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अमेरिका में हाई प्रोफाइल 'वेश्यालय गिरोह' का भंडाफोड़, भारतीय मूल के CEO समेत कई चर्चित लोग फंसे

ये गिरोह एक घंटे की सेक्स सर्विस के लिए 600 डॉलर (लगभग 50,000 रुपये) तक चार्ज करता था. मामले की जांच कर रही टीम ने इसे ‘कैंब्रिज ब्रॉथल हियरिंग्स’ का नाम दिया है. इसके तहत क्लाइंट के रिकॉर्ड्स की गहन जांच की जा रही है. इसमें 30 से अधिक प्रमुख व्यक्तियों के नाम सामने आए, जिन पर पैसे देकर सेक्स करने का आरोप है.

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10 अप्रैल 2025 (अपडेटेड: 10 अप्रैल 2025, 11:20 PM IST)
Who is Anurag Bajpayee, MIT alumnus and Indian-American CEO caught in elite Cambridge brothel scandal
स्टिंग ऑपरेशन के दौरान बाजपेयी को गिरफ्तार किया गया था. (फोटो- X)
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भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक और वॉटर टेक कंपनी ‘ग्रेडिएंट’ के CEO अनुराग बाजपेयी एक हाई-प्रोफाइल सेक्स स्कैंडल में फंस गए हैं. ये स्कैंडल हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पास स्थित कैंब्रिज इलाके के एक हाई-प्रोफाइल वेश्यालय गिरोह से जुड़ा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ये गिरोह इलाके के लग्जरी अपार्टमेंट्स से संचालित किया जाता था. इसमें डॉक्टर्स, वकील, कॉरपोरेट एग्जीक्यूटिव्स और पब्लिक ऑफिशियल्स जैसे प्रभावशाली क्लाइंट्स शामिल थे.

इंडियन एक्सप्रेस ने वॉल स्ट्रीट जर्नल के हवाले से लिखा है कि ये गिरोह एक घंटे की सेक्स सर्विस के लिए 600 डॉलर (लगभग 50,000 रुपये) तक चार्ज करता था. मामले की जांच कर रही टीम ने इसे ‘कैंब्रिज ब्रॉथल हियरिंग्स’ का नाम दिया है. इसके तहत क्लाइंट के रिकॉर्ड्स की गहन जांच की जा रही है. इसमें 30 से अधिक प्रमुख व्यक्तियों के नाम सामने आए, जिन पर पैसे देकर सेक्स करने का आरोप है.

इस मामले की जांच के तहत इसी साल की शुरुआत में एक स्टिंग ऑपरेशन किया गया था. उसी दौरान अनुराग बाजपेयी को गिरफ्तारी हुई थी. बाजपेयी और कई अन्य स्थानीय CEOs पर दुष्कर्म (misdemeanor) के आरोप लगाए गए हैं. इन लोगों के नाम हाल ही में अदालती दस्तावेजों के जरिये सामने आए हैं.

कौन हैं अनुराग बाजपेयी?

अनुराग बाजपेयी ने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर और पीएचडी की डिग्री हासिल की है. 2013 में उन्होंने ग्रेडिएंट को को-फाउंड किया. ये कंपनी अब अमेरिका की प्रमुख क्लीन-टेक कंपनी है. बाजपेयी की एकेडमिक और प्रोफेशनल उपलब्धियों को साइंटिफिक अमेरिकन की "टॉप 10 वर्ल्ड-चेंजिंग आइडियाज" लिस्ट में भी शामिल किया गया है. उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल की मानें तो उन्होंने अपनी स्कूलिंग साल 2003 में लखनऊ के ला मार्टिनियर कॉलेज से पूरी की थी. इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वो अमेरिका चले गए थे.

कंपनी ने किया बचाव  

इस विवाद के बीच ग्रेडिएंट ने बाजपेयी का समर्थन किया है. कंपनी के प्रवक्ता फेलिक्स वांग ने कहा,

"हमें न्याय प्रणाली पर भरोसा है और हमें विश्वास है कि ये मामला जल्द ही अनुकूल रूप से हल हो जाएगा. कंपनी अपने मिशन के तहत टेक इनोवेशन और स्वच्छ पानी के लिए प्रयास जारी रखेगी."

हालांकि, कुछ कर्मचारियों ने बाजपेयी के इस्तीफे की मांग की है, लेकिन कंपनी ने उनके नेतृत्व पर भरोसा जताया है.

अभी तक जांच में ये भी सामने आया कि इस गिरोह में ज्यादातर एशियाई मूल की महिलाएं शामिल थीं, जिन्हें सेक्स ट्रैफिकिंग का शिकार बताया गया है. इस मामले ने न केवल बाजपेयी की व्यक्तिगत छवि को प्रभावित किया, बल्कि कॉर्पोरेट नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाए हैं. ये मामला अभी भी जांच के दायरे में है, और इसके परिणाम बाजपेयी और ग्रेडिएंट के भविष्य पर गहरा असर डाल सकते हैं.

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