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कौन हैं बालेन शाह जो नेपाल में Gen Z की आवाज बन गए हैं?

इस समय नेपाल के Gen Z के दिलों में बालेन शाह ने अपनी गजब पैठ बना ली है. लोग उन्हें मेयर की कुर्सी छोड़कर ‘नेपाल का अगला लीडर’ बनते देखना चाहते हैं. कौन हैं बालेन शाह? प्रोटेस्ट की बीच उनकी बात क्यों की जा रही है?

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9 सितंबर 2025 (अपडेटेड: 29 सितंबर 2025, 07:07 PM IST)
Who is Kathmandu Mayor Balen Shah Gen Z protesters to Oli resignation
2023 में टाइम मैगजीन ने बालेन को TIME 100 नेक्स्ट लिस्ट में शामिल किया था. (फोटो- फेसबुक)
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नेपाल में Gen Z प्रोटेस्ट के बीच पीएम केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया है. खबर है कि ओली दुबई जाने की योजना बना रहे हैं. हिंसा के बीच कई मंत्री भी इस्तीफा दे चुके हैं. इन सबके बीच काठमांडू की गलियों में एक नौजवान की आवाज गूंज रही है. बालेन शाह ना किसी पुराने जमाने के राजनेता हैं, ना ही किसी बड़े खानदान के वारिस (Who is Kathmandu Mayor Balen Shah). काठमांडू का मेयर बनने से पहले वो पेशे से इंजीनियर और पैशन से रैपर थे. कौन हैं बालेन शाह? प्रोटेस्ट की बीच उनकी बात क्यों की जा रही है?

‘स्ट्रीट बॉय’ से स्टार रैपर तक

बालेन 1990 में काठमांडू के नारायणदेवी में जन्मे थे. मधेसी परिवार से ताल्लुक रखने वाले बालेन के पिता डॉक्टर राम नारायण शाह है, और मां का नाम ध्रुवादेवी है. स्कूल-कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें हिप-हॉप की दुनिया में काफी इंटरेस्ट था. 2012 में उनका पहला सिंगल "स्ट्रीट बॉय" आया. ये उन्होंने 9वीं क्लास में लिखा था. फिर क्या था, बालेन नेपाल के अंडरग्राउंड रैप सीन में छा गए. रॉ बार्ज (Raw Barz) नाम की नेपाल की पहली रैप बैटल लीग हुई. जिसमें उनके तीखे लिरिक्स ने सबको हक्का-बक्का कर दिया. उनका गाना NEPAL HASEKO (LAAJ SHARANAM OST) तो यूट्यूब पर 70 लाख से ज्यादा बार देखा गया! ये गाना गरीबी, भ्रष्टाचार और सिस्टम की खामियों को दिखाता है. यही वजह है कि बालेन सिर्फ रैपर नहीं, बल्कि युवाओं की आवाज बन गए.

केपी ओली के इस्तीफे के बाद 9 सितंबर को बालेन ने एक फेसबुक पोस्ट कर प्रदर्शन कर रहे युवाओं से एक अपील की. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पहले ही पद छोड़ चुके हैं, इसलिए प्रदर्शनकारियों को जान-माल की और हानि से बचना चाहिए. उन्होंने सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को लोगों की साझा संपत्ति बताया और युवाओं से कहा कि वो इन्हें नष्ट न करें. शाह ने लिखा,

"कृपया धैर्य रखें. राष्ट्रीय संसाधनों का नुकसान हमारी सामूहिक क्षति है. अब हम सभी के लिए संयम बरतना जरूरी है. अब से, आपकी पीढ़ी को ही देश का नेतृत्व करना होगा."

इंजीनियरिंग का जुनून था

बालेन सिर्फ माइक पर आग उगलने वाले रैपर नहीं हैं. वो एक सिविल इंजीनियर भी हैं. नेपाल के वीएस निकेतन स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने हिमालयन व्हाइट हाउस इंस्टीट्यूट से सिविल इंजीनियरिंग में डिग्री ली. फिर भारत के बेलगावी (कर्नाटक) की विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (VTU) से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में MTech किया. 2015 में जब नेपाल में भयानक भूकंप आया तो बालेन ने देश के पुनर्निर्माण में दिन-रात मेहनत की. उनका ये जुनून बाद में उनके मेयर बनने का बेस बना.

सिस्टम से टक्कर और मेयर की कुर्सी

2015 में भारत की नाकाबंदी ने नेपाल को हिलाकर रख दिया था. बालेन ने देखा कि कैसे सरकार ने आम लोगों को मुश्किल में छोड़ दिया. बस, यहीं से उन्होंने सिस्टम को ठीक करने की ठानी. एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में उन्होंने काठमांडू मेयर का चुनाव लड़ने की सोची, लेकिन उस वक्त पीछे हट गए. फिर 2021 में, फेसबुक पर एक पोस्ट के साथ बालेन ने एलान किया कि वो निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मेयर का चुनाव लड़ेंगे. चुनाव में उनका निशान था ‘लाठी’ जो सिस्टम की खामियों को तोड़ने का प्रतीक बना.

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2017 में उन्होंने काठमांडू मेयर का चुनाव लड़ने की सोची, लेकिन उस वक्त पीछे हट गए.

2022 का चुनाव बालेन के लिए टर्निंग पॉइंट था. उन्होंने नेपाली कांग्रेस और CPN-UML (Communist Party of Nepal Unified Marxist–Leninist) जैसे बड़े दलों के उम्मीदवारों को हराकर काठमांडू का मेयर बनने का इतिहास रच दिया. 38.6% वोटों के साथ वो 23,000 से ज्यादा वोटों के अंतर से जीते. ये जीत सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि पूरे नेपाल में निर्दलीय उम्मीदवारों की लहर थी जिसे लोगों ने ‘बालेन इफेक्ट’ का नाम दिया.

मेयर बन किए बड़े काम

मेयर बनते ही बालेन ने काठमांडू को बदलने की ठान ली. सड़कों की सफाई, फुटपाथों को पैदल यात्रियों के लिए बेहतर करना, सरकारी स्कूलों की निगरानी, और भ्रष्टाचार पर नकेल कसना. उनके कामों ने सबका ध्यान खींचा. नेपाल न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक उनका ‘बुलडोजर कैंपेन’ काफी चर्चा में रहा, जिसमें अवैध निर्माणों को ढहाया गया. उन्होंने टेक्स्टबुक-फ्री-फ्राइडे जैसा इनोवेटिव प्रोग्राम शुरू किया, जिसमें बच्चे किताबों से हटकर टेक्नोलॉजी और स्किल्स सीखते हैं. कचरा प्रबंधन और ट्रैफिक कंट्रोल में भी उन्होंने कमाल दिखाया. लेकिन स्ट्रीट वेंडर्स पर सख्ती की वजह से कुछ आलोचनाएं भी झेलनी पड़ीं.

क्यों बन गए Gen Z के हीरो?

नेपाल की सड़कों पर जो Gen Z भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ प्रोटेस्ट कर रहे हैं, उसी बगावत का चेहरा बन रहे हैं बालेन. वो भ्रष्टाचार के खिलाफ बेबाकी से बोलते हैं. नेपो बेबीज (नेता-पुत्रों की संतानों) को ललकारते हैं, और सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हैं. टिकटॉक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, हर जगह उनकी फैन फॉलोइंग जबरदस्त है. यही नहीं, 2023 में टाइम मैगजीन ने उन्हें ‘TIME 100 नेक्स्ट’ लिस्ट में शामिल किया था.

Gen Z प्रदर्शन में जब सड़कों पर युवा उतरे तो बालेन ने फेसबुक पर लिखा,

"मैं उम्र की सीमा की वजह से सड़क पर नहीं उतर सकता, लेकिन मेरा पूरा सपोर्ट प्रदर्शनकारियों के साथ है. प्रिय Gen Z, मुझे बताओ कि आप किस तरह का देश देखना चाहते हैं?"

हालांकि 9 सितंबर को बालेन शाह सड़कों पर उतरे. उनका एक वीडियो सामने आया है जिसमें वे एक सरकारी वाहन में बैठे-बैठे प्रदर्शनकारियों के बीच नजर आ रहे हैं. Gen Z उनकी मौजूदगी से उत्साहित दिखे और नारेबाजी करने लगे.

बालेन शाह नेपाल के युवाओं में बदलाव की उम्मीद जगा रहे हैं. कई लोग उनसे देश का नेतृत्व करने की मांग तक करने लगे हैं. लेकिन क्या वो राष्ट्रीय नेतृत्व की राह चुनेंगे? ये सवाल अभी हवा में है.

वीडियो: नेपाल में Gen-Z के प्रोटेस्ट के दूसरे दिन हिंसा, कई बड़े नेताओं का घर फूंका

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