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तारीख़: अमेरिकी एयरपोर्ट पर हुई वो डकैती, जिसके लुटेरे एक-एक कर गायब हुए

लूटे गए 6 लाख डॉलर्स का क्या हुआ, वो आज भी एक रहस्य है.

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लुफ़्थांसा हाइस्ट के पैसे जिसके पास गए, वो हमेशा के लिए गायब होने लगा.
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अभिषेक
11 दिसंबर 2020 (Updated: 11 दिसंबर 2020, 01:05 PM IST)
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तारीख़- 11 दिसंबर.

ये तारीख़ जुड़ी है एक एयरपोर्ट पर हुई डकैती से. एक शापित डकैती. जिसमें शामिल लुटेरे एक-एक कर गायब होने लगे. हमेशा के लिए. ये उस समय तक अमेरिका में हुई सबसे बड़ी डकैती थी. फिर ये शापित कैसे बन गई? जानते हैं विस्तार से.
साल 1978. तारीख़ 11 दिसंबर. सुबह के तीन बजे थे. न्यू यॉर्क के जॉन एफ़. कैनेडी (JFK) एयरपोर्ट पर शांति पसरी थी. तभी एक काली वैन लुफ्थांसा एयरलाइंस की बिल्डिंग के सामने आकर रुकी. वैन से छह लोग उतरे. उनके चेहरे पर नक़ाब था. हाथों में बंदूकें. उनकी नीयत का किसी को पता नहीं था.
नकाबपोश एक-एक कर एयरलाइंस की कार्गो बिल्डिंग में घुसे. उन्होंने स्टाफ़्स को इकट्ठा किया. उनके हाथ बांधे. और, उनको एक कमरे में बंद कर दिया. सुपरवाइजर को छोड़कर. उसके पास वॉल्ट की चाबी थी. अगर वॉल्ट को तोड़ने की कोशिश होती, तो अलार्म बज जाता और लुटेरे खतरे में आ जाते.
लूट की ख़बर सनसनी बनकर आई थी.
लूट की ख़बर सनसनी बनकर आई थी.


लुटेरे अंदर की पूरी ख़बर के साथ आए थे. उनकी प्लानिंग भी पक्की थी. उन्होंने सुपरवाइजर के सिर पर बंदूक रखी. वॉल्ट खुलवाया. और, कैश और गहनों के बॉक्स लेकर फरार हो गए. ये सारा खेल घंटे भर के अंदर खत्म हो गया था.
लुटेरों को कहां धोखा हो गया?
सब कुछ उम्मीद के मुताबिक हुआ था. बस एक को छोड़कर. क्या? लूट की रकम. उन्हें 20 लाख डॉलर से ज़्यादा की उम्मीद नहीं थी. लेकिन जब रकम गिनी गई, वहां कुल 50 लाख डॉलर्स थे. साथ में 10 लाख डॉलर के गहने भी. ये उस समय अमेरिका के इतिहास में हुई सबसे बड़ी डकैती थी. इस डकैती को नाम मिला ‘लुफ़्थांसा हाइस्ट’.
ये पैसे आख़िर थे किसके और इन्हें एयरपोर्ट पर क्यों रखा गया था? ये वो पैसे थे, जिन्हें अमेरिकन सर्विसमैन और टूरिस्ट विदेशों में एक्सचेंज कराते थे. लुफ़्थांसा एयलाइंस के कार्गो विमान इन पैसों को JFK एयरपोर्ट लाते. वहां से इन्हें बैंकों में पहुंचा दिया जाता था. कभी-कभार देर हो जाती. बैंक बंद हो जाता था. ऐसे में पैसों को अगले दिन तक के लिए एयरपोर्ट की बिल्डिंग में ही रख दिया जाता था.
इसकी ख़बर लुटेरों तक कैसे पहुंची? दरअसल, लुफ्थांसा कार्गो में पीटर ग्रुनवाल्ड नाम का एक आदमी काम करता था. उसने पहले भी यहां से छोटी-मोटी रकम चुराई थी. लेकिन इस बार उसका इरादा बड़ा हाथ मारने का था. उसे एक साथी की तलाश थी.
पीटर ने अपने दोस्त लुई वर्नर को ये प्लान बताया. वर्नर जुए में काफी रकम गंवा चुका था. उसके ऊपर काफी सारा कर्ज़ जमा हो चुका था. उसे लगा, इस प्लान से उसकी दिक़्क़त दूर हो जाएगी. उसने अपने दोस्त के साथ खेल कर दिया.
जिमी बर्क.
जिमी बर्क के संबंध न्यू यॉर्क की लुसेजे फ़ैमिली से थी. लुसेजे फ़ैमिली का शुमार न्यू यॉर्क के कुख़्यात गिरोहों में होता है.


वर्नर, पीटर को मार्टिन क्रुगमैन के पास ले गया. क्रुगमैन उधारी पर पैसे दिया करता था. एक समय में क्रुगमैन भी लूटपाट करता था. बाद में उसने अपना धंधा बदल लिया. वो मूवी कंसल्टेंट बन गया था. हालांकि उसका पुराना कनेक्शन छूटा नहीं था. क्रुगमैन से होते हुए डकैती का प्लान जिमी बर्क के पास पहुंचा. ज़िमी बर्क लंबे समय से क्राइम की दुनिया में था. उसे काफी अनुभव था. उसने अपने गैंग के साथ मिलकर इस लूट को अंज़ाम दे दिया था. उसे रत्ती भर नुकसान नहीं हुआ था.
ड्राइवर की भूल और हत्याओं का सिलसिला
लूट के आधे घंटे के बाद FBI को ख़बर मिल गई. लेकिन आगे का रास्ता नज़र नहीं आ रहा था. लूट इतनी सफ़ाई से हुई थी कि किसी सुराग का कोई अता-पता नहीं था. फिर एक टिप आई. एक हफ़्ते बाद FBI को एक लावारिस वैन के बारे में पता चला. इसे ब्रुकलिन की एक सोसाइटी में अवैध तरीके से पार्क किया गया था.
इस गाड़ी की तलाशी ली गई. इसमें लुफ़्थांसा कार्गो के एक स्टाफ़ का वॉलेट मिला. इस स्टाफ़ को डकैती के दौरान इसी गाड़ी में बंद कर रखा गया था. उसी दौरान उसका वॉलेट वहां गिर गया था. वैन पहचान ली गई. वैन से ड्राइवर का पता चल गया.
लूट में इस्तेमाल की गई काली वैन.
लूट में इस्तेमाल की गई काली वैन.


FBI ने सारा कच्चा चिट्ठा निकाल लिया था. ये एडवर्ड्स था. वो लूट में शामिल नहीं था. जिमी बर्क ने उसे वैन को ठिकाने लगाने का काम सौंपा था. कायदे से उसे कार को क्रशर में डालना था. लेकिन एडवर्ड्स अपनी गर्लफ़्रेंड के घर के बाहर उसे पार्क कर भूल गया. FBI को लगा, पूरा मामला हाथ में है. सुलझने में देर नहीं होगी. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. FBI जब एडवर्ड्स के घर पहुंची, तो बिस्तर पर उसकी लाश पड़ी थी. जिमी बर्क ने जांच की कड़ी तोड़ने के लिए एडवर्ड्स को मरवा दिया था.
इसके बाद तो हत्याओं का सिलसिला चल निकला. अगला नंबर मार्टिन क्रुगमैन का था. उसने जिमी बर्क से अपना हिस्सा बढ़ाने को कहा था. बर्क सनकी था. एक तो पकड़े जाने का डर, ऊपर से ज़्यादा पैसे हड़पने की चाह. अगले छह महीने में नौ लोग इसी चक्कर में कत्ल हुए. ये सारे लोग लूट से जुड़े थे और जिमी बर्क को इनसे खतरा महसूस हो रहा था.
अब FBI ने लुई वर्नर को पकड़ा. उसने अपने हिस्से आई रकम से नई गाड़ी खरीदी थी. FBI की उसके ऊपर नज़र थी. पीटर ग्रुनवाल्ड FBI का गवाह बन गया. उसने अपने दोस्त के ख़िलाफ़ अदालत में गवाही दी. वर्नर को 15 साल की सज़ा मिली. सज़ा मिलने के बाद वो भी FBI का साथ देने लगा.
1980 में जिमी बर्क भी अरेस्ट हो गया. उसे दो अलग मामलों में सज़ा मिली. अप्रैल, 1996 में जेल में उसकी मौत हो गई. लूटे गए पैसों का क्या हुआ? वो कभी रिकवर नहीं पाए. वो किसके हाथ लगा, ये आज तक एक रहस्य है.
1990 में मार्टिन स्कोरसेसे ने ‘Goodfellas’ नाम से फ़िल्म बनाई. इस फ़िल्म में रॉबर्ट डि नीरो का किरदार जिमी बर्क से इंस्पायर्ड था.

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