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UGC के नए नियमों के विरोध में लोगों ने लगाए पोस्टर, भाजपा नेता ने क्या कहा?

उत्तर प्रदेश के हापुड़ में कई लोगों ने UGC के नए नियमों का विरोध करते हुए अपने घरों के बाहर पोस्टर चस्पा किए हैं. पोस्टर में लिखा है-‘भाजपा नेता वोट मांगने ना आए, यह सवर्ण समाज का घर’. UGC के नियमों का विरोध क्यों?

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लोगों ने घरों के बाहर लगाए पोस्टर, नित्यानंद राय (केंद्रीय गृह राज्य मंत्री).
28 जनवरी 2026 (पब्लिश्ड: 11:06 AM IST)
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बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे के बाद से लोगों ने भी नए UGC नियमों का विरोध करना शुरू कर दिया है. उत्तर प्रदेश के हापुड़ के बक्सर गांव में दर्जनों घरों के बाहर लोगों ने पोस्टर चस्पा कर रखे है. लिखा है- ‘भाजपा नेता वोट मांगने ना आए, यह सवर्ण समाज का घर है’ कई पोस्टर पर ‘स्वर्ण अगेंस्ट बीजेपी’ लिखा है. ये विरोध सिर्फ हापुड़ में नहीं दिल्ली के UGC दफ्तर के बाहर, बरेली, मेरठ, लखनऊ समेत तमाम अन्य जगहों पर हो रहा है. 

आजतक से जुड़े देवेन्द्र कुमार शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में करणी सेना ने 27 जनवरी शाम 4 बजे परिवर्तन चौक पर UGC बिल के खिलाफ प्रोटेस्ट करने का अलिटमेटम दिया है. करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष दुर्गेश सिंह ने इस आंदोलन में सवर्ण समाज के लोगों से बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है. 

वीडियो में स्थानीय लोगों का गुस्सा साफ़ दिख रहा है. एक स्थानीय युवा ने कहा,

जो नेता ऊपर बैठे हैं, जो सवर्ण समाज के हैं अगर वो इस बिल को नहीं रोक पाए तो हम भाजपा में किसी को भी वोट नहीं देंगे. इस बिल से हमारे बच्चों का भविष्य खतरे में है. 

इसी सब बवाल के बीच जब केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से इस बारे में पूछा गया तो वो इसपर कुछ भी कहने से बचे. उन्होंने बस इतना कहा, ‘हर-हर महादेव, भारत माता की जय, भगवन विष्णु की जय और हरिहरनाथ की जय’.

UGC को लेकर विवाद क्यों?

UGC ने 13 जनवरी 2026 को नया नियम लागू किया. Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations 2026. इसका उद्देश्य बताया गया है कि हायर एजुकेशन इस्टीट्यूट्स में जातिगत भेदभाव और असमानता को रोकना है. नए नियम के मुताबिक, सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेज में समानता केंद्र, स्कॉड और कमिटी बनाई जाएगी. साथ ही 24x7 हेल्पलाइन का प्रावधान होगा.  

UGC का कहना है कि पिछड़ी जातियों, अनुसूचित जातियों और जनजातियों के खिलाफ शिकायतों में 2020 से 2025 के बीच 100% से ज्यादा वृद्धि हुई है. इसके अलावा रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए यह नियम बनाए गए हैं. सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच् शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं. वहीं, आलोचकों को आशंका है कि इससे सामाजिक विभाजन गहरा सकता है और यूनिवर्सिटी कैंपसों में नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं.

वीडियो: UGC Chairman से वित्त मंत्री कैसे बनाए गए मनमोहन सिंह?

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