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'सड़क चलने के लिए, नमाज के लिए नहीं', हिंदुओं से सीखने की नसीहत भी दे गए सीएम योगी

योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने कहा कि धार्मिक अनुशासन हिंदुओं से सीखना चाहिए. महाकुंभ में 66 करोड़ लोग आए लेकिन कोई आगजनी, तोड़फोड़, अपहरण नहीं हुआ. सड़क पर नमाज के मुद्दे पर योगी ने कहा कि सड़क चलने के लिए होती है. नमाज पढ़ने के लिए नहीं.

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Yogi Adityanath
योगी आदित्यनाथ
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राघवेंद्र शुक्ला
1 अप्रैल 2025 (Updated: 1 अप्रैल 2025, 12:52 PM IST)
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने सड़कों पर नमाज पर रोक के फैसले का बचाव किया है. उन्होंने कहा कि सड़क नमाज पढ़ने के लिए नहीं होती है. चलने के लिए होती है. कांवड़ यात्रा से इसकी तुलना करने पर योगी ने कहा कि कांवड़ यात्रा हरिद्वार से निकलकर तमाम क्षेत्रों तक जाती है. वो सड़क पर ही चलेगी. क्या हमने किसी परंपरागत मुस्लिम जुलूस को कभी रोका? 

योगी ने कहा, 

मोहर्रम के जुलूस निकलते हैं. हमने कभी रोका. हमने ये जरूर कहा कि ताजिया की साइज थोड़ा छोटा करो. ये तुम्हारी सुरक्षा के लिए है. हाइटेंशन तार होंगे. वो बदलेंगे नहीं तुम्हारे लिए. साइज छोटा रखो, नहीं तो हाइटेंशन की चपेट में आओगे. मर जाओगे.

एक वीडियो इंटरव्यू में सीएम योगी ने आगे कहा कि कांवड़ यात्रा में भी हम कहते हैं कि डीजे का साइज छोटा रखो. जो नहीं करता उसके लिए सख्ती करते हैं. कानून तो सबके लिए बराबर लागू किया जा रहा है. तो आप कैसे तुलना कर दे रहे हैं? 

उन्होंने कहा कि ईद में सड़क जाम करेंगे नमाज पढ़ने के नाम पर? नमाज पढ़ने की जगह ईदगाह होगा. मस्जिद होगा, सड़क नहीं होगी. मुख्यमंत्री ने महाकुंभ को धार्मिक अनुशासन का उदाहरण देते हुए कहा कि लोगों को हिंदुओं से अनुशासन सीखना चाहिए. योगी ने कहा,

 66 करोड़ लोग प्रयागराज में आए. कहीं कोई लूटपाट नहीं, कहीं कोई आगजनी नहीं, कोई तोड़फोड़ नहीं, कोई अपहरण नहीं... ये होता है अनुशासन. यही धार्मिक अनुशासन है. श्रद्धाभाव से महाकुंभ में आए. महास्नान में भाग लिया और फिर अपने गंतव्य की ओर बढ़ गए.

योगी ने कहा कि पर्व और त्योहार या ऐसे कोई भी आयोजन उद्दंडता का माध्यम नहीं बनने चाहिए. अगर आपको सुविधा चाहिए तो अनुशासन का पालन करना भी सीखिए. इंडिया टुडे के मुताबिक, योगी ने हिंदी के कथित विरोध को लेकर तमिलनाडु की स्टालिन सरकार पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा, 

तीन भाषा नीति पर विवाद स्वार्थी राजनीतिक हितों के लिए पैदा किया जा रहा है. यूपी के स्कूलों में तमिल और तेलुगु जैसी भाषाएं भी पढ़ाई जाती हैं. इससे नौकरियों के सृजन में ही मदद मिली है.

योगी ने आगे कहा, 

यूपी में हम तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, बंगाली और मराठी पढ़ा रहे हैं तो क्या इसकी वजह से यूपी छोटा हो गया? यूपी में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं. नौकरियां पैदा हो रही हैं. जो लोग अपने संकीर्ण राजनीतिक हितों के कारण इस भाषा विवाद को पैदा कर रहे हैं, वे अपने राजनीतिक उद्देश्यों को पूरा कर सकते हैं, लेकिन वे एक तरह से युवाओं के रोजगार पर हमला कर रहे हैं.

एक हफ्ते में ये दूसरी बार है जब योगी आदित्यनाथ ने भाषा विवाद पर स्टालिन को आड़े हाथों लिया है. उन्होंने कहा था कि डीएमके प्रमुख स्टालिन क्षेत्र और भाषा के आधार पर विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनका वोट बैंक खतरे में है. स्टालिन ने इस पर जवाब भी दिया था. उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि  योगी आदित्यनाथ हमें नफरत पर भाषण देना चाहते हैं? ये तो राजनीतिक कॉमेडी हो गई.

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