जो कंपनी दीपक कोचर और वेणुगोपाल धूत ने मिलकर बनाई थी. उसका स्वरूप मार्च 2010तक पूरी तरह बदल गया. मार्च 2010 तक इस कंपनी के 94.99 फीसदी शेयर सुप्रीम एनर्जीनाम की कंपनी के पास आ गए. और इसके मालिक वेणुगोपाल धूत थे.2010 में न्यू पॉवर कंपनी सुप्रीम एनर्जी के पास आ गई, जिसके मालिक थे वीडियोकॉनग्रुप के मालिक वेणुगोपाल धूत.करीब आठ महीने तक वेणुगोपाल धूत की कंपनी सुप्रीम एनर्जी, न्यू पॉवर कंपनी को भीचलाती रही. इसके बाद सुप्रीम एनर्जी ने अपनी पूरी हिस्सेदारी अपने सहयोगी महेशचंद्र पुंगलिया को ट्रांसफर कर दी. फिर कोई साल भर बाद 29 सितंबर, 2012 से 29अप्रैल 2013 के बीच महेश चंद्र पुंगलिया ने इस कंपनी की सारी हिस्सेदारी पिनैकलएनर्जी ट्रस्ट को ट्रांसफर कर दी. ये वही कंपनी थी, जिसका जिक्र इस कहानी मेंशुरुआत में किया गया था. इसके मैनेजिंग ट्रस्टी चंदा कोचर के पति दीपक कोचर थे. एकबात और. वो ये कि महेश चंद्र पुंगलिया ने पिनैकल एनर्जी को ये हिस्सेदारी सिर्फ 9लाख रुपए में बेच दी. मतलब ये कि वेणुगोपाल धूत ने एक शख्स को बीच में डालकर न्यूपॉवर और सुप्रीम एनर्जी यानी दोनो कंपनियों को दीपक कोचर की कंपनी पिनैकल एनर्जीको सिर्फ 9 लाख रुपए में बेच दिया.लेकिन इसमें गलत क्या है. हमारा जवाब है कुछ भी नहीं. इसमें कुछ भी गलत नहीं है. एकआदमी कंपनी बनाता है, वो किसे बेचता है, कितने में बेचता है ये उसका निजी मामला है.ये उसकी समझ है और उसकी अपनी ज़रूरत. लिहाजा अभी तक इस मामले में कुछ भी गलत नहींहै.लेकिन एक स्वाभाविक सवाल है. वो ये है कि सुप्रीम एनर्जी एक बड़ी कंपनी थी. फिरन्यू पॉवर भी बड़ी कंपनी बनाई गई. इस कंपनी ने बाकायदा 64 करोड़ रुपए का लोन लिया.लेकिन जब दोनों कंपनियों का मालिकाना हक दीपक कोचर के पास आया, तो बदले में दीपककोचर को मात्र 9 लाख रुपए ही क्यों चुकाने पड़े? इसका बड़ा आसान सा जवाब है. ये कहाजा सकता है कि दीपक कोचर ने सुप्रीम एनर्जी और न्यू पॉवर कंपनी को खरीदने के लिएऔर पैसे दिए होंगे. इसका जिक्र नहीं किया गया है. मगर यहीं एक आरोप है. आरोप ये किदीपक कोचर ने पैसे न चुकाकर आईसीआईसीआई बैंक से लोन दिलाने में वेणुगोपाल धूत कीमदद की. अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सुप्रीम एनर्जी और न्यू पॉवर कंपनी केमालिक रहे वेणुगोपाल धूत को 3250 करोड़ रुपए का लोन ICICI बैंक से दिलवाया गया. इसलोन को दिलवाने में उनकी मदद की दीपक कोचर की पत्नी चंदा कोचर ने, जो उस वक्त ICICIबैंक की एमडी और सीईओ थीं.वेणुगोपाल धूत ने ICICI बैंक से कर्ज लिया. बाद में अपनी कंपनी को 9 लाख रुपए मेंचंदा कोचर के पति दीपक कोचर को बेच दिया.कहानी अभी और भी है फिर आता अप्रैल, 2012. वेणुगोपाल धूत को अपनी कंपनी वीडियोकॉनके लिए पैसे की ज़रूरत पड़ती है. वे लोन के लिए आईसीआईसीआई बैंक से संपर्क करतेहैं. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, वेणुगोपाल धूत को 3250 करोड़ रुपए का लोन मंजूरकर दिया जाता है. जिस बोर्ड ने इस लोन को पास किया, उसके सदस्यों में चंदा कोचर भीशामिल थीं. यहां तक भी कुछ गलत नहीं था. एक कंपनी को लोन मिला, वो लोन की किश्तेंचुकाती रही. लेकिन 2017 में वीडियोकॉन ने लोन चुकाना बंद कर दिया. उस वक्त तक कंपनीपर 2810 करोड़ रुपए का बकाया था. फिर बैंक ने भी कंपनी से पैसे वसूलने की कोशिशनहीं की और इस पैसे को एनपीए यानी नॉन परफॉर्मिंग असेट में बदल दिया गया. इसका मतलबये था कि अब तक आईसीआईसीआई को 2810 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद खत्म हो चुकी थी. अबसब कुछ संदेह के घेरे में आ जाता है.वेणुगोपाल धूत को 3250 करोड़ रुपए का लोन आईसीआईसीआई बैंक दे देता है. इसके छहमहीने के अंदर ही वेणुगोपाल धूत अपनी दो कंपनियों को 9 लाख रुपये में दीपक कोचर कोसौंप देते हैं, जिनकी कीमत करोड़ों रुपए में है. ऐसा क्यों है, इसका जवाब लोन मिलनेकी पूरी प्रक्रिया में है, जिसे देने वाले लोगों में खुद चंदा कोचर भी थीं. जबवीडियोकॉन को लोन मिला था, उस वक्त चंदा कोचर बैंक की उस क्रेडिट समिति का हिस्साथीं, जो लोन पास करता है. मतलब ये कि दीपक कोचर ने लोन दिलाने में वेणुगोपाल धूत कीमदद की. उसके बदले में वेणुगोपाल धूत ने अपनी दो कंपनियां सिर्फ 9 लाख रुपए मेंदीपक कोचर को सौंप दीं.इस पूरे मामले में सीबीआई ने मार्च, 20018 में प्राथमिक जांच का केस दर्ज किया था.तब चंदा कोचर के पति दीपक कोचर के भाई राजीव कोचर को हिरासत में लेकर सीबीआई नेपूछताछ भी की थी. उस वक्त आईसीआईसीआई बैंक ने कहा था कि इस लोन को दिलाने में चंदाकोचर की भूमिका नहीं है. वो लोन देने वाले बोर्ड की मेंबर भर थीं. इसकेबाद अक्टूबर, 2018 में चंदा कोचर ने आईसीआईसीआई बैंक से इस्तीफा दे दिया था. फिरजनवरी 2019 में सीबीआई ने केस दर्ज किया. 7 सितंबर को ईडी ने दीपक कोचर के खिलाफ कईसबूत मिलने के बाद उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया था. इस दौरान दीपक लेनदेन को लेकरठीक-ठीक कुछ बता नहीं पाए, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.--------------------------------------------------------------------------------वीडियोः जेट एयरवेज क्राइसिस: क्या नरेश गोयल का हाल विजय माल्या जैसा होने वालाहै?