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इस्तीफा, पोस्टर और बवाल, सस्पेंड हुए बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री की पूरी कहानी

Alankar Agnihotri Backstory: अलंकार अग्निहोत्री सिटी मजिस्ट्रेट से पहले लखनऊ में सहायक नगर आयुक्त रह चुके हैं. मई 2025 में उन्हें बरेली में City Magistrate के पद पर नियुक्त किया गया था. पिछले साल अगस्त में दफ्तर में हनुमान जी की मूर्ति लगवाने की वजह से विवादों में घिर गए थे.

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alankar agnihotri row over ugc
अलंकार अग्निहोत्री 10 साल IT सेक्टर में काम कर चुके हैं.
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शुभम कुमार
27 जनवरी 2026 (पब्लिश्ड: 02:24 PM IST)
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बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को उत्तर प्रदेश सरकार ने निलंबित कर दिया है. 26 जनवरी को उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया था. इंटरनेट पर इनसे जुड़ी दो तस्वीरें छाई हुई हैं. एक तस्वीर में वो बोर्ड पर लगे अपने नाम के आगे इस्तीफा लिखते हुए दिख रहे हैं. एक और तस्वीर में उनके हाथ में एक पोस्टर है जिसमें लिखा है, “UGC ROLL BACK, शंकराचार्य और संतों का यह अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान, #BOYCOTT BJP #BOYCOTT BRAHMAN MP MLA.”

इस्तीफ़ा देने के पीछे उन्होंने दो वजहें बताईं. एक UGC के नए नियमों को लेकर सवर्ण समाज के छात्रों के अधिकार प्रभावित होने की बात कही. दूसरा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की शिखा यानी चोटी खींचे जाने की घटना का ज़िक्र किया. हालांकि, उनका इस्तीफा एक्सेप्ट नहीं किया गया है. निलंबन के साथ-साथ सरकार ने इनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए हैं. बाद में वो बरेली के कलेक्ट्रट ऑफिस के गेट के बाहर धरने पर बैठ गए. 

कौन हैं अलंकार अग्निहोत्री?

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक़, अलंकार मूलतः कानपुर के रहने वाले हैं और 2019 बैच के पीसीएस (PCS) अधिकारी हैं. अपने पांच पेज के पत्र में उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से इंजीनियरिंग की डिग्री का ज़िक्र किया. उन्होंने कहा,

मैं अलंकार अधिकारी, 2019 बैच के आईपीएस अधिकारी के तौर पर बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात हूं. मैंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से बी टेक में अपना स्नातक पूरा किया. मैं महामना मदन मोहन मालवीय के विचारों से हमेशा इंस्पायर रहता हूं. 

अलंकार पढ़ाई में हमेशा से तेजस्वी रहे हैं. यूपी बोर्ड एग्जाम में उनका 21 रैंक आया था. 2019 में पहली बार में ही उन्होंने पीसीएस एग्जाम क्लियर कर लिया था. उन्होंने करीब 10 साल IT सेक्टर में बिताया है. IIT BHU से बी टेक स्नातक और बीएचयू से ही LLB की डिग्री प्राप्त की है. इससे पहले वो एटा, उन्नाव और बलरामपुर में एसडीएम रह चुके हैं. सिटी मजिस्ट्रेट से पहले वो लखनऊ में सहायक नगर आयुक्त रह चुके हैं. मई 2025 में उन्हें बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर नियुक्त किया गया.

ये भी पढ़ें: बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री सस्पेंड, शंकराचार्य-UGC विवाद से 'दुखी' होकर इस्तीफा दिया था

सरकार पर क्या आरोप लगाए?

अपने पत्र में उन्होंने माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की चोटी खींचने और कथित मारपीट का ज़िक्र किया. उन्होंने कहा 

शिष्यों की मर्यादा का हनन किया गया, चूंकि चोटी/शिखा ब्राह्मण साधु-संतों का धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक है. उनका आरोप है कि स्थानीय प्रशासन और मौजूदा राज्य सरकार ब्राह्मण-विरोधी सोच के साथ काम कर रही है और साधु-संतों की अस्मिता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक़, उन्होंने जिला प्रशासन पर भी आरोप लगाया है. उनका कहना है कि 45 मिनट तक उन्हें ज़बरन रोका गया और बातचीत के बहाने उनपर दबाव बनाया गया. UGC के नियमों का विरोध करते हुए कहा 

केंद्र सरकार से सामान्य वर्ग अलग हो चुका है. नए नियमों से सिर्फ एक ही चीज हो सकती है. सामान्य वर्ग के बेटे-बेटियों का या तो शोषण होगा. या बेटियों पर जिनकी बुरी नजर होगी, वो समता समिति के जरिए फर्जी शिकायतें करेंगे.

ऑफिस में लगाई बजरंग बली की तस्वीर

17 अगस्त 2025 में अलंकार अग्निहोत्री विवादों में घिर गए थे. उस वक़्त इन्हें सिटी मजिस्ट्रेट का कार्यभार संभाले केवल 3 महीने ही हुए थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने उनपर आरोप लगाया था कि, उन्होंने अपने दफ्तर में भीम राव आंबेडकर की जगह बजरंग बली की तस्वीर लगाई है. उन्होंने दावा किया कि आंबेडकर की तस्वीर न लगाना "संविधान निर्माता" का अपमान और प्रोटोकॉल का उल्लंघन है. उनका कहना था कि सिटी मजिस्ट्रेट ने दफ्तर को अपने निजी स्थान के रूप में इस्तेमाल किया और  विश्वासों का प्रदर्शन किया. आज़ाद समाज पार्टी के राज्य महासचिव सुनील गौतम ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सरकारी कार्यालयों में महात्मा गांधी और डॉ. आंबेडकर की तस्वीरें प्रदर्शित करना कानूनी रूप से अनिवार्य है. 

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