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अमेरिका की टैरिफ धमकी से भारत-ईरान संबंध पर असर, BRICS योजनाओं पर बढ़ा दबाव

India-Iran Ties: इस साल दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तर पर कई बड़े समझौतों की उम्मीद थी. भारत ईरान के चाबहार पोर्ट में अपनी मौजूदगी बढ़ाने वाला था.

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U.S. tariff threat puts India-Iran ties, BRICS plans under strain
इस साल भारत-ईरान कूटनीतिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ भी मनाई जा रही है. (फोटो- PIB)
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प्रशांत सिंह
14 जनवरी 2026 (Published: 08:38 AM IST)
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अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के टैरिफ बम का असर भारत-ईरान के बीच संबंधों पर दिखने लगा है. मंगलवार, 13 जनवरी 2026 को ट्रंप ने घोषणा की थी कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश को अमेरिका के साथ ट्रेड करने पर 25% अतिरिक्त टैरिफ का सामना करना पड़ेगा. इस फैसले से भारत-ईरान संबंधों पर नया संकट मंडरा गया है. साथ ही भारत की BRICS अध्यक्षता और योजनाओं पर भी दबाव बढ़ गया है.

सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत इस वित्तीय वर्ष में ईरान के साथ अपने व्यापार को और कम करने की तैयारी कर रहा है. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक इसका मुख्य कारण “external economic factors” को बताया जा रहा है. ये फैसला ऐसे समय आया है जब भारत पिछले सप्ताह ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की मेजबानी की तैयारी कर रहा था. ये यात्रा आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए थी, जिसकी मेजबानी भारत कर रहा है. इस साल भारत-ईरान कूटनीतिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ भी मनाई जा रही है.

अमेरिका ईरान पर लगातार दबाव बढ़ा रहा है. जिस वजह से इस महीने के अंत में ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराकची की नई दिल्ली यात्रा पर भी सवालिया निशान लगा दिया है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार, 13 जनवरी को BRICS 2026 के लिए भारत के विजन की घोषणा की. उन्होंने कहा कि BRICS की अध्यक्षता में भारत इस बात पर जोर देगा कि ये संगठन वैश्विक झटकों को सहन करने में सक्षम है. ईरान BRICS का सदस्य है, और भारत इस समूह का संस्थापक सदस्य है. इस नाते भारत की ईरान नीति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.

जयशंकर ने BRICS आगामी शिखर सम्मेलन के लोगो के लॉन्च के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में ये बात कही. इस कार्यक्रम में BRICS सदस्य देशों के कई राजदूत मौजूद थे. जिनमें रूसी राजदूत डेनिस अलिपोव और ईरानी राजदूत मोहम्मद फतहाली भी शामिल थे. जयशंकर ने ये भी बताया कि उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत की. इस बातचीत में व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज, परमाणु सहयोग, रक्षा और ऊर्जा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई.

इस साल दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तर पर कई बड़े समझौतों की उम्मीद थी. भारत ईरान के चाबहार पोर्ट में अपनी मौजूदगी बढ़ाने वाला था. ये भारत के लिए सेंट्रल एशिया और रूस से कनेक्टिविटी के प्लान्स के साथ-साथ अफगानिस्तान में पाकिस्तान विरोधी तालिबान सरकार के साथ नई पार्टनरशिप के लिए भी बेहद अहम है.

ईरान 1 जनवरी 2024 को BRICS में फुल मेंबर बना था. 2023 के साउथ अफ्रीका समिट में ईरान, मिस्र, इथियोपिया और UAE को शामिल किया गया था. अधिकारियों के मुताबिक, BRICS सदस्य होने की वजह से ईरान के राष्ट्रपति को भारत में होने वाले समिट के लिए आने में कोई कानूनी रुकावट नहीं आनी चाहिए. लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि अमेरिका के साथ ईरान का बढ़ता टकराव देश को संकट में डाल रहा है.

वीडियो: दुनियादारी: ईरान से व्यापार करने वालों को ट्रंप ने क्या चेतावनी दी?

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