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कैशलेस इकॉनमी के फायदे जान लो, बाबा के फैन हो जाओगे

कैशलेस इकॉनमी फॉर्मूला सेंसलेस नहीं है: बाबा बेसलेस

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आशुतोष चचा
28 नवंबर 2016 (Updated: 28 नवंबर 2016, 09:19 AM IST)
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बाबा बेसलेस हफ्ते भर से अपने स्यामसिंग मोबाइल का पैकेट डाटा ऑन करते हैं. कुछ फेसबुक पोस्ट, कुछ ट्वीट, कुछ भटसप मैसेज देखते हैं. बेचैन होकर वापस बंद कर देते हैं. रोज उनके पास आने जाने वालों का तांता लगा हुआ है. जब से पता चला है कि "देश कैशलेस इकॉनमी बन रहा है." तब से उनकी बेचैनी बढ़ती जा रही है. वो गांव वालों को अब तक यही समझाते आए हैं कि कैसे सरकार ने नोटबंदी का फैसला गरीब जनता के हक में लिया है. कैसे गरीब चैन की नींद सो रहा है और अमीर नींद की गोली खा रहा है.
वो रोज भटसप पर आए मैसेज पढ़कर गांव वालों को यकीन दिलाते हैं कि इस एक कदम से दुनिया बदलने वाली है. बस पचास दिन की टेंसन है फिर कम से कम पचास हजार साल तक हमारी अर्थव्यवस्था पर कोई संकट नहीं आएगा. वो हर एक मैसेज से "जरूरी डाटा" निकालते हैं. इससे आतंकियों का कितना नुकसान हुआ. कितने काले धन होल्डरों ने खुदकुशी की. ISI के कितने कर्मचारी इस महीने की तनखाह न पाकर नौकरी छोड़ दिए. सरकार से लेकर बैंक अधिकारी तक किस हद तक मुस्तैद होकर काम कर रहे हैं. वो सरकारी अधिकारी जिन पर लापरवाह होने का ठप्पा लग चुका था. वो तीन तीन दिन घर नहीं जाते.
पूरा गांव इस मुहिम में सरकार के साथ है. लेकिन ये नई चरस कैशलेस इकॉनमी वाली बड़ी बेचैनी पैदा किए हुए है. सवेरे पिंटू सन ऑफ ठाकुर अक्षय प्रताप आया. बाबा बेसलेस लोटा हाथ में लिए कुल्ला कर रहे थे. सन ऑफ अक्षय प्रताप ने पल्सर से उतरकर पूछा बाबा, आज कुछ देखा? टीवी वाले भी बौराए हैं साले. कल शाम से कैशलेस कैशलेस की माला जप रहे हैं. ई कैशलेस का है बाबा? इससे कउनो परेशानी तो न होगी हम लोगों को? बाबा ने मुंह से पानी उगलकर कहा "देखो पिंटू. कुछ दिन टीवी देखना बंद कर दो. या जो चैनल हम बता रहे हैं बस वो देखो. कुछ चैनल स्याले देश में अफरा तफरी का माहौल बना रहे हैं. इनसे बचो. ये कैशलेस इकॉनमी का पूरा पहलू नहीं दिखा रहे. ये कितने काम की चीज है. ई साले कभी न बताएंगे. तुम सही किये जो हमाए पास आ गए. तुमको हम सब समझा देंगे. तुम सारे गांव को समझा देना. इससे घबराने की जरूरत नहीं है. इसके फायदे ही फायदे हैं." पिंटू आश्चर्य मिश्रित आंखें चौड़ी करते हुए बोले- अच्छा बाबा. एकाध फायदा हमरी बालक बुद्धी में भी डालो.
बाबा बोले, ये सरकार का समान नागरिकता वाला समाज बनाने की तरफ पहला कदम है. जेब में हजार का नोट रहे तो अगला सौ का नोट रखे आदमी को आंख दिखाता है. ये खतम हो जाएगा. टुन्नू भर का कार्ड होगा. जिसमें किसी को पता नहीं होगा कि दस रुपए है या दस लाख. उड़ो बेट्टा कितना उड़ोगे. दूसरा फायदा. जनता का आध्यात्मिक पक्ष मजबूत होगा. हर बाबा बछिया ये बताता है कि पैसा हाथ का मैल है. मोह माया से दूर रहो. जेब में गर्मी रहती है तो आदमी में घमंड आ जाता है. अब सुनो जो बाबा बेसलेस बताते हैं. जब जेब में धन ही न रहेगा तो कोई निर्धन पर रौब कैसे झाड़ेगा? इस तरह बहुत बड़े पाप से बचेगी जनता. इस लोक के साथ वह लोक भी सुधरेगा.
पिंटू आज आर पार के मूड में थे. बोले "बाबा, लेकिन ये होगा कइसे?" बाबा बेसलेस- घबराओ मत पेटीएम करो. पिंटू- हमारे घर में जो पेटी है उसमें तो अम्मा का खजाना रखा है. कहती हैं वो अब छोटू की बहुरिया को देंगी. तो पेटी में तो हो नहीं पाएगा कुछ. बाबा बेसलेस- नेट बैंकिंग के लिए अप्लाई कर दो. ट्रेन का टिकट से लेकर फोन रिचार्ज तक उससे हो जाएगा. पिंटू- लेकिन बाबा उसके लिए पहले स्यामसिंग का मोबाइल होना चाहिए न. और ये बताओ कि हम मंगरू की दुकान से आधा किलो प्याज और सौ ग्राम हरी मिर्ची लाए तो नेट बैंकिंग से उसका पेमेंट वहीं करना पड़ेगा कि घर आकर भी रकम उसको दे सकते हैं. लेकिन अगर वो बिना पैसा दिए प्याज और मिर्ची न लाने दिया तो? बाबा बेसलेस- डेबिट या क्रेडिट कार्ड है तुम्हारे पास? पिंटू- हमारे पास तो है बाबा. अम्मा की पेटी में रखा है. बाबा बेसलेस- तो उसको निकालो बे. उससे पेमेंट होगा अब. पिंटू- लेकिन बाबा डेबिट को पैसा दिया कैसे जाएगा? वो अपने आप आकर हमसे ले लेगा क्या? बाबा बेसलेस- अबे कोई मोबाइल है तुम्हारे पास? मोबाइल बैंकिंग ले लो. और सुनो. फालतू की बहस मत करो. देश की तरक्की में योगदान दो. पिंटू- लेकिन बाबा हम तो पंचई कक्षा पास हैं. तब भी हमरे पल्ले नहीं पड़ रही है आपकी बात. तो मंगरू की अम्मा, सुंदर की चाची, बग्गड़ चाचा को कइसे समझ में आएगी ये गड़बड़ रामायण. नत्थू को दस रुपए की कुटकी तमाखू लेनी होती है तो पेटी में कइसे करेंगे. बाबा हमको तो लगता है उल्टा. ये पेटी ओटी और नेट बैंकिंग सब चोंचला है. हमको तो लगता है इससे पुराना जमाना लौट आएगा. जिसमें चीज से चीज बदल कर बिन्निस किया जाता था. जैसे हम मंगरू से प्याज लेंगे तो उसके अपने खेत की आधा किलो आधी जौ देंगे. नत्थू तमाखू के बदले अगले दुकानदार की हंसिया पीटकर धार तेज कर देगा. इस तरह हमारी परंपरा एक बार फिर जीवित हो उठेगी. बाबा बेसलेस- देखो पिंटू तुम अक्षय प्रताप से बेसी हुसियार हो गए हो. कैशलेस इकॉनमी ऐसे अचानक ऩहीं आएगी जैसे तुम डर रहे हो. सरकार धीरे धीरे इसका इंतजाम करेगी. अभी तो कैश बिग बाजार से भी मिलेगा. उसके बाद जब नोट मिलनी एकदम बंद हो जाएगी तो मंगरू, नत्थू, बग्गड़ सब पेटीएम करेंगे. तुम सरकार की मंशा पर क्वेस्चन नहीं कर सकते. पिंटू- बस बाबा बस. सरकार की तरफ तो हम तिरछी निगाह से देख ही नहीं सकते. इतने दिन लाइन में लगकर ये तो समझ में आ गया कि सरकार की बनाई लाइन पर चलना है. बाबा बेसलेस ने ये इन्फॉर्मेशन आग की तरह फैला देने का आदेश देकर पिंटू को विदा किया. रजनीगंधा और तुलसी का पैकेट फाड़कर मुंह में फेंका. और मोबाइल लेकर नई जानकारियां जुटाने में व्यस्त हो गए. आप जाते जाते कैशलेस इकॉनमी का सबसे बड़ा फायदा देखते जाओ. https://youtu.be/sCMbCI0UhEA?t=13
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