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जब बम धमाके में बाल-बाल बचीं शीला दीक्षित!

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साल 1985 की एक दोपहर शीला दीक्षित का किस्सा खत्म हो गया होता. भला हो किसी की भूख का. एक लंच ने उन्हें बचा लिया.  जुलाई 1985. राजीव गांधी और संत हरचरण सिंह लोंगोवाल के बीच पंजाब पीस अकॉर्ड हुआ. लोगों को उम्मीद थी कि अब हालात ठीक हो जाएंगे. मगर फिर अगस्त में लोंगोवाल की हत्या कर दी गई. इसी माहौल में 25 सितंबर को विधानसभा चुनाव होने थे. शीला दीक्षित पहले भी कई इलेक्शन कैंपेन में शिरकत कर चुकी थीं. पंजाब भी भेजा गया उनको.

shiela Dixit

चुनाव प्रचार के आखिरी दिन की बात है. अंतिम रैली खत्म हुई. बिहार के एक सांसद की कार में बैठकर शीला दीक्षित बटाला से अमृतसर के लिए रवाना हुईं. कार में शीला थीं, वो सांसद थे, एक सुरक्षाकर्मी और एक ड्राइवर था. दिन के करीब एक बजे थे. ड्राइवर ने दोपहर के खाने के लिए एक रेस्तरां पर कार रोकी. कहा, अभी खाना खा लेते हैं. वरना अमृतसर पहुंचते-पहुंचते बहुत देर हो जाएगी. शीला अंदर कुर्सी पर बैठकर सॉफ्ट ड्रिंक का पहला घूंट गले में भरने ही जा रही थीं. कि तभी एक जोर की आवाज़ आई. एक धमाका हुआ था. उसी कार के अंदर, जिसमें कुछ मिनटों पहले शीला दीक्षित बैठी हुई थीं. कार टुकड़े-टुकड़े होकर उड़ गई. अगर ड्राइवर ने लंच के लिए गाड़ी नहीं रोकी होती, या कुछ मिनटों बाद रोकी होती, तो शीला धमाके के वक़्त कार के अंदर ही होतीं. ऐसा होता, तो शीला समेत बाकी तीनों लोग भी चिथड़ा-चिथड़ा होकर उड़ गए होते. ये लोग तो बच गए, मगर कार के पास मौजूद दो बच्चे मारे गए.

बाद में पुलिस ने बताया. कार के अंदर टाइम बम फिट था. इस धमाके का डर, ब्लास्ट की आवाज़, गाड़ी के परखच्चे उड़ने का फ्रेम, शीला को ये सब याद रहा. मगर उन्होंने कैंपेन में अपने हिस्से आई जिम्मेदारियां नहीं छोड़ीं. इस घटना के 13 साल और तीन महीने बाद शीला दीक्षित ने पहली बार दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.

सोर्स: शीला दीक्षित की लिखी किताब- सिटिजन देल्ही, माय टाइम्स माय लाइफ (ब्लूम्सबरी पब्लिकेशन्स)

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Political Kisse: incident when Sheila Dixit was almost killed in a bomb blast in punjab

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