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निसिथ प्रमाणिक: पीएम मोदी के सबसे युवा मंत्री, जितने कामयाब उतने ही विवादित

क़रीब 17 साल पहले की बात है. पश्चिम बंगाल के कूचबिहार ज़िले का एक 18 साल का लड़का घर वालों की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ जाकर अपनी प्रेमिका से शादी करता है और उसे लेकर बैंगलोर के लिए निकल जाता है. रास्ते में खड़गपुर में उसे एक अनाथ बच्ची मिलती है. लड़का उसे पहले खाना देता है. बाद में बच्ची उससे कहती है कि उसका कोई नहीं है, इसलिए वो उसे अपने साथ ले चले. बच्ची बैंगलोर तक नए जोड़े के साथ ही रहती है. वहां पहुंचकर लड़का बच्ची को पुलिस की देखरेख में छोड़ने की कोशिश करता है. लेकिन बाद में पुलिस की ही सलाह पर उसे अपने साथ रखने का फैसला करता है.

महज 18 साल की उम्र में उस नौजवान ने पत्नी के साथ एक अनाथ बच्ची का भी ख्याल रखने की जिम्मेदारी ले ली. और 17 साल बाद 7 जुलाई 2021 को इस लड़के ने भारत सरकार में राज्य मंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने की शपथ ली. पॉलिटिकल किस्से में आज हम बात करेंगे निसिथ प्रमाणिक की. जो अपने छोटे से सियासी सफर की बड़ी कामयाबी और आपराधिक मामलों, दोनों के चलते चर्चा में हैं.

Nisith Pramanik
बतौर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री कार्यभार संभालते निसिथ प्रामाणिक. (फ़ोटो- पीटीआई)

पिटाई से बचने के लिए टेबल पर सिगरेट रख देते थे

35 साल के निसिथ अपने ज़िले से पहले केंद्रीय मंत्री हैं. उत्तर बंगाल की अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट कूचबिहर (Coochbeehar) से सांसद बनने वाले निसिथ, राजवंशी समुदाय से आते हैं. वे साधारण परिवार में जन्मे. उनके शिक्षक उन्हें तेज दिमाग़ का बताते हैं. लेकिन ये भी कहते हैं कि निसिथ पढ़ाई से भागते थे. कक्षा 11 में उनको प्राइवेट ट्यूशन देने वाले मानस चक्रवर्ती बताते हैं कि “बिट्टू” यानी कि निसिथ पढ़ाई से दूर भागते थे. वो कहते हैं,

“मेरे और निसिथ की उम्र में ज़्यादा फ़र्क़ नहीं था. मैं उसका शिक्षक तो था लेकिन भैया ज़्यादा था. जब भी वो होमवर्क नहीं करता या पढ़ाई नहीं करता था तो सजा से बचने के लिए मेरी टेबल पर एक सिगरेट रख देता और मेरे आते ही कहता- भैया आप पहले सिगरेट पी लीजिए, और फिर मुझे कहता कि उसने होमवर्क नहीं किया है. फिर भी मैं उसको सजा देता. छड़ी से मारता, लेकिन वो इतना चालाक कि पहले ही छड़ी छुपा देता था.”

वहीं, निसिथ के बचपन के दोस्त शांतनु दास बताते हैं कि निसिथ गाते बहुत बेहतरीन हैं. कहते हैं,

“वो गाना लिखता भी था. उसका दिल बहुत बड़ा था. उसकी जेब में पैसे भले ना हो, लेकिन वो कहता था कि हम राजा के वंशज हैं, राजा की तरह रहना चाहिए. उसमें हमेशा से बड़ा बनने की चाह थी. अच्छे मौक़ों पर वो गाना ज़रूर सुनाता था.”

राजनीतिक सफ़र की शुरुआत

निसिथ प्रमाणिक की मां चंदा प्रमाणिक तृणमूल कांग्रेस में थीं और प्रधान रह चुकी थीं. निसिथ बड़े हुए उनका भी सियासी झुकाव तृणमूल की तरफ़ था. तब तक वो मेखलिगंज कॉलेज से डिप्लोमा इन एलेमेंटरी एजुकेशन कर प्राइमरी स्कूल में सहायक टीचर बन चुके थे. बंगाल में 3 दशक से ज्यादा समय तक अपराजित रही वामपंथी सरकार को 2011 में हराकर तृणमूल सत्ता में आई. इसके बाद पार्टी ने 25 जुलाई, 2011 अपने युवा मोर्चा, ‘तृणमूल युवा’ का गठन किया. इसके नेता बने ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी. तभी निसिथ भी तृणमूल युवा में शामिल हुए और 2013 के पंचायत चुनाव में अपने गांव भेटागुडी से उप-प्रधान चुने गए.

इसके बाद पार्टी में उनका क़द बढ़ता गया. उन्होंने पार्टी के अंदर युवाओं को ज़्यादा मौक़ा देने की लड़ाई निसिथ ने शुरू कर दी. धीरे-धीरे उन्होंने तृणमूल युवा की गतिविधियों को तेज किया और अभिषेक बनर्जी के ख़ास बन गए. इस दौरान निसिथ के खिलाफ आपराधिक मामले भी दर्ज हुए. उनकी छवि बाहुबली नेता की थी. ज़िले के बड़े नेताओं से उनकी अनबन शुरू हो गई थी. इससे निसिथ को क्या नुकसान हुआ, इस पर थोड़ा बाद में बात करेंगे.

संगीन मामलों में आरोपी हैं निसिथ

इसमें कोई शक नहीं कि निसिथ प्रमाणिक ने महज 10 साल के राजनीतिक करियर में बड़ी कामयाबियां हासिल की हैं. लेकिन उनका सफर बेदाग बिल्कुल नहीं रहा. चुनाव आयोग में दाखिल ऐफ़िडेविट के मुताबिक़, निसिथ के ख़िलाफ़ 11 मामले लंबित हैं. इनमें मर्डर, महिला के साथ ज़ोर-ज़बरदस्ती, डकैती, लूट, चोरी, हत्या की कोशिश, ज़मीन हड़पना जैसे तमाम संगीन आरोप शामिल हैं. हालांकि निसिथ के करीबी लोगों का मानना है कि ये मामले राजनीतिक द्वेष का परिणाम हैं.

ग़ौरतलब है कि इनमें से ज़्यादातर मामले तब के हैं, जब निसिथ टीएमसी में थे. तृणमूलग कांग्रेस के एक बड़े नेता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि निसिथ पार्टी की अंदरूनी लड़ाई का शिकार हुए. ज़िले के बड़े नेता उनसे खुश नहीं थे. इसलिए इन केसों के बहाने निसिथ को पार्टी से निकाल दिया गया. तृणमूल नेता ने ये भी बताया कि निसिथ काफ़ी समय तक पार्टी में वापसी की आस लगाए बैठे थे. लेकिन ऐसा नहीं हो सका. और अब खबर है कि उनके केंद्रीय मंत्री बनने के बाद टीएमसी के लोगों ने इन लंबित मामलों का जिक्र छेड़ दिया है. उन्होंने आरोप लगाते हुए का है कि ऐसे व्यक्ति को कैसे मंत्री बनाया जा सकता है, जिसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं.

इसके अलावा टीएमसी ने निशित की डिग्री पर भी सवाल खड़ा किया है. उसका कहना है कि निसिथ ने अलग-अलग समय में अलग-अलग डिग्री की बात कही है. कभी उन्होंने खुद को कक्षा 10 पास बताया है तो कभी बैचलर ऑफ कंप्यूटर.

बहरहाल, अब निसिथ प्रमाणिक भारत के गृह राज्य मंत्री हैं. बहुत ही छोटा राजनीतिक जीवन रहा है उनका. 2019 लोकसभा चुनावों में वो पहली बार सांसद बने. फिर 2021 के विधानसभा चुनाव में दीनहाटा सीट से उन्होंने तृणमूल के विधायक उदयन गुहा को महज़ 57 वोटों से मात दी. लेकिन पार्टी के आदेश अनुसार उन्होंने विधानसभा में शपथ नहीं ली. राजनीतिक जानकारों की मानें तो उनको मंत्रिमंडल में शामिल करके बीजेपी ने राजवंशी समुदाय पर अपनी पकड़ और मज़बूत कर ली है. ये समुदाय ना सिर्फ़ बंगाल, बल्कि असम में भी अच्छी तादाद में है.


वीडियो- बंगाल चुनाव: मोदी की रैली में आए राजवंशी समाज के लोगों ने बताया ममता दीदी से क्यों हैं नाराज़

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