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आरजी कर ट्रेनी डॉक्टर मामले में ममता सरकार ने HC में दायर की याचिका, सजा-ए-मौत की मांग की

इससे पहले 20 जनवरी को निचली अदालत ने संजय रॉय को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. वहीं, संजय रॉय को उम्रकैद की सजा के आदेश को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निराशा व्यक्त की है.

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आरजी कर मामले में आरोपी संजय रॉय को उम्रकैद की सजा के आदेश को लेकर ममता बनर्जी ने निराशा व्यक्त की है. (तस्वीर:PTI)
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शुभम सिंह
21 जनवरी 2025 (Updated: 21 जनवरी 2025, 05:44 PM IST)
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आरजी कर हॉस्पिटल में महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या के मामले में निचली अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है. यह याचिका पश्चिम बंगाल सरकार ने दायर की है जिसमें आरोपी संजय रॉय के खिलाफ मौत के सजा की मांग की गई है. इससे पहले 20 जनवरी को निचली अदालत ने संजय रॉय को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. वहीं, संजय रॉय को उम्रकैद की सजा के आदेश को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निराशा व्यक्त की है.

निचली अदालत के फैसले को चुनौती

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल सरकार के एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने संजय रॉय को मौत की सजा की मांग को लेकर याचिका दायर की है. कोलकाता हाई कोर्ट के जस्टिस देबांग्शु बसक और जस्टिस मोहम्मद रशीदी की बेंच ने याचिका को मंजूरी दे दी है.

पश्चिम बंगाल की सियालदाह कोर्ट ने 20 जनवरी को संजय रॉय को उम्र कैद की सजा सुनाई थी. एडिशनल जिला एवं सत्र जज अनिर्बान दास ने मौत की सजा देने से इनकार करते हुए कहा कि इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता. कोर्ट ने संजय रॉय पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है.

57 दिनों की सुनवाई के बाद 18 जनवरी को सियालदह कोर्ट ने संजय रॉय को दोषी ठहराया था. सीबीआई ने दोषी के लिए मौत की सजा की मांग की थी. कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को पीड़िता के परिवार को 17 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया.

यह भी पढ़ें:ममता बनर्जी का दावा, 'आरजी कर केस कोलकाता पुलिस देखती तो संजय को मौत की सजा मिलती'

ममता बनर्जी ने व्यक्त की निराशा

सूबे की सीएम ममता बनर्जी ने 21 जनवरी को मालदा में एक कार्यक्रम में फैसले पर निराशा व्यक्त की है. उन्होंने कहा, 

“मैं आरजी कर हॉस्पिटल में ट्रेनी महिला डॉक्टर की मौत के मामले में आरोपी के लिए मौत की सजा की मांग करती आ रही हूं. अगर कोई व्यक्ति इतना क्रूर है, तो समाज मानवीय कैसे रह सकता है?  आरोपी ने जघन्य अपराध किया है.”

ममता ने आगे कहा,

“मैं वकील रहीं हूं और मैने कई मामले लड़े हैं. अगर किसी को आजीवन कारावास की सजा दी जाती है, तो वह व्यक्ति आगे चलकर पैरोल पर रिहा हो सकता है. हमारा काम अपराधियों की सुरक्षा करना नहीं है.”

पश्चिम बंगाल विधानसभा ने सितंबर 2024 में ‘अपराजिता’ विधेयक पारित किया था. इसका मकसद दुष्कर्म और अन्य यौन अपराधों के लिए सजा को मृत्युदंड एवं आजीवन कारावास तक बढ़ाना है.

ममता ने कहा कि उनकी सरकार ने अपराजिता विधेयक पारित किया है, लेकिन केंद्र उसे लटकाए हुए है.

वीडियो: सियालदह कोर्ट की इस दलील के चलते फांसी की सजा से बच गया संजय रॉय

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